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कोरबा

दो गायों से शुरू हुई उम्मीद, पांच गायों ने संवारी मिनेश की जिंदगी

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राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना बनी बेरोजगार युवा के स्वावलंबन की मजबूत नींव
कोरबा 26 सितंबर 2026। कभी रोजगार की तलाश और आर्थिक तंगी से जूझ रहे 28 वर्षीय मिनेश राठिया के लिए आज उनकी डेयरी ही आत्मनिर्भरता का आधार बन गई है। करतला विकासखंड के ग्राम करतला निवासी मिनेश राठिया ने शासन की राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना का लाभ लेकर न केवल अपने लिए स्वरोजगार का रास्ता बनाया, बल्कि अपनी छोटी सी डेयरी को भी आगे बढ़ाया है। दो उन्नत नस्ल की गायों से शुरू हुआ उनका सफर अब पांच दुधारू गायों तक पहुंच चुका है।

कम दूध और सीमित साधनों के बीच गुजर रहा था जीवन

योजना का लाभ मिलने से पहले मिनेश बेरोजगार थे। परिवार में पहले से देशी नस्ल की गायें थीं, लेकिन उनसे होने वाला दुग्ध उत्पादन इतना कम था कि परिवार की दैनिक जरूरतें ही मुश्किल से पूरी हो पाती थीं। बिक्री के लिए दूध बचता ही नहीं था। उन्नत नस्ल की दुधारू गायें खरीदकर डेयरी व्यवसाय शुरू करने की इच्छा थी, लेकिन आर्थिक स्थिति इसकी अनुमति नहीं देती थी। ऐसे समय में पशु चिकित्सालय करतला के डॉ. विरेन्द्रपाल सिंह कंवर से उन्हें राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना की जानकारी मिली। योजना ने मिनेश के सपनों को नई दिशा दी और उन्होंने पशु चिकित्सालय में आवेदन प्रस्तुत किया।

सरकारी सहायता से मिली डेयरी को नई शुरुआत

वर्ष 2024-25 में योजना के अंतर्गत मिनेश को दो दुधारू गायों की खरीद के लिए 93 हजार 300 रुपये की सहायता मिली। इन उन्नत नस्ल की गायों के डेयरी में शामिल होते ही उनके जीवन में बदलाव की शुरुआत हो गई। दूध का उत्पादन बढ़ा तो घर की जरूरतें पूरी करने के बाद दूध बिक्री से आमदनी भी होने लगी। मिनेश ने इस आय को खर्च करने के बजाय अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने में लगाया। उनकी मेहनत और लगन का परिणाम यह रहा कि उन्होंने धीरे-धीरे तीन और उन्नत नस्ल की दुधारू गायें खरीद लीं। आज मिनेश के पास कुल पांच उन्नत नस्ल की दुधारू गायें हैं और डेयरी उनके परिवार की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है।

साइकिल से मोटरसाइकिल तक का सफर

मिनेश के जीवन में आए बदलाव की एक तस्वीर उनके साधनों में भी दिखाई देती है। कभी दूध बेचने के लिए उनके पास केवल साइकिल थी। डेयरी से होने वाली आमदनी बढ़ी तो उन्होंने मोटरसाइकिल खरीदी। अब वे आसानी से दूध लेकर बाजार और ग्राहकों तक पहुंच जाते हैं। यह मोटरसाइकिल उनके लिए केवल एक वाहन नहीं, बल्कि बेरोजगारी से आत्मनिर्भरता तक की यात्रा का प्रतीक बन गई है।

आत्मनिर्भरता के साथ बढ़ा आत्मविश्वास

डेयरी व्यवसाय से होने वाली आय में वृद्धि के साथ मिनेश के परिवार की आर्थिक स्थिति भी पहले की तुलना में बेहतर हुई है। उनकी वार्षिक आय अब 30 हजार रुपये से अधिक हो चुकी है। सबसे बड़ा बदलाव उनके आत्मविश्वास में आया है। जो युवा कभी रोजगार की तलाश में था, आज स्वयं का व्यवसाय संचालित कर रहा है और उसे आगे बढ़ाने की योजना बना रहा है।
गांव में भी मिनेश की मेहनत और सफलता को पहचान मिली है। आज गांव के बुजुर्ग अन्य युवाओं को भी स्वरोजगार अपनाने के लिए मिनेश के उदाहरण से प्रेरित करते हैं।

