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छत्तीसगढ़

रायपुर : नक्सलवाद के अंधेरे से निकलकर विकास की नई इबारत लिख रहा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा विकसित छत्तीसगढ़

सुरक्षा के साथ विकास की रणनीति ने बदली बस्तर की तस्वीर, अंतिम छोर तक पहुंच रही शासन की योजनाएं

नियद नेल्लानार से गांवों में पहुंचीं बुनियादी सुविधाएं, मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान में 34 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण

बस्तर में पर्यटन, रोजगार और आजीविका के खुल रहे नए द्वार

मुख्यमंत्री श्री साय ‘विकसित भारत-समृद्ध छत्तीसगढ़ : विकास का नया अध्याय’ कार्यक्रम में हुए शामिल

रायपुर, 31 अगस्त 2026। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि दशकों तक नक्सलवाद की चुनौती का सामना करने वाला छत्तीसगढ़ आज शांति, विश्वास और विकास के एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। नक्सलवाद के अंधेरे से बाहर निकलकर प्रदेश अब विकास की नई इबारत लिख रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, अधोसंरचना, पर्यटन और आजीविका सहित सर्वांगीण विकास के प्रत्येक क्षेत्र में तेजी से काम हो रहा है और इसके सकारात्मक परिणाम धरातल पर दिखाई देने लगे हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय आज राजधानी रायपुर में आयोजित ‘विकसित भारत-समृद्ध छत्तीसगढ़ : विकास का नया अध्याय’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प देश के सामने रखा है। इसी संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ ने भी विकसित राज्य बनने का स्पष्ट रोडमैप तैयार किया है। प्रदेश के विजन डॉक्यूमेंट के अंतर्गत 10 प्रमुख मिशन निर्धारित किए गए हैं और उन्हें धरातल पर उतारने के लिए लगातार काम किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ संभावनाओं से भरपूर राज्य है। प्रदेश का लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है और यहां लोहा, बॉक्साइट, लिथियम, सोना सहित अनेक महत्वपूर्ण खनिज संसाधन उपलब्ध हैं। छत्तीसगढ़ देश का एकमात्र टिन उत्पादक राज्य भी है। प्राकृतिक संसाधनों की इस समृद्धि के साथ प्रदेश की मेहनतकश मानव शक्ति हमारी सबसे बड़ी ताकत है। इन क्षमताओं का समुचित उपयोग कर छत्तीसगढ़ आने वाले वर्षों में देश के विकास में और बड़ी भूमिका निभाएगा।

सुरक्षा और विकास की समन्वित रणनीति से बदली बस्तर की तस्वीर

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि लंबे समय तक नक्सलवाद प्रदेश, विशेषकर बस्तर के विकास में सबसे बड़ी बाधा बना रहा। वर्ष 2023 में राज्य में सरकार बनने के बाद जनवरी 2024 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की स्थिति की समीक्षा की। इसके बाद केंद्र और राज्य सरकार ने समन्वय के साथ नई रणनीति पर काम शुरू किया। पड़ोसी राज्यों के साथ बेहतर तालमेल और सुरक्षा बलों की संयुक्त कार्रवाई ने नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान को निर्णायक गति दी।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति और हमारे सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से सशस्त्र नक्सलवाद के खिलाफ ऐतिहासिक सफलता मिली है। नई रणनीति की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि यह रही कि सुरक्षा बलों ने पूरी मजबूती से अभियान चलाते हुए पहले की तुलना में अपने जवानों की क्षति को कम रखा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर की जनता ने लगभग चार दशकों तक नक्सल हिंसा का दंश झेला है। नक्सली स्कूल, अस्पताल, सड़क, पुल-पुलिया और संचार सुविधाओं जैसे विकास कार्यों का विरोध करते थे, जिसके कारण अनेक दूरस्थ क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से कटे रहे। इसलिए सरकार ने नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई के साथ-साथ विकास को भी समान प्राथमिकता दी।

