रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के कई जिलों में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने छापेमारी की है। यह कार्रवाई रायपुर के पंडरी इलाके के रवि नगर स्थित सुशील विला में हुई है। कारोबारी नितिन डागा के घर दो गाड़ियों में पहुंची टीम सुबह से ही अंदर डॉक्यूमेंट्स की जांच कर रही है।
इसके अलावा दुर्ग में ऋषभ कॉलोनी में बघेल्स कॉर्पोरेट के फाउंडर और ठगी के आरोपी गुलशन बघेल के घर ED की टीम ने दबिश दी है। टीम दो गाड़ियों में पहुंची, जिसमें 10 से ज्यादा अधिकारी शामिल हैं। फिलहाल मौके पर जांच जारी है। यह कार्रवाई भारतमाला प्रोजेक्ट से जुड़े मामले में होने की आशंका है। हालांकि, आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
रायपुर के पंडरी इलाके में रवि नगर स्थित सुशील विला।
दुर्ग में ऋषभ ग्रीन सिटी स्थित गुलशन बघेल के घर पर छापा पड़ा है।
बघेल्स कॉर्पोरेट प्राइवेट लिमिटेड का फाउंडर गुलशन बघेल।
कौन है गुलशन बघेल
गुलशन बघेल, बघेल्स कॉर्पोरेट प्राइवेट लिमिटेड के फाउंडर हैं। कंपनी बिल्डिंग निर्माण, सड़क निर्माण, अर्थवर्क, मटेरियल हैंडलिंग और ट्रांसपोर्ट सेवाओं से जुड़े काम करती है। कंपनी सरकारी और निजी क्षेत्र की निर्माण परियोजनाओं में भी काम करती है।
भूपेश बघेल का भतीजा बताकर की थी ठगी
करीब 6 साल पहले गुलशन बघेल पर खुद को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का भतीजा बताकर सरकारी नौकरी लगवाने का दावा करने और एक महिला से ठगी करने के आरोप में पुलिस ने पकड़ा था।
ज्वेलरी और जमीन के कारोबार से जुड़े हैं डागा
रायपुर के पंडरी स्थित रवि नगर में आज सुबह करीब 4 बजे ED ने नितिन डागा के घर छापेमारी की। दो गाड़ियों में पहुंचे आधा दर्जन अधिकारी दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं। नितिन डागा का ज्वेलरी और जमीन का कारोबार बताया जा रहा है।
किस मामले में कार्रवाई, जानकारी नहीं
फिलहाल ED की यह कार्रवाई किस मामले से जुड़ी है, इसे लेकर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। जांच का दायरा और कार्रवाई से जुड़े अन्य विवरण भी स्पष्ट नहीं हैं। मामले में आधिकारिक जानकारी मिलने के बाद ही स्थिति साफ हो सकेगी।
कोरबा। कोरबा में आबकारी विभाग ने जिले में अवैध महुआ शराब के खिलाफ कार्रवाई करते हुए अलग-अलग क्षेत्रों से 53.6 लीटर महुआ शराब और 300 किलोग्राम महुआ लाहन जब्त किया है। कार्रवाई के दौरान पांच आरोपियों के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किए गए हैं।
विभाग की कार्रवाई के बावजूद जिले के कई गांवों में अवैध महुआ शराब की बिक्री जारी रहने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इससे परेशान ग्रामीण शराब बिक्री बंद कराने की मांग लेकर कलेक्ट्रेट भी पहुंच रहे हैं।
बुंदेली में 7 लीटर शराब और 30 किलो लाहन जब्त
पहली कार्रवाई बालको थाना क्षेत्र के ग्राम बुंदेली में की गई। यहां बोधराम श्रीवास (40), पिता घसिया श्रीवास के कब्जे से 7 लीटर महुआ शराब और 30 किलो महुआ लाहन जब्त किया गया। कार्रवाई आबकारी उपनिरीक्षक सुनील कुमार रात्रे के नेतृत्व में हुई। टीम में अनुजा बेक, संजय गुप्ता, भावेश साहू और कृष्णा कुमार राजवाड़े शामिल रहे।
दीपका क्षेत्र में दो प्रकरण दर्ज
दूसरी कार्रवाई दीपका वृत्त में आबकारी उपनिरीक्षक दीपमाला लक्षवानी ने की। यहां दो अलग-अलग मामलों में कार्रवाई की गई। बड़े बांका, थाना कटघोरा निवासी जगेश्वर मरकाम (38), पिता सुजान सिंह के पास से 6.2 लीटर महुआ शराब जब्त की गई। वहीं, डबरीपारा रजकम्मा निवासी अजीत टेकाम (23), पिता फूल सिंह के कब्जे से 11.2 लीटर महुआ शराब और 30 किलो महुआ लाहन बरामद किया गया।
