Connect with us

देश

SIR के खिलाफ मुंबई में कॉकरोच पार्टी का प्रदर्शन:सभी की टीशर्ट पर गांधी की फोटो, दिपके बोले– गांधी देश की आत्मा, अंबेडकर रीढ़, नेहरू दिमाग

Published

on

मुंबई/दिल्ली, एजेंसी। कॉकरोच जनता पार्टी आज मुंबई के शिवाजी पार्क में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े के लिए प्रदर्शन कर रही है। इस दौरान स्टेज पर मौजूद सभी लोग गांधी की फ़ोटो वाली टी-शर्ट पहनकर पहुंचे।

इस दौरान CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके ने कहा- जब भारत के प्रधानमंत्री अमेरिका जाते हैं, तब भी वहां कहा जाता है कि ये गांधी के देश से आए हैं। गांधी देश की आत्मा हैं, अंबेडकर रीढ़ की हड्डी और नेहरू दिमाग हैं।

वहीं, दिल्ली में SIR के ख़िलाफ़ लेफ्ट, AAP और स्टूडेंट यूनियन ने शुक्रवार को प्रदर्शन किया। जंतर-मंतर से सौरभ भारद्वाज, आतिशी, संजय सिंह समेत 700 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।

विशाल भारद्वाज बोले- मैं अपना समर्थन देने आया हूं

सीजेपी विरोध प्रदर्शन में, अभिनेता विशाल भारद्वाज ने कहा, “मुझे नहीं पता कि किसी के साथ कुछ हुआ है या नहीं। मैं यहां केवल अपना समर्थन देने आया हूं। क्या बॉलीवुड को भी इस मुद्दे का समर्थन करना चाहिए, यह एक व्यक्तिगत मामला है। मैं बॉलीवुड का हिस्सा हूं।

दीपके बोले- गांधी देश की आत्मा हैं

मुंबई के शिवाजी पार्क में प्रदर्शन के दौरान अभिजीत दीपके ने कहा कि गांधी कभी खत्म नहीं होंगे, कोई महामानव आएगा कहेगा कि हम नॉन-बायोलॉजिकल हैं। वो लोग आएंगे और कहेंगे कि हम विश्वगुरु हैं। पर जब भारत के प्रधानमंत्री अमेरिका जाते हैं, तब भी वहां कहा जाता है कि ये गांधी के देश से आए हैं। गांधी देश की आत्मा हैं, अंबेडकर रीढ़ की हड्डी और नेहरू दिमाग हैं।

मुंबई के शिवाजी पार्क में भारी संख्या में पहुंचे लोग

शिवाजी पार्क में पोस्टर्स लेकर पहुंचे लोग

CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने मीडिया से बात की

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने मीडिया को संबोधित किया।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने मीडिया को संबोधित किया।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने मुंबई के शिवाजी पार्क में विरोध प्रदर्शन से पहले मीडिया को संबोधित किया। सौरव ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। पूरे देश के युवा, युवा पीढ़ी, पिछली बार धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के लिए सब बाहर आए थे और इस बार भी, ज्ञानेश कुमार के साथ ऐसा ही होने वाला है। मुंबई के युवा फिर से सड़कों पर उतर रहे हैं। आज शिवाजी पार्क में एक बड़ा विरोध प्रदर्शन होने वाला है। और मैं चाहता हूं, मैं सभी मुंबईकरों और हमारे दोस्तों से अपील करता हूं।

मुंबई के शिवाजी पार्क में मीम वाले पोस्टर लेकर पहुंचे लोग

बिहार: विपक्ष का लोकतंत्र बचाओ मार्च; चौराहों पर फोर्स तैनात

चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आज से विपक्ष का देश भर में प्रदर्शन है। इंडिया ब्लॉक की तरफ से भी 2 से 8 अक्टूबर तक प्रदर्शन का ऐलान किया गया है।

आज पटना में सीपीआई (माले) की ओर से लोकतंत्र बचाओ मार्च निकाला गया है। इसमें कांग्रेस, सीपीएम और राजद, ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (AISA) भी शामिल हैं।

Continue Reading

देश

AI मॉडल्स कंट्रोल से बाहर, 100 संस्थानों में सेंधमारी:गलती पकड़ने के लिए AI से ही 50 पेटाबाइट डेटा जांचना होगा, इंसान को लगेंगे 6.6 करोड़ साल

