बनासकांठा, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को गुजरात के बनासकांठा में कहा कि यहां का आलू दुनियाभर में मशहूर है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा,
बनासकांठा में आकर कोई नहीं कहता कि आलू से सोना बनाएंगे, क्योंकि यहां के लोग पहले ही आलू से सोना बना रहे हैं।
मोदी की सभा में किसानों के बैठने के लिए कुर्सियों की जगह चारपाइयां बिछाई गई थीं। इस पर उन्होंने कहा कि देश के लोगों के लिए यह अजूबा होगा कि एक सभा में सभी लोग चारपाई पर बैठे हैं।
बनासकांठा के लोगों ने गांवों की इस पुरानी परंपरा को जिंदा रखा है। अगर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड वालों को बुलाया होता तो यह रिकॉर्ड में दर्ज हो जाता।
इस दौरान पीएम ने किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त जारी की। इसके तहत 9.34 करोड़ से ज्यादा किसान परिवारों को रू.18,690 करोड़ से अधिक की रकम मिलेगी। उन्होंने रू.14 हजार करोड़ से ज्यादा की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। साथ ही दो नई ट्रेन सेवाओं को हरी झंडी दिखाई।
पीएम ने बनासकांठा में रोड शो किया।
मोदी के भाषण की बड़ी बातें…
25 साल पहले यहां बिजली पानी की समस्या थी। मैं कहता था हमें बिजली पानी बचाना होगा। लोग विरोध करते थे मोदी कौन होता है जो ये बोलता है। मैं आपसे लड़ता रहा और देखिए हम कहां पहुंच गए। मैं आज फिर से कहूंगा पानी बिजली बचाना है।
हम चाहते हैं कि किसानों की गोबर से भी कमाई बढ़े। गोबर और खेती के अवशेषों से बायोगैस बायो सीएनजी और जैविक खाद बनाने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर भी बढ़े।
हमने मुफ्त टीकाकरण शुरू किया। 8 करोड़ से ज्यादा किसानों के पशुओं को मुफ्त टीके लगे हैं। इससे उनका पैसा बचा है। इससे दूध उत्पादन बढ़ा है। 2013-14 में एक गाय-भैंस से 5 लीटर से भी कम दूध मिलता था। आज वह बढ़कर 8 लीटर हो गया है।
कृषि बजट 2013-14 की तुलना में 5 गुना हो गया है। आज 10 करोड़ किसानों के खातों में 18 हजार करोड़ की राशि भेजी गई है। गुजरात के 50 लाख से ज्यादा किसानों को भी इसका लाभ मिला है। इनके खातों में 1 हजार करोड़ रुपए जमा हुए हैं। बनासकांठा के किसानों के खातों में 50 करोड़ पहुंचे हैं।
25 साल में मैं पहली बार बनासकांठा आया हूं। 2001 में मुख्यमंत्री बनने के बाद मेरा मुख्यमंत्री के रूप में पहला सार्वजनिक कार्यक्रम, 93 लाख लोग आए थे। वो बनासकांठा में हुआ था।
PM मोदी ने IVF लैब और भारत बोवाइन ब्रीडिंग एंड रिसर्च सेंटर (BBBRC) का दौरा किया। गुजरात के सीएम और डिप्टी सीएम ने उनका स्वागत किया।
पीएम नरेंद्र मोदी दो दिन के गुजरात दौरे पर हैं। शनिवार को वह एकता नगर में सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती पर होने वाले राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह में शामिल होंगे।
मोदी बोले- हमें पानी-बिजली बचाना
