सक्ती। सक्ती जिले के हसौद थाना क्षेत्र के ग्राम कैथा में 46 साल की महिला की हत्या के मामले में फरार आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पुलिस से बचने के लिए बिलाईगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम खुर्सुला-बकलिपाली के जंगल में छिपकर रह रहा था।
मुखबिर की सूचना पर हसौद पुलिस ने देर रात जंगल में दबिश देकर घेराबंदी की और उसे पकड़ लिया। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपी ने गाली-गलौज की बात पर महिला के साथ मारपीट कर हत्या करना स्वीकार किया है। आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है।
इधर, जिले के चंद्रपुर थाना क्षेत्र के ग्राम गोपालपुर में एक व्यक्ति पर प्राणघातक हमला करने के मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दशहरा मेले के दौरान आरोपियों ने कथित तौर पर व्यक्ति के साथ अश्लील गाली-गलौज की, जान से मारने की धमकी दी और मारपीट कर जमीन पर पटक दिया थी। दोनों आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
केस- 1 महिला का हत्यारा गिरफ्तार
पहला मामला हसौद थाना क्षेत्र के ग्राम कैथा का है। जानकारी के अनुसार, ग्राम कैथा निवासी अनिल विश्वकर्मा ने 23 अक्टूबर को हसौद थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसने बताया कि 23 अक्टूबर की सुबह करीब 7:15 बजे उसके बुआ का लड़का घर पहुंचा और जानकारी दी कि उसकी बुआ लक्ष्मी बाई विश्वकर्मा (46 वर्ष), पति बृजलाल विश्वकर्मा का शव गांव के रामलाल कश्यप के खेत में पड़ा मिला है।
सुबह करीब 7 बजे मृतिका की दो नाबालिग भतीजियों ने शव देखा था और इसकी जानकारी विकास विश्वकर्मा को दी थी। शिकायत के अनुसार, घटना 22 अक्टूबर की रात की है। आरोप है कि गांव के ही रंजीत धनुहार ने रामलाल कश्यप के खेत के सामने कसीही पेड़ के पास लक्ष्मी बाई के साथ हाथ-मुक्कों और आग जलाने वाली लकड़ी से मारपीट की थी। इसके बाद महिला का शव खेत से ले जाकर उसके घर की परछी में रख दिया गया था।
घटना के बाद आरोपी फरार हो गया। शिकायतकर्ता की रिपोर्ट पर पुलिस ने अपराध क्रमांक 196/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) में अपराध दर्ज कर जांच शुरू की।
पुलिस को देता रहा चकमा, जंगल में छिपे होने की मिली सूचना
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल कुमार ठाकुर ने फरार आरोपी की जल्द गिरफ्तारी के निर्देश दिए। हसौद पुलिस आरोपी की तलाश कर रही थी।
इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि फरार आरोपी रंजीत धनुहार बिलाईगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम खुर्सुला-बकलिपाली के जंगल में छिपा हुआ है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने देर रात जंगल में दबिश दी और चारों तरफ से घेराबंदी कर आरोपी को पकड़ लिया।
पूछताछ में हत्या करना स्वीकार किया
पुलिस के अनुसार, हिरासत में पूछताछ के दौरान आरोपी रंजीत धनुहार ने गाली-गलौज की बात पर लक्ष्मी बाई के साथ हाथ-मुक्कों और आग जलाने वाली लकड़ी से मारपीट कर हत्या करना स्वीकार किया।
पुलिस ने आरोपी का मेमोरेंडम कथन दर्ज किया। अपराध में संलिप्तता पाए जाने पर 49 वर्षीय रंजीत धनुहार, निवासी ग्राम कैथा, थाना हसौद को विधिवत गिरफ्तार किया गया। इसके बाद उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
केस- 2 दशहरा मेला देखकर लौट रहे व्यक्ति पर जानलेवा हमला
