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कोरबा

समय सीमा की बैठक:राजस्व पखवाड़ा में आमजन की शिकायतों का गंभीरता से निराकरण किया जाए : कलेक्टर

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टीबी उन्मूलन हेतु जिले में चलेगा विशेष अभियान

कोरबा। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने समय-सीमा की बैठक लेते हुए विभागीय कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने राज्य शासन के निर्देशानुसार जिले में आयोजित राजस्व पखवाड़ा में आम नागरिकों की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने, राजस्व संबंधी आवेदनों को ग्रहण करने तथा प्राप्त शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निराकरण करने के निर्देश दिए।

कलेक्टर ने तहसीलवार प्राप्त आवेदनों की समीक्षा करते हुए सीमांकन, नामांतरण, बंटवारा सहित अन्य राजस्व प्रकरणों का प्रभावी निपटारा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कृषि अधिकारी एवं तहसीलदारों को यह भी निर्देशित किया कि पटवारी और ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों के सहयोग से किसानों की जानकारी खाद वितरण हेतु एग्रीस्टैक पोर्टल में अनिवार्य रूप से दर्ज की जाए। उन्होंने इस कार्य को अत्यंत गंभीरता से पूर्ण कराने पर जोर दिया।
कलेक्टर ने राजस्व पखवाड़ा शिविरों का आकस्मिक निरीक्षण करने तथा लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की बात कही। उन्होंने मॉनीटरिंग को सुदृढ़ बनाने और आवेदन प्राप्त नहीं करने वाले पटवारियों को नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए।
बैठक में स्वास्थ्य विभाग से टीबी मुक्त अभियान के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने और सात दिनों के भीतर आवश्यक मानव संसाधन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने टीबी की पहचान हेतु एक्स-रे जांच को अनिवार्य रूप से बढ़ाते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, एमएमयू, नगरीय निकायों एवं सार्वजनिक उपक्रमों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने जनपद सीईओ को वल्नरेबल जनसंख्या की पहचान कर टीबी जांच शिविर आयोजित कराने के निर्देश भी दिए।
कलेक्टर ने डीएमएफ अंतर्गत स्वीकृत कार्यों की समीक्षा करते हुए अपूर्ण कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने दो वर्ष या उससे अधिक समय से लंबित कार्यों की स्थिति में नए प्रस्तावों की स्वीकृति पर रोक लगाने की बात स्पष्ट की। साथ ही निर्माण पोर्टल में जानकारी अपलोड नहीं करने वाले विभागों को जियो-टैगिंग के साथ फोटो एवं आवश्यक विवरण तत्काल अपलोड करने के निर्देश दिए।
बैठक में बंद योजनाओं के खातों को पूर्णतः बंद कर शेष राशि शासन खाते में जमा कराने, मुख्यमंत्री घोषणाओं की अद्यतन जानकारी प्रस्तुत करने, मातृ वंदना योजना के लक्ष्यों की पूर्ति, 275(क) के तहत जानकारी प्रेषित करने, कर्मयोगी भारत प्रशिक्षण पूरा कराने, अपार आईडी, रेडी-टू-ईट, प्रधानमंत्री आवास योजना, पीएम सूर्यघर योजना, धरती आबा, पीएम जनमन योजना तथा स्वीकृत आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण की प्रगति की गहन समीक्षा की गई। समय-सीमा के लंबित प्रकरणों पर प्रगति लाते हुए शीघ्र निराकरण के निर्देश दिए गए। उन्होंने पीएमओ, मुख्यमंत्री जनदर्शन, मानवाधिकार आयोग, कलेक्टर जनदर्शन सहित अन्य महत्वपूर्ण लंबित प्रकरणों को प्राथमिकता से निराकृत करने के निर्देश दिए।
जनगणना 2026 : स्वगणना का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के निर्देश
कलेक्टर श्री दुदावत ने जनगणना 2026 के तहत 15 अप्रैल से प्रारंभ होने वाली स्वगणना प्रक्रिया के व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए। उन्होंने 1 से 30 मई तक होने वाले मकान सूचीकरण कार्य को गंभीरता एवं तत्परता के साथ संचालित करने को कहा। जनगणना के प्रचार हेतु बैनर, पोस्टर, जिंगल, कचरा संग्रहण वाहनों, शिक्षा विभाग, नगरीय निकायों, जनपदों एवं सार्वजनिक उपक्रमों की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।
इस अवसर पर आयुक्त आशुतोष पांडेय, जिला पंचायत सीईओ दिनेश कुमार नाग, ओएसडी तरुण कुमार किरण, अपर कलेक्टर देवेंद्र पटेल, सहायक कलेक्टर क्षितिज गुरभेले, एसडीएम सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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कोरबा

