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कोरबा

विकास के नाम पर ग्रामीणों के भविष्य पर बुलडोजर, SECL और प्रशासन की हठधर्मिता से हरदीबाजार में आक्रोश व तनाव का माहौल

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अस्पताल व हॉस्टल भवन को ढहाए जाने से ग्रामीणों की उम्मीदें टूटीं, भारी पुलिस बल की मौजूदगी से गांव में कर्फ्यू जैसा माहौल

मुआवजा विसंगति रोजगार और पुनर्वास स्थल की बदहाली को लेकर ग्रामीणों में गहरा असंतोष, भविष्य को लेकर अनिश्चितता

देश हित में कोयला जरूरी, लेकिन किसानों के सीने पर चढ़कर विकास मंजूर नहीं — ग्राम पंचायत प्रतिनिधि व ग्रामीण

कोरबा/हरदीबाजार। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड SECL दीपका क्षेत्र द्वारा प्रशासन पुलिस बल और CISF की मौजूदगी में सुबह 5:00 बजे हरदीबाजार स्थित सरकारी स्वास्थ्य केंद्र (अस्पताल) एवं हॉस्टल भवन को जबरन ढहाए जाने की कार्रवाई से क्षेत्र में भारी आक्रोश और तनाव व्याप्त है। प्रशासनिक तंत्र के बल पर की गई इस कार्रवाई से अपनी वाजिब मांगों के निराकरण का इंतजार कर रहे स्थानीय किसानों और ग्रामीणों की उम्मीदें पूरी तरह टूट गई हैं ।

ग्रामीणों का आरोप है कि SECL और प्रशासन की प्राथमिकता केवल खदान विस्तार और कोयला उत्खनन तक सीमित है, जबकि प्रभावितों के मौलिक अधिकारों और समस्याओं की निरंतर अनदेखी की जा रही है ।

ग्रामीणों द्वारा उठाए गए प्रमुख मुद्दे एवं समस्याएं

  1. मुआवजा और रोजगार में विसंगति:- भू-स्वामियों को तय नीति के अनुसार मुआवजा और रोजगार उपलब्ध कराने में भारी अनियमितता बरती जा रही है। पात्र युवाओं को वैकल्पिक रोजगार न देकर भटकने पर मजबूर किया जा रहा है ।
  2. पुनर्वास (बसाहट) स्थल की दयनीय स्थिति:- SECL द्वारा बसाहट के लिए प्रस्तावित स्थलों पर निर्माण व विकास कार्य अत्यंत निराशाजनक और अधूरे पड़े हैं, जिससे ग्रामीणों के पुनर्वास पर संकट खड़ा हो गया है ।
  3. जल संकट और प्रदूषण की गंभीर समस्या:- दीपका खदान की दूरी हरदीबाजार से महज 25 मीटर रह गई है। खदान विस्तार से भू-जल स्तर तेजी से गिर रहा है। ठंड का मौसम खत्म होने से पहले ही कुएं बोरवेल और हैंडपंप सूख जाते हैं। लोगों को 2-3 दिनों तक नहाने और भोजन पकाने तक के लिए पानी नसीब नहीं होता। SECL द्वारा जलापूर्ति के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपये के टेंडर निकालकर केवल खानापूर्ति की जा रही है ।
  4. हैवी ब्लास्टिंग व सुरक्षा का खतरा:- खदान के अत्यधिक निकट होने के कारण हैवी ब्लास्टिंग से मकानों को क्षति पहुंच रही है और पर्यावरण व स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं ।
  5. प्रशासनिक अनदेखी पर उठे गंभीर सवाल

ग्रामीणों ने व्यथित होकर कहा कि जब-जब दीपका प्रबंधन को जरूरत होती है, जिला प्रशासन पुलिस बल लगाकर बलपूर्वक काम करवा लेता है। पूर्व में नापी और सर्वे के दौरान भी गांव को छावनी में तब्दील कर कर्फ्यू जैसा माहौल बना दिया गया था, लेकिन जब किसानों के मुआवजे रोजगार बसाहट और जल संकट के स्थायी समाधान की बात आती है, तो प्रशासन अपनी जवाबदेही से पल्ला झाड़ लेता है । ग्रामीण और प्रभावित किसान अपनी फरियाद लेकर कलेक्टर एसडीएम कार्यालय से लेकर SECL बिलासपुर मुख्यालय (CMD) तक के चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं, परंतु कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है ।

