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व्यंग्य : कोहनी का कमाल, आंदोलन में धमाल!

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अक्सर कोहनी मारना यानि एक तरह से ठिठोली करना ही होता है। यारी दोस्ती में कोहनी मारना मजे लेने के समान है। जिसका कोई बुरा भी नहीं मानता। पलकें टेढ़ी कर दस सेंटीमीटर उचका दो तो आनंद दुगुना हो जाता हैं। इसमें न कोई एफआईआर होती है, न कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस और न ही कोई राष्ट्रीय बहस!आजकल एक आंदोलन में चलते-चलते कोहनी मारने की चर्चा खूब चल पड़ी है। उसके बेकग्राउंड में टियाव-टियाव का भाई लोग म्यूजिक डाल के मजे ले रहें हैं।

लेकिन जनाब, कोहनी जब दोस्ती के दायरे से निकलकर राजनीति के मैदान में प्रवेश करती है, तो उसका महत्व अचानक बढ़ जाता है। वही कोहनी, जो कल तक ठिठोली का माध्यम थी, आज चर्चा का विषय बन जाती है। टीवी चैनलों को मसाला मिल जाता है, सोशल मीडिया को नया मुद्दा और राजनीतिक विश्लेषकों को अपनी प्रतिभा दिखाने का सुनहरा अवसर!

इस पर अपने बप्पी दा का गाना याद आता है-“जाना कहाँ है, दिलकश समाँ है…” अब आंदोलन के माहौल में इसकी पैरोडी कुछ यूँ बन सकती है-“जाना कहाँ है, आंदोलन रवाँ है, कोहनी का किस्सा, चर्चा में जमा है, गुस्सा जमा है, गुस्सा जमा है, किसने किसको मारा, यही मुद्दा बना है!”

हालाँकि आंदोलन किस दिशा में जा रहा है, यह तो आंदोलनकारी ही जानें, लेकिन आसपास चल रहे लोगों को एक नई सीख जरूर मिल गई होगी-राजनीति में कदमताल करते समय केवल आगे-पीछे ही नहीं, दाएँ-बाएँ भी देखते चलिए। पता नहीं कब कोई उत्साह में हाथ हिला दे और आपकी छाती या सीने तक कोहनी पहुँच जाए!

वैसे कोहनी का वार कोई मामूली बात नहीं। अगर जोर से लग जाए तो अस्पताल का बिल, एक्स-रे, डॉक्टर की फीस और तरह-तरह की जाँचें आपका पूरा बजट आंदोलन पर लगा सकती हैं। ऊपर से अगर मामला राजनीतिक हो, तो इलाज से पहले बयानबाजी का दौर शुरू हो सकता है। डॉक्टर पूछेगा, “दर्द कहाँ है?” और समर्थक पूछेंगे, “आप किस पक्ष में हैं?” और सबसे बड़ी मुसीबत तब होती है जब घटना का वीडियो वायरल हो जाए। फिर अदालत से पहले सोशल मीडिया फैसला सुनाने लगता है। किसी के लिए यह मजाक, किसी के लिए आक्रामकता और किसी के लिए राजनीतिक साजिश बन जाती है। वीडियो की लंबाई भले कुछ सेकंड हो, लेकिन उस पर बहस कई दिनों तक चल सकती है।

हमारे जमाने में रेडियो पर सावधानी के संदेश सुनाई देते थे—“जरा सी सावधानी, जिंदगी भर आसानी।” आज लगता है कि इसमें एक नई पंक्ति जोड़ने का समय आ गया है-“आंदोलन में चलें तो संभलकर चलें, हाथ-पैर अपने नियंत्रण में रखें और दूसरों की सीमाओं का सम्मान करें।”

