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कोरबा

कोरबा जिले में डिजिटल पारदर्शिता की नई शुरुआत -निर्माण कोरबा पोर्टल शीघ्र होगा सार्वजनिक

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कलेक्टर कुणाल दुदावत ने सभी विभागों को दिए निर्देश
कोरबा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में सुशासन और पारदर्शी प्रशासन की नीति को कोरबा जिले में भी सशक्त रूप से अपनाया जा रहा है। इसी कड़ी में जिले में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन को मज़बूत करने हेतु एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए कलेक्टर कुणाल दुदावत ने “निर्माण कोरबा” पोर्टल की शुरुआत की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। इस अभिनव पोर्टल का उद्देश्य जिले के सभी निर्माण कार्यों को डिजिटल मंच पर लाकर उन्हें आम नागरिकों एवं जनप्रतिनिधियों के लिए अधिक सुगम, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना है। अब विकास कार्यों की वास्तविक प्रगति कागज़ी फाइलों या मौखिक जानकारी पर निर्भर नहीं रहेगी, प्रत्येक सूचना एक क्लिक में उपलब्ध होगी।
इस संबंध में जिला प्रशासन द्वारा नगर निगम, नगरीय निकायों, जिला पंचायत, ग्रामीण यांत्रिकी सेवाएं, लोक निर्माण विभाग, आदिवासी विकास विभाग, जल संसाधन विभाग सहित सभी निर्माण एजेंसियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिले में स्वीकृत किसी भी निर्माण कार्य की समस्त जानकारी अब अनिवार्य रूप से पोर्टल में दर्ज की जाएगी। स्वीकृति से लेकर कार्य प्रारंभ की तिथि, कार्यस्थल, स्वीकृत लागत, प्रगति, निर्माणाधीन स्थिति तथा पूर्णता की जानकारी नियमित रूप से अपडेट की जाएगी। इसके साथ ही प्रत्येक चरण की जियो-टैग्ड तस्वीरें, इंजीनियरों की टिप्पणियाँ और स्थल की वास्तविक स्थिति भी उसी दिन पोर्टल पर अपलोड की जाएँगी।
कलेक्टर ने कहा कि कई बार कागज़ी जानकारी और वास्तविक स्थल की स्थिति में अंतर पाया जाता है-कहीं प्रगति दिखाई जाती है जबकि जमीन पर कार्य प्रारंभ ही नहीं हुआ होता, और कहीं पूर्णता दर्शा दी जाती है जबकि कई कमियाँ शेष रहती हैं। ऐसी विसंगतियों को समाप्त करने तथा जनता के बीच विश्वास बढ़ाने के लिए यह पोर्टल एक अत्यंत प्रभावी माध्यम सिद्ध होगा। पोर्टल में दर्ज प्रत्येक जानकारी वास्तविक समय में अपडेट की जाएगी, जिससे किसी भी विभाग या एजेंसी के लिए कार्य की वास्तविक स्थिति छिपाना संभव नहीं होगा।
निर्माण कोरबा पोर्टल की एक विशेषता यह है कि जिले की सभी परियोजनाओं को जीआईएस-आधारित मानचित्र पर प्रदर्शित किया जाएगा। प्रस्तावित कार्यों को पीले रंग में, निर्माणाधीन कार्यों को हरे रंग में तथा पूर्ण कार्यों को नीले रंग में दर्शाया जाएगा। इससे कोई भी नागरिक एक नज़र में जान सकेगा कि जिले के किस क्षेत्र में कौन-सा कार्य किस चरण में है। फील्ड टीम द्वारा अपलोड की गई जियो-टैग्ड तस्वीरें इस पोर्टल को और अधिक सशक्त बनाती हैं क्योंकि यह केवल जानकारी ही नहीं बल्कि उसका दृश्य प्रमाण भी प्रस्तुत करती हैं।
कलेक्टर ने यह निर्देश भी दिए हैं कि आगामी समीक्षा बैठकों में अब किसी प्रकार के दस्तावेज़ या कागज़ आधारित रिपोर्ट लाने की आवश्यकता नहीं होगी। सभी बैठकें सीधे पोर्टल खोलकर, उपलब्ध डेटा का अवलोकन करते हुए और उसी के आधार पर निर्णय लेते हुए संचालित की जाएँगी। यह प्रक्रिया न केवल समय की बचत करेगी बल्कि निर्णयों को अधिक सटीक और साक्ष्य-आधारित बनाएगी।