पंचायत प्रतिनिधियों का स्पष्ट रुख

हरदीबाजार ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों ने एक स्वर में कहा कि देश हित में कोयला और ऊर्जा आपूर्ति अत्यंत आवश्यक है तथा इसके लिए भूमि का अधिग्रहण भी जरूरी है, लेकिन स्थानीय किसानों और ग्रामीणों के सीने पर चढ़कर और उनके भविष्य को रौंदकर किया जाने वाला विकास किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है ।

ग्रामीणों ने मांग की है कि जब तक मुआवजा विसंगति का समाधान, पात्र भू-स्वामियों को रोजगार, व्यवस्थित बसाहट और पेयजल का स्थायी प्रबंध नहीं किया जाता, तब तक SECL और प्रशासन की इस एकतरफा व दमनकारी नीति का विरोध जारी रहेगा ।

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रबी सीजन में टोकन और क्यूआर कोड से उर्वरक वितरण शुरू

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नई डिजिटल व्यवस्था से खाद की उपलब्धता और बिक्री पर रहेगी निगरानी

कोरबा 05 नवंबर 2026। रबी सीजन 2026-27 में रासायनिक उर्वरकों का पारदर्शी और सुव्यवस्थित वितरण सुनिश्चित करने के लिए जिले में आज से ‘फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल’ (एफएफएस) सॉफ्टवेयर के माध्यम से टोकन आधारित व्यवस्था शुरू की गई है। इसके तहत किसान मोबाइल ऐप से खाद की प्री-बुकिंग कर ई-टोकन प्राप्त कर सकते हैं। दुकान पर टोकन का क्यूआर कोड स्कैन करने के बाद उर्वरक दिया जाएगा।

नई व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को समय पर उचित मूल्य पर खाद उपलब्ध कराना, वितरण में पारदर्शिता बढ़ाना और कालाबाजारी पर रोक लगाना है। एफएफएस सॉफ्टवेयर के जरिए विक्रेताओं के स्टॉक, उर्वरक की प्राप्ति, दैनिक बिक्री और शेष उपलब्धता का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाएगा। यूरिया, डीएपी, एसएसपी, एमओपी, एनपीके सहित अन्य उर्वरकों की बिक्री और स्टॉक की जानकारी के आधार पर अधिकारी मांग, आपूर्ति और वितरण की नियमित समीक्षा कर सकेंगे।
जिले के किसान आधार कार्ड या फार्मर आईडी की सहायता से ऐप में लॉगिन कर सकते हैं। ऐप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। किसान घर बैठे खाद की प्री-बुकिंग कर सकते हैं। बुकिंग के बाद 48 घंटे के भीतर संबंधित दुकान पर टोकन का क्यूआर कोड स्कैन कराना जरूरी होगा। निर्धारित समय में स्कैन नहीं कराने पर बुकिंग स्वतः निरस्त हो जाएगी। किसान कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के माध्यम से भी टोकन प्राप्त कर सकते हैं।
आज मोबाइल ऐप के माध्यम से ई-टोकन जारी किए गए। नई प्रक्रिया के तहत उर्वरक प्राप्त करने वाले किसानों ने व्यवस्था को सहज बताया। इसके सुचारू संचालन के लिए कृषि विभाग और सहकारी समितियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है तथा किसानों के बीच जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
उप संचालक कृषि ने जिले के किसानों से एफएफएस ऐप के माध्यम से ही खाद की बुकिंग और खरीदी करने की अपील की है। ऐप पर टोकन बनाने में किसी प्रकार की समस्या आने पर किसान नजदीकी कृषि विभाग कार्यालय या सहकारी समिति के अधिकारियों-कर्मचारियों से संपर्क कर सकते हैं।

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सेवा सेतु से बढ़ी शासकीय सेवाओं तक पहुंच, नागरिकों को मिल रही सुविधा

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आवेदन के तीन दिन में मिला आय प्रमाण पत्र, सेवा सेतु से आसान हुई राह