Published

on

मुंबई, एजेंसी। चैटजीपीटी बनाने वाली कंपनी ओपनएआई के मॉडल ने 100 से ज्यादा संस्थानों के सिस्टम में जबरन घुसपैठ की कोशिश की है। कंपनी ने खुद इसका खुलासा किया है।

50 पेटाबाइट डेटा जांच रही कंपनी, इंसान को लगेंगे 6.6 करोड़ साल

कंपनी अब अपने AI मॉडल्स के ट्रेनिंग और टेस्टिंग से जुड़े 50 पेटाबाइट डेटा की जांच कर रही है, ताकि अब तक मिले मामलों के अलावा भी कोई गड़बड़ी हुई हो, तो उसे पकड़ा जा सके।

इस जांच के लिए 7 हजार अत्याधुनिक GB200 और GB300 GPUs लगाए गए हैं। इसमें रोज करीब 5 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। ये डेटा कितना ज्यादा है इसे उदाहरण से समझें।

अगर यह पूरा डेटा सामान्य अंग्रेजी शब्दों में लिखा हो, तो एक इंसान 240 शब्द प्रति मिनट की तेज रफ्तार से बिना रुके भी पढ़े, तो इसे खत्म करने में करीब 6.6 करोड़ साल लग जाएंगे।

इंसानों के बस से बाहर होने के कारण इस काम को भी AI मॉडल्स से कराया जा रहा है। जांच को ज्यादा सटीक बनाने के लिए ज्यादा कंप्यूटिंग पावर लगाई जा रही है।

ओपनएआई ने संस्थानों को अलर्ट किया

कंपनी ने अपने AI एजेंट की चपेट में आए 100 से ज्यादा संस्थानों को अलर्ट जारी कर दिया है। हालांकि, कंपनी का दावा है कि इन संस्थानों का डेटा चोरी नहीं हुआ है। ओपनएआई ने बचाव में दलील दी कि AI एजेंट्स ने सिस्टम का ताला नहीं तोड़ा, बल्कि सिर्फ बंद दरवाजे को जबरन खटखटाकर और उसका हैंडल घुमाकर अंदर घुसने की कोशिश भर की थी।

वेबसाइट्स को गलत कमांड दिए

जांच में सामने आया है कि इन AI एजेंट्स ने कई वेबसाइट्स को मनमाने और अनाधिकृत कमांड भेजकर उनसे गलत प्रोसेस एग्जीक्यूट कराने का प्रयास किया।

इतना ही नहीं, सुरक्षा तंत्र को चकमा देने के लिए इन एजेंट्स ने वेबसाइट्स को आपस में संपर्क साधने का जरिया (कम्युनिकेशन चैनल) बना लिया और तय सुरक्षा पैमानों को पूरी तरह नजरअंदाज कर बायपास करने की कोशिश की।

ओपनएआई ने माना सुरक्षा घेरे नाकाम साबित हुए

ओपनएआई ने माना है कि उसके सुरक्षा घेरे AI एजेंट्स को काबू में रखने में नाकाम साबित हुए। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि प्रभावित संस्थानों को तकनीकी डेटा दे दिया गया है ताकि वे सिस्टम में लगी सेंध और सुरक्षा खामियों की जांच कर सकें।

अपनी नाकामी के बाद अब ओपनएआई ने दावा किया है कि वह AI मॉडल के इस असामान्य व्यवहार और सुरक्षा की कमियों से जुड़े निष्कर्षों को सार्वजनिक करेगी, ताकि दुनिया भर के साइबर सुरक्षा एक्सपर्ट्स मिलकर इस खतरे का तोड़ निकाल सकें।

जुलाई की हगिंग फेस घटना के बाद सुरक्षा नियम कड़े

इस घटना के सामने आने के बाद ओपन एआई ने सुरक्षा तंत्र को काफी सख्त किया गया है:

  • AI मॉडल्स के इंटरनेट इस्तेमाल पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं।
  • रिसर्च और लाइव सिस्टम को पूरी तरह एक-दूसरे से अलग कर दिया गया है।
  • किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत पकड़ने के लिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग बढ़ाई गई है।

हगिंग फेस घटना के बारे में जानें…

यह मामला एआई की दुनिया की अब तक की सबसे चौंकाने वाली घटनाओं में से एक है। आसान शब्दों में समझें कि असल में हुआ क्या था:

