Connect with us

कोरबा

बेग लेस डे को बनाया गया फन डे, माध्यमिक शाला राल संकुल डोंगरी,,,देखें पूरी खबर

Published

on

संवाददाता साबीर अंसारी

डोंगरी – राल :– छत्तीसगढ़ राज्य विद्यालयों में शिक्षा के प्रति बच्चों में रुचि को जागृत कर बढ़ाने हेतु प्रत्येक महीने के दूसरे एवं अंतिम शनिवार को बेगलेस डे मनाया जाता है एवं बच्चों को कौशल विकास, आर्ट कला, एवं अन्य ऐसे कलाओं को विकसित करने की योजना बनाई गई है जिससे बच्चों में धनार्जन करने की प्रवृत्ति का विकास हो साथ ही संपूर्ण विकास की ओर छात्र-छात्रा अग्रसर हो।

उक्त कड़ी में आज शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला राल संकुल डोंगरी विकासखंड कटघोरा जिला कोरबा छत्तीसगढ़ में बच्चों के लिए बाल मेला का आयोजन किया गया।कार्यक्रम की मुख्य अतिथि ग्राम सरपंच लक्ष्मीनकंवर रही, विशिष्ट अतिथि के रूप में संकुल समन्वयक लक्ष्मी शरण कोशले रहे जिनके द्वारा सर्वप्रथम मां सरस्वती एवं छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा पर पुष्प हार एवं दीप प्रज्वलित कर मेला का शुभारंभ रिबन काटकर मुख्य अतिथियों के द्वारा किया गया।

मेले में कक्षा पहली से लेकर कक्षा आठवीं तक के सभी छात्र-छात्राओं ने विभिन्न प्रकार के स्टाल लगाए जिसमें गुपचुप, चाट, छोले, सलोनी, ब्रेड पकोड़ा भेल, अमरूद, मैगी, भजिया समोसे, किराना दुकान अनेक प्रकार की बच्चों के मनपसंद व्यंजन का स्टॉल लगाकर शाला परिसर को मेला परिसर की अनुभूति कराया गया।

सभी छात्राओं को अत्यंत ही आनंदित कर देने वाले पल का एहसास कराया। इस मेले का आयोजन से छात्र-छात्राओं में व्यावसायिक दृष्टिकोण का विकास देखा गया सभी छात्र-छात्राएं पैसे का लेनदेन करना हिसाब किताब करना बड़े ही ध्यान से कर रहे जो लाभ उनको दुकान लगाकर प्राप्त हुआ उनसे भविष्य में व्यापारिक दृष्टिकोण का विकास देखा गया छात्र हिसाब किताब करना स्वत ही सीख रहे थे, छात्रों में आनंद के साथ गणितीय कौशल का विकास इस मेले के माध्यम से किया गया।

विद्यालय के प्रधान पाठक शिवकुमार साहू के द्वारा मेला का उद्देश्य एवं व्यापार के माध्यम से हम कैसे भविष्य में इंडिपेंडेंट बिजनेस ओनर बनकर अपने एवं अपने समाज को आर्थिक रूप से सुदृढ़ कैसे बना सकते हैं उसके बारे में सभी छात्र-छात्राओं को विस्तार से बताया साथ ही आर्थिक लाभ प्राप्त कर सभी छात्र-छात्रा अत्यंत ही प्रफुल्लित रहा विद्यालय के अन्य शिक्षक शिक्षिकाओं के द्वारा बच्चों को मेला पर निबंध लिखने हेतु प्रेरित किया गया।

इस कार्यक्रम को सफल बनाने में कृपाल सिंह, कल्याण सिंह श्रीवास, श्रीमती आशीष कंवर, श्रीमती मीनाक्षी गोस्वामी, गणेश राम चौहान कपिल दास, किताब सिंह कंवर समस्त विद्यालय परिवार एवं स्व सहायता समूह की महिलाओं का विशेष योगदान रहा अंत में प्रधान पाठक जी के द्वारा सभी पालकों छात्र-छात्राओं एवं मेले में उपस्थित समस्त अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का समापन किया गया।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