समय और धन दोनों बचे, तीन दिन में मिल गया प्रमाण पत्र” – सुश्री पायल नेटी

कोरबा  05 नवम्बर 2026। आवश्यक शासकीय दस्तावेज बनवाने के लिए पहले नागरिकों को कार्यालयों के चक्कर लगाने, बार-बार आने-जाने और अपना समय व धन खर्च करने जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। छत्तीसगढ़ शासन की सेवा सेतु पहल से शासकीय सेवाओं तक पहुंच आसान हो रही है। अब च्वाइस सेंटर के माध्यम से आवेदन कर आवश्यक प्रमाण पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक बन रही है।
पाली तहसील अंतर्गत ग्राम नांनबांका निवासी सुश्री पायल नेटी, पुत्री भगवान सिंह नेटी, को भी इस सुविधा का लाभ मिला। उन्होंने 30 सितंबर को आवश्यक दस्तावेजों के साथ ग्राम सुतर्रा स्थित अशोक च्वाइस सेंटर के माध्यम से आय प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया। आवेदन के महज तीन दिन बाद, 3 अक्टूबर को उनका आय प्रमाण पत्र जारी हो गया। कम समय में प्रमाण पत्र मिलने से उन्हें अनावश्यक भागदौड़ और कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिली।
पायल नेटी अपने अनुभव साझा करते हुए बताती हैं, “पहले आय प्रमाण पत्र बनवाने के लिए कार्यालयों में जाना पड़ता था। आने-जाने में समय लगता था और पैसे भी खर्च होते थे। अब च्वाइस सेंटर के माध्यम से आवेदन करने पर मुझे केवल तीन दिन में आय प्रमाण पत्र मिल गया। इसके लिए न तो अनावश्यक भागदौड़ करनी पड़ी और न ही बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़े। इससे मेरे समय और धन दोनों की बचत हुई है।”
पायल के अनुसार, सेवा सेतु के माध्यम से जरूरी शासकीय दस्तावेज प्राप्त करने की प्रक्रिया पहले से अधिक आसान हुई है। च्वाइस सेंटर के जरिए आवेदन की सुविधा मिलने से लोगों को अपने आवश्यक कार्यों के लिए बार-बार कार्यालय जाने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे शासकीय सेवाओं तक आम नागरिकों की पहुंच बढ़ रही है और उनका समय भी बच रहा है।
सेवा सेतु की इस पहल की सराहना करते हुए पायल नेटी एवं उनके पिता भगवान नेटी ने बताया सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से शासकीय सेवाओं का लाभ लेना पहले की तुलना में काफी सरल हुआ है। आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन करने पर महज तीन दिनों में आय प्रमाण पत्र जारी होना उनके लिए सुखद अनुभव रहा। उन्होंने इस सुविधा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताते हुए कहा, “सरकार की इस पहल से आम नागरिकों को बड़ी राहत मिल रही है। कम समय में जरूरी प्रमाण पत्र मिल जाने से भागदौड़ कम हुई है और समय व धन की बचत भी हो रही है। मैं चाहती हूं कि ऐसी सुविधाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे। जनसुविधा को प्राथमिकता देने वाली इस पहल के लिए उन्होंने  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को धन्यवाद दिया।

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आयुष्मान योजना में अनियमितता पर हरिकृष्णा केयर हॉस्पिटल का पंजीयन एक वर्ष के लिए निलंबित

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अस्पताल को नए मरीज भर्ती नहीं करने और योजना से संबंधित प्रचार सामग्री हटाने के निर्देश

कोरबा 05 नवंबर 2026। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत मरीजों को गुणवत्तापूर्ण एवं निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा अस्पतालों की नियमित निगरानी एवं जांच की जा रही है। इसी क्रम में 30 सितंबर 2026 को कटघोरा स्थित हरिकृष्णा केयर हॉस्पिटल ( HOSP22P147364) का औचक निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण के दौरान जांच दल ने अस्पताल में कई अनियमितताएं पाईं। इनमें मरीजों के परिजनों से नगद राशि लिए जाने संबंधी बयान, भर्ती अभिलेखों में गलत मोबाइल नंबर दर्ज होना, भर्ती फाइलों में दर्ज 68 मोबाइल नंबरों का गलत अथवा उपयोग में नहीं होना, नवजात शिशुओं के उपचार से संबंधित अनियमितताएं तथा पैथोलॉजी और अल्ट्रासोनोग्राफी से जुड़े अभिलेख उपलब्ध न होना शामिल है।
इन अनियमितताओं के संबंध में अस्पताल को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया था। अस्पताल प्रबंधन द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण संतोषजनक एवं तथ्यों के अनुरूप नहीं पाया गया। मरीजों से संबंधित अभिलेखों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच में गंभीर वित्तीय एवं प्रक्रियागत अनियमितताएं सामने आईं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस. एन. केशरी ने बताया कि अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा जुलाई 2026 में जारी दिशा-निर्देशों की कंडिका 6.4.1 के तहत कार्रवाई की गई है। इसके अंतर्गत हरिकृष्णा केयर हॉस्पिटल, कटघोरा का आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पंजीयन एक वर्ष के लिए निलंबित किया गया है। इस अवधि में अस्पताल को योजना के तहत नए मरीज भर्ती नहीं करने तथा अस्पताल एवं परिसर से योजना से संबंधित प्रचार-प्रसार सामग्री हटाने के निर्देश दिए गए हैं।

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