रायपुर, एजेंसी। बंगाल की खाड़ी में एक्टिव चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ का असर मंगलवार यानी आज से छत्तीसगढ़ में दिखने लगेगा। मौसम विभाग ने 28 और 29 अक्टूबर को प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी दी है। चक्रवाती तूफान अर्नब के बुधवार को ओडिशा-आंध्र प्रदेश तट से टकराने की आशंका है।
दक्षिण छत्तीसगढ़ में 60 से 90 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और कुछ जगहों पर 200 मिमी तक बारिश होने की संभावना है। 28 अक्टूबर के लिए चार जिलों में रेड अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, रायपुर समेत कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
चक्रवात ‘अर्नब’ के असर को देखते हुए बस्तर के स्कूलों में कल छुट्टी घोषित कर दी गई है। वहीं इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने किसानों के लिए मौसम आधारित सलाह जारी की है। किसानों को अगले 2 से 4 दिन धान और अन्य फसलों की कटाई रोकने, कटी फसल को सुरक्षित रखने और खेतों में पानी निकासी की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है।
कुछ जगहों पर बारिश, तेज हवा और बिजली गिरने की चेतावनी
मौसम विभाग ने मंगलवार को प्रदेश में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान जताया है। वहीं, एक-दो स्थानों पर भारी बारिश के साथ गरज-चमक, बिजली गिरने और 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है।
अगले दो दिनों में प्रदेश के अधिकांश स्थानों पर मध्यम बारिश हो सकती है। दक्षिण छत्तीसगढ़ में भारी बारिश की आशंका जताई गई है। मध्य छत्तीसगढ़ में भी भारी बारिश हो सकती है।
रायपुर में भी बदलेगा मौसम, दिन में 31 डिग्री तक रहेगा तापमान
रायपुर में बादलों छाए रह सकते हैं। बारिश, गरज-चमक और तेज हवा चलने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, शहर का अधिकतम तापमान करीब 31 डिग्री और न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस रह सकता है।
सोमवार को रायपुर में अधिकतम तापमान 32.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 1.2 डिग्री अधिक था। वहीं, न्यूनतम तापमान 20.1 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 0.3 डिग्री कम था।
अंबिकापुर में सबसे कम 12.9 डिग्री तापमान
प्रदेश में सोमवार को मौसम ड्राई रहा और कहीं भी बारिश दर्ज नहीं की गई। रायपुर में सबसे अधिक 32.4 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ, जबकि अंबिकापुर में न्यूनतम तापमान 12.9 डिग्री सेल्सियस रहा। बिलासपुर में अधिकतम तापमान 32.2 डिग्री, माना एयरपोर्ट में 31.2 डिग्री और जगदलपुर में 31.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
बस्तर संभाग के 4 जिलों में भारी बारिश
मौसम विज्ञानी गायत्री वाणी के मुताबिक, चक्रवात का असर 28 अक्टूबर को दक्षिण और मध्य छत्तीसगढ़ में ज्यादा रहेगा। इसके बाद 29 अक्टूबर को उत्तर-पश्चिम और उत्तर छत्तीसगढ़ के जिलों में बारिश का प्रभाव बढ़ सकता है। आज (मंगलवार) बस्तर संभाग के सुकमा, बस्तर और आसपास के जिलों में भारी बारिश की संभावना है।
दंतेवाड़ा-सुकमा में स्कूलों की छुट्टी, किसानों को भी सलाह
चक्रवात के संभावित असर को देखते हुए दक्षिण बस्तर के दंतेवाड़ा और सुकमा जिले में 28 अक्टूबर को स्कूलों में छुट्टी घोषित की गई है। वहीं, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने किसानों को अगले 2 से 4 दिनों तक धान और दूसरी फसलों की कटाई रोकने की सलाह दी गई है।
जिन किसानों ने फसल काट ली है, उन्हें उपज सुरक्षित रखने और खेतों में पानी निकासी की व्यवस्था करने को कहा गया है, ताकि बारिश से फसलों को नुकसान कम हो।
चक्रवात ‘अर्नब’ से निपटने की तैयारी आज 27 अक्टूबर और कल 28 अक्टूबर को प्रदेश के 12 जिलों में भारी बारिश और तेज हवाएं चलने की आशंका है। इसे देखते हुए सरकार ने राहत और बचाव की तैयारी तेज कर दी है। संवेदनशील गांवों में राहत शिविर, मेडिकल टीम, बचाव दल और कंट्रोल रूम तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।