क्योंकि लोकतंत्र में विचारों की टक्कर तो समझ में आती है, लेकिन विचार रखते-रखते कोहनी चलने लगे तो फिर विचार पीछे और कोहनी आगे हो जाती है। और अंत में, एक विनम्र सुझाव-आंदोलन में शामिल हों तो मुद्दों पर जोर लगाइए, आवाज बुलंद कीजिए, तर्कों की ताकत दिखाइए; कोहनी की ताकत नहीं। आखिर आंदोलन का उद्देश्य अपनी बात मनवाना है, किसी को अस्पताल पहुँचाना नहीं।

क्योंकि राजनीति में कोहनी मारकर सुर्खियाँ तो मिल सकती हैं, लेकिन सम्मान कमाने के लिए संयम और समझदारी ही काम आती है। और हाँ, दो गज दूरी वाला पुराना संदेश भले अब हर जगह सुनाई न देता हो, मगर एक बात आज भी जरूरी है-कोहनी को अपनी जगह लटकने दीजिये, अपने हाथों का प्रयोग किसी को भारी नुकसान पहुँचा सकता हैं। कोहनी मालिकों सावधान…!

संजय एम तराणेकर

(कवि, लेखक व समीक्षक)

इन्दौर-452011 (मध्य प्रदेश)

मो. 98260 25986

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देश

1 नवंबर से फोन-स्क्रीन पर कॉलर का नाम दिखाना जरूरी:जिस ID से सिम खरीदी, वही नाम डिस्प्ले होगा, फर्जी कॉल पहचानने में मदद मिलेगी

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नई दिल्ली, एजेंसी। आपके फोन पर जब भी किसी का कॉल आएगा, तो स्क्रीन पर उस व्यक्ति का नंबर और नाम दोनों दिखेंगे। जिस ID से सिम खरीदी, वही नाम डिस्प्ले होगा। इससे फर्जी कॉल पहचानने में मदद मिलेगी।

दूरसंचार विभाग ने टेलिकॉम ऑपरेटर्स को 1 नवंबर 2026 से ये सर्विस शुरू करने का निर्देश दिया है। यूजर को इस सर्विस को अलग से एक्टिवेट करने की जरूरत नहीं होगी।

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कोरबा

नवरात्रि का चतुर्थ दिन: माँ कुसमाण्डा देवी स्वरूपा श्री सर्वमंगला देवी की की गई पूजा अर्चनाशत्रुनाश के लिए मांगा श्रद्धालुओं ने आशीर्वाद

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कोरबा। आश्विन शुक्ल चतुर्थी शारदीय नवरात्रि के चतुर्थ दिन कोरबा की आराध्य देवी माँ श्री सर्वमंगला देवी की पूजा अर्चना माँ कुसमाण्डा देवी के रूप में की गई। सुबह से रात्रि 08.30 बजे तक लोगों की कतार मंदिर परिसर में देखी गई। भक्तों ने माँ सर्वमंगला देवी की पूजा अर्चना कर शत्रुनाश के लिए प्रार्थना की और आशीर्वाद मांगा।

मंदिर के प्रबंधक एवं राजपुरोहित पंडित नमन पाण्डेय ने बताया कि माँ कुसमाण्डा की महिमा अपरंपार है। सौम्य, अतिप्रिय माँ कुसमाण्डा देवी की पूजा अर्चना से मन में व्याप्त शत्रुओं का शमन होता है और मन में सद्बुद्धि और सद्विचार बढ़ता है। शरीर में शत्रु रूप में विद्यमान आलस्य, कलुषिता, विद्वेष, अहंकार, दम्भ जैसे शारीरिक और मानसिक शत्रु का शमन होता है और जीवन आनंदित होता है।
ज्योति कलशों की दिव्यता से मन में पवित्रता का जागरण

मंदिर परिसर में स्थापित ज्योति कलशों की लौ की दिव्यता से मन में पवित्रता का जागरण होता है। ज्योतिपूंज का दर्शन करने मात्र से तामसिक प्रवृत्ति का नाश होता है और सात्विक प्रवृत्ति का पुनर्जागरण होता है। असतो मा सद्गमय की पवित्र मनोकामना को लेकर ज्योति कलशों का दर्शन श्रद्धालु कर रहे हैं। ज्योति कलशों की दिव्यता से परिसर भी दिव्य हो चला है।
माँ के दरबार में लगा मेला