दूसरा मामला चंद्रपुर थाना क्षेत्र के ग्राम गोपालपुर का है। जानकारी के अनुसार, 20 अक्टूबर 2026 को ग्राम गोपालपुर निवासी शिकायतकर्ता ने चंद्रपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
उसने बताया कि वह 20 अक्टूबर की शाम दशहरा मेला देखने चंद्रपुर गया था। इसी दौरान रात करीब 7:30 बजे उसके पिता सौदागर मेहर गांव के स्कूल के सामने पीपल के पेड़ के पास मौजूद थे।
आरोप है कि इसी दौरान गांव के सागर उरांव और अमित सिदार ने उनके साथ अश्लील गाली-गलौज की। दोनों ने जान से मारने की धमकी देते हुए हाथ-मुक्कों से मारपीट की और उन्हें जमीन पर पटक दिया।
हमले में सौदागर मेहर के सिर पर गंभीर चोट आई। हालत बिगड़ने पर परिजन उन्हें इलाज के लिए रायगढ़ के बालाजी मेट्रो अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उनका उपचार जारी है। मेडिकल रिपोर्ट में डॉक्टरों ने चोट को जानलेवा बताया। इसके बाद पुलिस ने मामले में धारा 109(1) बीएनएस जोड़ दी।
पूछताछ में अपराध स्वीकार किया, दोनों आरोपी गिरफ्तार
मामले में पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल कुमार ठाकुर और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पंकज पटेल के दिशा-निर्देशन तथा एसडीओपी चंद्रपुर-डभरा सुमित गुप्ता के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी चंद्रपुर ने टीम गठित कर आरोपियों को पूछताछ के लिए बुलाया।
पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार किया। इसके बाद पुलिस ने सागर उरांव (36 वर्ष) और अमित सिदार (19 वर्ष), दोनों निवासी ग्राम गोपालपुर, थाना चंद्रपुर को गिरफ्तार कर लिया। न्यायालय में पेश करने के बाद दोनों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
इस मामले में चंद्रपुर थाने में अपराध क्रमांक 120/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 296, 351(3), 115(2), 3(5) और 109(1) के तहत कार्रवाई की गई है।
सभापति नूतन ठाकुर और छत्तीसगढ़िया सर्व समाज की मांग
कोरबा। छत्तीसगढ़िया सर्व समाज की ओर से सभापति नूतन सिंह ठाकुर ने मांग की है कि छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा एवं संस्कृति को सम्मान देने के लिए ट्रांसपोर्ट नगर चौक में छत्तीसगढ़ महतारी की भव्य प्रतिमा स्थापित किया जावे। छत्तीसगढ़ के विभिन्न चौक चौराहों में अनेक महापुरुषों की भव्य प्रतिमा स्थापित किया गया है ठीक उसी प्रकार टीपी नगर चौक पर छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा की स्थापना किया जाए। छत्तीसगढ़ स्थापना के 26 वर्ष पूर्ण होने के बावजूद भी किन्हीं राजनेता ने कोरबा के किसी चौक चौराहे पर छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा स्थापना की सुध नहीं लिया जबकि छत्तीसगढ़ महतारी विभिन्न समाज के सामाजिक, सांस्कृतिक एकता तथा समृद्धि की परिचायक है।
नगर निगम कोरबा के सभापति नूतन सिंह ठाकुर ने जिला प्रशासन एवं निगम प्रशासन से मांग करता है कि कोरबा के मुख्य चौराहा ट्रांसपोर्ट नगर चौक में छत्तीसगढ़ महतारी की भव्य प्रतिमा स्थापित किया जाए। कोरबा के विभिन्न समाजो के संयुक्त संगठन छत्तीसगढ़िया सर्व समाज कोरबा की मांग और छत्तीसगढ़िया समुदाय की भावनाओं का सम्मान करते हुए शीघ्र छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति स्थापित किया जाए।
