जिला प्रशासन की वेस्ट टू वेल्थ पहल ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दी नई उड़ान
दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले ने स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के कार्यान्वयन में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। जनपद पंचायत दुर्ग द्वारा ग्राम पंचायत कोलिहापुरी में स्थापित प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाई को अब जिले के प्रथम आधिकारिक मटेरियल रिकवरी सेंटर (एमआरसी) के रूप में विकसित किया गया है। यह केंद्र न केवल कचरा निपटान का एक केंद्र है, बल्कि यह आत्मनिर्भर ग्राम स्वराज की दिशा में एक सशक्त कदम है।
तकनीकी मार्गदर्शन और सामुदायिक भागीदारी से कचरा प्रबंधन बना लाभदायक उद्यम
इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कलेक्टर अभिजित सिंह ने कहा कि “कोलिहापुरी एमआरसी की स्थापना का मुख्य उद्देश्य कचरे के वैज्ञानिक निष्पादन के साथ- साथ ग्रामीण क्षेत्रों में वेस्ट टू वेल्थ (कचरे से कमाई) के मॉडल को मूर्त रूप देना है। यह केंद्र इस बात का प्रमाण है कि यदि सही तकनीकी मार्गदर्शन और सामुदायिक भागीदारी हो, तो ग्रामीण कचरा प्रबंधन को एक लाभदायक उद्यम में बदला जा सकता है। हम इस मॉडल को पूरे जिले के लिए एक मानक (बेंचमार्क) के रूप में देख रहे हैं।”
381 गांवों के प्लास्टिक कचरे का वैज्ञानिक पद्धति से रिसाइकिल
जिला पंचायत दुर्ग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बजरंग दुबे ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि कोलिहापुरी एमआरसी को जिले के स्वच्छता अभियान का नोडल सेंटर बनाया गया है। इसके कार्यक्षेत्र का विस्तार करते हुए दुर्ग जनपद के सभी 81 ग्रामों, धमधा के ग्राम लिटिया और पाटन के ग्राम पतोरा की इकाइयों को इस केंद्र से लिंकेज प्रदान की गई है। इस एकीकृत तंत्र के माध्यम से जिले के कुल 381 गांवों में उत्पन्न होने वाले प्लास्टिक कचरे को एकत्र कर उसे वैज्ञानिक पद्धति से रिसाइकिल किया जा रहा है।
गांवों के सेग्रीगेशन शेड से प्लास्टिक वेस्ट के संग्रहण की रियल-टाइम मॉनिटरिंग
कचरा प्रबंधन की सबसे बड़ी चुनौती—यानी घर-घर से कचरा संग्रहण—को हल करने के लिए जिला प्रशासन ने स्मार्ट तकनीक का उपयोग किया है। कचरा प्रबंधन में तकनीक का समावेश करते हुए, जिला खनिज न्यास निधि (डीएमएफ) के माध्यम से 04 अत्याधुनिक ई-रिक्शा उपलब्ध कराए गए हैं। इन रिक्शाओं की विशेषता यह है कि इनमें जीपीएस ट्रैकिंग प्रणाली स्थापित की गई है, जो सीधे कंट्रोल रूम से जुड़ी है। इसके माध्यम से गांवों के सेग्रीगेशन शेड से प्लास्टिक वेस्ट के संग्रहण की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है। यह संपूर्ण प्रक्रिया केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के पोर्टल पर पंजीकृत है, जो इसके वैज्ञानिक और कानूनी मानकों के अनुरूप होने की पुष्टि करती है।
आर्थिक स्वावलंबन और वेस्ट टू वेल्थ का मॉडल