मिनेश बोले-योजना ने बेरोजगारी से स्वावलंबन तक पहुंचाया

मिनेश राठिया कहते हैं, “मैं शासन की इस योजना से बहुत प्रसन्न हूं। योजना से मिली सहायता ने मुझे बेरोजगारी के दौर से बाहर निकलकर अपना काम शुरू करने का अवसर दिया। दो गायों से शुरू हुआ। मेरा डेयरी व्यवसाय आज पांच गायों तक पहुंच गया है। अब मेरा सपना है कि मैं अपनी डेयरी को और बड़ा करूं और अपने परिवार को और बेहतर भविष्य दूं। इस सहयोग के लिए मैं पशुधन विकास विभाग और शासन का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।”
मिनेश की कहानी बताती है कि जब युवा की मेहनत को सही समय पर शासकीय योजना का सहारा मिलता है, तो सहायता की छोटी सी शुरुआत भी आत्मनिर्भरता की बड़ी कहानी लिख सकती है। राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना ने मिनेश को केवल दुधारू गायें नहीं दीं, बल्कि रोजगार, आत्मविश्वास और आगे बढ़ने का अवसर दिया है।

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कोरबा

हाथियों के झुंड ने रौंदी फसल, दंतैल ने तोड़ा मकान:केंदई-एतमानगर-जटगा से पसान पहुंचे 30 हाथी, मोहनपुर और बनिया में अलग-अलग झुंड

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कोरबा। कोरबा जिले के कटघोरा वनमंडल के पसान रेंज में हाथियों की सक्रियता बढ़ गई है। केंदई, एतमानगर और जटगा रेंज में घूम रहे करीब 30 हाथियों का झुंड अब पसान क्षेत्र के लैंगी, मोहनपुर और बनिया पहुंच गया है। हाथी अलग-अलग झुंडों में बंटकर पांच से ज्यादा स्थानों पर घूम रहे हैं।

बीती रात हाथियों ने कई ग्रामीण इलाकों में खेतों में लगी धान की फसल रौंद दी। अब हाथी दिन में भी फसल खा रहे हैं और रात के समय गांवों के आसपास पहुंच रहे हैं। इससे किसानों को नुकसान हो रहा है और ग्रामीणों में डर का माहौल बना हुआ है।

झुंड से अलग दंतैल ने कच्चा मकान तोड़ा

झुंड से अलग हुए एक दंतैल हाथी ने मोहनपुर और पोड़ीकला के बीच जंगल में थुहानाला के पास रात में ग्रामीण के कच्चे मकान को कई जगह से तोड़ दिया। घटना के समय मकान मालिक परदेशी अपने परिवार के साथ एक ही कमरे में डरे हुए दुबके रहे।

हाथी के हमले से मकान को काफी नुकसान पहुंचा है। हालांकि राहत की बात रही कि घटना में किसी की जनहानि नहीं हुई।

अकेले घूम रहे दंतैल से ज्यादा खतरा

ग्रामीणों के मुताबिक, हाथियों का बड़ा झुंड आमतौर पर गांव के ज्यादा करीब नहीं आता। सबसे ज्यादा खतरा झुंड से अलग होकर घूमने वाले दंतैल हाथियों से बना हुआ है। पसान रेंज में सक्रिय हाथियों के दल में दो अकेले हाथी भी शामिल हैं, जो झुंड से अलग घूम रहे हैं। इनके लगातार स्थान बदलने के कारण वन विभाग के सामने इनकी निगरानी चुनौती बनी हुई है।

गांवों में मुनादी, जंगल नहीं जाने की सलाह

हाथियों की बढ़ती सक्रियता को देखते हुए वन विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। हाथियों की मौजूदगी वाले गांवों में टीम की ओर से मुनादी कराई जा रही है।

ग्रामीणों को जंगल और हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने तथा रात में अकेले जंगल या खेतों की ओर नहीं जाने की सलाह दी जा रही है। विभाग की टीम हाथियों की लोकेशन पर लगातार नजर रख रही है।

करतला रेंज में भी 9 हाथी पहुंचे

इधर, कोरबा वनमंडल के करतला रेंज में भी 9 हाथी बेहरसुआं क्षेत्र में पहुंच गए हैं। ये हाथी पहले लबेद के आसपास घूम रहे थे।

वहीं, चिकनीपाली के पहाड़ पर 9 हाथियों का एक और दल अभी भी मौजूद है। इस तरह जिले के अलग-अलग वन क्षेत्रों में हाथियों की लगातार मौजूदगी बनी हुई है, जिससे वन विभाग को निगरानी और ग्रामीणों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना पड़ रहा है।

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कोरबा के घर में घुसा सांप,महिला को डसने का शक:कॉमन वुल्फ स्नेक का रेस्क्यू, सर्प मित्र ने बताया- यह जहरीला नहीं