‘नियद नेल्लानार’ ने दूरस्थ गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार शुरू से स्पष्ट थी कि केवल नक्सल समस्या को समाप्त करना पर्याप्त नहीं होगा। स्थायी शांति के लिए बस्तर के प्रत्येक गांव और प्रत्येक परिवार तक विकास का लाभ पहुंचाना आवश्यक है। इसी सोच के साथ ‘नियद नेल्लानार’ योजना शुरू की गई। गोंडी भाषा में इसका अर्थ है – ‘आपका अच्छा गांव’।

उन्होंने बताया कि इस योजना के माध्यम से दूरस्थ और संवेदनशील गांवों में सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और दूरसंचार जैसी बुनियादी सुविधाएं तेजी से पहुंचाई जा रही हैं। क्षेत्र में 421 से अधिक स्कूल खोले गए हैं और दूरसंचार नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। विकास को और गति देने के लिए सरकार ने ‘नियद नेल्लानार 2.0’ भी प्रारंभ किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बस्तर को देश का सबसे सुंदर आदिवासी संभाग बनाने का संकल्प व्यक्त किया है और राज्य सरकार इसी लक्ष्य के अनुरूप बस्तर के समग्र विकास पर काम कर रही है।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत 34 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है और लगभग 40 हजार लोगों का उपचार किया गया है। ‘बस्तर मुन्ने’ कार्यक्रम के माध्यम से शासकीय अमला गांवों में पहुंचकर और वहां ठहरकर लोगों को योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ उपलब्ध करा रहा है।

शांति लौटने के साथ बस्तर में आजीविका और पर्यटन की नई संभावनाएं

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर में शांति स्थापित होने के साथ अब रोजगार, आजीविका और पर्यटन के नए अवसर भी तेजी से विकसित हो रहे हैं। पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के साथ समझौता किया गया है। बकरी पालन और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय लोगों की आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और जीवनशैली पूरी दुनिया को आकर्षित कर रही है। बस्तर के धुड़मारास गांव को दुनिया के श्रेष्ठ पर्यटन गांवों में शामिल किया गया है। यहां आने वाले देश-विदेश के पर्यटक होम-स्टे में रहकर स्थानीय जनजातीय जीवन और संस्कृति को निकट से अनुभव कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में होम-स्टे को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ऋण एवं अनुदान की सुविधा दे रही है। पर्यटन को रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने के उद्देश्य से नई औद्योगिक नीति में पर्यटन को भी शामिल किया गया है। नक्सलवाद की समाप्ति के बाद खाली हो रहे लगभग 70 सुरक्षा कैंपों को ‘सेवा डेरा’ के रूप में विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।

हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वालों के लिए खोले पुनर्वास के द्वार

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार की रणनीति केवल सुरक्षा कार्रवाई तक सीमित नहीं रही। हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने वाले लोगों के लिए बेहतर आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति तैयार की गई। सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया कि हिंसा छोड़कर लौटने वालों के साथ न्याय होगा और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलेगा।

उन्होंने कहा कि सरकार ने हिंसा की जगह संवाद और पुनर्वास को प्राथमिकता दी, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए और बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा का रास्ता चुना। मुख्यमंत्री ने कहा कि सशस्त्र नक्सलवाद समाप्त होने के बाद भी वैचारिक स्तर पर भ्रम फैलाने की कोशिश करने वाले कुछ तत्व मौजूद हैं, लेकिन बस्तर में तेजी से पहुंचता विकास और लोगों के जीवन में आ रहा सकारात्मक परिवर्तन ऐसे भ्रम का सबसे प्रभावी उत्तर है।

युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए शिक्षा और रोजगार पर विशेष जोर

