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क्या सिल्वर में आ सकता है 1980 जैसा क्रैश:तब हंट ब्रदर्स के कारण आई थी गिरावट, एक हफ्ते में करीब ₹25 हजार घटे दाम

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मुंबई,एजेंसी। 1980 की बात है। चांदी की कीमत 2 डॉलर प्रति औंस (28.35 ग्राम) से बढ़कर 48 डॉलर तक पहुंच गई। पर यह हुआ कैसे? इसके पीछे थे अमेरिका के हंट ब्रदर्स।

दुनिया की चांदी का एक तिहाई हिस्सा इन दो भाइयों की जेब में था। नेल्सन बंकर हंट और विलियम हर्बर हंट ने चांदी को 700% से ज्यादा बढ़ा दिया। हंट ब्रदर्स की इस कहानी में शामिल है लालच, साजिश और एक ऐसा क्रैश जिसे सिल्वर थर्सडे कहा जाता है।

हंट ब्रदर्स की ये कहानी आज हम इसलिए बता रहे हैं क्योंकि 10 महीने में चांदी के दाम दोगुने हो गए, लेकिन बीते एक ही हफ्ते में रू.1.78 लाख रुपए प्रति किलो के हाई से ये रू.1.52 लाख पर आ चुकी है। यानी, इसके दामों में करीब 25 हजार रुपए की गिरावट आई है।

तो क्या अब चांदी में वैसा ही फॉल आ सकता है, जैसा 1980 के दशक में आया था? चांदी के भाव में आई तेजी की वजहें क्या है? हंट ब्रदर्स की स्टोरी से इसे समझते हैं…

चैप्टर 1: शुरुआत

हंट ब्रदर्स अमीर परिवार से आते थे। उनके पिता हरॉल्डसन लेफायेट हंट गरीब परिवार में पैदा हुए, लेकिन 22 साल की उम्र में बिजनेसमैन बन गए। वह कॉटन की खरीद-बेच करते थे।

जल्दी ही उनका फोकस ऑयल पर शिफ्ट हो गया, जिसमें उन्होंने अरबों डॉलर की कमाई की। पिता की मौत के बाद हंट ब्रदर्स ने अरबों डॉलर का फैमिली बिजनेस संभाला।

विलियम हर्बर्ट हंट (बाएं) और नेल्सन बंकर हंट ने मिलकर सिल्वर प्राइस बढ़ाए थे।

विलियम हर्बर्ट हंट (बाएं) और नेल्सन बंकर हंट ने मिलकर सिल्वर प्राइस बढ़ाए थे।

चैप्टर 2: पपेट मास्टर

1970 के दशक के आखिर में डॉलर कमजोर हो रहा था और हाइपरइन्फ्लेशन की भविष्यवाणी थी। ऐसे में हंट ब्रदर्स का फोकस सिल्वर की तरफ शिफ्ट हो गया।

उन्होंने फिजिकल सिल्वर जमा करना शुरू किया और सिल्वर फ्यूचर्स के कॉन्ट्रैक्ट्स खरीदे। उन्हें यकीन था कि सिल्वर की वैल्यू आसमान छू लेगी।

फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए कैश सेटलमेंट लेने की बजाय, उन्होंने फिजिकल सिल्वर डिलीवर करवाया। ऐसा कम ही लोग करते थे। 70 के दशक की शुरुआत में जब हंट ब्रदर्स ने सिल्वर खरीदना शुरू किया, तो कीमत 2 डॉलर प्रति औंस थी। 1979 तक ये 6 डॉलर पहुंच गई।

हंट ब्रदर्स के पास 100 मिलियन औंस से ज्यादा सिल्वर था। हंट ब्रदर्स सिल्वर के पपेट मास्टर बन चुके थे। यानी, वो अपने हिसाब से कीमतों को बढ़ा रहे थे।

इससे सिल्वर मार्केट में सप्लाई की दिक्कतें बढ़ने लगीं। दिसंबर 1979 में सिल्वर की कीमत 25 डॉलर प्रति औंस और 1980 में 50 डॉलर प्रति औंस पहुंच गई। लेकिन हंट ब्रदर्स ने उधार लेकर सिल्वर खरीदना जारी रखा।

