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कोरबा

‘‘ज्ञानभारतम्‘‘राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान- कोरबा में सांस्कृतिक विरासत संरक्षण का सशक्त अभियान

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श्रीराम गुफा मंदिर सीतामढ़ी में प्राप्त हुई 14 दुर्लभ पांडुलिपियां

डिजिटल संरक्षण से सुरक्षित हुई अमूल्य धरोहर रूपी प्राचीन पांडुलिपियां

कोरबा। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित ‘‘ज्ञानभारतम‘‘ राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के अंतर्गत कोरबा जिले में भारतीय ज्ञान परंपरा एवं सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण हेतु व्यापक, सुनियोजित एवं प्रभावी कार्यवाही निरंतर जारी है। इस अभियान का उद्देश्य देश के विभिन्न क्षेत्रों में बिखरी प्राचीन एवं दुर्लभ पांडुलिपियों की पहचान, दस्तावेजीकरण, डिजिटल संरक्षण तथा भावी पीढ़ियों के लिए उनके सुरक्षित संवहन को सुनिश्चित करना है।
जिले के कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन द्वारा इस महत्वाकांक्षी अभियान को गंभीरता एवं प्रतिबद्धता के साथ क्रियान्वित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत जिले के विभिन्न प्राचीन, ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों में सर्वेक्षण कर उन पांडुलिपियों का संकलन एवं संरक्षण किया जा रहा है, जो अब तक निजी संरक्षण में सुरक्षित थीं और सार्वजनिक रूप से प्रकाश में नहीं आ सकी थीं।
इसी कड़ी में आज कोरबा नगर के समीप स्थित अत्यंत प्राचीन एवं आस्था के प्रमुख केंद्र श्रीराम गुफा मंदिर सीतामढ़ी में जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में ‘‘ज्ञानभारतम‘‘ राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के जिला समन्वयक सतीश प्रकाश सिंह की अगवाई में ‘‘ज्ञानभारतम दूत‘‘ युवा टीम कोरबा द्वारा विस्तृत सर्वेक्षण किया गया। यह स्थल न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि अपनी प्राचीन गुफाओं एवं सांस्कृतिक परंपराओं के कारण ऐतिहासिक महत्ता भी रखता है। वर्षों से साधना, श्रद्धा एवं सांस्कृतिक निरंतरता का केंद्र रहा यह स्थल आज पुनः एक नई पहचान के साथ उभरकर सामने आया, जब यहां 14 अत्यंत दुर्लभ एवं प्राचीन पांडुलिपियों का प्राप्त होना सुनिश्चित हुआ।
जिला समन्वयक श्री सिंह ने बताया कि मंदिर के पुजारी दुकालू श्रीवास (पिता स्व. मातादीन श्रीवास) द्वारा इन पांडुलिपियों को अत्यंत श्रद्धा एवं सावधानी के साथ वर्षों से सुरक्षित रखा गया है। उन्होंने जानकारी दी कि ये पांडुलिपियां उन्हें उनके पिता से प्राप्त हुई थीं, जिन्हें उनके पूर्वजों द्वारा सहेजकर रखा गया था। इस प्रकार यह अनमोल धरोहर पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होती रही है, जो भारतीय पारिवारिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों की सजीव परंपरा को भी दर्शाती है। प्राप्त पांडुलिपियों का अध्ययन करने पर ज्ञात हुआ कि इनमें ओड़िया भाषा का प्रयोग किया गया है। इनकी लिपि की प्रमुख विशेषता इसके गोलाकार अक्षर हैं, जिन्हें मुंडिया’ कहा जाता है। विद्वानों के अनुसार प्राचीन काल में ताड़पत्रों पर लेखन के दौरान उनकी संरचना को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से सीधी रेखाओं के स्थान पर गोलाकार अक्षरों का विकास किया गया, जिससे पत्तों की नसें फटने से बच सकें। इन पांडुलिपियों का कालखंड अनुमानतः 15 वीं से 19 वीं शताब्दी के मध्य का माना जा रहा है। विशेष उल्लेखनीय तथ्य यह है कि इन पांडुलिपियों के दोनों पक्षों (आगे एवं पीछे) पर लेखन अंकित है, जो उस काल की लेखन शैली एवं ज्ञान परंपरा की विशिष्टता को दर्शाता है।
जिला समन्वयक श्री सिंह ने इन पांडुलिपियों को भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि इस प्रकार की विरासत केवल धार्मिक या ऐतिहासिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक पहचान एवं ज्ञान-संपदा का आधार भी है। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे ‘‘ज्ञानभारतम‘‘ मिशन राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान  के उद्देश्य एवं महत्ता को बताते हुए कहा कि यदि किसी के पास भी ऐसी कोई प्राचीन पांडुलिपियां, दस्तावेज या धरोहर सुरक्षित हैं, तो वे आगे आकर इस ज्ञानभारतम अभियान में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें, ताकि इन धरोहरों का संरक्षण वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित ढंग से किया जा सके। मौके पर ज्ञानभारतम दूत युवा टीम द्वारा जिला समन्वयक सतीश प्रकाश सिंह की उपस्थिति में इन प्राचीन दुर्लभ पांडुलिपियों का डिजिटल संरक्षण किया गया तथा उन्हें ज्ञानभारतम ऐप में अपलोड कर राष्ट्रीय स्तर पर अभिलेखित किया गया।
इस अवसर पर जिला प्रशासन की ओर से ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के जिला समन्वयक श्री सिंह द्वारा मंदिर के पुजारी दुकालू श्रीवास को उनके अमूल्य योगदान एवं सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण में निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका के लिए मोमेंटो, शाल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया।
इस दौरान कमला नेहरू महाविद्यालय कोरबा के प्राचार्य डॉ. प्रशांत बोपापुरकर, सहायक प्राध्यापक डॉ. सुशीला कुजूर, विकास पांडे सहित ‘‘ज्ञानभारतम दूत‘‘ युवा टीम के शिवराज थवाईत, मानुप्रताप श्रीवास, राज कुरी, खुशबू दिनकर, मुस्कान राजपूत, धारणा केवट, मिली चैहान, शालिनी कुर्रे सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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कोरबा