कोरबा

कोरबा जिले में भूजल स्तर बढ़ाने के लिए बनाए जा रहे 234 बोरवेल रिचार्ज सैंड फिल्टर पिट

Published

on

विकसित भारत-जी राम जी के तहत रू1.32 करोड़ से अधिक के कार्य स्वीकृत

जल संरक्षण एवं संवर्धन के साथ ग्रामीणों को मिल रहा रोजगार, 180 से अधिक ग्राम पंचायतों में हो रहा निर्माण

मोर गांव मोर पानी अभियान के तहत जल सरंक्षण एवं संवर्धन सम्बंधी संरचनाओं को प्राथमिकता

कोरबा, 26 अक्टूबर 2026। जिले में गिरते भूजल स्तर को बढ़ाने तथा वर्षा जल के संरक्षण और पुनर्भरण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम के तहत 234 बोरवेल रिचार्ज सैंड फिल्टर पिट का निर्माण कराया जा रहा है। इन कार्यों के लिए कुल 1 करोड़ 32 लाख 97 हजार रुपये की स्वीकृति दी गई है। इन संरचनाओं के निर्माण से जहां ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं, वहीं भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देकर जल संकट की चुनौती से निपटने में भी मदद मिलेगी।

कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देशन तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत प्रतीक जैन के मार्गदर्शन में जिले में जल संरक्षण एवं जल संवर्धन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। ‘मोर गांव, मोर पानी’ अभियान के तहत वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण तथा जल स्रोतों के संरक्षण के लिए विभिन्न संरचनाओं का निर्माण कराया जा रहा है।

बारिश के पानी को जमीन के भीतर पहुंचाने में मिलेगी मदद

बोरवेल रिचार्ज सैंड फिल्टर पिट ऐसी संरचना है, जिसके माध्यम से वर्षा जल को रेत एवं अन्य फिल्टर सामग्री की सहायता से छानकर जमीन के भीतर पहुंचाया जाता है। इससे भूजल पुनर्भरण में मदद मिलती है तथा बोरवेल और आसपास के जलस्रोतों के जलस्तर को बनाए रखने में सहायता मिल सकती है। ग्राम पंचायतों, शासकीय भवनों, स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और सामुदायिक भवनों में ऐसी संरचनाएं जल संरक्षण की दृष्टि से उपयोगी हैं।

पांचों विकासखंडों में हो रहा निर्माण

जिले की 180 से अधिक ग्राम पंचायतों में मांग एवं आवश्यकता के अनुसार सामुदायिक बोरवेल रिचार्ज सैंड फिल्टर पिट का निर्माण कराया जा रहा है। विकासखंडवार स्थिति के अनुसार करतला में 64, कटघोरा में 30, कोरबा में 66, पाली में 13 तथा पोड़ी उपरोड़ा में 61 रिचार्ज पिट बनाए जा रहे हैं।

इन संरचनाओं से विशेषकर उन ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल पुनर्भरण को प्रोत्साहन मिलेगा, जहां जलस्तर में गिरावट की समस्या है। वर्षा जल का बेहतर उपयोग होने से जल उपलब्धता बढ़ाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी सहायता मिलेगी।

विकसित भारत- जी राम जी से जिले में जल संरक्षण एवं संवर्धन के इन प्रयासों के माध्यम से रोजगार सृजन के साथ जल सुरक्षा को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ भविष्य के लिए भी जल संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सके।

Continue Reading

कोरबा

वरिष्ठ पत्रकार सुभाष अग्रवाल को भ्रात शोक

Published

on

कोरबा। प्रेस क्लब के सदस्य एवं दैनिक तरूण छत्तीसगढ़ के संपादक सुभाष अग्रवाल के अनुज भ्राता (छोटे भाई) शहर के प्रतिष्ठित नागरिक एवं होटल रिलैक्स इन के संचालक सतीश अग्रवाल पिता स्वर्गीय ओमप्रकाश अग्रवाल का आज सोमवार दिनांक 26/10/2026 की देर शाम 7.30 बजे निधन हो गया। वे कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। वे अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनका अंतिम संस्कार कल मंगलवार दिनांक 27/10/2026 को सुबह 11 बजे स्थानीय मोती सागर पारा मुक्तिधाम में संपन्न होगा। इससे पूर्व अग्रोहा मार्ग स्थित उनके निवास से अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। उनके निधन पर कोरबा प्रेस क्लब परिवार ने शोक व्यक्त किया है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में परम शांति प्रदान करे एवं शोकाकुल परिवार को यह असह्य दुःख सहन करने की शक्ति दे।

