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कोरबा

डीएमएफटी कोरबा की पहल से शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मिला नया संबल

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कोरबा 19 अगस्त 2026। खनिज संपदा से प्राप्त संसाधनों का उपयोग जनकल्याण और समग्र विकास के लिए करने की दिशा में जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफटी) कोरबा द्वारा निरंतर महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों में मानव संसाधन की कमी को दूर करने के लिए डीएमएफ के सहयोग से किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव जिले के दूरस्थ एवं आवश्यकता वाले क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है।
शिक्षा व्यवस्था को मिली मजबूती
जिले के शिक्षक-विहीन एवं शिक्षक-कमी वाले प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक, माध्यमिक तथा हाई/हायर सेकेंडरी विद्यालयों में आवश्यकतानुसार मानदेय शिक्षकों की व्यवस्था के लिए डीएमएफटी द्वारा वित्तीय सहयोग प्रदान किया जा रहा है। इस पहल से उन विद्यालयों में नियमित कक्षाओं के संचालन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था को मजबूती मिल रही है, जहां शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की संभावना रहती थी।
वर्ष 2026-27 के लिए विभिन्न शैक्षणिक स्तरों पर मानदेय शिक्षकों हेतु अलग-अलग मदों में वित्तीय सहयोग का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही शासकीय महाविद्यालयों के कन्या छात्रावासों में विशेष पिछड़ी जनजाति वर्ग के शिक्षित अभ्यर्थियों को मानदेय प्रदान करने के लिए भी सहयोग किया जा रहा है। इससे आवश्यकता वाले विद्यालयों एवं छात्रावासों में मानव संसाधन की उपलब्धता मजबूत हो रही है।
स्वास्थ्य सेवाओं में बढ़ी मानव संसाधन की उपलब्धता
शिक्षा के साथ स्वास्थ्य क्षेत्र में भी डीएमएफटी कोरबा द्वारा मानव संसाधन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं उप-स्वास्थ्य केंद्रों में स्टाफ नर्स, मेडिकल लैब टेक्नीशियन, ड्रेसर, फार्मासिस्ट, ईएमटी, रेडियोग्राफर सहित अन्य आवश्यक स्वास्थ्य कर्मियों की सेवाओं के लिए मानदेय हेतु वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 5 विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं 4 दंत चिकित्सकों की सेवाओं के लिए भी वित्तीय सहयोग प्रदान किया जा रहा है। इससे स्वास्थ्य संस्थानों में सेवाओं के नियमित संचालन को बेहतर बनाने तथा ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों को उनके क्षेत्र के निकट आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में सहायता मिल रही है।
जनकल्याण की दिशा में डीएमएफटीकी सार्थक पहल
डीएमएफटी कोरबा द्वारा खनिज प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए शिक्षा, स्वास्थय, पेयजल, अधोसंरचना एवं आजीविका जैसे विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर कार्य किया जा रहा है। मानव संसाधन को मजबूत करने की यह पहल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
खनिज संपदा से जनकल्याण की ओर-डीएमएफटी कोरबा की यह पहल जिले के विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य और नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक सार्थक प्रयास बन रही है।

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कोरबा

CMD के गेवरा दौरे के बिच भू विस्थापित श्रमिकों के विभिन्न मांगो को लेकर अजय जायसवाल के नेतृत्व मे खदान मे लगातार 6 घंटे काम ठप कर किया जमकर विरोध प्रदर्शन

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कोरबा/गेवरा। आज एक तरफ गेवरा खदान के दौरे मे SECL बिलासपुर CMD कोरबा प्रवास पर रहे वही दूसरी ओर अजय जायसवाल भू विस्थापित श्रमिकों सहित स्थानीय बेरोजगारों रोजगार सहित विभिन्न मांगो को लेकर खदान मे धरने पर बैठ गए।

आज दिनांक 27/10/2026 को गेवरा खदान मे कार्यरत निजी ठेका कंपनी PNC सहित अन्य कंपनी मे कार्यरत भू विस्थापित श्रमिकों के द्वारा 6 महीने पूर्व से हाई पावर कमेटी के अनुसार पेमेंट, भविष्य निधि ,सुरक्षा, बोनस, पेमेंट स्लिप, जॉइनिंग लेटर सहित 2 महीने से लंबित भुगतान को लेकर कई बार पत्राचार किया जा चूका है, परन्तु प्रबंधन और कंपनी के द्वारा किसी प्रकार का सुनवाई नहीं किया, जिसको लेकर भू विस्थापित श्रमिकों के द्वारा अजय जायसवाल पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष कोरबा को सूचित किया। तत्पश्चात अजय जायसवाल के द्वारा आज खदान पहुंच भू विस्थापितों के विभिन्न मुद्दे को लेकर खदान मे धरने पर बैठ गए और सभी श्रमिकों के द्वारा 6 घंटा काम बंद कर काम ठप कर आंदोलन कर दिया गया, जिसके उपरांत SECL प्रबंधन और pnc कंपनी के अधिकारी वार्ता हेतु पहुंचे और हड़ताल स्थगित करने निवेदन किया गया। तत्पश्चात दिनांक 29/10/2026 को 12 बजे SECL गेवरा CGM ऑफिस मे वार्ता करते हुए मांग पूरा करने का आश्वासन दिया गया, साथ ही वार्ता मे विभिन्न मुद्दों पर बात करने सहमति बनी, जिसमे सभी –