कोरबा जिले में भूजल स्तर बढ़ाने के लिए बनाए जा रहे 234 बोरवेल रिचार्ज सैंड फिल्टर पिट

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विकसित भारत-जी राम जी के तहत रू1.32 करोड़ से अधिक के कार्य स्वीकृत

जल संरक्षण एवं संवर्धन के साथ ग्रामीणों को मिल रहा रोजगार, 180 से अधिक ग्राम पंचायतों में हो रहा निर्माण

मोर गांव मोर पानी अभियान के तहत जल सरंक्षण एवं संवर्धन सम्बंधी संरचनाओं को प्राथमिकता

कोरबा, 26 अक्टूबर 2026। जिले में गिरते भूजल स्तर को बढ़ाने तथा वर्षा जल के संरक्षण और पुनर्भरण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम के तहत 234 बोरवेल रिचार्ज सैंड फिल्टर पिट का निर्माण कराया जा रहा है। इन कार्यों के लिए कुल 1 करोड़ 32 लाख 97 हजार रुपये की स्वीकृति दी गई है। इन संरचनाओं के निर्माण से जहां ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं, वहीं भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देकर जल संकट की चुनौती से निपटने में भी मदद मिलेगी।

कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देशन तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत प्रतीक जैन के मार्गदर्शन में जिले में जल संरक्षण एवं जल संवर्धन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। ‘मोर गांव, मोर पानी’ अभियान के तहत वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण तथा जल स्रोतों के संरक्षण के लिए विभिन्न संरचनाओं का निर्माण कराया जा रहा है।

बारिश के पानी को जमीन के भीतर पहुंचाने में मिलेगी मदद

बोरवेल रिचार्ज सैंड फिल्टर पिट ऐसी संरचना है, जिसके माध्यम से वर्षा जल को रेत एवं अन्य फिल्टर सामग्री की सहायता से छानकर जमीन के भीतर पहुंचाया जाता है। इससे भूजल पुनर्भरण में मदद मिलती है तथा बोरवेल और आसपास के जलस्रोतों के जलस्तर को बनाए रखने में सहायता मिल सकती है। ग्राम पंचायतों, शासकीय भवनों, स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और सामुदायिक भवनों में ऐसी संरचनाएं जल संरक्षण की दृष्टि से उपयोगी हैं।

पांचों विकासखंडों में हो रहा निर्माण

जिले की 180 से अधिक ग्राम पंचायतों में मांग एवं आवश्यकता के अनुसार सामुदायिक बोरवेल रिचार्ज सैंड फिल्टर पिट का निर्माण कराया जा रहा है। विकासखंडवार स्थिति के अनुसार करतला में 64, कटघोरा में 30, कोरबा में 66, पाली में 13 तथा पोड़ी उपरोड़ा में 61 रिचार्ज पिट बनाए जा रहे हैं।

इन संरचनाओं से विशेषकर उन ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल पुनर्भरण को प्रोत्साहन मिलेगा, जहां जलस्तर में गिरावट की समस्या है। वर्षा जल का बेहतर उपयोग होने से जल उपलब्धता बढ़ाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी सहायता मिलेगी।

विकसित भारत- जी राम जी से जिले में जल संरक्षण एवं संवर्धन के इन प्रयासों के माध्यम से रोजगार सृजन के साथ जल सुरक्षा को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ भविष्य के लिए भी जल संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सके।