सोमवार को हुई बैठक के बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने 26 अक्टूबर को चक्रवात से निपटने की कार्ययोजना जारी की। इसके तहत 12 अति संवेदनशील जिलों के 763 बाढ़ प्रभावित गांवों की पहचान की गई है। बाकी 21 जिलों में भी 1,006 संवेदनशील गांवों की पहचान की गई है।
लोगों को सुरक्षित रखने के लिए 779 राहत शिविर तैयार रखे गए हैं। इनमें करीब एक लाख लोगों के ठहरने की व्यवस्था है। जरूरत पड़ने पर लोगों को यहां पहुंचाया जाएगा। गर्भवती महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगों को सुरक्षित निकालने में प्राथमिकता दी जाएगी।
12 जिलों में ज्यादा खतरा, आज से दिखेगा असर
विभाग की कार्ययोजना के अनुसार, सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, कोंडागांव, बस्तर, कांकेर, धमतरी, महासमुंद, गरियाबंद, बालोद और रायपुर को अति संवेदनशील जिलों में शामिल किया गया है। इन जिलों में 27 और 28 अक्टूबर को भारी बारिश और तेज हवाओं का असर पड़ने की आशंका है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, आज (मंगलवार) से बस्तर संभाग के जिलों में बारिश का असर दिख सकता है। 28 अक्टूबर को दक्षिण और मध्य छत्तीसगढ़ में भारी बारिश की संभावना है। इसके बाद 29 अक्टूबर को उत्तर-पश्चिम और उत्तर छत्तीसगढ़ के जिलों में भी बारिश का प्रभाव बढ़ सकता है।
779 राहत शिविर तैयार, एक लाख लोगों को ठहराने की क्षमता
सरकार ने 12 संवेदनशील जिलों में 341 और बाकी जिलों में 438 राहत शिविर तैयार रखने के निर्देश दिए हैं। इनमें पीने का पानी, भोजन, दवाइयां और बिजली की व्यवस्था की जाएगी।
तेज हवाओं से गिरने की आशंका वाले मकानों की पहचान कर जरूरी कदम उठाने को कहा गया है। प्रशासन मुनादी कर लोगों से अपील कर रहा है कि खराब मौसम में बिना जरूरत घर से बाहर न निकलें।
7 SDRF टीमों के साथ NDRF भी संभालेगी मोर्चा
आपदा से निपटने के लिए राज्य में SDRF की 7 टीमें तैयार की गई हैं। हर टीम में 36 जवान हैं। इनकी तैनाती रायपुर, बिलासपुर, जगदलपुर, दुर्ग और अंबिकापुर में की जा रही है।
दुर्ग में NDRF की एक टीम पहले से मौजूद है। सुकमा, बस्तर और बीजापुर में भी एक-एक NDRF टीम तैनात करने की तैयारी है।
इसके अलावा सभी जिलों में नगर सेना के 828 प्रशिक्षित जवान और 3,895 आपदा मित्र तैनात किए जा रहे हैं। बचाव कार्यों के लिए SDRF के पास 1,450 उपकरण हैं। इनमें पानी के अंदर देखने वाले कैमरे, हाइड्रोलिक कटर और रबर बोट शामिल हैं।
अस्पतालों में दवाइयां और डॉक्टर तैयार रखने के निर्देश
सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी तैयारी की है। 12 संवेदनशील जिलों में 12 जिला अस्पतालों, 65 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और 215 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त दवाइयां और डॉक्टर उपलब्ध रखने की व्यवस्था की गई है।
अन्य 21 जिलों में 21 जिला अस्पतालों, 153 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और 609 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।
पशुओं की देखभाल और टीकाकरण के लिए भी पशु चिकित्सकों के माध्यम से व्यवस्था करने को कहा गया है। आपदा के दौरान घायल लोगों को प्राथमिकता से इलाज उपलब्ध कराया जाएगा।
24 घंटे कंट्रोल रूम चालू रहेंगे, हेल्पलाइन नंबर 1070 जारी
राज्य स्तर पर बाढ़ नियंत्रण कक्ष 24 घंटे चालू है। आपदा के समय लोग टोल फ्री नंबर 1070 पर संपर्क कर सकते हैं। राज्य नियंत्रण कक्ष सभी जिलों के कंट्रोल रूम से संपर्क में रहेगा।
सभी जिलों में कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने और उनके फोन नंबरों का प्रचार करने के निर्देश दिए गए हैं।
इंद्रावती, शबरी और गोदावरी नदियों के जलस्तर पर नजर रखने के लिए केंद्रीय जल आयोग से संपर्क किया जा रहा है। गंगरेल डैम, ओडिशा के खातीगुड़ा डैम और मुरान बांध से भी समन्वय किया गया है।
बांधों से पानी छोड़ने की स्थिति बनने पर प्रशासन को 48 घंटे पहले सूचना देने की व्यवस्था करने को कहा गया है।
बाढ़ में फंसे लोगों को हेलीकॉप्टर से निकालने की तैयारी