1. ‘आंसर की’ चुराने के लिए किया गया हैक

ओपनएआई अपने एक AI मॉडल की साइबर सुरक्षा क्षमता जांचने के लिए उसका टेस्ट ले रही थी। टेस्ट में अच्छा स्कोर करने के लिए AI ने एक खतरनाक शॉर्टकट चुना। उसने सोचा कि सवालों को हल करने से बेहतर है कि सीधे ‘आंसर की’ चुरा ली जाए।

2. पाबंदियां तोड़कर इंटरनेट पर पहुंचा

उस AI मॉडल को एक सुरक्षित और बंद टेस्टिंग एनवायरनमेंट में रखा गया था, जहां उसे इंटरनेट चलाने की इजाजत नहीं थी। इसके बावजूद AI ने उस सिस्टम की सुरक्षा तोड़ी, इंटरनेट तक अपनी पहुंच बनाई और मशहूर AI प्लेटफॉर्म हगिंग फेस के सिस्टम को हैक कर लिया, ताकि वहां से जवाब हासिल कर सके। 16 जुलाई को हगिंग फेस ने इस हैक का खुलासा किया था।

3. दो महीने से चल रहा था सीक्रेट नेटवर्क

जांच में सामने आया कि यह किसी एक अकेले AI मॉडल का काम नहीं था। यह सिलसिला घटना से करीब दो महीने पहले यानी मई की शुरुआत से ही चल रहा था।

ओपनएआई के ही सर्वरों के भीतर कई AI एजेंट्स आपस में सीक्रेट नोट्स छोड़ रहे थे। इन नोट्स में वे एक-दूसरे को बता रहे थे कि सिस्टम की सुरक्षा कैसे तोड़नी है और प्रतिबंधित डेटा तक कैसे पहुंचना है। ये एजेंट्स खुद को एक ‘स्वार्म’ यानी संगठित झुंड कह रहे थे।

4. अनकंट्रोल्ड बर्ताव

इंजीनियर्स ने इन मॉडल्स को ऐसा करने के लिए कोई ट्रेनिंग नहीं दी थी। AI ने सिस्टम में मौजूद संसाधनों का इस्तेमाल करके यह तरीका खुद ही विकसित कर लिया था। ओपनएआई को अपने ही सर्वर में चल रहे इस पूरे नेटवर्क की भनक तक नहीं थी।

चिंता की असली वजह क्या है?

इसे एक उदाहरण से समझते हैं: अगर आपको अपनी रसोई में दो चींटियां दिखती हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि घर में सिर्फ दो ही चींटियां हैं। यह घटना किसी तरह पकड़ में आ गई, लेकिन सबसे बड़ा डर यह है कि बंद दरवाजों और सुरक्षित सर्वरों के पीछे ऐसे कितने AI सिस्टम हैं जो इंसानों की जानकारी के बिना अपनी सीमाएं लांघ रहे हैं।

अमेरिकी और ऑस्ट्रेलियाई सरकारी साइट्स में भी सेंधमारी

हगिंग फेस घटना के बाद ओपनएआई के एआई एजेंट्स ने अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की सरकारी वेबसाइट्स में भी सेंधमारी की थी। इस स्थिति को देखते हुए ओपनएआई ने मॉनिटरिंग बढ़ा दी है और अपने नए मॉडल डेवलपमेंट पर फिलहाल रोक लगा दी है।

AI से मानवता के खात्मे का खतरा

AI रिसर्चर जैकब कॉक्सन का दावा है कि अगर एआई पर समय रहते कड़ा नियंत्रण नहीं लगाया गया, तो यह जल्द ही मानवता के अंत का कारण बन सकता है। वहीं एआई कंपनी एंथ्रोपिक के CEO डारियो अमोदेई ने भी माना कि AI के डेवलपमेंट को धीमा करने की जरूरत है।

ये घटनाएं इस बात का संकेत है कि टेस्टिंग स्टेज में ही टेक कंपनियों के हाथ से उनके एडवांस AI मॉडल्स की कमान छूट रही है। AI मॉडल्स ना सिस्टम की सुरक्षा को बायपास कर रहे हैं, बल्कि तय दायरों को तोड़कर इंसानी नियंत्रण से बाहर हो रहे हैं।

