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कोरबा

सतरेगा पर्यटन रिसॉर्ट के इलेक्ट्रिक सर्किट बोर्ड में किंग कोबरा घुस कर बैठा, जितेंद्र सारथी ने किया खतरनाक रेस्क्यु

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कोरबा। जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सतरेगा पिकनिक स्पॉट के रिसॉर्ट में सुबह उस वक्त पर्यटनों एवं कर्मचारियों में हड़कंप मच गया, जब विद्युत मीटर बोर्ड के पीछे करीब 8 फीट लंबा किंग कोबरा छिपकर बैठा मिला। किंग कोबरा की जानकारी मिलते ही रेस्ट हाउस के मैनेजर इस्तीखार खान ने तत्काल वन विभाग एवं नोवा नेचर संस्था के सदस्य जितेंद्र सारथी को सूचना दिया, जिसके बाद सारथी ने अपने अजगर बहार के स्थानीय टीम के सदस्य कमलेश, देवेंद्र, राम, गौतम, दिल ,नरेश, देव मरावी को तत्काल सतरेगा के लिए रवाना कर साथ ही इसकी जानकारी कोरबा वनमंडलाधिकारी जितेंद्र उपाध्याय दिया एवं उनके निर्देशानुसार उपवनमण्डलाधिकारी रामसिंह राठिया उत्तर के मार्गदर्शन एवं बालकों रेंजर जयंत सरकार के नेतृत्व में जितेंद्र सारथी एवं सिद्धांत जैन कोरबा से रेस्क्यू के लिए मौके पर पहुंच कर सर्वप्रथम विद्युत विभाग को सूचना देकर बिजली को बंद करवाया गया, फिर पूरी सावधानी के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया, किंग कोबरा सर्किट बोर्ड के पीछे बेहद संकरी जगह में छिपा हुआ था, जिसके कारण उसे बाहर निकालना टीम के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा। लगभग एक घंटे की कड़ी मशक्कत और सावधानी के बाद टीम ने करीब 8 फीट लंबे किंग कोबरा को सफलतापूर्वक सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

रेस्क्यू के दौरान किंग कोबरा को देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटकों की भीड़ लग गई, इतने फुर्तीले और लंबे सांप को देख कर लोग जिज्ञासा वश फोन से वीडियो बनाने से नहीं चुके, साथ ही मौजूद लोगों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया, सफल रेस्क्यू के बाद पंचनामा के पश्चात किंग कोबरा को उसके उपयुक्त प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रूप से छोड़ दिया गया।

कोरबा जिले के लेमरू, बालको , पसरखेत , करतला, कुदमुरा एवं आसपास के वन क्षेत्रों से पिछले कुछ समय से छोटे आकार के किंग कोबरा लगातार सामने आ रहे हैं, छोटे किंग कोबरा का बार-बार मिलना इस क्षेत्र में इनके प्राकृतिक प्रजनन और अनुकूल आवास की उपलब्धता का सकारात्मक संकेत माना जा सकता है, साथ ही यह बात भी सिद्ध करता हैं कि एक ही सांप बार बार रेस्क्यु नहीं हो रहे बल्कि सभी किंग कोबरा दूसरे से भिन्न हैं। हालांकि, क्षेत्र में इनकी वास्तविक संख्या और आबादी की स्थिति निर्धारित करने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन आवश्यक है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब स्थानीय लोगों में भी किंग कोबरा और अन्य वन्यजीवों के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ रही है। आज किसी क्षेत्र में किंग कोबरा दिखाई देने पर लोग उसे मारने या नुकसान पहुंचाने के बजाय तुरंत वन विभाग अथवा प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को सूचना देते हैं। सूचना का समय पर मिलना और सांप का सुरक्षित रेस्क्यू होकर पुनः प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाना वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण है।

वन विभाग एवं नोवा नेचर ने आम लोगों से अपील की है कि किंग कोबरा या किसी भी सांप के दिखाई देने पर उससे दूरी बनाए रखें और स्वयं पकड़ने या नुकसान पहुंचाने का प्रयास न करें, तत्काल प्रशिक्षित स्नेक रेस्क्यू टीम को सूचना दें।

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कोरबा

CMD के गेवरा दौरे के बिच भू विस्थापित श्रमिकों के विभिन्न मांगो को लेकर अजय जायसवाल के नेतृत्व मे खदान मे लगातार 6 घंटे काम ठप कर किया जमकर विरोध प्रदर्शन

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कोरबा/गेवरा। आज एक तरफ गेवरा खदान के दौरे मे SECL बिलासपुर CMD कोरबा प्रवास पर रहे वही दूसरी ओर अजय जायसवाल भू विस्थापित श्रमिकों सहित स्थानीय बेरोजगारों रोजगार सहित विभिन्न मांगो को लेकर खदान मे धरने पर बैठ गए।