बारिश से गांवों में पानी भरने या लोगों के चारों तरफ पानी घिरने पर जरूरत के मुताबिक हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू किया जाएगा। इसके लिए रायपुर और बस्तर में मौजूद हेलीकॉप्टर बेस से संपर्क किया गया है।
नदी, नाले, पुल-पुलिया और पानी में डूबी सड़कों पर खतरा होने पर लोगों की आवाजाही रोक दी जाएगी। प्रभावित परिवारों को सुरक्षित जगहों और राहत शिविरों तक पहुंचाया जाएगा। शिविरों में भोजन, पीने के पानी और इलाज की व्यवस्था रखने के निर्देश दिए गए हैं।
तूफान के बाद नुकसान का सर्वे, सड़क-बिजली बहाली पर फोकस
सरकार ने चक्रवात का असर खत्म होने के बाद नुकसान का आकलन करने की तैयारी भी की है। राजस्व, कृषि, पंचायत, पशुपालन, नगरीय प्रशासन, लोक निर्माण, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और दूरसंचार विभाग को मकानों, फसलों, पशुओं और संचार व्यवस्था को हुए नुकसान का सर्वे करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रभावित इलाकों में पीने के पानी की जांच और सफाई की जाएगी। पानी को साफ करने, कीटों पर नियंत्रण रखने और बीमारियों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। मृत पशुओं को सुरक्षित तरीके से हटाया जाएगा। क्षतिग्रस्त सड़कों, पुल-पुलियों, तटबंधों और नालियों की मरम्मत के साथ बिजली और दूरसंचार सेवाएं भी बहाल की जाएंगी।
रायपुर. 27 अक्टूबर 2026। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने आज रायपुर के सिविल लाइन स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित राज्य कैबिनेट की बैठक के बाद पत्रकार-वार्ता को संबोधित किया। उन्होंने नवीन विश्राम भवन में पत्रकार-वार्ता में कैबिनेट की बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी दी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां सिविल लाईन स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित कैबिनेट की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए –
1. मंत्रिपरिषद ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में छत्तीसगढ़ प्रदेश के किसानों से दिनांक 15 नवम्बर 2026 से धान खरीदी करने का निर्णय लिया है। उक्त अवधि में 27.50 लाख से अधिक किसानों से 3100 रूपये प्रति क्विंटल की दर से अधिकतम 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से धान की खरीदी की जावेगी। किसान हित में बड़ा फैसला लेते हुए एग्रीस्टेक आईडी युक्त विगत वर्ष के पंजीकृत सभी कृषकों को धान विक्रय हेतु मान्य किया है, इन किसानों को पृथक से पंजीयन की कोई आवश्यकता नहीं होगी।
एग्रीस्टेक में पंजीयन होने के कारण किसानों को धान विक्रय हेतु पृथक से ऋण पुस्तिका समिति में लाने की आवश्यकता नहीं होगी। डिजिटल क्राप सर्वे के माध्यम धान के रकबे का ऑनलाईन निर्धारण डिजिटल रूप से सुनिश्चित हुआ है। वास्तविक किसानों से धान खरीदी सुनिश्चित करने हेतु बायोमैट्रिक आधारित धान की खरीदी की जावेगी। किसानों को बेहतर एवं सुगम व्यवस्था प्रदान किये जाने हेतु 360 नये उपार्जन केन्द्र प्रारंभ किये जा रहे हैं, फलस्वरूप इस वर्ष 3100 उपार्जन केन्द्रों के माध्यम से धान खरीदी सुश्चित की जायेगी। धान खरीदी हेतु समितियों में समुचित व्यवस्था किये जाने के निर्देश दिये गये है।
मंत्रिपरिषद ने खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 एवं वर्ष 2025-26 में अतिशेष धान की धान की नीलामी के माध्यम से निराकरण करने के संबंध में मंत्रिमण्डलीय उपसमिति की बैठक के निर्णय का अनुसमर्थन किया है।
2. मंत्रिपरिषद ने मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान (एम-ऊर्जा) योजना के अंतर्गत घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं को 200 यूनिट तक बिजली बिल में दी जा रही रियायत को पूर्ववत जारी रखने का निर्णय लिया है। साथ ही, योजना का लाभ लेने के लिए 400 यूनिट तक मासिक विद्युत खपत की पात्रता अवधि को 30 सितंबर 2026 से बढ़ाकर 31 मार्च 2027 तक कर दिया गया है। इस निर्णय से लगभग 7.25 लाख घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं को योजना के तहत बिजली बिल में मिल रही रियायत का लाभ निरंतर प्राप्त होता रहेगा।