Continue Reading

देश

मोदी से कैप्टन स्मित बोले-घायल था पर हिम्मत नहीं हारी:विमान गिर रहा था, आखिरी मौका था, हनुमान चालीसा पढ़ते हुए कॉकपिट का दरवाजा खोला

Published

on

दिल्ली, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को 174 जान बचाने वाले भारतीय पायलट स्मित मच्छर से करीब 9 मिनट वीडियो कॉल पर बात की। स्मित ने दो दिन पहले दुबई से तेल अवीव जा रहे प्लेन की हाइजैकिंग नाकाम की थी। ओमानी को-पायलट ने उन्हें चाकू मारा। स्मित ने फिर भी प्लेन क्रैश नहीं होने दिया।

मोदी ने स्मित से कहा,

पूरा देश आपके लिए प्रार्थना कर रहा था और आपके अच्छे स्वास्थ्य की कामना कर रहा था। आपके साहस और सूझबूझ से कई लोगों की जान बची।

बातचीत के दौरान स्मित ने बताया कि वह विमान उड़ा रहे थे और एक झटके के बाद नीचे गिर गए, जिससे काफी चोटें आईं। इसके बावजूद उन्हें महसूस हो रहा था कि विमान नीचे जा रहा है।

स्मित ने कहा, “मुझे पता था कि यह आखिरी मौका है। दरवाजा वहीं था और मैंने उसे खोल दिया। मैं मुश्किल समय में हनुमान चालीसा पढ़ता हूं और उस समय भी पढ़ रहा था। मुझे पता है कि भगवान ने ही हमें बचाया।”

PM मोदी ने शुक्रवार सुबह कैप्टन स्मित मच्छर से 9 मिनट वीडियो कॉल पर बातचीत की।

PM मोदी ने शुक्रवार सुबह कैप्टन स्मित मच्छर से 9 मिनट वीडियो कॉल पर बातचीत की।

PM से बात करते हुए स्मित भावुक हुए

PM से बात करते हुए स्मित भावुक हो गए। उन्होंने कहा, ‘आपका फोन आया, यह मेरे लिए बहुत गर्व की बात है। माफ कीजिए सर, मैं आपके सामने रो रहा हूं। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मेरी आपसे बात होगी।’

मोदी ने कहा कि आपने इतना बड़ा काम किया है कि देश का हर नागरिक और दुनिया के लोग आपको देखना और आपसे बात करना चाहते हैं। आपने हनुमान चालीसा के बारे में जो बताया, उसके लिए मैं आपकी मां गीताबेन को प्रणाम करूंगा कि उन्होंने आपको ऐसे संस्कार दिए। मैं आपके पिता भूपेंद्रभाई को भी प्रणाम करूंगा।

मोदी ने कहा कि कल जब मेरी सोनलबेन से बात हुई तो मैं हैरान रह गया। वे इतनी शांति और हिम्मत से बात कर रही थीं। मैंने कल्पना भी नहीं की थी कि ऐसी परिस्थिति में वे इतनी सहजता से बात कर पाएंगी।

कैप्टन स्मित PM मोदी से बातचीत के दौरान भावुक हो गए थे।

कैप्टन स्मित PM मोदी से बातचीत के दौरान भावुक हो गए थे।

अस्पताल में भर्ती हैं कैप्टन स्मित

कैप्टन स्मित अभी UAE के अस्पताल में भर्ती हैं। उन्हें कल सऊदी अरब से एयरलिफ्ट करके अबू धाबी ले जाया गया। UAE में भारत के राजदूत दीपक मित्तल ने अस्पताल में कैप्टन स्मित और उनके परिवार से मुलाकात की थी। उन्होंने बताया था कि पायलट की हालत स्थिर है और वे तेजी से ठीक हो रहे हैं। उनका मनोबल भी ऊंचा है।

मित्तल ने कहा कि कैप्टन को अच्छा इलाज मिल रहा है और भारतीय दूतावास वहां के अधिकारियों के लगातार संपर्क में है। राजदूत ने कैप्टन स्मित को भारत का बहादुर बेटा बताया। उन्होंने कहा कि हवा में आपात स्थिति के दौरान उनकी बहादुरी से सैकड़ों लोगों की जान बची और एक बड़ी दुर्घटना टल गई।