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के समय प्रदेश में केवल एक मेडिकल कॉलेज था, जबकि आज 15 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। प्रत्येक विकासखंड तक उच्च शिक्षा की पहुंच बढ़ी है और आईआईटी, आईआईएम, ट्रिपल आईटी जैसे राष्ट्रीय महत्व के प्रतिष्ठित संस्थान प्रदेश में संचालित हो रहे हैं।

उन्होंने बताया कि प्रदेश के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है। दिल्ली में यूथ हॉस्टल के माध्यम से युवाओं को यूपीएससी की तैयारी में सहयोग दिया जा रहा है। प्रदेश में 34 नालंदा परिसरों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों को अध्ययन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चों की शिक्षा और उनके बेहतर भविष्य के लिए भी सरकार अनेक सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। सरकार का प्रयास है कि आर्थिक परिस्थितियां किसी प्रतिभाशाली बच्चे के सपनों की राह में बाधा न बनें।

नई औद्योगिक नीति से निवेश और रोजगार को मिल रही नई गति

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नई औद्योगिक नीति के माध्यम से छत्तीसगढ़ में उद्योग, निवेश और रोजगार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है। अब तक लगभग 8 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं और इनका असर धरातल पर भी दिखाई देने लगा है।

उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता केवल निवेश आकर्षित करना नहीं, बल्कि उसके माध्यम से प्रदेश के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर तैयार करना है। इसी उद्देश्य से एक हजार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने वाले उद्यमों के लिए विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है।

“किसान परिवार से मिली मेहनत और जिम्मेदारी की सीख”

कार्यक्रम में अपनी जीवनयात्रा का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वे किसान परिवार से आते हैं और खेती उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा रही है। दस वर्ष की आयु में पिता के निधन के बाद परिवार के बड़े बेटे के रूप में कम उम्र में ही उन्हें जिम्मेदारियां संभालनी पड़ीं। बचपन से खेती करते हुए उन्होंने परिश्रम, धैर्य और जिम्मेदारी का महत्व सीखा।

उन्होंने कहा कि राजनीति में आने की उनकी कोई पूर्व योजना नहीं थी। गांव के लोगों के आग्रह पर पहली बार वार्ड पंच का चुनाव लड़ा और जनप्रतिनिधि के रूप में सार्वजनिक जीवन की शुरुआत हुई। पांच वर्ष तक पंच के रूप में किए गए कार्यों के आधार पर गांववासियों ने उन्हें निर्विरोध सरपंच चुना। इसके बाद वर्ष 1990 में तपकरा विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधायक बने। अविभाजित मध्यप्रदेश में दो बार विधायक और रायगढ़ से चार बार सांसद के रूप में जनता की सेवा का अवसर मिला।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में कार्य करने का अवसर मिला और आज छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश की सेवा का महत्वपूर्ण दायित्व मिला है। सार्वजनिक जीवन में जो भी जिम्मेदारी मिली, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ निभाने का प्रयास किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ के सामने संभावनाओं का नया आकाश है। नक्सलवाद की बाधा दूर होने के साथ बस्तर सहित पूरा प्रदेश विकास की नई गति पकड़ रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध छत्तीसगढ़ मानव विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, उद्योग और पर्यटन में भी देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो तथा वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण में ‘विकसित छत्तीसगढ़’ अपनी सशक्त भूमिका निभाए। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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कोरबा

माँ श्री सर्वमंगला देवी मंदिर दुरपा कोरबा में हवन-पूर्णाहुति के साथ शारदीय नवरात्रि पर विराम

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प्रबंधक एवं राजपुरोहित नमन पाण्डेय ने सपत्नीक किया हवन-पूर्णाहुति, विद्वान आचार्यों के श्रीमुख से निकला दिव्य मंत्रोच्चार, शंखनाद से परिसर हुआ भक्तिमय
सार्वभौम का कल्याण हो, विश्व में शांति हो, घर-घर पहुंचे समृद्धि की शुभ-मंगलकामनाओं के लिए मांगा माँ से आशीर्वाद