पीएम ने कहा- जीवन के अंतिम क्षण तक आपकी सेवा में जुटा रहूंगा। आपको पुरानी बातें याद होंगी। 25 साल पहले यहां बिजली पानी की समस्या थी। मैं कहता था हमें बिजली पानी बचाना होगा। लोग विरोध करते थे मोदी कौन होता है जो ये बोलता है। मैं आपसे लड़ता रहा और देखिए हम कहां पहुंच गए। मैं आज फिर से कहूंगा पानी बिजली बचाना है।
बनासकांठा का आलू आज विश्व प्रसिद्ध है। कोई बनास कांठा वाले को आकर नहीं कहेगा कि आलू का सोना बनाऊंगा वो पहले से सोना बना रहे हैं।
मोदी ने कहा- सेवा करते हुए 25 साल पूरे किए
पीएम ने कहा- कुछ दिन पहले 7 अक्टूबर को मुझे सेवक के रूप में काम करते हुए 25 साल पूरे हुए। 7 अक्टूबर 2001 को जब मैंने शपथ ली तो आपने प्रेम दिया। एक एक गुजराती ने मुझे बहुत कुछ सिखाया। मैं सामान्य परिवार से निकला जिसके परिवार ने कभी गांव का मुखिया बनने का सपना भी नहीं देखा था उसको आपने लायक समझा। पहले गुजरात फिर देश की सेवा की जिम्मेदारी दी। जनसेवा से राष्ट्रसेवा और गुजरात के विकास से देश का विकास। कैसे करना है कैसे आगे बढ़ना है ये आपने मुझे सिखाया।
मोदी बोले- हमारा सीफूड निर्यात 2 गुना हुआ
मोदी बोले- मछली पालन के क्षेत्र में विस्तार हुआ है। भारत का सीफूड निर्यात 2 गुना हो गया है। मधुमक्खी पालन से शहद का उत्पादन 12 सालों में 2 गुना हो गया है। हमारा देश प्राकृतिक शहद का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक बन गया है।
मोदी बोले- गोबर से किसानों की कमाई बढ़ाएंगे
पीएम ने कहा- हम चाहते हैं कि किसानों की गोबर से भी कमाई बढ़े। गोबर और खेती के अवशेषों से बायोगैस बायो सीएनजी और जैविक खाद बनाने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर भी बढ़े। इसलिए यहां 2 बायो सीएनजी प्लांट का शिलान्यास हुआ है।
पीएम बोले- 150 करोड़ टीके पशुओं को लगाए जा चुके
मोदी ने कहा- पशुओं को बीमारियों से बचाना भी हमारी प्राथमिकता है। इसलिए हमने मुफ्त टीकाकरण शुरू किया। इसलिए करीब 150 करोड़ टीके पशुओं को लगाए जा चुके है। 8 करोड़ से ज्यादा किसानों के पशुओं को मुफ्त टीके लगे हैं। इससे उनका पैसा बचा है। इससे दूध उत्पादन बढ़ा है। 2013-14 में एक गाय-भैंस से 5 लीटर से भी कम दूध मिलता था। आज वह बढ़कर 8 लीटर हो गया है। भारत में दूध उत्पादन बढ़ने की गति सबसे तेज है। भारत दूध उत्पादन में नंबर वन है।
पीएम बोले- आईवीएफ की मदद से पशुओं की नस्ल सुधरेगी
पीएम ने कहा- राष्ट्रीय गोकुल मिशन से देसी नस्लों को संरक्षण और बढ़ावा दिया जा है। बनासकांठा में बना नया रिसर्च सेंटर इस मिशन को मजबूती देगा। यहां मुर्रा जाफराबादी जैसी नस्लों का संरक्षण होगा। ये देश में ऐसी पहली सुविधा है।
यदि किसी किसान के पास अच्छी नस्ल की गाय है जो ज्यादा दूध देती है और कम खर्च में स्वस्थ रहती है तो वो चाहेगा कि गाय की आने वाली पीढ़ी में भी ये गुण बने रहे। आईवीएफ इसमें मदद करते हैं। इसका सीधा लाभ पशुपालकों को मिलेगा।
पीएम बोले- किसानों को बीजों की करीब 3 हजार नई किस्में दी गईं
मोदी ने कहा- किसानों के लिए मौसम में हो रहा बदलाव बहुत बड़ी चुनौती है। बीते सालों में बीजों की करीब 3 हजार नई किस्में किसानों को दी गईं।