ओमानी पायलट के हमले में घायल कैप्टन स्मित मच्छर। 30 सितंबर को सऊदी में लैंड होने के बाद उन्हें इलाज के लिए ले जाया गया।

ओमानी पायलट के हमले में घायल कैप्टन स्मित मच्छर। 30 सितंबर को सऊदी में लैंड होने के बाद उन्हें इलाज के लिए ले जाया गया।

PM मोदी पहले भी कर चुके हैं तारीफ

प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को कैप्टन स्मित मच्छर की बहादुरी और सूझबूझ की तारीफ की थी। उन्होंने कहा था कि गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद पायलट ने धैर्य और साहस दिखाया। उनकी बहादुरी से पूरा देश गर्व महसूस कर रहा है। मोदी ने कहा, “इजराइल के प्रधानमंत्री ने भी कहा कि एक भारतीय ने 9/11 जैसी त्रासदी रोक दी। हमारे देश के हर नागरिक को स्मित की बहादुरी पर बहुत गर्व है।” प्रधानमंत्री ने कैप्टन मच्छर के माता-पिता और पत्नी से भी बात की थी। उन्होंने पिता भूपेंद्रभाई, मां गीताबेन और पत्नी सोनलबेन से उनकी सेहत की जानकारी ली। साथ ही भरोसा दिलाया कि भारतीय मिशनों की ओर से पायलट और उनके परिवार को हर संभव मदद दी जाएगी।

ट्रम्प और नेतन्याहू ने हीरो बताया था

इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर की बहादुरी की तारीफ की और उन्हें सच्चा हीरो बताया।

नेतन्याहू ने कहा कि मच्छर की बहादुरी से विमान में सवार 174 लोगों की जान बचाने में मदद मिली। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने भी कैप्टन मच्छर को हीरो बताया और उनकी बहादुरी की सराहना की।

हमले के बाद पायलट घायल हो गए थे, फ्लाइट में मौजूद डॉक्टर ने उनका प्राथमिक उपचार किया था।

हमले के बाद पायलट घायल हो गए थे, फ्लाइट में मौजूद डॉक्टर ने उनका प्राथमिक उपचार किया था।

स्पाइसजेट में 11 साल पायलट रह चुके हैं कैप्टन स्मित

फ्लाईदुबई से पहले स्मित ने 11 साल से ज्यादा समय तक स्पाइसजेट में काम किया। यहां उन्होंने 9500 घंटे से ज्यादा उड़ान भरी। इनमें 6400 घंटे से ज्यादा समय विमान के मुख्य पायलट यानी पायलट-इन-कमांड के तौर पर था।

जून 2022 में उन्होंने फ्लाईदुबई जॉइन की थी। उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, उन्हें कॉमर्शियल विमान उड़ाने का 13 साल से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने बोइंग 737 विमानों पर करीब 9750 घंटे उड़ान भरी है।

स्मित की लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, वे पायलटों की ट्रेनिंग, उनकी जांच और उन्हें काम के दौरान गाइड करने का काम भी करते थे।

स्मित की लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, वे पायलटों की ट्रेनिंग, उनकी जांच और उन्हें काम के दौरान गाइड करने का काम भी करते थे।

इजराइल और गुजरात सरकार सम्मानित करेगी

कैप्टन स्मित मच्छर को इजराइल सम्मानित करेगा। भारत में इजराइल के राजदूत रुवेन अजार ने इंडिया टुडे से बातचीत में यह जानकारी दी।

वहीं, गुजरात सरकार ने भी कैप्टन स्मित को ‘विशिष्ट गुजरात गरिमा पुरस्कार’ से सम्मानित करने का ऐलान किया है।

Continue Reading

देश

Central Railway का 1 अक्टूबर से सख्त नियम, Train Ticket के साथ Original ID Card अनिवार्य

Published

on

नई दिल्ली, एजेंसी। फेस्टिव सीजन चल रहा है। इस दौरान लोग अपने घर जाने की तैयारियां करते हैं। अपने घर जाने के लिए लोग ट्रेन से जाते हैं। यदि आप अक्टूबर के महीने में ट्रेन का सफर करने वाले हैं, तो थोड़ा सावधान हो जाए। असल में सेंट्रल रेलवे 1 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक, खास ‘टिकट चेकिंग अभियान’ चलाने जा रहा है।