यह केंद्र आर्थिक रूप से आत्मनिर्भरता की एक सफल गाथा लिख रहा है, जहां प्रतिदिन 150 किलोग्राम प्लास्टिक कचरे को आधुनिक मशीनों के जरिए प्रसंस्करण किया जा रहा है। प्लास्टिक को पिघलाकर उससे लम्स (लम्प्स) तैयार किए जा रहे हैं, जिनकी बाजार में भारी मांग है। इन लम्स को 20 से 25 रुपये प्रति किलो की दर से बड़ी निर्माण कंपनियों को बेचा जा रहा है। पिछले छह महीनों के सफल संचालन के उपरांत, सभी परिचालन खर्चों, बिजली शुल्क, मशीनों के रखरखाव और श्रमिकों के मानदेय का भुगतान करने के पश्चात इकाई प्रतिमाह लगभग 15 हजार रुपए का शुद्ध लाभांश अर्जित कर रही है।
सामाजिक सुरक्षा के साथ समान साप्ताहिक मजदूरी और बीमा कवरेज भी
इस परियोजना ने स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए द्वार खोले हैं। एएस पॉलिमर के साथ हुए एमओयू के तहत स्थानीय निवासियों को प्रत्यक्ष रोजगार दिया गया है। श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उन्हें मनरेगा दरों के समान साप्ताहिक मजदूरी और बीमा कवरेज प्रदान किया गया है।
इस मॉडल का सामाजिक पहलू अत्यंत सराहनीय है कि 5 प्रतिशत लाभ ग्राम पंचायत को सामाजिक कल्याण गतिविधियों के लिए, 5 प्रतिशत लाभ स्थानीय शिव शक्ति स्व-सहायता समूह को सशक्तिकरण हेतु दिया गया है।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम
यह परियोजना स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) और मनरेगा के अभिसरण (कन्वर्जेंस) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। विगत वर्ष 2024 में स्वच्छ भारत मिशन से 6 लाख और मनरेगा से 12 लाख, कुल 18 लाख की लागत से भवन तैयार किया गया। मशीनरी बेलिंग, फटका और श्रेडर मशीनें स्थापित करने हेतु लगभग 8 लाख स्वच्छ भारत मिशन से उपलब्ध कराई गई है। निजी भागीदारी एएस पॉलिमर द्वारा परियोजना में 9 लाख का निवेश किया गया है और बिजली कनेक्शन हेतु 1 लाख रुपये का योगदान दिया गया है। ग्राम पंचायत द्वारा इकाई के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराई गई है। जनपद पंचायत दुर्ग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बताते हुए कहा कि यह मॉडल न केवल गांवों को कचरा मुक्त रखेगा, बल्कि ग्रामीण विकास के लिए एक सतत आय का स्रोत भी बना रहेगा। 11 महीने की अवधि वाला यह समझौता ज्ञापन (एमओयू) दुर्ग जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने में सक्षम है।
जांजगीर-चांपा। जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ में शराब पीने के बाद संदिग्ध परिस्थितियों में बसपा पार्षद समेत दो लोगों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान बसपा पार्षद रामखिलावन जांगड़े (55) और निजी क्लिनिक संचालक जोहितराम खरे (52) के रूप में हुई है।
दोनों ने शुक्रवार देर शाम अपने दो अन्य साथियों के साथ देशी शराब का सेवन किया था। घर पहुंचने के बाद उन्हें सांस लेने में परेशानी होने लगी और उनकी तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद दोनों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पामगढ़ ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर उन्हें बिलासपुर रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान दोनों की मौत हो गई।