3. छत्तीसगढ़ मंत्रिपरिषद् ने बिटुमिन (डामर) की कीमतों में हुई असाधारण वृद्धि को देखते हुए छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण के अंतर्गत संचालित तथा लोक निर्माण विभाग अंतर्गत राज्य वित्त पोषित सड़क निर्माण, नवीनीकरण एवं संधारण कार्यों के अनुबंधकों को मूल्य राहत (क्षतिपूर्ति) प्रदान करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
इसके तहत 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक की अवधि में अनुबंधकों द्वारा वास्तव में क्रय एवं उपयोग की गई बिटुमिन की मात्रा पर छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण के अंतर्गत संचालित कार्यों के लिए कुल 130.88 करोड़ रुपये की राहत राज्य शासन द्वारा बजट से अनुदान के रूप में दी जाएगी। वहीं, राज्य वित्त पोषित सड़क निर्माण, नवीनीकरण एवं संधारण कार्यों के ऐसे अनुबंध, जिनकी निविदाएं 1 अप्रैल 2026 से पूर्व प्राप्त हुई हैं, उनमें 15 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक क्रय कर उपयोग किए गए बिटुमिन पर भी मूल्य राहत प्रदान की जाएगी। इस पर लगभग 70 करोड़ से 100 करोड़ रुपये तक अतिरिक्त व्यय का अनुमान है।
इस निर्णय से डामरीकरण से संबंधित लंबित सड़क निर्माण कार्यों को गति मिलेगी और उन्हें निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने में सहायता मिलेगी। साथ ही, भारत सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी।
4. मंत्रिपरिषद ने राज्य के शासकीय सेवकों एवं उनके आश्रित परिवारजनों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करने के महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी है। नई व्यवस्था के तहत शासकीय सेवकों को उपचार के समय अस्पताल में चिकित्सा व्यय का भुगतान स्वयं करने और बाद में प्रतिपूर्ति के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरने की आवश्यकता नहीं होगी। सूचीबद्ध अस्पतालों में उन्हें कैशलेस उपचार की सुविधा मिलेगी तथा पूर्व-अनुमोदन और दावों की प्रक्रिया ऑनलाइन एवं डिजिटल माध्यम से की जाएगी। इस निर्णय से विशेष रूप से गंभीर बीमारी और आपातकाल की स्थिति में शासकीय सेवकों एवं उनके परिवारों को तत्काल उपचार के साथ बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी।
5. मंत्रिपरिषद ने प्रदेश में अधोसंरचना विकास की योजना, परियोजना तैयारी, गुणवत्ता, निगरानी और संधारण की व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं आधुनिक बनाने के लिए ‘मुख्यमंत्री अधोसंरचना मिशन-2026’ के प्रारूप (मिशन गाइडलाइन्स) को मंजूरी प्रदान की है। मिशन वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए संचालित होगा, जिसके लिए कुल 500 करोड़ रूपए, अर्थात 100 करोड़ रूपए प्रतिवर्ष का प्रावधान प्रस्तावित है।
लोक निर्माण विभाग इसका नोडल विभाग तथा छत्तीसगढ़ रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पाेरेशन लिमिटेड (CGRIDCL) क्रियान्वयन एजेंसी होगी।
मिशन के तहत प्रदेश का सड़क नेटवर्क मास्टर प्लान तैयार करने, अधोसंरचना की आवश्यकताओं का डेटा आधारित आकलन, परियोजनाओं के सर्वेक्षण एवं DPR की अग्रिम तैयारी, WAMISऔर ई-माप पुस्तिका के माध्यम से कार्यों का डिजिटलीकरण, GIS आधारित समेकित नियोजन, गुणवत्ता एवं सड़क सुरक्षा ऑडिट तथा PPP और नवीन वित्तीय मॉडल को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे परियोजनाओं की प्राथमिकता वस्तुनिष्ठ आधार पर तय होगी, निविदा से पहले आवश्यक तैयारियां पूरी होने से समय और लागत में होने वाली वृद्धि को कम करने, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुधारने तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद मिलेगी। मिशन को लागू करने से संबंधित आवश्यक कार्यवाही के लिए लोक निर्माण विभाग को अधिकृत किया गया है।