कोरबा। आज अपराह्न माँ श्री सर्वमंगला देवी मंदिर परिसर दुरपा कोरबा में महाअष्टमी पर शारदीय नवरात्रि पर हवन-पूर्णाहुति के साथ विराम लग गया। मंदिर के प्रबंधक एवं राजपुरोहित नमन पाण्डेय ने सपरिवार हवन-पूजन किया और यहां उपस्थित विद्वान आचार्यों ने दिव्य मंत्रोच्चार, घंटे एवं शंखनाद के बीच हवन-पूर्णाहुति को विधि-विधान के साथ सम्पन्न कराया और माँ आदिशक्ति से प्रार्थना की, कि पूरे विश्व का कल्याण हो, विश्व में शांति की पुनसर््थापना हो, चारों तरफ समृद्धि की बयार हो और घर-घर सुख, सम्पत्ति और वैभव का निवास हो, इन्हीं शुभ-मंगलकामनाओं के साथ माँ आदिशक्ति से आशीर्वाद मांगा।
21 कन्याओं का श्रृंगार कर कराया भोज, दिए उपहार

माँ श्री सर्वमंगला देवी मंदिर दुरपा कोरबा में महाअष्टमी पूजा सम्पन्न होने के बाद हवन-पूर्णाहुति को विधि-विधान से सम्पन्न कराने के बाद एवं महाअष्टमी पर माँ महागौरी स्वरूपा माँ श्री सर्वमंगला देवी की पूजा अर्चना एवं संध्या आरती सम्पन्न होने के बाद 21 कन्याओं को सादर आमंत्रित किया गया और श्री पाण्डेय के निजनिवास के अतिथि कक्ष में सभी 21 कन्याओं का श्रृंगार किया गया, पाण्डेय परिवार द्वारा सभी कन्याओं का पग प्रक्षालन किया गया और उसके बाद सभी को भोग परोसा गया। कन्या भोज के बाद उपस्थित देवी स्वरूपा सभी कन्याओं को उपहार दिया गया और इस तरह शारदीय नवरात्रि पर विराम लग गया।


महागौरी स्वरूपा माँ श्री सर्वमंगला देवी की महाअष्टमी आरती


महाअष्टमी पर श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व भीड़

कल गोधूली बेला पर जवारा कलश का विसर्जन

माँ श्री सर्वमंगला देवी मंदिर परिसर दुरपा कोरबा में 181 जवारा कलश भी नवरात्रि के प्रथम दिन प्रज्ज्वलित किए गए थे और 09 दिन तक जवारा कलशों की बैगाओं द्वारा सेवा करने के बाद कल महानवमी 19 अक्टूबर को संध्या गोधूली बेला में जवारा कलशों का गंगा स्वरूपा हसदेव नदी में विसर्जित किया जाएगा। विसर्जन से पूर्व जवारा कलशों का विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की जाएगी और असतो मा सद्गमय… की कामना के साथ नारी शक्ति अपने-अपने सिर में कलशों को लेकर रैली के रूप में नदी तट पर पहुंचेंगी, साथ में बैगा भी होंगे और विसर्जन की प्रक्रिया विधि विधान के साथ पूर्ण होगी और जवारा कलश विसर्जन के साथ शारदीय नवरात्रि सम्पन्न होगी।

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छत्तीसगढ़

विधायक अमर अग्रवाल को तिलक नगर के विस्थापितों ने घेरा:बोले- तारीख पर तारीख मिल रही,अब तिलक नगर में ही बसाइए,तंबू लगाकर धरने की चेतावनी

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बिलासपुर, एजेंसी। बिलासपुर शहर के तिलक नगर में विस्थापित परिवारों ने नगर विधायक अमर अग्रवाल को घेरकर उनके पुनर्वास की मांग उठाई। विधायक रघुनंदन सभागृह का लोकार्पण करने श्रीराम मंदिर पहुंचे थे। इसी दौरान प्रभावित परिवारों के लोगों, जिनमें ज्यादातर महिलाएं थीं, ने उनसे मुलाकात कर मांग की कि उन्हें उसी जगह बसाया जाए, जहां से हटाकर इमलीभाठा भेजा गया था।