रामखिलावन जांगड़े ने सिम्स में, जबकि जोहितराम खरे ने अपोलो अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वहीं, शराब पीने के दौरान साथ रहे कमल नाथ खरे उर्फ राजा की शनिवार को तबीयत बिगड़ने पर उसे इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। मामले में शराब पीने के दौरान मौजूद मुकेश कश्यप उर्फ गोलू को पुलिस ने हिरासत में लिया है। उससे पूछताछ की जा रही है।
बसपा पार्षद रामखिलावन जांगड़े।
निजी क्लिनिक संचालक जोहितराम खरे
जहरीला पदार्थ मिला होने की आशंका
घटना के बाद शराब में जहरीला पदार्थ मिले होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, फिलहाल दोनों की मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है। इसकी पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही हो सकेगी।
दोनों मृतकों के शवों का बिलासपुर में पोस्टमॉर्टम कराया जाना है। मौत के कारणों का पता लगाने के लिए विसरा सुरक्षित रखकर जांच कराए जाने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दोनों की मौत शराब के सेवन से हुई या इसके पीछे कोई अन्य कारण था।
चार लोग साथ बैठकर पी रहे थे शराब
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार देर शाम भाजपा पार्षद रामखिलावन जांगड़े अपने तीन साथियों के साथ बैठकर शराब पी रहे थे। इनमें रामखिलावन जांगड़े और जोहितराम खरे की तबीयत अचानक बिगड़ गई। शराब सेवन के बाद दोनों को सांस लेने में परेशानी होने लगी।
हालत खराब होने पर परिजन और आसपास के लोग उन्हें इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पामगढ़ लेकर पहुंचे। वहां शुरुआती इलाज के बाद दोनों की स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें बिलासपुर रेफर कर दिया।
सिम्स में इलाज के दौरान बसपा पार्षद रामखिलावन जांगड़े की मौत हो गई।
सिम्स और अपोलो अस्पताल में हुई मौत
पामगढ़ से बिलासपुर पहुंचने के बाद रामखिलावन जांगड़े को सिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि जोहितराम खरे का अपोलो अस्पताल में इलाज चल रहा था। इलाज के दौरान दोनों ने दम तोड़ दिया।
दोनों की मौत के बाद मामले को संदिग्ध माना जा रहा है। शराब में जहरीला पदार्थ मिला होने की आशंका के बीच पोस्टमॉर्टम और अन्य जांच के जरिए मौत की वजह पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों की मौत शराब में किसी जहरीले पदार्थ की मौजूदगी के कारण हुई या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी।
सांस लेने में परेशानी के बाद बिगड़ी हालत
एसडीओपी तोपेश वर्मा के अनुसार, दोनों मृतकों ने अपने दो अन्य साथियों के साथ सादी देशी शराब का सेवन किया था। इसके बाद घर पहुंचने पर उन्हें सांस लेने में परेशानी होने लगी। हालत बिगड़ने पर दोनों को बिलासपुर के अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
एसडीओपी ने बताया कि शराब पीने के दौरान मौजूद दो अन्य साथियों की तलाश की जा रही है, ताकि घटना के संबंध में जानकारी जुटाई जा सके।
पोस्टमॉर्टम और जांच रिपोर्ट से स्पष्ट होगी मौत की वजह
दोनों शवों का बिलासपुर में पोस्टमॉर्टम कराया जाना है। मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए विसरा सुरक्षित रखकर जांच कराए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि दोनों की मौत किस वजह से हुई और क्या शराब में किसी जहरीले पदार्थ की मिलावट थी।
