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कोरबा

पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी को याद किया कांग्रेसियों ने

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कोरबा। जिला कांग्रेस कमेटी कोरबा द्वारा देश के पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न स्व. राजीव गांधी जी का 82 वां जन्म दिवस को सद्भावना दिवस के रूप में मनाया गया। प्रियदर्शनी इंदिरा स्टेडियम परिसर टी. पी. नगर कोरबा में स्व0 राजीव गांधी जी के प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। उपस्थित समस्त कांग्रेस जनों ने पुष्प अर्पित कर नमन किया।
इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष डाॅ.चरण दास महंत ने कहा कि स्व. राजीव गांधी जी की आत्मीय सोच थी कि पंचायती राज के माध्यम से गांव के व्यक्ति को अपने मौलिक अधिकार एवं कर्तव्यों का पूर्ण ज्ञान हो और वह उसका ईमानदारी से पालन करें। गांव की पंचायत को खुद निर्णय लेने का अधिकार हो उन्होंने कहा था राष्ट्रवाद, धर्मनिरपेक्ष और समाजवादी विचारधारा ही हमारे महान देश की अकेली प्रासंगिक विचारधारा है।
सांसद श्रीमती ज्‍योत्‍सना महंत ने भारत रत्न स्व. राजीव गांधी जी को याद करते हुए कहा कि राजीव गांधी का अभूतपूर्व योगदान महिला वर्ग को सत्ता में अधिकाधिक भागीदार बनाने के लिए रहा उन्होंने महिलाओं को प्रत्येक क्षेत्र में 33 प्रतिशत की भागीदारी हेतु रूपरेखा पहले से ही बना दी थी। जिसके वर्तमान में सुपरिणाम देखने को मिल रहा था।

पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि स्व. राजीव गांधी जी के कारण ही पंचायती राज कायम हुआ है। पूरे देश में उनके द्वारा भ्रमण कर सभी वर्गों से विचार विमर्श कर देश के प्रगति के लिए विकास योजना को नया आयाम दिया गया है। कोरबा जिले के आदिवासी बाहुल्य ग्राम रंजना में उनका आगमन हुआ था।

पूर्व विधायक श्‍याम लाल कंवर ने कहा कि स्व. राजीव गांधी जी के अंदर उत्कृष्टता का जुनून था। हर क्षेत्र में चाहे छात्र जीवन हो या पायलट या राजनीति सभी में उत्कृष्टता हासिल की। स्व. राजीव गांधी जी की सोच एवं प्रयास पूर्ण रूप से राष्ट्र निर्माण एवं अंतर्राष्ट्रीय क्षितीज में भारत को एक विशिष्ट स्थान दिलाने हेतु केन्द्रित है।

इस अवसर पर जिला कांग्रेस अध्‍यक्ष मुकेश राठौर, ग्रामीण जिला अध्यक्ष मनोज चौहान, पूर्व अध्यक्ष नत्थूलाल यादव, प्रदेश पदाधिकारी हरीश परसाई, पूर्व महापौर राजकिशोर प्रसाद, प्रदेश सचिव विकास सिंह, पूर्व सभापति श्‍याम सुंदर साेनी, संतोष राठौर, महिला कांग्रेस अध्‍यक्ष कुसुम द्विवेदी, पूर्व अध्‍यक्ष सपना चौहान, ब्‍लॉक अध्‍यक्ष पालुराम साहु, राजेन्‍द्र तिवारी, ए डी जोशी, बसंत चंद्रा, अजा प्रकोष्‍ठ के जिला नारायण कुर्रे, सेवादल अध्‍यक्ष प्रदीप पुरायणे, युवा कांग्रेेस अध्‍यक्ष राकेश पंकज, अल्‍पसंख्‍यक प्रकोष्‍ठ जिला अध्‍यक्ष  मो.शाहिद, मंडल अध्‍यक्ष मनीष शर्मा, जवाहर निर्मलकर, रोपा तिर्की, नेता प्रतिपक्ष कृपाराम साहू, पार्षद रवि चंदेल, बद्री किरण, अविनाश बंजारे, रामगोपाल कुर्रे, जिला उपाध्‍यक्ष राजेन्‍द्र सिंह ठाकुर, दुष्‍यंत शर्मा, एफ डी मानिकपुरी, महेन्‍द्र थवाईत, संतोष यादव, कांग्रेस पदाधिकारी लक्ष्‍मीनारायण विश्‍वकर्मा, रामगोपाल यादव, रतन यादव, गंगाराम भाराद्वाज, अंकित वर्मा, कुंजबिहारी, डी आर नेताम आदि ने स्‍व. राजीव गांधी के जीवनी पर प्रकाश डाला, उन्‍हें याद किया और राजीव जी की प्रतिमा पर पुष्‍प अर्पित कर नमन  किया ।
इस अवसर पर संगीता श्रीवास, ममता अग्रवाल, झल कुंवर, आंगन बाई, रज्‍जाक खान, सुनील निर्मलकर, अनिल कुमार सिंह, अमृता निषाद, धनंजय दिवान, इरफान अलि, नटवर लाल, लक्ष्‍मी बाई, निकिता, शिवभट्ट तुलसी सिंह, गुलशन साहु, कमलेश कुर्रे, कौशल श्रीवास, मुकेश रात्रे सहित अनेकों कांग्रेस पदाधिकारी उपस्थित थे ।