तिलक नगर स्थित श्रीराम मंदिर के पीछे नदी किनारे रहने वाले करीब 300 परिवारों को लगभग छह साल पहले कोरोना काल में भारी बारिश के बीच बेदखल किया गया था। उस समय उन्हें वहीं प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान बनाकर देने की बात कही गई थी। विस्थापितों का आरोप है कि वर्षों बाद भी उनकी मांग पूरी नहीं हुई है और उन्हें बार-बार आश्वासन ही मिल रहा है।

निवेदन को भीख समझा जा रहा, अब ठोस जवाब चाहिए

प्रभावित परिवारों ने कहा कि वे लंबे समय से जनप्रतिनिधियों के सामने पुनर्वास और आवास की मांग रख रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें इंतजार करने के लिए कहा जाता है। उनका कहना है कि मकान तोड़ते समय पुनर्वास का भरोसा दिया गया था, मगर अब तक उन्हें इसका लाभ नहीं मिला।

रहवासियों के मुताबिक, करीब एक सप्ताह पहले भी विधायक से मुलाकात कर अपनी समस्या बताई थी। उस दौरान आश्वासन मिला था, लेकिन कोई स्पष्ट जवाब नहीं आने पर वे दोबारा अपनी मांग लेकर पहुंचे। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि बार-बार की गुहार को भीख समझा जा रहा है।

टेंडर और फंड का हवाला, लेकिन जमीन और नक्शे पर सवाल

प्रभावित परिवारों का कहना है कि वे दो बार विधायक से मुलाकात कर चुके हैं। हर बार उन्हें टेंडर प्रक्रिया पूरी होने और फंड उपलब्ध होने के बाद आगे की कार्रवाई का भरोसा दिया जा रहा है।

रहवासियों ने सवाल उठाया कि जब तक जमीन का चयन और ड्राइंग-डिजाइन तैयार नहीं होगा, तब तक मकानों का निर्माण कैसे आगे बढ़ेगा? उनका आरोप है कि अधिकारी और जनप्रतिनिधि समय देने के बावजूद अब तक कोई ठोस जवाब नहीं दे रहे हैं।

जर्जर आवास और नशे के बढ़ते प्रचलन से परेशान परिवार

स्थानीय निवासी अंकुश ठाकुर ने बताया कि प्रभावित परिवार अब तक मिले आश्वासनों से संतुष्ट नहीं हैं। उनके अनुसार, अधिकारियों से चर्चा कर दो दिनों के भीतर जवाब देने की बात कही गई थी, लेकिन एक सप्ताह से अधिक समय बीतने के बाद भी स्पष्ट जवाब नहीं मिला। दोबारा मुलाकात करने पर भी उन्हें संतोषजनक उत्तर नहीं दिया गया।

अंकुश ठाकुर ने पुनर्वास के लिए उपलब्ध कराए गए आवासों की जर्जर स्थिति पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि कई मकान जीर्ण-शीर्ण हालत में हैं और बारिश के दौरान पानी भरने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा क्षेत्र में नशे के बढ़ते प्रचलन से बच्चों के भविष्य को लेकर भी परिवार चिंतित हैं।

मांग पूरी नहीं हुई तो तंबू लगाकर करेंगे आंदोलन

स्थानीय निवासी अनिता यादव ने कहा कि मौजूदा आवासों में रहने के दौरान परिवारों को कई तरह की परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो वे संबंधित स्थल पर तंबू लगाकर धरना शुरू करेंगे। जरूरत पड़ने पर आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा।

विस्थापित परिवारों ने दोहराया कि वे अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि पुनर्वास को लेकर ठोस पहल और स्पष्ट जवाब चाहते हैं।