तिलकेजा और भालूभटरा में भी कार्रवाई
तीसरी कार्रवाई उरगा थाना क्षेत्र के ग्राम तिलकेजा में हुई। यहां अन्नपूर्णा जायसवाल (35), पति राजकुमार के कब्जे से 11 लीटर महुआ शराब और 180 किलो महुआ लाहन जब्त किया गया। कार्रवाई आबकारी उपनिरीक्षक विपिन कुमार पाठक ने की।
चौथी कार्रवाई कटघोरा थाना क्षेत्र के भालूभटरा में की गई। यहां शांति बाई, पति पताइत राम के पास से 18.2 लीटर महुआ शराब और 60 किलो महुआ लाहन जब्त किया गया। कार्रवाई आबकारी उपनिरीक्षक डॉ. सुकांत पांडेय ने की।
कार्रवाई के बाद भी अवैध बिक्री की शिकायतें
आबकारी विभाग की ओर से अवैध महुआ शराब के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। कुछ दिन पहले भी दीपका क्षेत्र में अवैध महुआ शराब के मामले में कार्रवाई कर आरोपियों को जेल भेजा गया था। इसके बावजूद क्षेत्र में अवैध शराब कारोबार सक्रिय होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
बताया जा रहा है कि पकड़े जाने से बचने के लिए कुछ लोग गांवों के आसपास तालाबों और नदी किनारे अवैध शराब की भट्टियां संचालित करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई गांवों में खुलेआम शराब की बिक्री से परेशानी हो रही है। इसे बंद कराने की मांग को लेकर ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंच रहे हैं।
रायपुर, एजेंसी। नवा रायपुर के माना-तूता में बन रही चित्रोत्पला फिल्म सिटी के लिए जंगल में पेड़ों की कटाई फिर शुरू हो गई है। कटाई के दौरान ग्रामीण पेड़ों से लिपटकर रोकने की कोशिश करने लगे। इस दौरान ग्रामीणों को रोकने पहुंची पुलिस के साथ झूमाझटकी हुई। इसका वीडियो भी सामने आया है।
विरोध कर रहे 10 ग्रामीणों को पुलिस माना थाने ले गई। इसकी जानकारी मिलने पर शहर जिला कांग्रेस और ग्रामीण कांग्रेस के अध्यक्ष समेत बड़ी संख्या में कांग्रेसी थाने पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों को थाने ले जाने के विरोध में घेराव किया। घेराव के करीब 1 घंटे बाद पुलिस ने ग्रामीणों को छोड़ दिया।
दरअसल, मंगलवार को पेड़ काटे जाने की जानकारी मिलने पर ग्रामीण मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने कटाई रोकने की मांग की थी। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी इसका विरोध किया था। विरोध के बाद पेड़ों की कटाई रोक दी गई थी, लेकिन अब दोबारा कटाई तेज कर दी गई है।
इधर, स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर पेड़ों की कटाई जारी रही, तो वे फिर से इसका विरोध करेंगे।
चित्रोत्पला फिल्म सिटी के लिए पेड़ों की कटाई की जा रही थी।
मौके पर पहुंचे ग्रामीणों पेड़ कटाई का विरोध किया था। इसके बाद कटाई पर रोक लगा दी गई थी।
दोबारा पेड़ कटाई शुरू होने पर ग्रामीण पेड़ों से लिपट गए।
विरोध कर रहे ग्रामीणों का पुलिस थाने ले गई।
कांग्रेसियों ने माना थाने का घेराव किया। इस दौरान वे धरने पर बैठ गए।
ग्रामीण बोले- 30 से 40 साल पुराने हैं पेड़
ग्रामीणों का कहना है कि फिल्म सिटी का निर्माण करीब 100 एकड़ क्षेत्र में किया जा रहा है। इसके लिए बड़ी संख्या में पेड़ काटे जाने की आशंका है। जंगल में काटे जा रहे पेड़ करीब 30 से 40 साल पुराने हैं। एक पेड़ को बड़ा होने में कई साल लग जाते हैं। ऐसे में पुराने पेड़ों को काटना पर्यावरण के लिहाज से सही नहीं है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें विकास कार्यों से परेशानी नहीं है, लेकिन इसके लिए जंगल के पुराने पेड़ों को नहीं काटना चाहिए। उनकी मांग है कि फिल्म सिटी के लिए नवा रायपुर में किसी दूसरे स्थान का चयन किया जाए
मौके पर पुलिस की टीम भी मौजूद रही।
क्या है चित्रोत्पला फिल्म सिटी परियोजना?