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कोरबा

बेबी एलिफेंट की छठी मनाई, नाम रखा ‘काशी’:7 गांवों के ग्रामीण शामिल हुए, स्वस्थ जीवन की कामना की, जिले में 48 हाथियों की मौजूदगी

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कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा वन मंडल के करतला रेंज में 9 हाथियों का झुंड घूम रहा है। झुंड में नन्हे हाथी के जन्म की खुशी में रविवार को 7 गांवों के ग्रामीणों ने उसकी छठी मनाई और उसका नाम ‘काशी’ रखा।

कार्यक्रम काशीपानी जंगल के कारीपानी मंदिर के नीचे गौठान टिकरापारा में आयोजित किया गया। इसमें रामभाठा, लबेद, पाहराभांठा, काशीपानी, छातापाठ, जामपानी और छुईडुंगा गांव के ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए।

मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद ग्रामीणों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई। ग्रामीणों ने हाथी के बच्चे के स्वस्थ जीवन की कामना की।

बेबी एलिफेंट का नाम ‘काशी’ रखा गया है।

बेबी एलिफेंट का नाम ‘काशी’ रखा गया है।

छठी कार्यक्रम काशीपानी जंगल के कारीपानी मंदिर के नीचे गौठान टिकरापारा में आयोजित किया गया।

छठी कार्यक्रम काशीपानी जंगल के कारीपानी मंदिर के नीचे गौठान टिकरापारा में आयोजित किया गया।

रविवार को 7 गांवों के ग्रामीणों ने उसकी छठी मनाई।

रविवार को 7 गांवों के ग्रामीणों ने उसकी छठी मनाई।

जिले में 48 हाथियों की मौजूदगी

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, 9 हाथियों का झुंड फिलहाल काशीपानी के जंगल में घूम रहा है। इसके अलावा कुदमुरा रेंज में 32 हाथी और चचिया क्षेत्र में 7 हाथी मौजूद हैं। हाल के दिनों में हाथियों ने 17 किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाया है।

20 साल से जंगल में आ रहे हाथी

ग्रामीणों ने बताया कि करीब 20 साल से हाथी इस जंगल में आते हैं। वे लंबे समय तक यहां रुकने के बाद वापस चले जाते हैं। यह हाथियों का पुराना कॉरिडोर है।

SDO मणिकांत वर्मा ने ग्रामीणों से हाथियों से छेड़छाड़ नहीं करने और सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि फसल नुकसान के मामलों में नियमानुसार मुआवजा दिया जाता है। जनहानि रोकने के लिए सतर्क रहना जरूरी है।

साल 2000 में पहली बार आए थे हाथी

जिले में साल 2000 में पहली बार कुदमुरा रेंज के आमटिकरा गांव में हाथी आए थे। इसके बाद धीरे-धीरे उनकी संख्या बढ़ती गई। कई बार जिले में हाथियों की संख्या 150 तक पहुंच चुकी है।

धिनारा गांव से शुरू हुई छठी मनाने की परंपरा

बेबी एलिफेंट की छठी मनाने की परंपरा धिनारा गांव से शुरू हुई थी। ग्रामीण अब हाथियों को लेकर जागरूक हो रहे हैं। पहले जहां हाथियों को भगवान मानकर पूजा की जाती थी, वहीं अब ग्रामीण सुरक्षित दूरी बनाए रखने पर जोर देते हैं।