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छत्तीसगढ़

हादसे के बाद जाम:बोलेरो ने ऑटो को मारी टक्कर तो कार से टकराई, चालक की मौत, 6 लोग गंभीर रूप से घायल

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जांजगीर। चांपा-जांजगीर मुख्य मार्ग पर दर्राभांठा के पास शुक्रवार रात हुए एक भीषण सड़क हादसे में ऑटो चालक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि वाहन में सवार 6 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। दुर्घटना एक चेन एक्सीडेंट के रूप में हुई, जिसमें पीछे से आ रही तेज रफ्तार बोलेरो ने ऑटो को टक्कर मारी, जिससे अनियंत्रित होकर ऑटो एक अन्य कार से जा टकराया।

मृतक की पहचान ग्राम बोड़सरा निवासी चंद्रशेखर धीवर (पिता रामनारायण धीवर) के रूप में हुई है। हादसे के तुरंत बाद परिजनों और ग्रामीणों ने मुआवजे की मांग को लेकर सड़क पर चक्काजाम कर दिया। इसके चलते सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यात्रियों को चांपा से जांजगीर की 10 किलोमीटर की दूरी तय करने में 5 घंटे का समय लग गया।

मौके पर पहुंचे तहसीलदार द्वारा पीड़ित परिवार को 25,000 रुपये की तात्कालिक सहायता राशि उपलब्ध कराने के बाद जाम समाप्त कराया गया। पुलिस ने पंचनामा के बाद शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है। थाना प्रभारी जय प्रकाश साहू ने कहा कि बोलेरो के ओवरटेक करने के कारण यह हादसा हुआ। घायलों का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है। बोलेरो चालक की तलाश जारी है।

जगराता के लिए सड़क पर बांधा GI तार, गला कटने से युवक की मौत

शहर में धार्मिक आयोजनों के नाम पर मुख्य सड़कों को मनमाने तरीके से बंद करने की लापरवाही ने 20 साल के युवक की जान ले ली। शुक्रवार देर रात जयस्तंभ चौक पर जगराता कार्यक्रम के लिए सड़क पर बांधे गए रस्सी और जीआई तार में गला फंसने से बुलेट सवार फैजान आलम की मौत हो गई।

उसका गला कट गया, जबकि पीछे बैठा साथी समीर गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के बाद आक्रोशित लोगों ने जगराता बंद करवा दिया और कोतवाली थाने का घेराव किया। पुलिस ने आयोजन समिति के पदाधिकारियों समेत अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया है। शहर में इन दिनों जगह-जगह टेंट और पंडाल लगाकर मुख्य मार्ग रोके जा रहे हैं।

देवीगंज रोड पर दिनभर जाम लग रहा है। इसके बावजूद प्रशासन कार्रवाई नहीं कर रहा। जयस्तंभ चौक पर भी सड़क बंद करने के लिए रस्सी और जीआई तार बांधने की अनुमति प्रशासन या नगर निगम से नहीं ली गई थी।

मुआवजे के लिए सड़क पर उतरे लोग, लग गई वाहनों की लंबी कतार

हादसे के तुरंत बाद आक्रोशित परिजनों और स्थानीय नागरिकों ने सड़क पर चक्काजाम कर दिया। लोगों का कहना था कि पीड़ित गरीब परिवार को शासन की तरफ से उचित मुआवजा और आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए। चक्काजाम की सूचना मिलते ही तहसीलदार और पुलिस प्रशासन के अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे।

अधिकारियों ने परिजनों से बातचीत की और शासन स्तर से हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया। प्रशासन की ओर से त्वरित कार्रवाई करते हुए पीड़ित परिवार को तात्कालिक सहायता के रूप में Rs.25,000 रुपए दिया गए। इसके बाद जाम समाप्त हुआ और यातायात सुचारू रूप से बहाल हो सका। परिजनों के आधे घंटे चक्काजाम का यह असर हुआ कि सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई।

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