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कोरबा। कोरबा के मानिकपुर इलाके में आधी रात एक घर में सांप घुसने से हड़कंप मच गया। रात करीब 3:30 बजे बिस्तर पर सांप देखकर घर की महिला चीखने लगी। परिजनों को आशंका हुई कि सांप ने महिला को डस लिया है। इसके बाद मोहल्ले में भी अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस सिपाही हितेश राव ने तुरंत वाइल्डलाइफ रेस्क्यू टीम के जितेंद्र सारथी को सूचना दी। सारथी ने पहले महिला को अस्पताल ले जाने की सलाह दी। इसके बाद वे खुद मौके पर पहुंचे और सावधानी से सांप को पकड़ लिया।

करैत जैसा दिखता है, लेकिन जहरीला नहीं

रेस्क्यू के बाद सांप की पहचान कॉमन वुल्फ स्नेक के रूप में हुई। रेस्क्यूअर जितेंद्र सारथी के मुताबिक, यह सांप जहरीला नहीं होता। उन्होंने बताया कि इसका रंग-रूप करैत जैसा दिखाई देता है, इसलिए कई बार लोग इसे जहरीला समझ लेते हैं।

सांप को लेकर अस्पताल पहुंचे रेस्क्यूअर

सांप को सुरक्षित पकड़ने के बाद जितेंद्र सारथी सीधे जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने डॉक्टर से मिलकर स्पष्ट किया कि पकड़ा गया सांप जहरीला नहीं था। यह जानकारी मिलने के बाद महिला और उसके परिवार ने राहत की सांस ली।

डॉक्टरों ने भी महिला की हालत ठीक बताई। घटना के बाद समय पर सूचना देने और रेस्क्यू टीम तक बात पहुंचाने में सिपाही हितेश राव की भूमिका की भी सराहना की जा रही है।

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मानिकपुर खदान विस्तार की जनसुनवाई में भारी विरोध:पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल और ग्रामीणों ने मुआवजा और रोजगार मांगा, लंबित मामले निपटाने को कहा

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कोरबा। कोरबा में एसईसीएल की मानिकपुर खदान के विस्तार के लिए पर्यावरण जनसुनवाई हुई। इसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल पहुंचे। उन्होंने खदान विस्तार से पहले इलाके की समस्याओं को सुलझाने की मांग रखी।

जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों ने साफ कर दिया कि जब तक पुराने लंबित मामले नहीं निपटाए जाते, तब तक खदान विस्तार को मंजूरी नहीं मिलनी चाहिए। पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि पहले के सभी भू-विस्थापितों के मुआवजा और पुनर्वास के लंबित मामलों को प्राथमिकता से निपटाया जाए। साथ ही स्थानीय युवाओं को रोजगार में अनिवार्य रूप से प्राथमिकता दी जाए।

ग्रामीणों ने प्रदूषण रोकने और ट्रकों को त्रिपाल से ढकने की मांग की

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि खदान चलने से इलाके में प्रदूषण हो रहा है। कोयला ले जाने वाले वाहन बिना त्रिपाल के चलते हैं, जिससे पूरे इलाके में धूल उड़ती है। लोगों ने मांग की कि सभी कोयला परिवहन वाहनों को पूरी तरह त्रिपाल से ढकना जरूरी किया जाए और धूल व वायु प्रदूषण को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।

जनसुनवाई में दूसरे वक्ताओं ने भी अपनी बात कही। उन्होंने कहा कि खदान विस्तार से पहले इलाके में वायु, जल, ध्वनि और धूल प्रदूषण की वैज्ञानिक और पारदर्शी जांच की जाए। इसकी रिपोर्ट सार्वजनिक हो, ताकि लोगों को असली स्थिति का पता चल सके।

मजदूरों को सुरक्षा उपकरण और बेहतर अस्पताल की मांग

ग्रामीणों ने स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी शिकायत की। उन्होंने कहा कि खदान क्षेत्र में पर्याप्त मेडिकल सुविधाएं नहीं हैं। मजदूर बिना सुरक्षा उपकरणों के काम करने को मजबूर हैं। सभी मजदूरों को जरूरी स्वास्थ्य सुरक्षा उपकरण दिए जाएं और इलाके में बेहतर अस्पताल की सुविधा मिले।

इसके साथ ही, ग्रामीणों ने स्थानीय लोगों की शिकायतों के जल्दी समाधान के लिए एक पारदर्शी शिकायत निपटान व्यवस्था बनाने की मांग भी रखी।

ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जब तक भू-विस्थापितों के अधिकार, मजदूरों की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखकर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक खदान विस्तार की प्रक्रिया आगे न बढ़े।

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