बीते दशक में भी पशुपालन और डेयरी सेक्टर में भी विज्ञान और टेक्नोलॉजी पर जोर दिया है। पशुओं की नस्ल बेहतर होगी तो दूध उत्पादन बढ़ेगा। 4 गाय से मिलने वाला दूध एक ही गाय से मिले। समय पर टीकाकरण इलाज समय पर मिलेगा तो बीमारी से होने वाला नुकसान कम होगा। यानी पशु स्वस्थ होगा तो मेरे पशुपालक भाई बहनों की कमाई भी बढ़ेगी।
मोदी बोले- खेती के तरीकों में आधुनिकता आई
मोदी ने कहा- पहले किसान को पता लगाने में मुश्किल होती थी कि उसके खेत को कौन सी खाद चाहिए। आज 26 करोड़ से ज्यादा सॉइल हेल्प कार्ड देश के किसानों के पास हैं। इनसे खेती के तरीकों में आधुनिकता आई है।
मोदी बोले- 5 योजनाओं ने 50 लाख करोड़ रुपए बचाए
मोदी ने कहा- 5 योजनाओं से देश के किसानों को 50 लाख करोड़ रुपए की बचत हुई है। इससे देश के किसानों की आय बढ़ाई और खेती का सामर्थ्य बढ़ाया है। एग्रीकल्चर इज अवर कल्चर।
पीएम किसान सम्मान निधि के 4.50 लाख करोड़ छोटे किसानों के खातों में पहुंचे। आजादी के बाद कभी इन छोटे किसानों की जरूरतों को नहीं समझा गया। कभी उन्हें पूछा नहीं गया। जबकि देश में छोटे किसानों की संख्या 85% से ज्यादा है। ऐसे छोटे किसानों की हमारी सरकार ने चिंता की उन्हें पीएम किसान सम्मान से मदद की।
बीते कुछ सालों में वैश्विक अनिश्चितता के बीच खाद की कीमतों में उछाल आया। हमारी सरकार ने इसका बोझ किसानों पर नहीं पड़ने दिया। सरकार ने 16 लाख करोड़ खर्च किए, ताकि आपको सस्ती खाद मिले।
पहले की सरकारों ने एमएसपी पर किसानों को धोखा दिया। हमने गेहूं और धान एमएसपी पर खरीद की। इससे किसानों के खातों में 24 लाख करोड़ गए।
पिछले 10-12 साल में किसानों को फसल बीमा योजना से मुआवजे में 2 लाख करोड़ रुपए मिल चुके हैं।
सिंचाई पर किसान की लागत कम हो। इसलिए पीएम कुसुम योजना की भूमिका लगातार बढ़ रही है। इसके तहत करीब 12 लाख सोलर पंप दिए हैं। ये पंप न मिलते तो 80 करोड़ लीटर से ज्यादा का डीजल किसानों को खरीदना पड़ता। इसमें जो पैसा लगता वो नहीं लगा। लाखों किसानों को बचत हुई। बिजली की बचत हुई।
मोदी बोले- गुजरात के 50 लाख से ज्यादा किसानों सम्मान निधि मिली
मोदी ने कहा- हमारे किसान विकसित भारत के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक हैं। हमारी सरकार ने किसानों को सशक्त करने में प्राथमिकता दी है। देश का कृषि बजट 2013-14 की तुलना में 5 गुना हो गया है। आज 10 करोड़ किसानों के खातों में 18 हजार करोड़ की राशि भेजी गई है। गुजरात के 50 लाख से ज्यादा किसानों को भी इसका लाभ मिला है। इनके खातों में 1 हजार करोड़ रुपए जमा हुए हैं। बनासकांठा के किसानों के खातों में 50 करोड़ पहुंचे हैं। बीते सालों में 50 लाख करोड़ रुपए किसानों को मिले हैं या उनकी बचत हुई है।
पीएम ने हिंदी में भाषण देने की परमीशन मांगी
मोदी ने कहा- नवरात्र के कुछ ही दिन बात मां अम्बा की पावन भूमि पर आने का अवसर मिला है। मैं मां अम्बा को प्रणाम करता हूं। कुछ देर पहले किसान, महिलाओं , बच्चियों, पशुओं को लिए प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन किया है। किसानों के खातों में पीएम सम्मान योजना की राशि भी पहुंची है। मैं उन्हें बधाई देता हूं