आज दिनांक 27/10/2026 को गेवरा खदान मे कार्यरत निजी ठेका कंपनी PNC सहित अन्य कंपनी मे कार्यरत भू विस्थापित श्रमिकों के द्वारा 6 महीने पूर्व से हाई पावर कमेटी के अनुसार पेमेंट, भविष्य निधि ,सुरक्षा, बोनस, पेमेंट स्लिप, जॉइनिंग लेटर सहित 2 महीने से लंबित भुगतान को लेकर कई बार पत्राचार किया जा चूका है, परन्तु प्रबंधन और कंपनी के द्वारा किसी प्रकार का सुनवाई नहीं किया, जिसको लेकर भू विस्थापित श्रमिकों के द्वारा अजय जायसवाल पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष कोरबा को सूचित किया। तत्पश्चात अजय जायसवाल के द्वारा आज खदान पहुंच भू विस्थापितों के विभिन्न मुद्दे को लेकर खदान मे धरने पर बैठ गए और सभी श्रमिकों के द्वारा 6 घंटा काम बंद कर काम ठप कर आंदोलन कर दिया गया, जिसके उपरांत SECL प्रबंधन और pnc कंपनी के अधिकारी वार्ता हेतु पहुंचे और हड़ताल स्थगित करने निवेदन किया गया। तत्पश्चात दिनांक 29/10/2026 को 12 बजे SECL गेवरा CGM ऑफिस मे वार्ता करते हुए मांग पूरा करने का आश्वासन दिया गया, साथ ही वार्ता मे विभिन्न मुद्दों पर बात करने सहमति बनी, जिसमे सभी –

1 श्रमिकों को हाई पावर कमेटी के अनुसार पेमेंट
2 सभी श्रमिकों का id कार्ड, सुरक्षा,
3 पेमेंट स्लिप
4 स्थानीय बेरोजगरों को रोजगार
5 जॉइनिंग लेटर, सहित बोनस पर बात करने और मांग पूरा करने का आश्वासन दिया गया।
उक्त हड़ताल मे भू विस्थापित श्रमिकों के साथ अजय जायसवाल पूर्व उपाध्यक्ष जिला पंचायत कोरबा, शेत मसीह सांसद प्रतिनिधि, मधुसूदन दस नेता प्रतिपक्ष बांकी मोंगरा, गोविंदा सारथी, कमलेश प्रजापति, संतोष यादव, प्रकाश सागर, फिरोज, राजकुमार पटवा, राकेश राजपूत,संजय यादव, सुजीत महंत, गौरव साहू, अनिल सागर, सहित कम्पनी मे कार्यरत हेल्फर, ड्राइवर सहित ग्रामीण सैकड़ो की संख्या मे उपस्थित रहे।

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कोरबा

न्यायाधीश ने बंदियों को अधिकारों की जानकारी दी

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कोरबा। प्रथम जिला व अपर सत्र न्यायाधीश व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव गरिमा शर्मा ने जिला जेल कोरबा के बंदियों को कानूनी अधिकारों की जानकारी दी। न्यायाधीश शर्मा जेल में बंदियों की भोजन, स्वास्थ्य और स्वच्छता संबंधी सुविधाओं का जायजा लिया। बंदियों से व्यक्तिगत चर्चा कर, उनकी समस्याओं और आवश्यकताओं का अवलोकन किया। न्यायाधीश शर्मा ने कहा कि पात्र बंदियों को निशुल्क विधिक सहायता देंेगे। बंदियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी दिवसों में न्यायालयों में उपस्थित कराने की व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बंदियों को उनके अधिकारों और न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। प्राधिकरण का मानना है कि जरूरतमंद और पात्र व्यक्तियों को निशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराना केवल एक दायित्व नहीं बल्कि समाज में समानता और न्याय का अधिकार भी है।

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कोरबा

पाली-लाफा रोड पर पेड़ों की डंगाल की छंटनी नहीं, मोड़ पर हादसे का डर

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कोरबा/पाली। पाली-लाफा मार्ग पर कई अंधे मोड़ हैं, इनके आसपास सड़क किनारे पेड़ों की डंगाल की छंटनी नहीं कराने पर सड़क हादसे का डर बना हुआ है। 8 किलोमीटर सड़क के रास्ते पर 5 से अधिक मोड़ है, जहां पर सुरक्षित आवाजाही में खतरा बना हुआ है। सामने से आ रहे वाहन पेड़ों की झुकी डंगाल के कारण नजर नहीं आते हैं और वाहनों के टकराने से सड़क दुर्घटना हो चुकी है। चैतुरगढ़ स्थित मां महिषासुर मर्दिनी का ऐतिहासिक मंदिर जाने का भी यह रास्ता है। पाली से चैतुरगढ़ की दूरी लगभग 32 किलोमीटर है। इसी मार्ग पर लाफा तक कई अंधे मोड़ से चालकों का सफर मुश्किल हो रहा है। चैतुरगढ़ में मां महिषासुर मर्दिनी का मंदिर होने के साथ यह क्षेत्र घने जंगलों से घिरा हुआ है।

इस कारण जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल में से एक है। इसकी प्राकृतिक सुंदरता के कारण छत्तीसगढ़ का कश्मीर भी कहा जाता है। पर्यटक पाली-लाफा मार्ग से चैतुरगढ़ के लिए आवाजाही करते हैं। जिला पंचायत सदस्य कौशल नेटी ने मांग की है कि पाली से लाफा होते हुए चैतुरगढ़ जाने वाले मार्ग का निरीक्षण कराया जाए। सड़क किनारे दृश्यता रोकने वाली डालियों की नियमानुसार कटाई-छंटाई कराई जाए। दुर्घटना की दृष्टि से संवेदनशील मोड़ों को चिह्नित किया जाए। वहां जरूरी सुरक्षा उपाय किए जाएं।

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