हंट ब्रदर्स ने 1970 के दशक में फिजिकल सिल्वर जमा करना शुरू किया था।

हंट ब्रदर्स ने 1970 के दशक में फिजिकल सिल्वर जमा करना शुरू किया था।

चैप्टर 3: सिल्वर थर्सडे

हंट ब्रदर्स का प्लान बिल्कुल ठीक चल रहा था, लेकिन कमोडिटी एक्सचेंज, इंक. यानी, COMEX के दखल ने सब कुछ बदल दिया। सिल्वर के पीक से एक हफ्ते पहले 7 जनवरी 1980 को COMEX सिल्वर रूल 7 लाई। इसमें मार्जिन पर कमोडिटी खरीदने पर पाबंदियां लगा दी गई।

इससे हंट ब्रदर्स के लिए ब्रोकरेज से उधार लेकर सिल्वर खरीदना मुश्किल हो गया। इससे हंट ब्रदर्स की ताकत कमजोर पड़ने लगी। अब आती है वो तारीख जिसे सिल्वर थर्सडे कहा जाता है।

27 मार्च 1980 को हंट ब्रदर्स मार्जिन कॉल मिस कर गए। यानी, जो पैसा उन्हें देना था वो नहीं दे पाए। ऐसे में ब्रोकर ने सिल्वर बेचना शुरू कर दिया और एक ही दिन ये 50% से ज्यादा गिर गया।

  • मार्जिन: जब आप ब्रोकर से उधार लेकर कुछ खरीदते हैं, तो कुछ पैसे पहले ही जमा करने पड़ते हैं। ये “मार्जिन” है। मान लीजिए आप रू.100 का सामान खरीदना चाहते हैं, लेकिन आपके पास सिर्फ रू.20 हैं। ब्रोकर बाकी रू.80 उधार देता है। यहां रू.20 “मार्जिन” है।
  • मार्जिन कॉल: अगर बाजार में चीजों की कीमत गिरने लगे तो निवेश की वैल्यू कम हो जाती है। ब्रोकर को डर लगता है कि अगर और नुकसान हुआ, तो उधार का पैसा डूब सकता है। इसलिए वे आपको तुरंत और पैसे जमा करने के लिए कहते हैं। इसे मार्जिन कॉल कहते हैं।
  • अगर मार्जिन कॉल मिस हो जाए: अगर आप पैसे नहीं जमा कर पाते तो ब्रोकर आपकी सारी होल्डिंग जबरदस्ती बेच देता है। हंट ब्रदर्स के साथ भी ऐसा ही हुआ था। जब चांदी की कीमत गिरने लगी तो ब्रोकर ने उनसे पैसे मांगे, लेकिन वो और पैसे नहीं दे पाए।
27 मार्च 1980 को सिल्वर के दाम एक ही दिन में 50% से ज्यादा गिर गए थे।

27 मार्च 1980 को सिल्वर के दाम एक ही दिन में 50% से ज्यादा गिर गए थे।

चैप्टर 4: क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन

इस क्रैश के बाद हंट ब्रदर्स के खिलाफ क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन शुरू हुआ। 1986 में उन्होंने अपनी कंपनी के दिवालिया होने की घोषणा की। 1988 में पर्सनल बैंकरप्सी भी घोषित की।

1988 में न्यूयॉर्क की जूरी ने हंट ब्रदर्स को ऑर्डर दिया कि वे पेरू सरकार की मिनरल मार्केटिंग कंपनी को 130 मिलियन डॉलर पेमेंट करें, क्योंकि क्रैश से उस कंपनी को नुकसान हुआ था।

कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमीशन ने दोनों भाइयों पर 10-10 मिलियन डॉलर का फाइन भी लगाया। सिल्वर रिजर्व्स को मैनिपुलेट करने के लिए ट्रेडिंग करने से हमेशा के लिए बैन कर दिया।

चैप्टर 5: फ्यूचर

इतिहास में सिल्वर में दो बार बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। 1980 में और 2011 में। 2011 में चांदी 31 साल बाद 50 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गई थी।

लेकिन उसके बाद ये तेजी से गिरने लगीं और 26 डॉलर प्रति औंस तक लुढ़क गईं। ये गिरावट स्पेकुलेशन, रेगुलेटरी ऐक्शन और ग्लोबल फीयर्स के कारण आई थी।

अब, दस साल से ज्यादा समय के बाद, चांदी का भाव फिर से 50 डॉलर प्रति औंस को क्रॉस कर दिया है। रुपए प्रति किलो में ये 1.55 लाख के करीब होती है। ऐसे में, कई लोगों के मन में सवाल है कि क्या आज के समय में सिल्वर में इसी तरह की गिरावट आ सकती है?