मुझे बनासकांठा के लोगों से माफी मांगता हूं क्योंकि मैं हिंदी में बोल रहा हूं। आपकी परमीशन चाहता हूं। हिंदी में बोलने की।
प्रोग्राम में ‘मोदी कहीं नहीं जाएगा’ लिखे पोस्टर लेकर लोग पहुंचे।
अहमदाबाद, एजेंसी। PM नरेंद्र मोदी ने शनिवार को सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती पर ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ पर लोगों को राष्ट्रीय एकता की शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल के बिना आज के भारत की कल्पना करना भी मुश्किल है।
इससे पहले वे सुबह ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ पहुंचे और श्रद्धांजलि दी। यहां उन्होंने 400 करोड़ रुपए से ज्यादा की विकास योजनाओं का उद्घाटन किया। इसके बाद उन्होंने रेन फॉरेस्ट और वामन वृक्ष वाटिका का दौरा किया।
कठिन समय में देश के भीतर की ताकतें अस्थिरता पैदा करने में जुट गई थीं
जब कठिन समय में देश बाहरी चुनौतियों के समाधान तलाश रहा था। उस समय देश के भीतर की ताकतें अस्थिरता पैदा करने में जुट गई थीं लेकिन देशवासी एक रहे। यही हमारा सबसे बड़ा आधार है।
डीबीटी के जरिए दिल्ली से निकला एक-एक पैसा गरीब तक पहुंचा
कुछ दिन पहले ही वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट आई है। यह बताती है कि 50 करोड़ भारतीयों ने गरीबी को परास्त किया है। पहले जहां 100 में से 27 लोग भीषण गरीबी की चपेट में थे आज यह संख्या कम होते-होते 100 में से सिर्फ 3 से कम रह गई है।
पूरी दुनिया मान रही है कि यह बहुत बड़ी सिद्धि है। ये सब हुआ कैसे, वो इसलिए हुआ कि पिछले 12 साल से देश गरीब कल्याण को प्राथमिकता दे रहा है। इन सालों में लीकेज प्रूफ व्यवस्था मिली।
डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी डीबीटी के जरिए दिल्ली से निकला एक-एक पैसा गरीब तक पहुंचा। मुफ्त राशन ने गरीब की जेब में पैसा बचाया। गरीब का जीवन आसान किया। करोड़ों को बीमा की सुरक्षा मिली।
जिन्होंने गरीबी हटाओ के नारे लगाए वो खुद अमीर होते चले गए
जिन युवाओं के सामने कभी अनिश्चितता थी। उनके लिए आगे बढ़ने के अवसर हैं। इस बार नक्सल पीड़ितों के परिवार अतिथि हैं। मैं उन जवानों को भी नमन करता हूं, जिन लोगों ने शांति स्थापित करने के लिए बलिदान दिया।
आज भारत पहले से अधिक सुरक्षित संकल्पित है। इसका एकमात्र कारण देशवासियों का बढ़ा हुआ आत्म विश्वास है। यह संकल्पसिद्धि से आता है।
भारत में गरीबी हटाने की बातें आजादी के बाद से ही चली आ रही हैं। इसके नाम पर वोट मांगे गए लेकिन देश में गरीबी की क्या स्थिति रही यह हम सभी जानते हैं। जिन्होंने गरीबी हटाओ के नारे लगाए वो खुद अमीर होते चले गए हालात में बदलाव आना शुरु हुआ कुछ साल में ही।
मोदी बोले- देश में नक्सलवाद की कमर तोड़ी जा चुकी
पिछले 2 साल में देश ने कई उपलब्धियां हासिल की हैं। मैंने यहीं कहा था- जब तक देश नक्सलवाद माओवादी आतंक से पूरी तरह मुक्त नहीं हो जाता हम चैनसे बैठने वाले नहीं हैं। ठीक एक साल बाद आज जब हम यहां हैं तो वह संकल्प पूरा हो चुका है।