वैसे तो माँ सर्वमंगला देवी मंदिर परिसर दुरपा कोरबा साल के 365 दिन आबाद और समृद्ध रहता है, लेकिन 09 दिन तक नवरात्रि में यहां का मेला लोगों को भाता है। आध्यात्मिक और धर्म में काम आने वाली सभी वस्तुएं यहां उपलब्ध रहती हैं और दर्शनार्थी यहां आकर धार्मिक चीजों की खरीदी करते हैं।
कल माँ स्कंदमाता स्वरूपा की होगी पूजा, पंचमी में रहेगी अभूतपूर्व भीड़

नवरात्रि में पंचमी को भी अभूतपूर्व भीड़ रहती है। पंचमी को माँ स्कंदमाता स्वरूपा माँ श्री सर्वमंगला देवी की पूजा अर्चना होगी और भक्तगण माँ का दर्शन करने के साथ उनके प्रिय भोग केला एवं अन्य फलों को अर्पित करेंगे।
नमन पाण्डेय ने बताया कि माँ स्कंदमाता आरोग्य की देवी हैं और उनकी पूजा से शरीर के सभी रोग दूर होते हैं और आरोग्य की प्राप्ति होती है। आरोग्य धन को सबसे बड़ा धन माना जाता है।

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देश

राहुल यूथ प्रोटेस्टर्स को साथ लाए, पुलिस पर आरोप लगाए:छात्रा बोली- प्राइवेट पार्ट पर मारा, युवक ने कहा- गुंडों के कहने पर हिरासत में लिया

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नई दिल्ली, एजेंसी। SIR के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन करने वाले छात्रों ने बुधवार को राहुल गांधी से मुलाकात की। राहुल ने सभी के साथ मिलकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। जिसमें छात्रों ने दिल्ली पुलिस पर मारपीट और हिरासत में ज्यादती करने के आरोप लगाए।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में NSUI के छात्र, कार्यकर्ताओं और कंटेंट क्रिएटर्स ने अपने साथ घटनाएं बताईं। एक छात्रा ने प्राइवेट पार्ट पर लात मारने का आरोप लगाया, जबकि दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा अदिरा ने दावा किया कि पुलिस की पिटाई से उसके एक कान से सुनने की क्षमता चली गई।

एक अन्य प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि पुलिस RSS और भाजपा से जुड़े लोगों के कहने पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले रही थी।

राहुल गांधी ने छात्रों से घटनाओं के वीडियो और दूसरे सबूत सुरक्षित रखने को कहा। उन्होंने कहा कि इन सबूतों के आधार पर पुलिसकर्मियों से लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त तक, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी।

कांग्रेस समेत विपक्ष एक अक्टूबर से लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। अब तक 5 प्रदर्शन किए जा चुके हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस की फोटोज

राहुल गांधी ने 6 छात्रों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की।

राहुल गांधी ने 6 छात्रों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की।

रितु बराला ने बताया कि उनके चेहरे पर चोट लगी है।

रितु बराला ने बताया कि उनके चेहरे पर चोट लगी है।

अदिरा ने होठों के नीचे लगी चोटों को भी दिखाया।

अदिरा ने होठों के नीचे लगी चोटों को भी दिखाया।

राहुल गांधी ने कहा- देखिए ये हिंदुस्तान है, इसकी कोई जात नहीं

राहुल गांधी ने कहा, ‘ये हिंदुस्तान है, अमित शाह जी यहां कोई हिंदू-मुस्लिम नहीं है, इनकी कोई जात नहीं है। आप इस आवाज के सामने खड़े नहीं हो सकते। स्टूडेंट्स से कहना चाहता हूं। आप वीडियो बनाकर रखिए। उन सबूतों को हम रखेंगे।’