कोरबा। 01 नवम्बर 2000 का वह स्वर्णीम दिन, जब प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने छत्तीसगढ़ को मध्यप्रदेश से अलग कर विकास का नया द्वार खोल दिया और यहां की छत्तीसगढ़ी संस्कृति को अलग पहचान दी। 26 साल का युवा छत्तीसगढ़ अब विकास की नई इबारत लिख रहा है। आज प्रदेश के कोने-कोने में इसका जश्न मनाया जा रहा है। तीन दिन तक प्रदेश में चलने वाला राज्योत्सव छत्तीसगढ़ की संस्कृति, यहां की विरासत और यहां की प्रगति को रेखांकित कर रहा है।
इसी कड़ी में आज मड़वारानी के पास स्थित ग्राम खरहरकुड़ा में संचालित छत्तीसगढ़ का सर्वोत्कृष्ट ग्रामीण अंचल में सीबीएसई अंग्रेजी माध्यम का विद्यालय एनकेएम लायंस पब्लिक हायर सेकेण्डरी स्कूल के बच्चों ने राज्य स्थापना दिवस को अपनी प्रस्तुति से खास बना दिया और नन्हें-मुन्ने बच्चों ने फैंसी ड्रेस, छत्तीसगढ़ी गीत, संगीत एवं नृत्य के माध्यम से छत्तीसगढ़ की संस्कृति और विरासत को आकार दिया। बच्चों की प्रस्तुति इतनी आकर्षक थी कि बच्चों की तालियों से सांस्कृति हॉल गुंजायमान हो गया।
डायरेक्टर ने दी राज्य स्थापना पर बधाई
एनकेएम लायंस पब्लिक स्कूल के डायरेक्टर पीएमजेएफ लायन डॉ. राजकुमार अग्रवाल ने बच्चों सहित क्षेत्र एवं जिलेवासियों को राज्य स्थापना पर बधाई दी और कहा कि हमारा छत्तीसगढ़ पूरे विश्व में सबसे सुंदर, शांत और सद्भाव को समेटे हुए अलौकिक प्रदेश है, जहां कोई एक बार आता है-यहीं का होकर रह जाता है। यहां की संस्कृति और विरासत जहां लोगों को आकर्षित करते हैं, वहीं यहां का प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटन के रूप में लोगों को एक बार नहीं बार-बार आने के लिए लालायित करता है। यहां के निवासी का मधुर व्यवहार ऐसा, कि लोग यहां आकर रम जाते हैं। ऐसी है हमारी छत्तीसगढ़ महतारी की अनमोल भूमि।
रायपुर, एजेंसी। 1 नवंबर 2000 को मध्यप्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ देश का 26वां राज्य बना। उस समय प्रदेश के सामने कई चुनौतियां थीं। सड़क, बिजली और दूसरी सुविधाओं की कमी थी। उद्योग कम थे, शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधाएं भी सीमित थीं। दूर-दराज के गांवों और आदिवासी इलाकों तक विकास पहुंचाना भी बड़ी चुनौती थी।
बस्तर और सरगुजा के कई इलाकों में नक्सलवाद के कारण विकास के काम भी प्रभावित हो रहे थे। अब 26 साल बाद प्रदेश में काफी बदलाव आया है। बजट का आकार 23 गुना से ज्यादा और निवेश 247 गुना बढ़ने का दावा है। नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा और विकास के काम पहुंचे हैं। लाल आतंक को खत्म करने की दिशा में भी बड़ी कामयाबी मिली है।
26 साल में छत्तीसगढ़ का बजट 23 गुना बढ़ा।
7,294 करोड़ से शुरू हुआ बजट का सफर, अब 1.72 लाख करोड़
राज्य गठन के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के कार्यकाल में वित्त मंत्री रामचंद्र सिंहदेव ने वर्ष 2001-02 में पहला बजट पेश किया था। इसका आकार 7,294 करोड़ रुपए था।
2002-03 में बजट बढ़कर 8,471 करोड़ और 2003-04 में 9,978 करोड़ रुपए हो गया। 2003 में सत्ता परिवर्तन के बाद वित्त मंत्री अमर अग्रवाल के कार्यकाल में 2004-05 का बजट 10,555 करोड़ और 2006-07 में 13,185 करोड़ रुपए रहा।
इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने वित्त विभाग संभाला और लगातार 12 बजट पेश किए। इस दौरान 2007-08 में 16,473 करोड़ रुपए का बजट 2017-18 में बढ़कर 88,599 करोड़ रुपए हो गया।