आज देश में नक्सलवाद की कमर तोड़ी जा चुकी है। 2015 में देश के 126 जिले प्रभावित थे। मार्च 2026 तक ऐसा कोई जिला नहीं रह गया जो अब भी नक्सलवाद से प्रभावित हो।दशकों तक हिंसा खून खराबे से पीड़ित जिले मुख्य धारा का हिस्सा बन रहे हैं।
मोदी ने कहा- सरदार पटेल ने हमें प्रगति की राह बताई
वे जानते थे कि भारत की विविधता ही उसकी एकता का आधार है। हम हजारों साल से इसी तरह जीते आए हैं। सरदार पटेल ने एक बार फिर उसी भारत की नींव रखी। उन्होंने देश के भूगोल को ही नहीं जोड़ा उन्होंने भावनात्मक एकता के सूत्र में भी पिरोया। सोमनाथ मंदिर के निर्माण के रूप में सांस्कृतिक एकता भी बनाए रखी।
इस साल उस काम को भी 75 साल पूरे हो रहे हैं। उसी गौरव ने हमेें सोमनाथ स्वाभिमान पर्व की प्रेरणा दी। जिसे देश पूरे उत्साह से मना रहा है।
आज दुनिया के मंच पर भारत का बढ़ता कद और काशी विश्वनाथ से राममंदिर तक देश जिस दिशा में आगे बढ़ रहा है वह राह हमें सरदार पटेल ने दिखाई है।
मोदी बोले- सरदार पटेल ने भारत के वर्तमान स्वरूप को गढ़ा
मैं सरदार पटेल के चरणों में श्रद्धा से नमन करता हूं। वे भारत के इतिहास का महान व्यक्तित्व हैं जिनके बिना आज के भारत की कल्पना भी मुश्किल है। सरदार पटेल ने भारत के वर्तमान स्वरूप को गढ़ा है। विभाजन के बाद भी जिन्हेोंने हिमालय से कन्याकुमारी तक भारत को एक रखा , वह केवल सरदार पटेल ही कर सकते थे।
मोदी ने कहा-स्वतंत्रता को सही क्षमता मिलती है गणतंत्र से
सरदार पटेल जिन्होंने आजादी के बाद 550 से ज्यादा रियासतों को एक किया। देश को एकता के सूत्र में पिरोया। किसी भी देश के लिए आजादी जरूरी हाेती है। जब आजादी होती है तब देश अपने भविष्य का निर्णय खुद करता है। लेकिन स्वतंत्रता को सही क्षमता मिलती है गणतंत्र से।
इस साल एकता दिवस की परेड अद्भुत रही है। देश की विरासत आकांक्षाएं आज ये सब जातियों के माध्यम से भी देश के सामने आई हैं। इसलिए यह केवल आयोजन तक सीमित नहीं है जनभागीदारी से जन उत्सव भी बन गया है।
मोदी बोले- एकता हमें राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ने की शक्ति देती है
इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा- मैंने कल भारत पर्व में कई प्रस्तुतियां देखीं। आज हम यहां हैं। दुनिया की यह सबसे ऊंची प्रतिमा, इसके निर्माण में लगी देश की भागीदारी, इस जगह की आभा, एकता दिवस की असाधारण ऊर्जा और प्रेरणा यहां आकर मन गर्व और कृतज्ञता से भर जाता है।
संविधान हमें जनता के प्रति जवाबदेह रखता है। एकता हमें राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ने की शक्ति देती है। इसलिए हमारे देश में स्वतंत्रता दिवस गणतंत्र दिवस और एकता दिवस तीनों राष्ट्रीय पर्वों को उत्साह से मनाया जाता है।
ओमान, एजेंसी। होर्मुज में गुरुवार को 27 भारतीय क्रू सदस्यों वाले तेल टैंकर MT लुईस 1 पर हमला हुआ। पनामा के झंडे वाले इस टैंकर के पास एक छोटी नाव पहुंची थी। नाव से आए लोगों ने जहाज के बाहरी हिस्से (हुल) पर दो लिम्पेट माइंस चिपका दीं और वहां से चले गए।
कुछ देर बाद दोनों विस्फोटकों में धमाका हुआ, जिससे इंजन रूम में आग लग गई। इसकी वजह से जहाज का इंजन कुछ समय के लिए बंद हो गया। हालांकि, क्रू ने आग पर काबू पा लिया और जहाज को सुरक्षित कर लिया।