यह पोर्टल जिले में डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल सरकारी कार्यप्रणाली आधुनिक होगी, बल्कि जनता और जनप्रतिनिधियों की सीधी भागीदारी सुनिश्चित होगी। कुछ ही दिनों में यह पोर्टल आम जनता के लिए भी उपलब्ध करा दिया जाएगा, जिसके बाद कोई भी नागरिक अपने मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से किसी भी निर्माण कार्य की स्थिति वास्तविक समय में देख सकेगा। इससे विकास कार्यों की गति बढ़ेगी और जवाबदेही भी और अधिक मज़बूत होगी।
“निर्माण कोरबा” पोर्टल जिले के डिजिटलीकरण, पारदर्शिता और सुशासन का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरेगा। यह न केवल निर्माण कार्यों की निगरानी को सरल बनाएगा, बल्कि आम नागरिकों में यह विश्वास भी दृढ़ करेगा कि जिला प्रशासन उनके हित में समर्पित रूप से कार्य कर रहा है और विकास की प्रत्येक ईंट पूरी ईमानदारी के साथ रखी जा रही है।

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कोरबा

CMD के गेवरा दौरे के बिच भू विस्थापित श्रमिकों के विभिन्न मांगो को लेकर अजय जायसवाल के नेतृत्व मे खदान मे लगातार 6 घंटे काम ठप कर किया जमकर विरोध प्रदर्शन

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कोरबा/गेवरा। आज एक तरफ गेवरा खदान के दौरे मे SECL बिलासपुर CMD कोरबा प्रवास पर रहे वही दूसरी ओर अजय जायसवाल भू विस्थापित श्रमिकों सहित स्थानीय बेरोजगारों रोजगार सहित विभिन्न मांगो को लेकर खदान मे धरने पर बैठ गए।

आज दिनांक 27/10/2026 को गेवरा खदान मे कार्यरत निजी ठेका कंपनी PNC सहित अन्य कंपनी मे कार्यरत भू विस्थापित श्रमिकों के द्वारा 6 महीने पूर्व से हाई पावर कमेटी के अनुसार पेमेंट, भविष्य निधि ,सुरक्षा, बोनस, पेमेंट स्लिप, जॉइनिंग लेटर सहित 2 महीने से लंबित भुगतान को लेकर कई बार पत्राचार किया जा चूका है, परन्तु प्रबंधन और कंपनी के द्वारा किसी प्रकार का सुनवाई नहीं किया, जिसको लेकर भू विस्थापित श्रमिकों के द्वारा अजय जायसवाल पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष कोरबा को सूचित किया। तत्पश्चात अजय जायसवाल के द्वारा आज खदान पहुंच भू विस्थापितों के विभिन्न मुद्दे को लेकर खदान मे धरने पर बैठ गए और सभी श्रमिकों के द्वारा 6 घंटा काम बंद कर काम ठप कर आंदोलन कर दिया गया, जिसके उपरांत SECL प्रबंधन और pnc कंपनी के अधिकारी वार्ता हेतु पहुंचे और हड़ताल स्थगित करने निवेदन किया गया। तत्पश्चात दिनांक 29/10/2026 को 12 बजे SECL गेवरा CGM ऑफिस मे वार्ता करते हुए मांग पूरा करने का आश्वासन दिया गया, साथ ही वार्ता मे विभिन्न मुद्दों पर बात करने सहमति बनी, जिसमे सभी –