CMD के गेवरा दौरे के बिच भू विस्थापित श्रमिकों के विभिन्न मांगो को लेकर अजय जायसवाल के नेतृत्व मे खदान मे लगातार 6 घंटे काम ठप कर किया जमकर विरोध प्रदर्शन

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कोरबा/गेवरा। आज एक तरफ गेवरा खदान के दौरे मे SECL बिलासपुर CMD कोरबा प्रवास पर रहे वही दूसरी ओर अजय जायसवाल भू विस्थापित श्रमिकों सहित स्थानीय बेरोजगारों रोजगार सहित विभिन्न मांगो को लेकर खदान मे धरने पर बैठ गए।

आज दिनांक 27/10/2026 को गेवरा खदान मे कार्यरत निजी ठेका कंपनी PNC सहित अन्य कंपनी मे कार्यरत भू विस्थापित श्रमिकों के द्वारा 6 महीने पूर्व से हाई पावर कमेटी के अनुसार पेमेंट, भविष्य निधि ,सुरक्षा, बोनस, पेमेंट स्लिप, जॉइनिंग लेटर सहित 2 महीने से लंबित भुगतान को लेकर कई बार पत्राचार किया जा चूका है, परन्तु प्रबंधन और कंपनी के द्वारा किसी प्रकार का सुनवाई नहीं किया, जिसको लेकर भू विस्थापित श्रमिकों के द्वारा अजय जायसवाल पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष कोरबा को सूचित किया। तत्पश्चात अजय जायसवाल के द्वारा आज खदान पहुंच भू विस्थापितों के विभिन्न मुद्दे को लेकर खदान मे धरने पर बैठ गए और सभी श्रमिकों के द्वारा 6 घंटा काम बंद कर काम ठप कर आंदोलन कर दिया गया, जिसके उपरांत SECL प्रबंधन और pnc कंपनी के अधिकारी वार्ता हेतु पहुंचे और हड़ताल स्थगित करने निवेदन किया गया। तत्पश्चात दिनांक 29/10/2026 को 12 बजे SECL गेवरा CGM ऑफिस मे वार्ता करते हुए मांग पूरा करने का आश्वासन दिया गया, साथ ही वार्ता मे विभिन्न मुद्दों पर बात करने सहमति बनी, जिसमे सभी –