हमले के पीछे किसका हाथ है, इसकी पुष्टि नहीं हुई है। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बताया कि जहाज पर सवार सभी 27 भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। किसी को चोट नहीं आई है।
पहली बार लिम्पेट माइंस से सफल हमला
रॉयटर्स के मुताबिक, फरवरी में अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद होर्मुज में पहली बार लिम्पेट माइंस से सफल हमला हुआ है।
इससे पहले सितंबर में भी इसी तरह के विस्फोटक लगाने की कोशिश की गई थी, लेकिन उनमें धमाका नहीं हुआ था। ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी UKMTO के मुताबिक, टैंकर पर हमला ओमान के खासाब शहर से करीब 46 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में हुआ।
लिम्पेट माइंस छोटे आकार के विस्फोटक होते हैं, जिन्हें गोताखोर या छोटी नाव से जहाज के बाहरी हिस्से पर चिपकाया जा सकता है। इनमें चुंबक लगे होते हैं, जिससे ये जहाज पर चिपक जाते हैं। इनका इस्तेमाल आमतौर पर जहाजों को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जाता है।
एक दिन में दो तेल टैंकरों पर हमला
29 अक्टूबर को लाइबेरिया के झंडे वाले तेल टैंकर एमटी अरजानाह पर भी हमला हुआ था। इस जहाज पर दो भारतीय नागरिक सवार थे। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल के मुताबिक, दोनों भारतीय सुरक्षित हैं।
इस तरह एक ही दिन में होर्मुज के आसपास दो तेल टैंकरों पर हमले हुए। दोनों जहाजों पर कुल 29 भारतीय नाविक सवार थे। सभी सुरक्षित हैं।
होर्मुज में अब तक 122 जहाजों पर हमला
इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) के मुताबिक, 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से 30 अक्टूबर तक फारस की खाड़ी, होर्मुज और ओमान की खाड़ी में 122 जहाजों पर हमला हुआ।
होर्मुज दुनिया का एक अहम समुद्री रास्ता है। यहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल दूसरे देशों तक पहुंचता है। लगातार हो रहे हमलों से तेल की सप्लाई और दुनियाभर के कारोबार पर असर पड़ सकता है।
अमेरिकी चुनाव के बाद ईरान पर फिर हमले की तैयारी
अमेरिका और इजराइल 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर फिर हमला कर सकते हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, दोनों देश तेज सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं। इसमें ईरान के तेल-गैस ठिकानों, परमाणु केंद्रों और मिसाइलों-ड्रोन के ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने मिडिल ईस्ट में अपनी तैयारी बढ़ा दी है। कुछ संवेदनशील ठिकानों से सैनिकों को हटाया जा रहा है और हथियारों का भंडार बढ़ाया जा रहा है। इजराइल की सुरक्षा के लिए पैट्रियट मिसाइल सिस्टम भी भेजा जा रहा है। यह सिस्टम दुश्मन की मिसाइलों और लड़ाकू विमानों को हवा में ही मार गिराता है। हालांकि, ट्रम्प ने अभी हमले का अंतिम फैसला नहीं लिया है।