फिलहाल पुलिस मामले से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटा रही है। शराब सेवन के दौरान मौजूद दोनों अन्य साथियों से पूछताछ के बाद घटना के संबंध में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर 2026 से धान खरीदी की शुरुआत होने जा रही है। सरकार 3100 रुपए समर्थन मूल्य पर किसानों से धान खरीदेगी। पंजीकृत किसानों से 1 एकड़ में अधिकतम 21 क्विंटल धान लिया जाएगा। धान खरीदी का यह अभियान 31 जनवरी 2027 तक चलेगा।
दुर्ग पंडवानी महासम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने तारीख का ऑफिशियल ऐलान किया। राज्य सरकार ने इस सीजन में कुल 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का बड़ा लक्ष्य रखा है। पिछले साल 140 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया था। धान खरीदी का लक्ष्य इस साल 20 लाख मीट्रिक टन बढ़ा है।
पिछले 5 सालों में 63% बढ़ा धान खरीदी का लक्ष्य
2021-22: 98 लाख मीट्रिक टन
2026-27: 160 लाख मीट्रिक टन
5 साल में लक्ष्य 1.63 गुना बढ़ा
कुल बढ़ोतरी: 62 लाख मीट्रिक टन (करीब 63%)
किसानों को इन बातों का रखना होगा ध्यान:
एग्रीस्टैक पंजीयन अनिवार्य: धान बेचने के लिए इस बार किसानों को एग्रीस्टैक पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीयन कराना जरूरी किया गया है।
टोकन की व्यवस्था: खरीदी केंद्रों पर टोकन के जरिए तय तारीख पर ही धान की बिक्री हो सकेगी।
बायोमेट्रिक सत्यापन: उपार्जन केंद्रों पर पारदर्शिता बरतने के लिए किसानों का बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा।
गुणवत्ता और नमी के मानक: धान में नमी की मात्रा 17 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए, अन्यथा माल रिजेक्ट हो सकता है।
सूरजपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में टीचर और उनके बेटे की हत्या के आरोपी की पत्नी ने अपने पति को फांसी देने की मांग की है। आरोपी की पत्नी और मृतका एक ही स्कूल में टीचर थीं।
आरोपी की पत्नी ने बताया कि करीब 15 दिन पहले ही उसके पति ने बिना उसकी मर्जी के उसका एक करोड़ रुपए का बीमा कराया था। उसे शक है कि अगला टारगेट वह खुद थी। उसका कहना है कि पति ने घटना वाली रात पेंड्रा जाने की बात कहकर उसे गुमराह किया था। उसे पति के इस हत्याकांड के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
आरोपी की पत्नी ने बताया कि पति ने पुलिस की पूछताछ में टीचर की हत्या इगो में करने की बात कही थी। रजनी ने शायद प्रवेश को ‘नामर्द’ कहा था। आरोपी की पत्नी ने कहा, हो सकता है कि दोनों के बीच अवैध संबंध रहे हों, हालांकि इसकी जानकारी मुझे नहीं है।
मामला जयनगर और विश्रामपुर थाना क्षेत्र का है। आरोपी ने टीचर रजनी बरेट (40) से पैसे मांगे, नहीं देने पर उसका गला घोंट दिया। वहीं, मृतका के बेटे सूजल बरेट (18) को सुनसान जगह ले जाकर पत्थर से उसके सिर और सीने पर वार कर उसकी हत्या कर दी थी। पुलिस ने हत्या के आरोप में परवेश कुमार उर्फ प्रवेश कुमार को गिरफ्तार किया है।
बेटे की लाश सड़क किनारे सुनसान जगह में मिली थी।
महिला सरकारी स्कूल में टीचर थी, उसकी लाश बाथरूम में मिली थी।
पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
पत्नी ने कहा-बीमा कराया था, अगला टार्गेट मैं थी
दोहरे हत्याकांड के आरोपी प्रवेश कुमार की गिरफ्तारी के बाद उसकी पत्नी सरिता लकड़ा ने पति से सारे रिश्ते तोड़ने की बात कही और उसे जल्द से जल्द फांसी देने की मांग की।
सरिता कैमरे के सामने फूट-फूटकर रोने लगी। उसने बताया कि हत्या की घटना से करीब 15 दिन पहले ही उनके पति प्रवेश ने बिना उनकी मर्जी के टाटा एआईए कंपनी में उनका एक करोड़ रुपए का बीमा कराया था। सरिता ने आशंका जताई कि उनके पति का अगला टारगेट वह खुद थी।
पत्नी बोली- जान का खतरा, पति ने झूठ बोला था
सरिता लकड़ा ने कहा कि अब उसे अपनी जान का डर सता रहा है। पति ने एक करोड़ रुपए का बीमा इसलिए कराया था, ताकि मेरी मौत के बाद बीमा की रकम लेकर वह आसानी से फरार हो सके।
सरिता ने बताया कि घटना वाली रात भी पति ने पेंड्रा जाने की बात कहकर उसे गुमराह किया था। उन्हें इस हत्याकांड की जानकारी बाद में पुलिस के जरिए मिली। सरिता ने प्रशासन से अपनी सुरक्षा की मांग की है।
चार साल से थे लिव इन में
हत्याकांड का आरोपी प्रवेश कुमार मूल रूप से हरियाणा के करनाल जिले का रहने वाला है। वह ऑटो पार्ट्स सप्लाई का कारोबार करता था और विश्रामपुर में रह रहा था। कोरोना काल में उसकी आर्थिक स्थिति खराब हो गई थी। उसने कारोबार के लिए बैंक से 20 लाख रुपए का लोन भी लिया था।
आर्थिक तंगी के कारण उसे अपनी दुकान बंद करनी पड़ी। इसके बाद वह अलग-अलग दुकानों पर ऑटो पार्ट्स की सप्लाई करने लगा। सरिता लकड़ा के संपर्क में आने के बाद दोनों वर्ष 2022 से पति-पत्नी की तरह रह रहे थे। सरिता ने बताया कि इस वारदात के बाद उन्होंने अपनी मांग का सिंदूर मिटा दिया है।
‘नामर्द’कहने पर हत्या, कहा- हो सकता है अवैध संबंध
सरिता ने बताया कि उनके पति प्रवेश कुमार ने पुलिस की पुलिस की पूछताछ में कहा था कि उसने इगो में आकर रजनी की हत्या कर दी। सरिता के मुताबिक, रजनी ने शायद प्रवेश को ‘नामर्द’ कहा था, जिसके कारण उसने हत्या की।
सरिता ने यह भी कहा कि हो सकता है कि प्रवेश और रजनी के बीच अवैध संबंध रहे हों, लेकिन उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।
टीचर और बेटे की हुई थी हत्या
जानकारी के मुताबिक, 10 अक्टूबर की सुबह जयनगर थाना क्षेत्र के महावीरपुर में नेशनल हाईवे-43 से लगी ग्रामीण सड़क के किनारे एक लड़के का शव मिला था। लड़के की हत्या के बाद शव सड़क किनारे फेंका गया था।
मृतक की पहचान बिश्रामपुर के कार्मल कॉन्वेंट स्कूल में 12वीं के छात्र सुजल बरेठ (18) के रूप में हुई। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि सुजल की स्कूटी घर से करीब 500 मीटर दूर एक पेट्रोल पंप पर लावारिस हालत में खड़ी थी।
मां का शव बाथरूम में मिला
देर रात पुलिस सुजल के घर पहुंची, तो मुख्य दरवाजे पर ताला लगा मिला। उसकी मां रजनी बरेठ का भी पता नहीं चल रहा था। इसके बाद बिश्रामपुर पुलिस ने सुजल के रिश्तेदारों को मौके पर बुलाया। उनकी मौजूदगी में घर का ताला तोड़ा गया। अंदर बाथरूम में सुजल की मां रजनी बरेठ (40) का शव भी संदिग्ध हालत में मिला।
पति से तलाक के बाद बेटे के साथ रहती थी