जानकार कहते हैं कि सिल्वर प्राइसेस में बड़े उतार-चढ़ाव आज के समय में भी देखने को मिलते हैं, लेकिन सिल्वर थर्सडे के बाद लगाए गए सेफगार्ड्स के कारण इतने बड़े स्केल पर मार्केट मैनिपुलेशन आसान नहीं है। उस समय बाजार में काफी कम रेगुलेशन्स थे।

सिल्वर की वैल्यू को ड्राइव करने वाले फंडामेंटल्स भी हंट के जमाने से काफी बदल चुके हैं। इंडस्ट्रियल डिमांड ट्रेडिशनल फोटोग्राफी से आगे बढ़कर क्रूशियल मॉडर्न टेक्नोलॉजीज में फैल गई है। सोलर पैनल्स में फोटोवोल्टेइक सेल्स के लिए सिल्वर का भारी मात्रा में इस्तेमाल होता हैं।

अभी चांदी में जो तेजी आई है उसकी तीन बड़ी वजहें हैं…

  • फेस्टिव सीजन: भारत दुनिया में चांदी के सबसे बड़े कंज्यूमर्स में से एक है। दिवाली-धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदना शुभ माना जाता है। इससे चांदी की डिमांड बढ़ी है।
  • इंडस्ट्रियल डिमांड: चांदी का सबसे ज्यादा इस्तेमाल सोलर फैक्ट्रियों में होता है। इसके अलावा AI इंडस्ट्री और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स में भी चांदी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।
  • सप्लाई की कमी: चांदी की मांग तो बढ़ रही है, लेकिन इसकी सप्लाई में रुकावट आ रही है। कुछ देशों में पर्यावरण नियम या खदान बंद होने से प्लान्ड माइनिंग कम हो गई है।

एनालिस्टों का कहना है कि 2025 में आई कीमतों की तेजी स्पेकुलेटिव बबल नहीं है। आज इंडस्ट्रियल डिमांड और इन्फ्लेशन हेजिंग से कीमते बढ़ी है।

इसलिए, चांदी की कीमतों में थोड़ा बहुत करेक्शन आ सकता है, लेकिन 1980 और 2011 जैसे शार्प क्रैश का रिस्क अब कम है।

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150 किमी. की रफ्तार से आगे बढ़ रहा चक्रवात अर्नब:आंध्र और ओडिशा में भारी बारिश शुरू, एमपी-यूपी और बिहार में भी अलर्ट

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चेन्नई/भुवनेश्वर/भोपाल/जयपुर/लखनऊ, एजेंसी। बंगाल की खाड़ी में चक्रवात अर्नब 150 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। इसके 28 अक्टूबर की सुबह बापटला और विशाखापत्तनम के बीच तट से टकराने की आशंका है।

आंध्र प्रदेश के 16 जिलों में भारी बारिश का रेडअलर्ट जारी किया गया है। तटीय इलाकों में लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाया गया है। आंध्र-ओडिशा में करीब 4,000 शेल्टर बनाए गए हैं।

विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम हवाई अड्डों पर मंगलवार और बुधवार को 21 उड़ानें रद्द कर दी गईं।

आंध्र-ओडिशा में भारी बारिश शुरू हो गई है। समुद्र में नौकाएं ले जाने पर पाबंदी लगा दी गई है। स्कूल भी बंद हैं।

मौसम विभाग ने तेलंगाना, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पुडुचेरी, बिहार और उत्तर प्रदेश में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। अंडमान-निकोबार सहित तटीय इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।

ओडिशा के पुरी में तेज बारिश

एअर इंडिया ने विशाखापत्तनम-विजयवाड़ा की फ्लाइट के लिए एडवाइजरी जारी की

चक्रवात अर्नब के चलते एअर इंडिया ने विशाखापत्तनम और विजयवाड़ा आने-जाने वाली फ्लाइट के यात्रियों के लिए एडवाइजरी जारी की है। एयरलाइन ने यात्रियों से फ्लाइट का स्टेटस जांचने और एयरपोर्ट पहुंचने के लिए अतिरिक्त समय रखने की अपील की है।