1 श्रमिकों को हाई पावर कमेटी के अनुसार पेमेंट
2 सभी श्रमिकों का id कार्ड, सुरक्षा,
3 पेमेंट स्लिप
4 स्थानीय बेरोजगरों को रोजगार
5 जॉइनिंग लेटर, सहित बोनस पर बात करने और मांग पूरा करने का आश्वासन दिया गया।
उक्त हड़ताल मे भू विस्थापित श्रमिकों के साथ अजय जायसवाल पूर्व उपाध्यक्ष जिला पंचायत कोरबा, शेत मसीह सांसद प्रतिनिधि, मधुसूदन दस नेता प्रतिपक्ष बांकी मोंगरा, गोविंदा सारथी, कमलेश प्रजापति, संतोष यादव, प्रकाश सागर, फिरोज, राजकुमार पटवा, राकेश राजपूत,संजय यादव, सुजीत महंत, गौरव साहू, अनिल सागर, सहित कम्पनी मे कार्यरत हेल्फर, ड्राइवर सहित ग्रामीण सैकड़ो की संख्या मे उपस्थित रहे।

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कोरबा

न्यायाधीश ने बंदियों को अधिकारों की जानकारी दी

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कोरबा। प्रथम जिला व अपर सत्र न्यायाधीश व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव गरिमा शर्मा ने जिला जेल कोरबा के बंदियों को कानूनी अधिकारों की जानकारी दी। न्यायाधीश शर्मा जेल में बंदियों की भोजन, स्वास्थ्य और स्वच्छता संबंधी सुविधाओं का जायजा लिया। बंदियों से व्यक्तिगत चर्चा कर, उनकी समस्याओं और आवश्यकताओं का अवलोकन किया। न्यायाधीश शर्मा ने कहा कि पात्र बंदियों को निशुल्क विधिक सहायता देंेगे। बंदियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी दिवसों में न्यायालयों में उपस्थित कराने की व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बंदियों को उनके अधिकारों और न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। प्राधिकरण का मानना है कि जरूरतमंद और पात्र व्यक्तियों को निशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराना केवल एक दायित्व नहीं बल्कि समाज में समानता और न्याय का अधिकार भी है।

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कोरबा

पाली-लाफा रोड पर पेड़ों की डंगाल की छंटनी नहीं, मोड़ पर हादसे का डर

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कोरबा/पाली। पाली-लाफा मार्ग पर कई अंधे मोड़ हैं, इनके आसपास सड़क किनारे पेड़ों की डंगाल की छंटनी नहीं कराने पर सड़क हादसे का डर बना हुआ है। 8 किलोमीटर सड़क के रास्ते पर 5 से अधिक मोड़ है, जहां पर सुरक्षित आवाजाही में खतरा बना हुआ है। सामने से आ रहे वाहन पेड़ों की झुकी डंगाल के कारण नजर नहीं आते हैं और वाहनों के टकराने से सड़क दुर्घटना हो चुकी है। चैतुरगढ़ स्थित मां महिषासुर मर्दिनी का ऐतिहासिक मंदिर जाने का भी यह रास्ता है। पाली से चैतुरगढ़ की दूरी लगभग 32 किलोमीटर है। इसी मार्ग पर लाफा तक कई अंधे मोड़ से चालकों का सफर मुश्किल हो रहा है। चैतुरगढ़ में मां महिषासुर मर्दिनी का मंदिर होने के साथ यह क्षेत्र घने जंगलों से घिरा हुआ है।

इस कारण जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल में से एक है। इसकी प्राकृतिक सुंदरता के कारण छत्तीसगढ़ का कश्मीर भी कहा जाता है। पर्यटक पाली-लाफा मार्ग से चैतुरगढ़ के लिए आवाजाही करते हैं। जिला पंचायत सदस्य कौशल नेटी ने मांग की है कि पाली से लाफा होते हुए चैतुरगढ़ जाने वाले मार्ग का निरीक्षण कराया जाए। सड़क किनारे दृश्यता रोकने वाली डालियों की नियमानुसार कटाई-छंटाई कराई जाए। दुर्घटना की दृष्टि से संवेदनशील मोड़ों को चिह्नित किया जाए। वहां जरूरी सुरक्षा उपाय किए जाएं।

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