नवा रायपुर के माना-तूता क्षेत्र में चित्रोत्पला फिल्म सिटी और ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 24 जनवरी 2026 को इस परियोजना का भूमिपूजन किया था। इसका उद्देश्य छत्तीसगढ़ में फिल्म निर्माण को बढ़ावा देना और राज्य को फिल्मों की शूटिंग के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है।
परियोजना के तहत फिल्म सिटी के लिए 95.79 करोड़ रुपए और ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के लिए 52.03 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। दोनों परियोजनाओं को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर विकसित करने की योजना है। इसमें निजी क्षेत्र से करीब 300 करोड़ रुपए के निवेश की संभावना भी जताई गई है।
फिल्म सिटी में फिल्मों और वेब सीरीज की शूटिंग के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। यहां सड़क, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट जैसे स्थायी सेट तैयार करने की योजना है।
फिल्म सिटी के लिए जंगल में पेड़ों की कटाई फिर शुरू हो गई है।
फिल्म इंडस्ट्री और पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना
चित्रोत्पला फिल्म सिटी से छत्तीसगढ़ में फिल्म निर्माण, पर्यटन और रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। वहीं, ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर में सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शनियां और अन्य आयोजन किए जाने हैं।
हालांकि, निर्माण के लिए पेड़ों की कटाई को लेकर ग्रामीण विरोध कर रहे हैं। उनकी मांग है कि विकास कार्यों के साथ जंगल और पुराने पेड़ों को भी सुरक्षित रखा जाए।
रायपुर, एजेंसी। बंगाल की खाड़ी में एक्टिव चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ का असर मंगलवार यानी आज से छत्तीसगढ़ में दिखने लगेगा। मौसम विभाग ने 28 और 29 अक्टूबर को प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी दी है। चक्रवाती तूफान अर्नब के बुधवार को ओडिशा-आंध्र प्रदेश तट से टकराने की आशंका है।
दक्षिण छत्तीसगढ़ में 60 से 90 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और कुछ जगहों पर 200 मिमी तक बारिश होने की संभावना है। 28 अक्टूबर के लिए चार जिलों में रेड अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, रायपुर समेत कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
चक्रवात ‘अर्नब’ के असर को देखते हुए बस्तर के स्कूलों में कल छुट्टी घोषित कर दी गई है। वहीं इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने किसानों के लिए मौसम आधारित सलाह जारी की है। किसानों को अगले 2 से 4 दिन धान और अन्य फसलों की कटाई रोकने, कटी फसल को सुरक्षित रखने और खेतों में पानी निकासी की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है।
कुछ जगहों पर बारिश, तेज हवा और बिजली गिरने की चेतावनी
मौसम विभाग ने मंगलवार को प्रदेश में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान जताया है। वहीं, एक-दो स्थानों पर भारी बारिश के साथ गरज-चमक, बिजली गिरने और 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है।
अगले दो दिनों में प्रदेश के अधिकांश स्थानों पर मध्यम बारिश हो सकती है। दक्षिण छत्तीसगढ़ में भारी बारिश की आशंका जताई गई है। मध्य छत्तीसगढ़ में भी भारी बारिश हो सकती है।
रायपुर में भी बदलेगा मौसम, दिन में 31 डिग्री तक रहेगा तापमान
रायपुर में बादलों छाए रह सकते हैं। बारिश, गरज-चमक और तेज हवा चलने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, शहर का अधिकतम तापमान करीब 31 डिग्री और न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस रह सकता है।