एअर इंडिया ने कहा कि खराब मौसम के कारण सड़क से एयरपोर्ट पहुंचने में भी परेशानी हो सकती है।

आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में बारिश

आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में भी चक्रवात के असर से कुछ इलाकों मे बारिश हुई है। समुद्र में लहरें तेज हैं और हालात खराब बने हुए हैं।

तमिलनाडु के कई इलाकों में लगातार बारिश

तिरुचिरापल्ली में लगातार हो रही भारी बारिश से खेत पानी में डूब गए हैं।

तिरुचिरापल्ली में लगातार हो रही भारी बारिश से खेत पानी में डूब गए हैं।

डिंडीगुल जिले के पहाड़ी इलाके में भूस्खलन से पेरियाकुलम-कोडाइकनाल सड़क का एक हिस्सा धंस गया।

डिंडीगुल जिले के पहाड़ी इलाके में भूस्खलन से पेरियाकुलम-कोडाइकनाल सड़क का एक हिस्सा धंस गया।

अगले 2 दिन के मौसम का हाल

28 अक्टूबर

  • आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और ओडिशा में भारी बारिश का रेड अलर्ट है। विदर्भ में बारिश का ऑरेंज अलर्ट है।
  • बिहार, झारखंड, असम, मेघालय, बंगाल, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, पूर्वी मध्य प्रदेश, मध्य महाराष्ट्र और कर्नाटक में बारिश का यलो अलर्ट है।

29 अक्टूबर

  • पूर्वी उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ में भारी बारिश का रेड अलर्ट है। बिहार, झारखंड, ओडिशा, पूर्वी मध्य प्रदेश में ऑरेंज अलर्ट है।
  • महाराष्ट्र, कोंकण-गोवा, कर्नाटक, विदर्भ, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, बंगाल, असम और मेघालय में बारिश का यलो अलर्ट है।

राज्यों से मौसम की खबर

उत्तराखंड: सभी जिलों में दो दिन तक मौसम शुष्क, 28 अक्टूबर से बदलेगा मौसम

उत्तराखंड के सभी जिलों में अगले दो दिन मौसम शुष्क रहने की संभावना है। इसके बाद 28 अक्टूबर से मौसम बदल सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में हल्की बारिश के साथ 3500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी हो सकती है।

हिमाचल: 29-30 अक्टूबर को बारिश-बर्फबारी के आसार, 11 शहरों का टेंपरेचर 10॰C से नीचे लुढ़का

हिमाचल प्रदेश में सुबह-शाम और रात के समय ठंड बढ़ने लगी है। प्रदेश के 11 शहरों का न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया है। ट्राइबल एरिया में ठंड का असर ज्यादा है। कुकुमसेरी में न्यूनतम तापमान माइनस 2.5 डिग्री और केलांग में पारा माइनस 0.4 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क चुका है।

राजस्थान: 2 दिन बाद बारिश का अलर्ट, चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के असर से तेज हवा भी चलेगी

बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ का राजस्थान में भी असर दिखेगा। इस चक्रवात से आने वाली समुद्री हवा से आधे राजस्थान में बादल छा सकते हैं। कई जिलों में तेज हवा चलने के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।

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सोनिया बोलीं- नहीं चाहती थी कि राजीव PM बनें:मेरी किताब आएगी तो तमाशा होगा

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नई दिल्ली, एजेंसी। सोनिया गांधी ने कहा- जब राजीव गांधी को देश का प्रधानमंत्री बनाया जा रहा था, तब मैं इस फैसले के खिलाफ थीं। कभी नहीं चाहती थीं कि राजीव गांधी प्रधानमंत्री बनें।

मेरी किताब आने पर कुछ ‘तमाशा’ जरूर होगा। दशकों से लोग मेरी कहानी बता रहे, अब मेरी बारी है अपनी कहानी बताने की।

सोनिया गांधी पर लिखी गई किताब ‘बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ 10 नवंबर को रिलीज होगी। उन्होंने मंगलवार को X पर इसका नया वीडियो पोस्ट किया।