रजनी बरेठ बेलटिकरी के सरकारी स्कूल में टीचर थीं। पति से 5 साल पहले तलाक के बाद वह अपने बेटे सुजल के साथ विश्रामपुर थाना क्षेत्र के केशवनगर में किराए के मकान में रहती थीं। घटना के बाद पुलिस ने कई संदेहियों से पूछताछ की।
मामला ब्लाइंड मर्डर का होने के कारण साइबर सेल और सूरजपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने कई संदिग्धों से पूछताछ की। आसपास के CCTV फुटेज खंगाले गए और संदिग्धों के मोबाइल की लोकेशन भी निकाली गई।
सहेली के पति पर गया शक
जांच के दौरान रजनी बरेठ के स्कूल में पदस्थ एक महिला टीचर के पति परवेश उर्फ प्रवेश कुमार (36) की भूमिका संदिग्ध मिली। पुलिस को CCTV में एक व्यक्ति टीचर के घर की ओर जाते दिखा था। जांच के बीच संदिग्ध फरार हो गया था। इसके बाद 22 अक्टूबर को पुलिस ने उसे हिरासत में लिया। पूछताछ में आरोपी ने हत्या करना कबूल कर लिया।
पैसे देने से मना करने पर मां की हत्या
पूछताछ में प्रवेश कुमार ने रजनी बरेठ और सुजल बरेठ की हत्या करना स्वीकार किया। आरोपी ने बताया कि उसकी पत्नी और रजनी बरेठ एक ही स्कूल में टीचर थीं, जिसके कारण आरोपी का रजनी बरेठ के घर आना-जाना था।
आरोपी ने मोटर-पार्ट्स के व्यवसाय के लिए 20 लाख रुपये का लोन लिया था और उसे पैसों की जरूरत थी। उसे पता था कि रजनी बरेठ ने भी 19 लाख रुपये का लोन लिया है।
9 अक्टूबर की दोपहर आरोपी पैदल रजनी बरेठ के घर पहुंचा। रजनी शाम को ड्यूटी से लौटीं, तो सुजल ट्यूशन के लिए घर से चला गया। प्रवेश ने रजनी से पैसे मांगे। उन्होंने पैसे देने से मना कर दिया।
बाथरूम में गला दबाकर मार डाला
पैसों के लालच में प्रवेश कुमार ने रजनी बरेठ से झूमाझटकी की। जब रजनी भागने लगीं, तो आरोपी ने उन्हें बाथरूम में खींचकर उनके सिर पर शैंपू की बोतल मारी और गला दबाकर उनकी हत्या कर दी।
आरोपी प्रवेश कुमार
सबूत मिटाने बेटे को मार डाला
आरोपी ने बताया कि बेटे सुजल को पता था कि घर पर उसकी मां और आरोपी मौजूद थे, इसलिए उसने सुजल को भी मारने की प्लानिंग की। वह रजनी के घर जाने वाले रास्ते के तिराहे पर करीब 3 घंटे तक सुजल का इंतजार करता रहा। रात करीब 9 बजे सुजल आया, तो उसने कहा कि तेरी मम्मी मेरे घर पर हैं।
आरोपी सुजल को कार में बैठाकर घुमाते हुए अंबिकापुर लेकर आया और उसे मैगी खिलाई। रात को वे राईं जंगल में बाथरूम जाने के बहाने रुके, जहां आरोपी ने सुजल के गले में स्टॉक कसकर उसे मारने की कोशिश की।
सीमेंट के टुकड़े से सिर-सीने पर मारा
सुजल भागने लगा, तो आरोपी ने सड़क किनारे पड़े सीमेंट के खंभे के टुकड़े से उसके सिर और सीने पर वार कर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद शव को कार में रखकर वह कालीघाट पहुंचा, जहां सड़क के किनारे उसने सुजल का शव फेंक दिया।
सूरजपुर एसपी योगेश पटेल ने बताया कि पुलिस ने दोहरे हत्याकांड के आरोपी के कब्जे से मृतका का मोबाइल, ज्वेलरी एवं अन्य सामान बरामद किया है। घटना में प्रयुक्त कार भी जब्त की गई है। आरोपी को कोर्ट में पेश कर दिया गया है।
सूरजपुर एसपी योगेश पटेल ने बताया कि पुलिस ने आरोपी के पास से मृतका का मोबाइल, गहने और अन्य सामान बरामद किया है। जांच में आरोपी की पत्नी की इस हत्याकांड में कोई भूमिका नहीं मिली है।