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कोरबा

पेंड्रा में बुलेट पेड़ से टकराई, युवक की मौत:जिला अस्पताल में इलाज के दौरान तोड़ा दम, कोरबा का रहने वाला था

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गौरेला-पेंड्रा-मरवाही/कोरबा। जीपीएम में तेज रफ्तार बुलेट बाइक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पेड़ से टकरा गई। हादसे में गंभीर रूप से घायल बाइक सवार ललित यादव की जिला अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। वह कोरबा जिले के पाली का निवासी था।

घटना पेंड्रा थाना क्षेत्र की है। जानकारी के मुताबिक, हादसा भाड़ी गांव के पास हुआ। बुलेट की रफ्तार तेज होने के कारण चालक का नियंत्रण छूट गया और बाइक सड़क किनारे पेड़ से जा टकराई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि युवक गंभीर रूप से घायल हो गया।

जिला अस्पताल में इलाज के दौरान तोड़ा दम

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से घायल युवक को जिला अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

पुलिस ने शुरू की जांच

मृतक की पहचान ललित यादव के रूप में हुई है। वह कोरबा जिले के पाली का निवासी था। युवक की मौत से परिवार में मातम छा गया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है।

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कोरबा

चक्रवात के प्रभाव से छत्तीसगढ़ में बढ़ेगी वर्षा की गतिविधियां, किसानों के लिए मौसम आधारित सलाह जारी

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कोरबा, 26 अक्टूबर 2026। दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने से विकसित हो रही चक्रवाती परिस्थितियों का असर छत्तीसगढ़ के मौसम पर पड़ने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग से प्राप्त पूर्वानुमान के अनुसार,  आगामी 28 एवं 29 अक्टूबर को प्रदेश के सभी जिलों में वर्षा होने तथा कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना जताई गई है। मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए किसानों को फसलों, सब्जियों, फलदार पौधों और पशुधन की सुरक्षा के लिए आवश्यक सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है।
पूर्वानुमान के अनुसार 27 अक्टूबर को प्रदेश के दक्षिणी हिस्सों में वर्षा की गतिविधियां अधिक रहने की संभावना है। 28 एवं 29 अक्टूबर को सभी जिलों में वर्षा का पूर्वानुमान है। वर्षा के कारण रात के तापमान में वृद्धि होने से आगामी कुछ दिनों तक ठंड का प्रभाव कम रहने की संभावना है।

मौसम की संभावित स्थिति को देखते हुए किसानों को सलाह दी गई है कि पकने की अवस्था में पहुंच चुकी धान, दलहन एवं तिलहन फसलों की कटाई अगले दो से तीन दिनों तक टालें। जिन किसानों ने कटाई शुरू कर दी है, वे कटी हुई फसलों को शीघ्र सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाएं तथा खेतों में अतिरिक्त पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था करें। फसलों में कीट या रोग के लक्षण दिखाई देने पर मौसम साफ होने के बाद कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार आवश्यक उपचार करें। तिवरा एवं अलसी की उत्तेरा फसल लेने वाले किसान फिलहाल बुवाई स्थगित रखें। रबी फसलों की बुवाई नवंबर के प्रथम सप्ताह से शुरू करने की सलाह दी गई है।
सब्जियों एवं फलदार पौधों की सुरक्षा के लिए भी विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। तेज हवा और वर्षा की संभावना को देखते हुए लौकी, करेला जैसी लता वाली सब्जियों को सहारा देने की व्यवस्था करें तथा जिन केले के पौधों में फूल या फल आ चुके हैं, उन्हें बांस से सहारा दें। रबी मौसम की सब्जियों की बुवाई नवंबर के प्रथम सप्ताह से प्रारंभ करने की सलाह दी गई है। वहीं पशुपालक अपने पशुओं को सूखे एवं सुरक्षित स्थानों पर रखें, उनके लिए चारे और स्वच्छ पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करें तथा वज्रपात की आशंका के दौरान पशुओं को चराते समय पेड़ों के नीचे आश्रय लेने से बचें।
किसानों से अपील की गई है कि वे आगामी दिनों के मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखें और खेतों में जल निकासी सहित फसलों एवं पशुधन की सुरक्षा के लिए समय रहते आवश्यक प्रबंध करें।

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