यह X पर पिछले हफ्ते जुड़ने के बाद सोनिया गांधी की दूसरी पोस्ट है। वीडियो में वह किताब के पन्ने पलटते हुए अपनी कहानी खुद बताने की बात कहती हैं।

सोनिया ने 5 दिन में सोशल मीडिया पर तीसरा वीडियो पोस्ट किया। 22 अक्टूबर को इंस्टाग्राम पर और 24 अक्टूबर को एक्स पर डेब्यू किया था।

सोनिया ने कहा- बहुत सी बातें मनगढ़ंत थीं

सोनिया ने कहा, बहुत सी बातें या तो मनगढ़ंत थीं या फिर उन्हें बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया था। इसलिए मुझे लगा कि अब मुझे खुद अपनी कहानी लिखनी चाहिए और तथ्यों और घटनाओं को ठीक वैसे ही बताना चाहिए, जैसे वे असलियत में घटी थीं।

राजीव से रेस्टोरेंट में मिलीं सोनिया, वहीं प्यार हुआ

शनिवार को X पर सोनिया ने पहले पोस्ट में लिखा- कैम्ब्रिज में राजीव गांधी से पहली मुलाकात ने दोस्ती का रास्ता खोला।

सोनिया ने कहा-

यहीं से प्यार की शुरुआत हुई, हमने साथ मिलकर यादों की एक दुनिया बनाई।

सोनिया ने किताब खोलकर बताया- इसमें प्रियंका की कई तस्वीरें हैं।

सोनिया ने किताब खोलकर बताया- इसमें प्रियंका की कई तस्वीरें हैं।

सोनिया की जिंदगी के किस्से

पहली मुलाकात में ही राजीव पसंद आ गए

सोनिया ने बताया कि राजीव गांधी से पहली बार मिलने पर उन्हें तुरंत लगा कि वह ऐसे व्यक्ति हैं, जिनके साथ वह रहना चाहेंगी। बाद में उन्हें पता चला कि राजीव भी ऐसा ही महसूस करते थे। दोनों की दोस्ती पार्टियों, घूमने और छात्रों की बैठकों में साथ समय बिताने से आगे बढ़ी।

उन्होंने कहा

वह बहुत सौम्य दिखने वाले व्यक्ति थे। बेशक, वह बहुत अच्छे दिखते थे। लेकिन उनका सौम्य स्वभाव साफ नजर आता था।

इंदिरा से पहली मुलाकात और नए परिवार में ढलना

राजीव से शादी के बाद सोनिया ने नेहरू-गांधी परिवार में अपनी जगह बनाई। आत्मकथा में अपनी सास और तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी से पहली मुलाकात और भारत में परिवार के साथ जीवन बिताने के अनुभवों का जिक्र है।

उन्होंने लिखा कि यहां की भाषा, खानपान और संस्कृति से तालमेल बैठाना भी जीवन का हिस्सा था। किताब में हिंदी सीखने, साड़ी पहनने और भारतीय जीवनशैली अपनाने के बारे में भी लिखा है।

इंदिरा और राजीव की हत्या के बाद बदली जिंदगी

1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने। सात साल बाद, 1991 में राजीव की भी हत्या कर दी गई। सोनिया ने बताया कि अपनों को खोने के दर्द ने उन्हें सार्वजनिक जीवन और राजनीति की ओर धकेला। इससे पहले वह अपनी निजी जिंदगी को सार्वजनिक नजरों से दूर रखना चाहती थीं।

राजीव की हत्या के बाद भी राजनीति से दूर रहीं

1991 में राजीव की हत्या के बाद भी सोनिया राजनीति से दूर रहीं। पीवी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बने। 1996 तक कांग्रेस कमजोर होने लगी और पार्टी में कई गुट बन गए।

1997 में कांग्रेस को एकजुट करने के लिए सोनिया ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ली। 62 दिन बाद 1998 में वे कांग्रेस अध्यक्ष बन गईं। सोनिया 2017 तक अध्यक्ष रहीं, जो पार्टी के इतिहास में सबसे लंबा कार्यकाल है।

पीएम बनने का मौका मिला, लेकिन मनमोहन सिंह को चुना

2004 में कांग्रेस ने 14 सहयोगी दलों के साथ UPA बनाया। चुनाव के बाद लेफ्ट समेत कई दलों के समर्थन से UPA को 335 सांसदों का समर्थन मिला। सहयोगियों ने सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री बनाने का समर्थन किया, लेकिन उन्होंने 18 मई 2004 को पद ठुकरा दिया। इसके बाद मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने।