6. मंत्रिपरिषद ने प्रदेश में पर्यटन के समग्र विकास के लिए ‘मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन’ को मंजूरी प्रदान की है। ‘पर्यटन से समृद्धि’ के ध्येय के साथ मिशन का संचालन अगले 5 वर्षों तक किया जाएगा, जिसके लिए लगभग 500 करोड़ रूपए का प्रावधान प्रस्तावित है। मिशन के माध्यम से पर्यटन स्थलों पर बेहतर अधोसंरचना, कनेक्टिविटी, सुविधाएं, सुरक्षा एवं स्वच्छता विकसित करने के साथ होमस्टे, निजी निवेश और पर्यटन उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे जहां स्थानीय युवाओं, महिलाओं और स्व-सहायता समूहों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे वहीं छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी।
7. मंत्रिपरिषद् ने विशुद्ध रूप से राजनीतिक आंदोलनों से संबंधित 9 प्रकरणों को जनहित में न्यायालय से वापस लिये जाने के लिए उपसमिति की 30 सितंबर 2026 की बैठक में की गई अनुशंसा के अनुसार आगामी कार्यवाही की अनुमति प्रदान की है।
8. मंत्रिपरिषद् ने रायपुर जिले की नगर पंचायत कूंरा का नाम बदलकर कुंवरगढ़ करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी है। छत्तीसगढ़ के 36 गढ़ों में शामिल कुंवरगढ़ अपने प्राचीन मंदिरों, ऐतिहासिक धरोहरों और तालाबों के लिए जाना जाता है। समय के साथ इसका नाम कूंरा प्रचलित हो गया था। स्थानीय नागरिक लंबे समय से नगर पंचायत को उसकी ऐतिहासिक पहचान कुंवरगढ़ के नाम से पुनः पहचान दिलाने की मांग कर रहे थे, जिस पर मंत्रिपरिषद द्वारा यह निर्णय लिया गया है।
9. मंत्रिपरिषद ने औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में संशोधन को मंजूरी प्रदान की है। इसके तहत राज्य के विशाल कोयला भंडार के मूल्यवर्धित उपयोग और आयात प्रतिस्थापन को बढ़ावा देने के लिए 1,000 करोड़ रूपए अथवा उससे अधिक निवेश वाली कोल गैसीफिकेशन परियोजनाओं के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज का प्रावधान किया गया है।
10. मंत्रिपरिषद ने 295 किलोमीटर लंबी कटघोरा-तखतपुर-मुंगेली-कवर्धा-खैरागढ़-डोंगरगढ़ रेल परियोजना के त्वरित क्रियान्वयन के लिए शत-प्रतिशत इक्विटी निवेश छत्तीसगढ़ रेलवे कॉर्पाेरेशन लिमिटेड (CRCL) के माध्यम से किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
लगभग 8,000 करोड़ रूपए की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना में 25 प्रतिशत, यानी करीब 2,000 करोड़ रूपए की अंशपूंजी होगी, जिसमें छत्तीसगढ़ शासन और रेल मंत्रालय द्वारा लगभग 1,000-1,000 करोड़ रूपए का योगदान दिया जाएगा। राज्य शासन की हिस्सेदारी मिनरल डेवलपमेंट फंड/डीएमएफ/राज्य बजट के माध्यम से वहन की जाएगी। इस रेल परियोजना से रेल सुविधा से वंचित क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी तथा उद्योग, पर्यटन, रोजगार और कृषि उपज के लिए नए बाजारों तक पहुंच का विस्तार होगा।
11. मंत्रिपरिषद ने रिडेवलपमेंट योजना के द्वितीय चरण में 5 परियोजनाओं को सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान की है। इसके अंतर्गत शासकीय पोल्ट्री फार्म-दुर्ग, वेटनरी हॉस्पिटल कैम्पस रामानुजगंज, जशपुर में पुलिस लाइन एवं रणजीता स्टेडियम के पीछे की भूमि, सक्ती के बुधवारी बाजार तथा धमतरी के रुद्री चौक की शासकीय भूमि एवं जर्जर परिसंपत्तियों का सुनियोजित पुनर्विकास किया जाएगा। परियोजनाओं का क्रियान्वयन पीपीपी मॉडल पर निजी क्षेत्र की भागीदारी से किया जाएगा, जिससे राज्य शासन पर अतिरिक्त वित्तीय भार डाले बिना नई शासकीय परिसंपत्तियों का निर्माण, भूमि का बेहतर उपयोग, राजस्व में वृद्धि तथा रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
12. मंत्रिपरिषद ने राजनांदगांव जिले में भंडारण सुविधा के विकास के लिए केंद्रीय भंडारण निगम (CWC) को ग्राम खपरीकला में 10 एकड़ भूमि आवंटित करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की है। यह भूमि निर्धारित गाइडलाइन दर के अनुसार बाजार मूल्य के 75 प्रतिशत प्रब्याजि, वार्षिक भू-भाटक तथा निर्धारित अधोसंरचना एवं पर्यावरण उपकर लेकर आवंटित की जाएगी। इस निर्णय से जिले में भंडारण अधोसंरचना का विस्तार होगा और कृषि उपज सहित अन्य वस्तुओं के सुरक्षित भंडारण की क्षमता बढ़ेगी।