राहुल ने कहा कि जब सब खत्म होगा तो इन सबूतों के आधार पर सबको सजा मिलेगी। चाहे पुलिस वाले हों या ज्ञानेश कुमार हों। ये देश की आवाज हैं। इस आवाज को दबाने की कोशिश हो रही है।

प्रदर्शनकारी अदिरा ने कहा- जहां CCTV नहीं थे, वहां पर मुक्के मारे

राहुल गांधी ने कहा, ‘केरल की अदिरा की एक कान से सुनने की क्षमता चली गई है। उस कान पर चोट लगने के कारण वह एक कान से सुन नहीं पा रही है। अब उसे सुनाई नहीं देता। पिछली बार मैंने आपको एक लड़का दिखाया था, जिसकी आंखों की रोशनी चली गई थी। अब इस लड़की के एक कान से सुनने की क्षमता चली गई है।’

अदिरा ने बताया, ‘मैं केरल की रहने वाली हूं और दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ती हूं। कल जब हमें हिरासत में लिया गया, तब बस में कोई महिला पुलिसकर्मी नहीं थी। इसलिए मैंने सिर्फ इतना पूछा कि महिला पुलिस अधिकारी या महिला कांस्टेबल कहां है? अगर वे हमें हिरासत में लेना चाहते हैं, तो बस में कम से कम एक महिला कांस्टेबल का मौजूद होना जरूरी है।’

इसके बाद बस आगे बढ़ी और कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन के सामने जाकर रुकी। वहां पुलिसकर्मियों ने मेरे पूरे गाल पर लगातार मारा। इसकी वजह से मेरी आंख में चोट आई है और कान को भी नुकसान पहुंचा है…”

अदिरा को पुलिस ने घसीटकर हिरासत में लिया

प्रदर्शनकारी ऋतु बराला ने कहा- नाखूनों से मेरा चेहरा खरोंच दिया

NSUI से जुड़ी ऋतु बराला ने कहा, ‘कल NSUI के सभी कार्यकर्ता शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान हमें तीन बसों में हिरासत में लिया गया। हर बस में हमारे करीब 30-40 साथी थे। हमारी बस में दो लड़कियां और 20-30 अन्य NSUI कार्यकर्ता थे।

बस में चंचल यादव नाम की एक महिला पुलिस कांस्टेबल थी। हिरासत में लिए जाने के बाद हमने गेट से दोबारा बस से बाहर निकलने और प्रदर्शन का नेतृत्व जारी रखने की कोशिश की।’

13 अक्टूबर: ऋतु और महिला पुलिसकर्मियों के बीच झड़प की तस्वीरें

प्रदर्शनकारी रमित ने कहा- मुझे डंडे से पीटा गया

प्रदर्शनकारी रमित ने कहा, ‘मैं कंटेंट क्रिएटर हूं, मुझे 11 अक्तूबर को RSS और भाजपा के गुंडों के बोलने के बाद हिरासत में लिया गया। उनके पास डंडे थे। पुलिस ने उनकी बात सुनकर लोगों को हिरासत में लिया और बुरी तरह हमें पीटा। उनका फोन छीना। वहां कोई फीमेल पुलिस ऑफिसर्स भी नहीं थीं। उनके डंडे का रिस्पॉन्स डंडा ही है।

रमित 11 अक्टूबर को कनॉट प्लेस में प्रदर्शन को कवर कर रहे थे

पुलिस रमित को उठाकर ले जाते हुए।

पुलिस रमित को उठाकर ले जाते हुए।

प्रदर्शनकारी धर्मेंद्र ने बताया- मुझे बहुत ज्यादा मारा

प्रदर्शनकारी धर्मेंद्र ने बताया, ‘मुझे बहुत ज्यादा मारा, अंकित कसाना नाम का पुलिस वाले ने कहा कि कितने लीडर आएंगे तेरे साथ। तुझे बचाने कोई नहीं आएगा। तुम पैसे लेकर आते हो। उन्होंने लात-घूंसे थप्पड़ मारे। मुझे डर लग रहा था लेकिन अब मुझे गोली भी मारेंगे तो गोली खा लूंगा।’

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