हालांकि, NDA ने सोनिया के विदेशी नागरिक का मुद्दा उठाकर उनके पीएम बनने का विरोध किया। इसके कारण सोनिया ने पीएम पद ठुकरा दिया और मनमोहन सिंह को पीएम बनाने का प्रस्ताव रखा। मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बनें। हालांकि, कहा जाता है कि पर्दे के पीछे रहकर सरकार की बागडोर सोनिया के हाथों में ही थी।

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सुप्रीम कोर्ट ने SIR पर कहा-हमें सब पता, जांच करेंगे:याचिकाकर्ता 10 दिन में जवाब दें, कल EC ने कहा था- फैसलों में सबकी सहमति थी

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नई दिल्ली, एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को SIR और चुनाव आयोग के कामकाज पर दायर राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं की याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि आप 10 दिन में चुनाव आयोग के हलफनामे का जवाब दें। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख 17 नवंबर तय की।

दरअसल, याचिकाकर्ताओं की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी ने अपील की थी कि चुनाव आयोग ने सोमवार को ही अपना जवाब दिया है। हमें जवाब देने के लिए वक्त चाहिए।

सिंघवी ने दलील दी कि कोर्ट फिलहाल आयोग में हो रही मीटिंग्स और कम्युनिकेशंस का ब्योरा सुरक्षित रखने का आदेश दे। इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा, “हमें सब पता है। हम जांच करेंगे।”

चुनाव आयोग ने सोमवार को ही कहा था कि SIR से जुड़े सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए थे।

चुनाव आयोग ने कहा था- SIR का फॉर्म 6 नहीं बदला

चुनाव आयोग ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हमने SIR के फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया है। नियमों के अनुसार इस पर बदलाव का अधिकार केंद्र के पास है।

फैसलों पर CEC ज्ञानेश कुमार, कमिश्नर सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी तीनों की सहमति थी। कोर्ट में दाखिल एफिडेविट पर भी तीनों के दस्तखत हैं।

सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग के जवाब

  • फाइल पर आपत्ति लिखना, फैसले का विरोध नहीं: आयोग ने कहा कि फाइल पर लिखे सवाल, सुझाव या आपत्तियां अपने आप में आयोग का अंतिम फैसला नहीं होतीं।
  • नाम का पुरानी वोटर लिस्ट से मिलान नहीं हुआ तो BLO घर आएंगे: जिन लोगों के नाम पुरानी वोटर लिस्ट से नहीं जुड़ पाए हैं, उनके जरूरी दस्तावेज BLO घर जाकर जुटाएंगे और ऑनलाइन अपलोड करेंगे।
  • हर वोटर को सुनवाई के लिए दफ्तर नहीं बुलाया जाएगा: आयोग ने कहा कि ऐसे वोटरों को आम तौर पर खुद पेश होने की जरूरत नहीं होगी। जरूरत पड़ने पर सुनवाई होगी और जहां संभव होगा, ऑनलाइन की जाएगी।
  • वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने-काटने का फैसला अधिकारी करेंगे: आयोग ने साफ किया कि वोटर लिस्ट में किसी का नाम बिना सक्षम चुनाव अधिकारी (ERO) के आदेश के न जोड़ा जाएगा और न हटाया जाएगा।
  • ECINet की जांच के लिए विशेषज्ञों की टीम: IIT मद्रास और IISc बेंगलुरु के विशेषज्ञों की एक समिति बनाई गई है। यह टीम जांचेगी कि ECINet प्लेटफॉर्म ठीक से काम कर रहा है या नहीं और नियमों का पालन हो रहा है या नहीं।
  • CEC को हटाना आसान नहीं: आयोग ने कहा कि संविधान के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी प्रक्रिया और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जिन पर सुप्रीम कोर्ट के किसी जज को हटाया जाता है।
  • अभी संक्षिप्त जवाब, आगे विस्तार से जवाब देंगे: आयोग ने कहा कि दशहरे की छुट्टियों के कारण फिलहाल छोटा जवाब दाखिल किया गया है। जरूरत पड़ने पर वह हर आरोप का विस्तार से जवाब भी देगा।

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