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कोरबा

सौर ऊर्जा से जगमगाया वनांचल, ग्रामीणों को मिली रोशनी और सुरक्षित आवागमन

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चौक-चौराहों से ग्रामीण बाजार तक रोशनी, डीएमएफ से बढ़ी वनांचल की सुविधा
सोलर हाईमास्ट से रोशन हुआ भाठापारा, ग्रामीणों ने जताया आभार

कोरबा, 28 सितम्बर 2026। दिन ढलते ही रोशनी से जगमगाते चौक-चौराहे, सुगम होता ग्रामीणों का आवागमन और सुरक्षित महसूस करते राहगीरकृकोरबा के दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में सौर ऊर्जा से विकास की नई तस्वीर दिखाई दे रही है। पारंपरिक ऊर्जा के स्थान पर सौर ऊर्जा को अपनाते हुए जिला प्रशासन द्वारा जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) से स्वीकृत राशि से क्रेडा के माध्यम से सोलर हाईमास्ट लाइटें स्थापित की जा रही हैं। इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रिकालीन प्रकाश व्यवस्था मजबूत हो रही है और जनसुविधाओं का विस्तार हो रहा है।

कटघोरा विकासखंड के ग्राम भांठापारा में स्थापित सोलर हाईमास्ट लाइट से रात के समय पर्याप्त प्रकाश उपलब्ध हो रहा है। 9 मीटर ऊंचा पोल, 1200 वॉट क्षमता के सोलर मॉड्यूल तथा 30 वॉट की एलईडी लाइटें लगाई गई हैं। इनसे चौक-चौराहों और आसपास के क्षेत्रों में पर्याप्त एवं स्पष्ट रोशनी मिलती है। सोलर हाईमास्ट में डस्क-टू-डॉन तकनीक का उपयोग किया गया है। सूर्यास्त के साथ लाइटें स्वतः चालू और सूर्याेदय के बाद बंद हो जाती हैं। पर्याप्त बैटरी बैकअप के कारण मौसम खराब होने अथवा बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में भी रात्रिकालीन प्रकाश उपलब्ध रहता है। सौर ऊर्जा के उपयोग से विद्युत की बचत होती है और स्थानीय निकायों पर अतिरिक्त बिजली बिल का भार नहीं पड़ता। इससे ऊर्जा संरक्षण के साथ पर्यावरण अनुकूल व्यवस्था को भी बढ़ावा मिल रहा है।
ग्रामवासियों ने बताया गांव के प्रमुख स्थानों पर रोशनी उपलब्ध होने से ग्रामीणों, महिलाओं, बुजुर्गों, राहगीरों और वाहन चालकों को रात में आने-जाने में सहूलियत मिल रही है। बाजार, हाट और स्थानीय दुकानों में शाम के बाद आवश्यक कार्य करने में सुविधा बढ़ी है। बरसात के मौसम में अंधेरे रास्तों पर विषैले जीव-जंतुओं का खतरा भी ग्रामीणों के लिए कम हुआ है। सार्वजनिक स्थानों पर पर्याप्त प्रकाश से सुरक्षा का भरोसा मजबूत हुआ है।
गाँव के रहने वाले महावीर पटेल ने गाँव मे  सोलर हाई मास्ट लाइट लगने से हो रहे लाभ के बारे में बताते हुए कहा कि  पहले रात के समय चौक और आसपास के रास्तों पर पर्याप्त रोशनी नहीं होने से आवागमन में परेशानी होती थी। सोलर हाईमास्ट लगने के बाद गांव का प्रमुख क्षेत्र रोशन रहता है और रात में आने-जाने में अधिक सुविधा महसूस होती है। ग्रामीणों ने इस जनहितकारी सुविधा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, जिला प्रशासन एवं क्रेडा विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया है।
सौर ऊर्जा आधारित यह पहल दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार, ऊर्जा संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा दे रही है। डीएमएफ की राशि से स्थापित सोलर हाईमास्ट ग्रामीण क्षेत्रों में जनसुविधा के विस्तार का प्रभावी माध्यम बन रहे हैं।

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कोरबा

सेजेस पाली में नुक्कड़ नाटक के माध्यम से महिला सशक्तिकरण का संदेश

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नमो सेवा गाथा पर विद्यार्थियों की प्रभावशाली प्रस्तुति, लगभग 495 लोग हुए शामिल
कोरबा, 07 अक्टूबर 2026। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत सेजेस अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, पाली में ‘नमो सेवाकृअनकही कहानियां’ कार्यक्रम के तहत नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से महिला सशक्तिकरण और नमो सेवा गाथा पर प्रभावशाली प्रस्तुति दी।
विद्यार्थियों की शानदार प्रस्तुति से ग्रामीणजन, जनप्रतिनिधि, पालक और छात्र-छात्राएं उत्साहित नजर आए। कार्यक्रम में स्कूली विद्यार्थियों, जनप्रतिनिधियों और पालकों सहित लगभग 495 लोग उपस्थित रहे।

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मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल से दिव्यांगजनों की राह हुई आसान