1 श्रमिकों को हाई पावर कमेटी के अनुसार पेमेंट
2 सभी श्रमिकों का id कार्ड, सुरक्षा,
3 पेमेंट स्लिप
4 स्थानीय बेरोजगरों को रोजगार
5 जॉइनिंग लेटर, सहित बोनस पर बात करने और मांग पूरा करने का आश्वासन दिया गया।
उक्त हड़ताल मे भू विस्थापित श्रमिकों के साथ अजय जायसवाल पूर्व उपाध्यक्ष जिला पंचायत कोरबा, शेत मसीह सांसद प्रतिनिधि, मधुसूदन दस नेता प्रतिपक्ष बांकी मोंगरा, गोविंदा सारथी, कमलेश प्रजापति, संतोष यादव, प्रकाश सागर, फिरोज, राजकुमार पटवा, राकेश राजपूत,संजय यादव, सुजीत महंत, गौरव साहू, अनिल सागर, सहित कम्पनी मे कार्यरत हेल्फर, ड्राइवर सहित ग्रामीण सैकड़ो की संख्या मे उपस्थित रहे।

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कोरबा

न्यायाधीश ने बंदियों को अधिकारों की जानकारी दी

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कोरबा। प्रथम जिला व अपर सत्र न्यायाधीश व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव गरिमा शर्मा ने जिला जेल कोरबा के बंदियों को कानूनी अधिकारों की जानकारी दी। न्यायाधीश शर्मा जेल में बंदियों की भोजन, स्वास्थ्य और स्वच्छता संबंधी सुविधाओं का जायजा लिया। बंदियों से व्यक्तिगत चर्चा कर, उनकी समस्याओं और आवश्यकताओं का अवलोकन किया। न्यायाधीश शर्मा ने कहा कि पात्र बंदियों को निशुल्क विधिक सहायता देंेगे। बंदियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी दिवसों में न्यायालयों में उपस्थित कराने की व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बंदियों को उनके अधिकारों और न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। प्राधिकरण का मानना है कि जरूरतमंद और पात्र व्यक्तियों को निशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराना केवल एक दायित्व नहीं बल्कि समाज में समानता और न्याय का अधिकार भी है।

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कोरबा

पाली-लाफा रोड पर पेड़ों की डंगाल की छंटनी नहीं, मोड़ पर हादसे का डर

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कोरबा/पाली। पाली-लाफा मार्ग पर कई अंधे मोड़ हैं, इनके आसपास सड़क किनारे पेड़ों की डंगाल की छंटनी नहीं कराने पर सड़क हादसे का डर बना हुआ है। 8 किलोमीटर सड़क के रास्ते पर 5 से अधिक मोड़ है, जहां पर सुरक्षित आवाजाही में खतरा बना हुआ है। सामने से आ रहे वाहन पेड़ों की झुकी डंगाल के कारण नजर नहीं आते हैं और वाहनों के टकराने से सड़क दुर्घटना हो चुकी है। चैतुरगढ़ स्थित मां महिषासुर मर्दिनी का ऐतिहासिक मंदिर जाने का भी यह रास्ता है। पाली से चैतुरगढ़ की दूरी लगभग 32 किलोमीटर है। इसी मार्ग पर लाफा तक कई अंधे मोड़ से चालकों का सफर मुश्किल हो रहा है। चैतुरगढ़ में मां महिषासुर मर्दिनी का मंदिर होने के साथ यह क्षेत्र घने जंगलों से घिरा हुआ है।

इस कारण जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल में से एक है। इसकी प्राकृतिक सुंदरता के कारण छत्तीसगढ़ का कश्मीर भी कहा जाता है। पर्यटक पाली-लाफा मार्ग से चैतुरगढ़ के लिए आवाजाही करते हैं। जिला पंचायत सदस्य कौशल नेटी ने मांग की है कि पाली से लाफा होते हुए चैतुरगढ़ जाने वाले मार्ग का निरीक्षण कराया जाए। सड़क किनारे दृश्यता रोकने वाली डालियों की नियमानुसार कटाई-छंटाई कराई जाए। दुर्घटना की दृष्टि से संवेदनशील मोड़ों को चिह्नित किया जाए। वहां जरूरी सुरक्षा उपाय किए जाएं।

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