13. मंत्रिपरिषद ने राजनांदगांव जिले के ग्राम सोमनी में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के माध्यम से मल्टी फ्रूट प्रोसेसिंग फैसिलिटी की स्थापना के लिए कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग को राजगामी संपदा की 31.55 एकड़ भूमि आवंटित करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की है। लगभग 400 करोड़ रूपए के प्रस्तावित निवेश वाली इस परियोजना में किसानों से सीधे उपज की खरीदी की व्यवस्था विकसित की जाएगी। परियोजना से 1,000 से अधिक प्रत्यक्ष और 5,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे तथा फल उत्पादक किसानों को उनकी उपज के प्रसंस्करण और विपणन के लिए बेहतर सुविधाएं एवं बाजार उपलब्ध हो सकेगा।
14. मंत्रिपरिषद ने सुशासन एवं अभिसरण विभाग के विभागाध्यक्ष कार्यालय के लिए 3 नए पदों के सृजन को मंजूरी प्रदान की है। इनमें आयुक्त/संचालक का एक पद, अपर संचालक का एक पद तथा विशेषज्ञ (अपर संचालक स्तर) का एक पद शामिल है। इन पदों के सृजन से विभाग को प्रभावी प्रशासनिक नेतृत्व, बेहतर समन्वय एवं पर्यवेक्षण के साथ लोक प्रशासन और विधि संबंधी विषयों में विशेषज्ञता मिलेगी तथा सुशासन से जुड़ी नीतिगत एवं सुधारात्मक पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन को गति मिलेगी।
15. मंत्रिपरिषद् ने वन मुख्यालय (विभागाध्यक्ष कार्यालय), अरण्य भवन, नवा रायपुर में विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (पे-लेवल-16) का एक अस्थायी पद एक वर्ष के लिए सृजित करने की स्वीकृति दी है। इससे पीएम गति-शक्ति, प्रगति एवं परिवेश पोर्टल से जुड़े कार्यों के त्वरित निष्पादन, समन्वय और पर्यवेक्षण में मदद मिलेगी।
16. मंत्रिपरिषद ने स्वर्गीय डॉ. राकेश मोहन चंदोला, सह प्राध्यापक, चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर के 19 अक्टूबर 1987 से 7 जनवरी 2022 तक की सेवा को परिवार पेंशन के प्रयोजन के लिए नियमित सेवा मानने का निर्णय लिया है। इसके आधार पर उनके पात्र परिवारजन को परिवार पेंशन, एरियर्स तथा नियमानुसार ब्याज के भुगतान की स्वीकृति प्रदान की गई है।
17. मंत्रिपरिषद द्वारा मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के प्रारूप की स्वीकृति प्रदान की गई। मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के अंतर्गत प्रतिभा पहचान से लेकर पदक प्राप्ति तक खिलाड़ियों के विकास की क्रमबद्ध व्यवस्था प्रस्तावित है। इसके लिए वर्ष 2026-27 में 100 करोड़ रूपए का बजट प्रावधान किया गया है। विद्यालयों एवं चयन शिविरों के माध्यम से टैलेंट हंट और मुख्यमंत्री ट्रॉफी आयोजित कर प्रतिभाओं की पहचान की जाएगी तथा उन्हें AMS में पंजीकृत किया जाएगा। इसके बाद फीडर सेंटरों में बुनियादी प्रशिक्षण, राज्य खेल अकादमियों में खेल-विशिष्ट उन्नत प्रशिक्षण और उच्च प्रदर्शन केंद्रों में विशेषज्ञ कोचिंग, स्पोर्ट्स साइंस एवं प्रदर्शन विश्लेषण की सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी। 10 मुख्य खेल विधाओं में कोर एवं डेवलपमेंट समूह बनाकर पदक संभावित खिलाड़ियों को लक्षित सहायता और एक्सपोज़र दिया जाएगा। प्रतियोगिता परिणाम एवं निर्धारित प्रदर्शन मानकों के आधार पर खिलाड़ियों की प्रगति और सहायता की नियमित समीक्षा होगी। प्रथम चरण में अंबिकापुर, बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग, जगदलपुर और जशपुर में फीडर सेंटर की स्थापना की जाएगी। नीति के तहत विभिन्न घटकों के एकीकृत क्रियान्वयन से सुदृढ़ खेल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित होगा और खिलाड़ियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए तैयार किया जा सकेगा।
18. मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन नियम, 2015 में संशोधन किया गया है। इससे भूमि उपयोग सरलीकरण एवं भू-खण्ड सुगमता की पूर्ति होगी। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को प्रोत्साहन मिलेगा। औद्योगिक भूमि एवं भवन संबंधी विवादों में कमी आएगी और रिक्त अथवा अतिशेष भूमि का उत्पादक उपयोग एवं पारदर्शी ई-नीलामी से आबंटन सुनिश्चित होगा।