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कोरबा

वरिष्ठ पत्रकार सुभाष अग्रवाल को भ्रात शोक

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कोरबा। प्रेस क्लब के सदस्य एवं दैनिक तरूण छत्तीसगढ़ के संपादक सुभाष अग्रवाल के अनुज भ्राता (छोटे भाई) शहर के प्रतिष्ठित नागरिक एवं होटल रिलैक्स इन के संचालक सतीश अग्रवाल पिता स्वर्गीय ओमप्रकाश अग्रवाल का आज सोमवार दिनांक 26/10/2026 की देर शाम 7.30 बजे निधन हो गया। वे कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। वे अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनका अंतिम संस्कार कल मंगलवार दिनांक 27/10/2026 को सुबह 11 बजे स्थानीय मोती सागर पारा मुक्तिधाम में संपन्न होगा। इससे पूर्व अग्रोहा मार्ग स्थित उनके निवास से अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। उनके निधन पर कोरबा प्रेस क्लब परिवार ने शोक व्यक्त किया है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में परम शांति प्रदान करे एवं शोकाकुल परिवार को यह असह्य दुःख सहन करने की शक्ति दे।

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बेबी एलिफेंट की छठी मनाई, नाम रखा ‘काशी’:7 गांवों के ग्रामीण शामिल हुए, स्वस्थ जीवन की कामना की, जिले में 48 हाथियों की मौजूदगी

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कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा वन मंडल के करतला रेंज में 9 हाथियों का झुंड घूम रहा है। झुंड में नन्हे हाथी के जन्म की खुशी में रविवार को 7 गांवों के ग्रामीणों ने उसकी छठी मनाई और उसका नाम ‘काशी’ रखा।

कार्यक्रम काशीपानी जंगल के कारीपानी मंदिर के नीचे गौठान टिकरापारा में आयोजित किया गया। इसमें रामभाठा, लबेद, पाहराभांठा, काशीपानी, छातापाठ, जामपानी और छुईडुंगा गांव के ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए।

मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद ग्रामीणों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई। ग्रामीणों ने हाथी के बच्चे के स्वस्थ जीवन की कामना की।

बेबी एलिफेंट का नाम ‘काशी’ रखा गया है।

बेबी एलिफेंट का नाम ‘काशी’ रखा गया है।

छठी कार्यक्रम काशीपानी जंगल के कारीपानी मंदिर के नीचे गौठान टिकरापारा में आयोजित किया गया।

छठी कार्यक्रम काशीपानी जंगल के कारीपानी मंदिर के नीचे गौठान टिकरापारा में आयोजित किया गया।

रविवार को 7 गांवों के ग्रामीणों ने उसकी छठी मनाई।

रविवार को 7 गांवों के ग्रामीणों ने उसकी छठी मनाई।

जिले में 48 हाथियों की मौजूदगी

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, 9 हाथियों का झुंड फिलहाल काशीपानी के जंगल में घूम रहा है। इसके अलावा कुदमुरा रेंज में 32 हाथी और चचिया क्षेत्र में 7 हाथी मौजूद हैं। हाल के दिनों में हाथियों ने 17 किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाया है।

20 साल से जंगल में आ रहे हाथी

ग्रामीणों ने बताया कि करीब 20 साल से हाथी इस जंगल में आते हैं। वे लंबे समय तक यहां रुकने के बाद वापस चले जाते हैं। यह हाथियों का पुराना कॉरिडोर है।

SDO मणिकांत वर्मा ने ग्रामीणों से हाथियों से छेड़छाड़ नहीं करने और सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि फसल नुकसान के मामलों में नियमानुसार मुआवजा दिया जाता है। जनहानि रोकने के लिए सतर्क रहना जरूरी है।

साल 2000 में पहली बार आए थे हाथी

जिले में साल 2000 में पहली बार कुदमुरा रेंज के आमटिकरा गांव में हाथी आए थे। इसके बाद धीरे-धीरे उनकी संख्या बढ़ती गई। कई बार जिले में हाथियों की संख्या 150 तक पहुंच चुकी है।

धिनारा गांव से शुरू हुई छठी मनाने की परंपरा

बेबी एलिफेंट की छठी मनाने की परंपरा धिनारा गांव से शुरू हुई थी। ग्रामीण अब हाथियों को लेकर जागरूक हो रहे हैं। पहले जहां हाथियों को भगवान मानकर पूजा की जाती थी, वहीं अब ग्रामीण सुरक्षित दूरी बनाए रखने पर जोर देते हैं।

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