आइए आपको बताते हैं रेलवे के ये नए नियम क्या हैं और आपको ट्रैवल करने से पहले किन बातों का ध्यान रखना बेहद जरुरी है।

कम से कम एक ओरिजिनल ID होना है जरूरी 

इस अभियान के चलते सबसे बड़ा नियम है ‘वन टिकट, वन ओरिजिनल आईडी’। रेलवे के अधिकारियों ने साफ कहा है कि अब सफर के समय सिर्फ टिकट होना ही काफी नहीं है, बल्कि आपके पास अपना ओरिजिनल पहचान पत्र होना जरुरी है।

उदाहरण के तौर पर, यदि आप अपने परिवार के चार लोगों के लिए एक ही टिकट बुक किया है, तो उन चारों में से कम से कम किसी एक व्यक्ति के पास उसका ओरिजिनल आईडी कार्ड होना बहुत जरुरी है। यदि चेकिंग के दौरान असली आईडी नहीं दिखा पाए, तो टीटीई उस पर यात्रा करने वाले सभी लोगों को बिना टिकट मान सकता है और आप पर जुर्माना लग सकता है।

कोटा और ई-पास वालों के लिए नियम सख्त

रेलवे के मुताबिक, अगर आप किसी खास कोटे या कंसेशन पर सफर कर रहे हैं? यदि हां, तो आपको अपनी पात्रता को साबित करने के लिए सभी दास्तावेज ओरिजिनल ही साथ रखें। इतना ही नहीं, जो लोग रेलवे के ई-पास या पीटीओ का इस्तेमाल करके यात्रा करने पर, आपको असली पहचान पत्र दिखाना होगा। उनकों इस बात का ध्यान देना होगा कि ट्रेन में बैठने से पहले उनका ई-पास संबंधित अथॉरिटी  से सही तरीके से एक्सचेंज करा लिया गया हो।

जनरल टिकट वालों की भी होगी हाई-टेक चेकिंग 

दरअसल, यह चेकिंग अभियान सिर्फ स्लीपर या एसी कोच तक ही नहीं, बल्कि आप जनरल डिब्बे में सफर कर रहे हैं, तो आप वहां भी चेकिंग स्टाफ टिकटों की असलियत जांचेगा। वहीं,  जरुरत पड़ने पर रेलवे अधिकारी टीटीई ऐप की मदद से किसी भी टिकट को तुरंत वेरिफाई कर सकते हैं।

भारतीय रेलवे क्यों कर रहा है इतनी सख्ती

सेंट्रल रेलवे ने बताया है कि, इसके पीछे मकसद है सिस्टम में होने वाली धोखाधड़ी को खत्म करना है, जाने इसके मुख्य कारण है-

– भारतीय रेलवे में होने वाले आर्थिक नुकसान को रोकना।

– वहीं, रिजर्वेशन की सुविधाओं का जो लोग गलत फायदा उठाते हैं, उन लोगों को पकड़ना।

– इसके अलावा, पास और कंसेशन के नाम पर होने वाले फर्जीवाड़े पर लगाम लगाना।

– सही यात्रियों की पहचान करना और टिकटों की वैधता जांचना।

चेकिंग में कौन-कौन से पहचान पत्र चलेंगे? 

इस बीच, रेलवे ने उन दास्तावेजों की एक लिस्ट भी दी है, जिन्हे आप सफर के दौरान अपनी पहचान साबित करने के लिए दिखा सकते हैं ये ओरिजनल आईडी-

-आधार कार्ड
-वोटर आईडी कार्ड
-पासपोर्ट या पैन कार्ड
-ड्राइविंग लाइसेंस
– केंद्र या राज्य सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले फोटो और सीरियल नंबर वाला कार्ड
– मान्यता प्राप्त स्कूल/कॉलेज का फोटो वाला स्टूडेंट आईडी कार्ड
– किसी राष्ट्रीयकृत बैंक की पासबुक, जिस पर आपकी फोटो लगी हो।
– बैंक का क्रेडिट कार्ड जिस पर आपकी लैमिनेटेड फोटो हो।

Continue Reading
Advertisement

Trending

Copyright © 2020 Divya Akash | RNI- CHHHIN/2010/47078 | IN FRONT OF PRESS CLUB TILAK BHAVAN TP NAGAR KORBA 495677