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कोरबा, 7 अक्टूबर 2026। समाज कल्याण विभाग द्वारा आज प्रतीक जैन मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत कोरबा, ओएसडी तरुण कुमार किरण की उपस्थिति में पात्र दिव्यांगजनों को मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल वितरित की गई। दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के उद्देश्य से दी गई इस सहायता से उनके आवागमन में सुविधा होगी और वे दैनिक कार्य अधिक सुगमता से कर सकेंगे।
मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल प्राप्त करने वाले हितग्राहियों में रेल्वे कॉलोनी, कोरबा निवासी 55 वर्षीय सैय्यद याकूब, पिता सैय्यद अब्दुल कादर, सुभाष ब्लॉक, कोरबा निवासी 44 वर्षीय श्रीमती सुनीता दास, पिता बाबू राज, शांति नगर, कुसमुंडा निवासी 34 वर्षीय श्रीमती सीमा कुमारी, पिता अदरू, तथा गुरसिया, कटघोरा निवासी 20 वर्षीय प्रदीप कुमार उरांव, पिता हरिराम शामिल हैं।
ट्राईसाइकिल मिलने पर हितग्राहियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए शासन और समाज कल्याण विभाग के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि इस सहायता से उनकी गतिशीलता बढ़ेगी और वे अपने दैनिक कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय अधिक आत्मनिर्भर बन सकेंगे।

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रंग-बिरंगी दीवारों से बदली आंगनबाड़ी की तस्वीर, बरपाली के नौनिहालों को मिला सुरक्षित माहौल और सीखने का अवसर

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सुरक्षित छत और रंगीन दीवारों ने बदला माहौल, बरपाली आंगनबाड़ी में बढ़ी नौनिहालों की उपस्थिति
कोरबा, 07 अक्टूबर 2026। कभी जर्जर भवन की दीवारों और असुविधाओं के बीच संचालित होने वाला आंगनबाड़ी केंद्र अब बच्चों की खिलखिलाहट और रंग-बिरंगे चित्रों से गुलजार है। जहां पहले पालकों को अपने छोटे बच्चों को केंद्र भेजते समय उनकी सुरक्षा की चिंता रहती थी, वहीं अब ग्राम पंचायत बरपाली का नया आंगनबाड़ी भवन नौनिहालों के लिए सुरक्षित, सुंदर और सहज वातावरण बन गया है। जिला प्रशासन द्वारा डीएमएफ मद से 11.69 लाख की लागत से निर्मित नए भवन में पक्की छत, मजबूत दीवार, पक्का फर्श, रंगीन चित्र और बच्चों के लिए खिलौनों सहित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसका असर बच्चों की उपस्थिति में भी दिखाई दे रहा है और 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चे नियमित रूप से आंगनबाड़ी पहुंच रहे हैं।
पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के बरपाली स्थित इस आंगनबाड़ी केंद्र में वर्तमान में 30 बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें 6 माह से 3 वर्ष आयु वर्ग के 17 तथा 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के 13 बच्चे शामिल हैं। इसके साथ ही 2 गर्भवती महिलाएं, 3 शिशुवती माताएं और 6 किशोरी बालिकाएं भी केंद्र की सेवाओं से लाभान्वित हो रही हैं। नए भवन के बाद बच्चों के लिए उपलब्ध स्थान और वातावरण में आए बदलाव ने केंद्र की गतिविधियों को भी अधिक व्यवस्थित किया है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती शिवकला बताती हैं कि पुराने भवन की स्थिति ऐसी थी कि बच्चों को केंद्र में रखते समय उनकी सुरक्षा को लेकर हमेशा चिंता बनी रहती थी। भवन जर्जर होने के कारण पालक भी बच्चों को आंगनबाड़ी भेजने में सहज महसूस नहीं करते थे। नए भवन के बनने से सबसे बड़ा बदलाव बच्चों की सुरक्षा और उनके सहज वातावरण में आया है। अब पक्की छत, मजबूत दीवार और पक्के फर्श वाले भवन में बच्चे आराम से बैठते हैं, खेलते हैं और विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं।
श्रीमती शिवकला के अनुसार नए भवन की दीवारों पर बने रंग-बिरंगे चित्र बच्चों को खूब आकर्षित करते हैं। बच्चे चित्रों को देखकर उनके बारे में जानने की उत्सुकता दिखाते हैं और आसपास की वस्तुओं को पहचानने का प्रयास करते हैं। खिलौनों और आकर्षक वातावरण के कारण उनमें केंद्र आने की रुचि भी बढ़ी है। पहले की तुलना में अब बच्चे अधिक संख्या में आंगनबाड़ी पहुंचते हैं और 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की नियमित उपस्थिति दिखाई देती है। बच्चों के लिए केंद्र अब केवल आने-जाने की जगह नहीं रहा, यहां वे खेलते हुए सीखते हैं और सहज माहौल में अपनी प्रारंभिक शिक्षा की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।
आंगनबाड़ी सहायिका श्रीमती चमेली बाई बताती हैं कि नए भवन में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने और उन्हें भोजन कराने में भी काफी सुविधा हुई है। निर्धारित साप्ताहिक मेन्यू के अनुसार सुबह बच्चों को मीठा या नमकीन दलिया दिया जाता है। इसके बाद दाल, चावल और सब्जी सहित भोजन उपलब्ध कराया जाता है। सुरक्षित और सुविधाजनक भवन में बच्चों को भोजन कराने तथा उनकी देखभाल करने में आसानी होती है। बच्चों का नियमित रूप से केंद्र आना उनके लिए भी उत्साह का विषय है।

कार्यकर्ता श्रीमती शिवकला कहती हैं कि पहले भवन की स्थिति के कारण बच्चों और पालकों में जो संकोच था, वह अब दूर हुआ है। नए भवन ने बच्चों को सुरक्षित जगह दी है और आकर्षक वातावरण ने उनके मन में आंगनबाड़ी के प्रति अपनापन बढ़ाया है। बच्चे सुबह केंद्र आने के लिए उत्साहित रहते हैं और यहां होने वाली गतिविधियों में रुचि के साथ शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए ऐसी बेहतर सुविधा उपलब्ध होने से उन्हें अपने कार्य में भी संतोष और उत्साह मिलता है। नौनिहालों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराने की इस पहल के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया।

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