सोमवार को रायपुर में अधिकतम तापमान 32.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 1.2 डिग्री अधिक था। वहीं, न्यूनतम तापमान 20.1 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 0.3 डिग्री कम था।
अंबिकापुर में सबसे कम 12.9 डिग्री तापमान
प्रदेश में सोमवार को मौसम ड्राई रहा और कहीं भी बारिश दर्ज नहीं की गई। रायपुर में सबसे अधिक 32.4 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ, जबकि अंबिकापुर में न्यूनतम तापमान 12.9 डिग्री सेल्सियस रहा। बिलासपुर में अधिकतम तापमान 32.2 डिग्री, माना एयरपोर्ट में 31.2 डिग्री और जगदलपुर में 31.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
बस्तर संभाग के 4 जिलों में भारी बारिश
मौसम विज्ञानी गायत्री वाणी के मुताबिक, चक्रवात का असर 28 अक्टूबर को दक्षिण और मध्य छत्तीसगढ़ में ज्यादा रहेगा। इसके बाद 29 अक्टूबर को उत्तर-पश्चिम और उत्तर छत्तीसगढ़ के जिलों में बारिश का प्रभाव बढ़ सकता है। आज (मंगलवार) बस्तर संभाग के सुकमा, बस्तर और आसपास के जिलों में भारी बारिश की संभावना है।
दंतेवाड़ा-सुकमा में स्कूलों की छुट्टी, किसानों को भी सलाह
चक्रवात के संभावित असर को देखते हुए दक्षिण बस्तर के दंतेवाड़ा और सुकमा जिले में 28 अक्टूबर को स्कूलों में छुट्टी घोषित की गई है। वहीं, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने किसानों को अगले 2 से 4 दिनों तक धान और दूसरी फसलों की कटाई रोकने की सलाह दी गई है।
जिन किसानों ने फसल काट ली है, उन्हें उपज सुरक्षित रखने और खेतों में पानी निकासी की व्यवस्था करने को कहा गया है, ताकि बारिश से फसलों को नुकसान कम हो।
चक्रवात ‘अर्नब’ से निपटने की तैयारी आज 27 अक्टूबर और कल 28 अक्टूबर को प्रदेश के 12 जिलों में भारी बारिश और तेज हवाएं चलने की आशंका है। इसे देखते हुए सरकार ने राहत और बचाव की तैयारी तेज कर दी है। संवेदनशील गांवों में राहत शिविर, मेडिकल टीम, बचाव दल और कंट्रोल रूम तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।
सोमवार को हुई बैठक के बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने 26 अक्टूबर को चक्रवात से निपटने की कार्ययोजना जारी की। इसके तहत 12 अति संवेदनशील जिलों के 763 बाढ़ प्रभावित गांवों की पहचान की गई है। बाकी 21 जिलों में भी 1,006 संवेदनशील गांवों की पहचान की गई है।
लोगों को सुरक्षित रखने के लिए 779 राहत शिविर तैयार रखे गए हैं। इनमें करीब एक लाख लोगों के ठहरने की व्यवस्था है। जरूरत पड़ने पर लोगों को यहां पहुंचाया जाएगा। गर्भवती महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगों को सुरक्षित निकालने में प्राथमिकता दी जाएगी।
12 जिलों में ज्यादा खतरा, आज से दिखेगा असर
विभाग की कार्ययोजना के अनुसार, सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, कोंडागांव, बस्तर, कांकेर, धमतरी, महासमुंद, गरियाबंद, बालोद और रायपुर को अति संवेदनशील जिलों में शामिल किया गया है। इन जिलों में 27 और 28 अक्टूबर को भारी बारिश और तेज हवाओं का असर पड़ने की आशंका है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, आज (मंगलवार) से बस्तर संभाग के जिलों में बारिश का असर दिख सकता है। 28 अक्टूबर को दक्षिण और मध्य छत्तीसगढ़ में भारी बारिश की संभावना है। इसके बाद 29 अक्टूबर को उत्तर-पश्चिम और उत्तर छत्तीसगढ़ के जिलों में भी बारिश का प्रभाव बढ़ सकता है।
779 राहत शिविर तैयार, एक लाख लोगों को ठहराने की क्षमता
सरकार ने 12 संवेदनशील जिलों में 341 और बाकी जिलों में 438 राहत शिविर तैयार रखने के निर्देश दिए हैं। इनमें पीने का पानी, भोजन, दवाइयां और बिजली की व्यवस्था की जाएगी।