1 श्रमिकों को हाई पावर कमेटी के अनुसार पेमेंट
2 सभी श्रमिकों का id कार्ड, सुरक्षा,
3 पेमेंट स्लिप
4 स्थानीय बेरोजगरों को रोजगार
5 जॉइनिंग लेटर, सहित बोनस पर बात करने और मांग पूरा करने का आश्वासन दिया गया।
उक्त हड़ताल मे भू विस्थापित श्रमिकों के साथ अजय जायसवाल पूर्व उपाध्यक्ष जिला पंचायत कोरबा, शेत मसीह सांसद प्रतिनिधि, मधुसूदन दस नेता प्रतिपक्ष बांकी मोंगरा, गोविंदा सारथी, कमलेश प्रजापति, संतोष यादव, प्रकाश सागर, फिरोज, राजकुमार पटवा, राकेश राजपूत,संजय यादव, सुजीत महंत, गौरव साहू, अनिल सागर, सहित कम्पनी मे कार्यरत हेल्फर, ड्राइवर सहित ग्रामीण सैकड़ो की संख्या मे उपस्थित रहे।

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न्यायाधीश ने बंदियों को अधिकारों की जानकारी दी

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कोरबा। प्रथम जिला व अपर सत्र न्यायाधीश व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव गरिमा शर्मा ने जिला जेल कोरबा के बंदियों को कानूनी अधिकारों की जानकारी दी। न्यायाधीश शर्मा जेल में बंदियों की भोजन, स्वास्थ्य और स्वच्छता संबंधी सुविधाओं का जायजा लिया। बंदियों से व्यक्तिगत चर्चा कर, उनकी समस्याओं और आवश्यकताओं का अवलोकन किया। न्यायाधीश शर्मा ने कहा कि पात्र बंदियों को निशुल्क विधिक सहायता देंेगे। बंदियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी दिवसों में न्यायालयों में उपस्थित कराने की व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बंदियों को उनके अधिकारों और न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। प्राधिकरण का मानना है कि जरूरतमंद और पात्र व्यक्तियों को निशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराना केवल एक दायित्व नहीं बल्कि समाज में समानता और न्याय का अधिकार भी है।

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पाली-लाफा रोड पर पेड़ों की डंगाल की छंटनी नहीं, मोड़ पर हादसे का डर

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कोरबा/पाली। पाली-लाफा मार्ग पर कई अंधे मोड़ हैं, इनके आसपास सड़क किनारे पेड़ों की डंगाल की छंटनी नहीं कराने पर सड़क हादसे का डर बना हुआ है। 8 किलोमीटर सड़क के रास्ते पर 5 से अधिक मोड़ है, जहां पर सुरक्षित आवाजाही में खतरा बना हुआ है। सामने से आ रहे वाहन पेड़ों की झुकी डंगाल के कारण नजर नहीं आते हैं और वाहनों के टकराने से सड़क दुर्घटना हो चुकी है। चैतुरगढ़ स्थित मां महिषासुर मर्दिनी का ऐतिहासिक मंदिर जाने का भी यह रास्ता है। पाली से चैतुरगढ़ की दूरी लगभग 32 किलोमीटर है। इसी मार्ग पर लाफा तक कई अंधे मोड़ से चालकों का सफर मुश्किल हो रहा है। चैतुरगढ़ में मां महिषासुर मर्दिनी का मंदिर होने के साथ यह क्षेत्र घने जंगलों से घिरा हुआ है।

इस कारण जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल में से एक है। इसकी प्राकृतिक सुंदरता के कारण छत्तीसगढ़ का कश्मीर भी कहा जाता है। पर्यटक पाली-लाफा मार्ग से चैतुरगढ़ के लिए आवाजाही करते हैं। जिला पंचायत सदस्य कौशल नेटी ने मांग की है कि पाली से लाफा होते हुए चैतुरगढ़ जाने वाले मार्ग का निरीक्षण कराया जाए। सड़क किनारे दृश्यता रोकने वाली डालियों की नियमानुसार कटाई-छंटाई कराई जाए। दुर्घटना की दृष्टि से संवेदनशील मोड़ों को चिह्नित किया जाए। वहां जरूरी सुरक्षा उपाय किए जाएं।

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