19. मंत्रिपरिषद् ने खरीफ-2026 में “कृषक उन्नति योजना” के संशोधन संबंधी कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग के प्रस्ताव का अनुमोदन किया। किसानों से 3100 रूपए प्रति क्विंटल की दर से धान की खरीदी की जाएगी।
कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत धान फसल पर आदान सहायता राशि प्रति क्विंटल के स्थान पर प्रति एकड़ के मान से प्रदान करने का निर्णय लिया गया। इससे किसानों को प्रोत्साहन मिलेगा। इससे फसल विविधीकरण, किसानों की आय तथा उनके सामाजिक-आर्थिक स्तर में सुधार होगा। साथ ही उन्नत बीज, उर्वरक, कीटनाशक, कृषि यंत्रीकरण और नवीन कृषि तकनीकों में निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
CMD के गेवरा दौरे के बिच भू विस्थापित श्रमिकों के विभिन्न मांगो को लेकर अजय जायसवाल के नेतृत्व मे खदान मे लगातार 6 घंटे काम ठप कर किया जमकर विरोध प्रदर्शन
कोरबा/गेवरा। आज एक तरफ गेवरा खदान के दौरे मे SECL बिलासपुर CMD कोरबा प्रवास पर रहे वही दूसरी ओर अजय जायसवाल भू विस्थापित श्रमिकों सहित स्थानीय बेरोजगारों रोजगार सहित विभिन्न मांगो को लेकर खदान मे धरने पर बैठ गए।
आज दिनांक 27/10/2026 को गेवरा खदान मे कार्यरत निजी ठेका कंपनी PNC सहित अन्य कंपनी मे कार्यरत भू विस्थापित श्रमिकों के द्वारा 6 महीने पूर्व से हाई पावर कमेटी के अनुसार पेमेंट, भविष्य निधि ,सुरक्षा, बोनस, पेमेंट स्लिप, जॉइनिंग लेटर सहित 2 महीने से लंबित भुगतान को लेकर कई बार पत्राचार किया जा चूका है, परन्तु प्रबंधन और कंपनी के द्वारा किसी प्रकार का सुनवाई नहीं किया, जिसको लेकर भू विस्थापित श्रमिकों के द्वारा अजय जायसवाल पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष कोरबा को सूचित किया। तत्पश्चात अजय जायसवाल के द्वारा आज खदान पहुंच भू विस्थापितों के विभिन्न मुद्दे को लेकर खदान मे धरने पर बैठ गए और सभी श्रमिकों के द्वारा 6 घंटा काम बंद कर काम ठप कर आंदोलन कर दिया गया, जिसके उपरांत SECL प्रबंधन और pnc कंपनी के अधिकारी वार्ता हेतु पहुंचे और हड़ताल स्थगित करने निवेदन किया गया। तत्पश्चात दिनांक 29/10/2026 को 12 बजे SECL गेवरा CGM ऑफिस मे वार्ता करते हुए मांग पूरा करने का आश्वासन दिया गया, साथ ही वार्ता मे विभिन्न मुद्दों पर बात करने सहमति बनी, जिसमे सभी –
1 श्रमिकों को हाई पावर कमेटी के अनुसार पेमेंट 2 सभी श्रमिकों का id कार्ड, सुरक्षा, 3 पेमेंट स्लिप 4 स्थानीय बेरोजगरों को रोजगार 5 जॉइनिंग लेटर, सहित बोनस पर बात करने और मांग पूरा करने का आश्वासन दिया गया। उक्त हड़ताल मे भू विस्थापित श्रमिकों के साथ अजय जायसवाल पूर्व उपाध्यक्ष जिला पंचायत कोरबा, शेत मसीह सांसद प्रतिनिधि, मधुसूदन दस नेता प्रतिपक्ष बांकी मोंगरा, गोविंदा सारथी, कमलेश प्रजापति, संतोष यादव, प्रकाश सागर, फिरोज, राजकुमार पटवा, राकेश राजपूत,संजय यादव, सुजीत महंत, गौरव साहू, अनिल सागर, सहित कम्पनी मे कार्यरत हेल्फर, ड्राइवर सहित ग्रामीण सैकड़ो की संख्या मे उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय ने ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ के दिवाली गिफ्ट पैक का किया लोकार्पण
स्थानीय उत्पादों को मिलेगा बड़ा बाजार, महिला स्व-सहायता समूहों और वन उपज संग्राहकों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
रायपुर, 27 अक्टूबर 2026। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के सिविल लाइन स्थित मुख्यमंत्री निवास में ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ के दिवाली गिफ्ट पैक का लोकार्पण किया। वन धन विकास केंद्रों से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित स्थानीय एवं हर्बल उत्पादों को आकर्षक गिफ्ट पैक के रूप में तैयार किया गया है। इस पहल से जहां छत्तीसगढ़ के गुणवत्तापूर्ण स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार मिलेगा, वहीं लघु वनोपज संग्राहकों और महिला स्व-सहायता समूहों की आजीविका को