वाराणसी, एजेंसी। नई दिल्ली से वाराणसी तक बुलेट ट्रेन चलाई जाएगी। यह ट्रेन एक घंटे में नई दिल्ली से आगरा और 3 घंटे 30 मिनट में वाराणसी पहुंच जाएगी। रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव ने शनिवार को वाराणसी में बताया कि प्रधानमंत्री ने दिल्ली-वाराणसी-गुवाहाटी बुलेट ट्रेन के नॉर्दर्न कॉरिडोर को मंजूरी दे दी है।
यह कॉरिडोर दिल्ली से शुरू होकर आगरा, कानपुर, लखनऊ और अयोध्या को जोड़ेगा। इसके बाद वाराणसी, पटना और सिलीगुड़ी होते हुए गुवाहाटी तक पहुंचेगा।
अभी वाराणसी का सफर 10 घंटे का
वाराणसी से दिल्ली की दूरी करीब 807 किलोमीटर है। तेजस और राजधानी जैसी ट्रेनों को यह दूरी तय करने में 10 घंटे से अधिक लगते हैं। बुलेट ट्रेन से यह सफर सिर्फ 3:30 घंटे में हो सकेगा।
रेलवे सूत्रों के अनुसार, सिलीगुड़ी से चलकर वाराणसी पहुंचने वाली बुलेट ट्रेन और वाराणसी से चलकर दिल्ली जाने वाली ट्रेन की टाइमिंग ऐसी रखी जाएगी कि यात्री एक ट्रेन से उतरकर दूसरे में सवार हो सकें।
प्लेन से करीब 4 घंटे लगते हैं
फ्लाइट से वाराणसी से दिल्ली जाने में 1 घंटा 40 मिनट लगते हैं। एयरपोर्ट पर जाने, विमान में सवार होने और लैंडिंग के बाद एयरपोर्ट से निकलने वाले समय को जोड़ें तो इस यात्रा में भी करीब चार घंटे लग जाते हैं।
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन से अधिक सीटें होंगी
भारत में पहली बुलेट ट्रेन मुंबई-अहमदाबाद के बीच चलेगी। इससे अधिक सीट की क्षमता वाली बुलेट ट्रेन वाराणसी-सिलीगुड़ी के बीच चलेगी। अभी तक मुंबई-अहमदाबाद के बीच 731 सीटों वाली बुलेट ट्रेन चलाने की योजना है। जबकि, वाराणसी से पटना के रास्ते सिलीगुड़ी जाने वाली बुलेट ट्रेन में 750 यात्री सफर कर पाएंगे।
बुलेट ट्रेन में भूकंप के लिए वॉर्निंग सिस्टम
बुलेट ट्रेन में पहली बार अर्थक्वेक वार्निंग सिस्टम लगाया जा रहा है। यह सिस्टम जापानी तकनीक पर बेस्ड है। भूकंप आने पर यह सिस्टम तुरंत बिजली सप्लाई बंद कर देगा। बिजली बंद होते ही इमरजेंसी ब्रेक लगेंगे और ट्रेन वहीं रुक जाएगी।
बुलेट ट्रेन के फायदे
यात्रा समय में भारी कमी: बुलेट ट्रेन की रफ्तार 300 से 350 किमी होगी। इससे व्यवसाय, शिक्षा और पर्यटन के लिए एक जगह से दूसरी जगह जाने में कम समय लगेगा।
पर्यावरण अनुकूल परिवहन: यह बिजली से चलती है, जिससे डीजल या पेट्रोल की तुलना में कार्बन उत्सर्जन बहुत कम होता है। वायु प्रदूषण कम होता है।
आर्थिक विकास और रोजगार: हाई-स्पीड कॉरिडोर के निर्माण से हजारों लोगों को सीधे और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेंगे। रेलवे, स्टेशनों, लॉजिस्टिक्स और आसपास के क्षेत्रों में व्यवसाय बढ़ेगा।
सुरक्षित और आरामदायक यात्रा: बुलेट ट्रेन में सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक, ब्रेकिंग सिस्टम और फायर-सेफ्टी के इंतजाम हैं। इसके साथ ही आरामदायक सीटें, एसी कोच और न्यूनतम शोर यात्रा के अनुभव को बेहतर बनाते हैं।
क्षेत्रीय और शहरी कनेक्टिविटी मजबूत: अलग-अलग राज्यों और शहरों को जोड़कर व्यापार और उद्योग को बढ़ावा मिलता है। ग्रामीण और छोटे शहर भी बड़े शहरों से जुड़ते हैं, जिससे विकास का फैलाव होता है।