2018 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद भूपेश बघेल ने वित्त विभाग संभाला। उनके कार्यकाल में बजट एक लाख करोड़ रुपए के पार पहुंचा। 2023 में भाजपा सरकार आने के बाद भी बजट में लगातार विस्तार हुआ। वर्ष 2026-27 में इसका आकार 1.72 लाख करोड़ रुपए हो गया है।
देश के शीर्ष उद्योगपतियों ने छत्तीसगढ़ में निवेश की जताई इच्छा।
निवेश 247 गुना बढ़ा, खनन से 19 हजार करोड़ की उम्मीद
छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में खनिज संसाधनों की बड़ी भूमिका रही है। कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट और चूना पत्थर आधारित उद्योगों ने प्रदेश को औद्योगिक पहचान दी है।
राज्य गठन के बाद बिजली, इस्पात और सीमेंट उद्योगों का विस्तार हुआ। 25 साल की विकास यात्रा के आंकड़ों में निवेश 247 गुना बढ़ने का दावा किया गया है। 2026-27 के बजट में खनन से 19 हजार करोड़ रुपए राजस्व मिलने का अनुमान है।
राज्य गठन के समय 7 जिला अस्पताल और 1 मेडिकल कॉलेज था, अब 30 जिला अस्पताल और 16 मेडिकल कॉलेज हैं।
नए PHC सेंटर खोलकर गांवों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं।
अस्पताल 7 से 30 हुए, मेडिकल कॉलेज 16 तक पहुंचे
स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी संस्थागत सुविधाएं बढ़ी हैं। राज्य गठन के समय प्रदेश में 7 जिला अस्पताल और एक मेडिकल कॉलेज था।
अब जिला अस्पतालों की संख्या 30 और मेडिकल कॉलेजों की संख्या 16 हो गई है। साक्षरता दर भी करीब 65% से बढ़कर 79% तक पहुंची है।
ग्रामीण सड़कों के निर्माण में 98 गुना वृद्धि का दावा किया गया है। सिंचाई का रकबा दोगुना, खरीफ उत्पादन तीन गुना और रबी उत्पादन छह गुना होने की बात भी सामने आई है।
केंद्र और राज्य सरकार ने प्रदेश काे नक्सलमुक्त घोषित कर दिया है।
केंद्र और राज्य सरकार के प्रयासों से प्रदेश में सक्रिय रहे कई नक्सलियों ने सरेंडर किया।
नक्सलवाद के खिलाफ अभियान, विकास की पहुंच बढ़ी
प्रदेश के विकास की सबसे बड़ी बाधाओं में नक्सलवाद शामिल रहा है। बस्तर के कई इलाकों में सड़क, स्कूल, अस्पताल और संचार जैसी सुविधाएं पहुंचाना लंबे समय तक चुनौती बना रहा।
सुरक्षा बलों के अभियानों, नए सुरक्षा कैंपों और सरकारी योजनाओं के विस्तार से इन क्षेत्रों में बदलाव आया है। नक्सलवाद के खिलाफ अभियान तेज होने से प्रभावित इलाकों में विकास कार्यों को गति मिली है। लाल आतंक के खात्मे की दिशा में हुई प्रगति को राज्य की 26 साल की यात्रा का अहम पड़ाव माना जा रहा है।
राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2024 से मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ों में 516 नक्सलियों को मार गिराया। इस दौरान 2,587 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण किया। नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई के साथ पुनर्वास और विकास कार्यों का दायरा भी बढ़ा है।
आंकड़ों के साथ आम आदमी की जिंदगी का सवाल
26 साल में बजट, निवेश, स्वास्थ्य संस्थानों, सड़क और कृषि उत्पादन के आंकड़े बढ़े हैं। लेकिन विकास का आकलन सिर्फ सरकारी खर्च से नहीं होगा।
ग्रामीण युवाओं को रोजगार, किसानों की आय में स्थायी बढ़ोतरी, आदिवासी क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अब भी अहम कसौटियां हैं। राज्य की अगली चुनौती इन आंकड़ों का लाभ आखिरी व्यक्ति तक पहुंचाना है।