तेज हवाओं से गिरने की आशंका वाले मकानों की पहचान कर जरूरी कदम उठाने को कहा गया है। प्रशासन मुनादी कर लोगों से अपील कर रहा है कि खराब मौसम में बिना जरूरत घर से बाहर न निकलें।
7 SDRF टीमों के साथ NDRF भी संभालेगी मोर्चा
आपदा से निपटने के लिए राज्य में SDRF की 7 टीमें तैयार की गई हैं। हर टीम में 36 जवान हैं। इनकी तैनाती रायपुर, बिलासपुर, जगदलपुर, दुर्ग और अंबिकापुर में की जा रही है।
दुर्ग में NDRF की एक टीम पहले से मौजूद है। सुकमा, बस्तर और बीजापुर में भी एक-एक NDRF टीम तैनात करने की तैयारी है।
इसके अलावा सभी जिलों में नगर सेना के 828 प्रशिक्षित जवान और 3,895 आपदा मित्र तैनात किए जा रहे हैं। बचाव कार्यों के लिए SDRF के पास 1,450 उपकरण हैं। इनमें पानी के अंदर देखने वाले कैमरे, हाइड्रोलिक कटर और रबर बोट शामिल हैं।
अस्पतालों में दवाइयां और डॉक्टर तैयार रखने के निर्देश
सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी तैयारी की है। 12 संवेदनशील जिलों में 12 जिला अस्पतालों, 65 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और 215 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त दवाइयां और डॉक्टर उपलब्ध रखने की व्यवस्था की गई है।
अन्य 21 जिलों में 21 जिला अस्पतालों, 153 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और 609 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।
पशुओं की देखभाल और टीकाकरण के लिए भी पशु चिकित्सकों के माध्यम से व्यवस्था करने को कहा गया है। आपदा के दौरान घायल लोगों को प्राथमिकता से इलाज उपलब्ध कराया जाएगा।
24 घंटे कंट्रोल रूम चालू रहेंगे, हेल्पलाइन नंबर 1070 जारी
राज्य स्तर पर बाढ़ नियंत्रण कक्ष 24 घंटे चालू है। आपदा के समय लोग टोल फ्री नंबर 1070 पर संपर्क कर सकते हैं। राज्य नियंत्रण कक्ष सभी जिलों के कंट्रोल रूम से संपर्क में रहेगा।
सभी जिलों में कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने और उनके फोन नंबरों का प्रचार करने के निर्देश दिए गए हैं।
इंद्रावती, शबरी और गोदावरी नदियों के जलस्तर पर नजर रखने के लिए केंद्रीय जल आयोग से संपर्क किया जा रहा है। गंगरेल डैम, ओडिशा के खातीगुड़ा डैम और मुरान बांध से भी समन्वय किया गया है।
बांधों से पानी छोड़ने की स्थिति बनने पर प्रशासन को 48 घंटे पहले सूचना देने की व्यवस्था करने को कहा गया है।
बाढ़ में फंसे लोगों को हेलीकॉप्टर से निकालने की तैयारी
बारिश से गांवों में पानी भरने या लोगों के चारों तरफ पानी घिरने पर जरूरत के मुताबिक हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू किया जाएगा। इसके लिए रायपुर और बस्तर में मौजूद हेलीकॉप्टर बेस से संपर्क किया गया है।
नदी, नाले, पुल-पुलिया और पानी में डूबी सड़कों पर खतरा होने पर लोगों की आवाजाही रोक दी जाएगी। प्रभावित परिवारों को सुरक्षित जगहों और राहत शिविरों तक पहुंचाया जाएगा। शिविरों में भोजन, पीने के पानी और इलाज की व्यवस्था रखने के निर्देश दिए गए हैं।
तूफान के बाद नुकसान का सर्वे, सड़क-बिजली बहाली पर फोकस
सरकार ने चक्रवात का असर खत्म होने के बाद नुकसान का आकलन करने की तैयारी भी की है। राजस्व, कृषि, पंचायत, पशुपालन, नगरीय प्रशासन, लोक निर्माण, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और दूरसंचार विभाग को मकानों, फसलों, पशुओं और संचार व्यवस्था को हुए नुकसान का सर्वे करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रभावित इलाकों में पीने के पानी की जांच और सफाई की जाएगी। पानी को साफ करने, कीटों पर नियंत्रण रखने और बीमारियों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। मृत पशुओं को सुरक्षित तरीके से हटाया जाएगा। क्षतिग्रस्त सड़कों, पुल-पुलियों, तटबंधों और नालियों की मरम्मत के साथ बिजली और दूरसंचार सेवाएं भी बहाल की जाएंगी।