भी मजबूती मिलेगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अभिनव पहल की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध वन संपदा हमारे लाखों वनवासी परिवारों की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार है। हमारी सरकार का प्रयास है कि वनों से प्राप्त उपज का अधिक से अधिक मूल्य संवर्धन प्रदेश में ही हो और इसका सीधा आर्थिक लाभ वन उपज संग्राहकों तथा इससे जुड़े महिला समूहों तक पहुंचे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वन धन विकास केंद्रों के माध्यम से हमारी माताएं-बहनें स्थानीय वनोपज को प्रसंस्कृत कर गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों को बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार से जोड़कर हम उनके परिश्रम को नई पहचान और आय के बेहतर अवसर दे रहे हैं। ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ के दिवाली गिफ्ट पैक इसी दिशा में एक सार्थक पहल हैं।
उन्होंने प्रदेशवासियों से स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने का आह्वान करते हुए कहा कि जब हम छत्तीसगढ़ में बने उत्पादों को खरीदते और उपहार में देते हैं, तो उसका लाभ सीधे हमारे वनांचल के परिवारों और महिला स्व-सहायता समूहों तक पहुंचता है। स्थानीय उत्पादों को अपनाना हमारी परंपराओं, स्थानीय उद्यमिता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने में हमारी सहभागिता है।
उल्लेखनीय है कि ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ के दिवाली गिफ्ट पैक दो श्रेणियों—प्रीमियम और सामान्य—में तैयार किए गए हैं। प्रीमियम गिफ्ट पैक में नौ प्रकार के चयनित उत्पाद शामिल हैं। वहीं सामान्य गिफ्ट पैक में पांच प्रकार के उत्पाद रखे गए हैं।
आम नागरिक इन गिफ्ट पैक को छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ द्वारा संचालित ‘संजीवनी’ विक्रय केंद्रों से खरीद सकेंगे। इससे दिवाली पर उपहार देने की परंपरा को छत्तीसगढ़ के स्थानीय उत्पादों, महिला उद्यमिता और जनजातीय आजीविका से जोड़ने का अवसर मिलेगा।
वन संपदा के साथ छत्तीसगढ़ के पारंपरिक स्वाद का समावेश
दिवाली गिफ्ट पैक में प्रदेश की वन संपदा और स्थानीय स्वाद से जुड़े विविध उत्पादों को शामिल किया गया है। इनमें जामुन जूस, जामुन स्प्रेड, आंवला कैंडी, इमली कैंडी, कोदो और महुआ से बने कुकीज़, च्यवनप्राश, वाइल्ड फॉरेस्ट हनी, बस्तर के मसाला एवं नमकीन काजू, जशपुर की ग्रीन टी तथा एलोवेरा जेल जैसे उत्पाद शामिल हैं।
इन उत्पादों में छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक संपदा, पारंपरिक खाद्य संस्कृति और महिला समूहों के उद्यम कौशल का सुंदर समावेश दिखाई देता है। स्थानीय वनोपज से तैयार इन उत्पादों की बेहतर पैकेजिंग और विपणन से ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ ब्रांड को भी नई पहचान मिल रही है।
वन धन विकास केंद्रों में तैयार हो रहे उत्पाद
गिफ्ट पैक में शामिल उत्पाद प्रदेश के विभिन्न वन धन विकास केंद्रों और प्रसंस्करण इकाइयों में तैयार किए जा रहे हैं। इनमें वन धन विकास केंद्र कौरीनभाटा (राजनांदगांव), बोड़ला (कवर्धा), पंचक्की (जशपुर), आसना (जगदलपुर), दुगली (धमतरी), डोंगानाला (कटघोरा) तथा केंद्रीय प्रसंस्करण इकाई जामगांव (एम), दुर्ग शामिल हैं।
इन वन धन विकास केंद्रों का वार्षिक कारोबार लगभग 60 से 70 लाख रुपए है। यहां वनोपज के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आय के अवसर सृजित किए जा रहे हैं। विशेष रूप से महिला स्व-सहायता समूह उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और अन्य गतिविधियों से जुड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रहे हैं।
वन धन उत्पादों के प्रसंस्करण, निर्माण और विपणन का प्रत्यक्ष लाभ वन उपज संग्राहकों और महिला स्व-सहायता समूहों को मिलता है। दिवाली गिफ्ट पैक के माध्यम से इन उत्पादों की मांग और बिक्री बढ़ने से वनांचल की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ महिला समूहों के आर्थिक सशक्तीकरण को भी नया बल मिलेगा।