Continue Reading

कोरबा

बेबी एलिफेंट की छठी मनाई, नाम रखा ‘काशी’:7 गांवों के ग्रामीण शामिल हुए, स्वस्थ जीवन की कामना की, जिले में 48 हाथियों की मौजूदगी

Published

on

कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा वन मंडल के करतला रेंज में 9 हाथियों का झुंड घूम रहा है। झुंड में नन्हे हाथी के जन्म की खुशी में रविवार को 7 गांवों के ग्रामीणों ने उसकी छठी मनाई और उसका नाम ‘काशी’ रखा।

कार्यक्रम काशीपानी जंगल के कारीपानी मंदिर के नीचे गौठान टिकरापारा में आयोजित किया गया। इसमें रामभाठा, लबेद, पाहराभांठा, काशीपानी, छातापाठ, जामपानी और छुईडुंगा गांव के ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए।

मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद ग्रामीणों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई। ग्रामीणों ने हाथी के बच्चे के स्वस्थ जीवन की कामना की।

बेबी एलिफेंट का नाम ‘काशी’ रखा गया है।

बेबी एलिफेंट का नाम ‘काशी’ रखा गया है।

छठी कार्यक्रम काशीपानी जंगल के कारीपानी मंदिर के नीचे गौठान टिकरापारा में आयोजित किया गया।

छठी कार्यक्रम काशीपानी जंगल के कारीपानी मंदिर के नीचे गौठान टिकरापारा में आयोजित किया गया।

रविवार को 7 गांवों के ग्रामीणों ने उसकी छठी मनाई।

रविवार को 7 गांवों के ग्रामीणों ने उसकी छठी मनाई।

जिले में 48 हाथियों की मौजूदगी

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, 9 हाथियों का झुंड फिलहाल काशीपानी के जंगल में घूम रहा है। इसके अलावा कुदमुरा रेंज में 32 हाथी और चचिया क्षेत्र में 7 हाथी मौजूद हैं। हाल के दिनों में हाथियों ने 17 किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाया है।

20 साल से जंगल में आ रहे हाथी

ग्रामीणों ने बताया कि करीब 20 साल से हाथी इस जंगल में आते हैं। वे लंबे समय तक यहां रुकने के बाद वापस चले जाते हैं। यह हाथियों का पुराना कॉरिडोर है।

SDO मणिकांत वर्मा ने ग्रामीणों से हाथियों से छेड़छाड़ नहीं करने और सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि फसल नुकसान के मामलों में नियमानुसार मुआवजा दिया जाता है। जनहानि रोकने के लिए सतर्क रहना जरूरी है।

साल 2000 में पहली बार आए थे हाथी

जिले में साल 2000 में पहली बार कुदमुरा रेंज के आमटिकरा गांव में हाथी आए थे। इसके बाद धीरे-धीरे उनकी संख्या बढ़ती गई। कई बार जिले में हाथियों की संख्या 150 तक पहुंच चुकी है।

धिनारा गांव से शुरू हुई छठी मनाने की परंपरा

बेबी एलिफेंट की छठी मनाने की परंपरा धिनारा गांव से शुरू हुई थी। ग्रामीण अब हाथियों को लेकर जागरूक हो रहे हैं। पहले जहां हाथियों को भगवान मानकर पूजा की जाती थी, वहीं अब ग्रामीण सुरक्षित दूरी बनाए रखने पर जोर देते हैं।

Continue Reading
Advertisement

Trending

Copyright © 2020 Divya Akash | RNI- CHHHIN/2010/47078 | IN FRONT OF PRESS CLUB TILAK BHAVAN TP NAGAR KORBA 495677