कोरबा । पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने हरेली के पावन पर्व पर हसदेव नदी के तट पर भवानी मंदिर के समीप निर्मित प्रदेश के एकमात्र छत्तीसगढ़ महतारी मंदिर पहुंचकर पूजा अर्चना कर अंचल और प्रदेशवासियों की खुशहाली और समृद्धि के लिए कामना की। इस अवसर पर जयसिंह अग्रवाल ने मंदिर परिसर में कृषि उपकरणों की विधिवत पूजा अर्चना की, तत्पश्चात मंचीय कार्यक्रम प्रारंभ किया गया। मंचीय कार्यक्रम के शुरुआत में समारोह के मुख्य अतिथि जयसिंह अग्रवाल का मंदिर संचालन समिति के सदस्यों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर गर्मजोशी के साथ स्वागत किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जयसिंह अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ महतारी मंदिर के सदस्यों को बधाई देते हुए कहा कि विगत 21 वर्षों से मंदिर संचालन समिति के सदस्यगण इस परिसर में अपनी सेवाएं दे रहे हंै, जो कि प्रशंसनीय है। विगत 21 वर्षों से मुझे भी यहां आकर छत्तीसगढ़ महतारी की पूजा अर्चना करने का सौभाग्य प्राप्त होते आ रहा है। उन्होंने आगे कहा कि मंदिर परिसर के पास ही एक सुविधा जनक सामुदायिक भवन एवं शेड का निर्माण करवाया गया है, जिससे विभिन्न कार्यक्रम के आयोजनों में लाभ मिलता है। श्री अग्रवाल ने आगे कहा कि हरेली का पर्व किसानों, खेतीहर, कामगरों का महान लोकपर्व है। इस दिन किसान अपने कृषि उपकरणों का घर के आंगन में परंपरागत ढंग से पूजा अर्चना करते हैं। चारों तरफ खेत-खलिहानों में मनमोहक और आंखो को सुकून देने वाली हरियाली तथा शीतल हवाएं से आनंद मिलता है।
संचालन समिति के अध्यक्ष मोहन प्रधान ने स्वागत उद्बोधन किया। जिन्होंने बताया कि समूचे छत्तीसगढ़ में कोरबा एकमात्र ऐसी जगह है, जहां आज से बीस साल पहले जयसिंह अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ महतारी मंदिर का निर्माण करवाया, जहां प्रतिवर्ष हरेली पर्व का भव्य आयोजन किया जाता है। इस मंदिर परिसर में दूरस्थ अंचलों के भी श्रद्धालु पहुंचकर पूजा अर्चना करते हैं तथा प्रदेश के ख्यातिलब्ध लोक कलाकारों का जत्था नृत्य अथवा गायन विधाओं में अपनी प्रस्तुतियां देते हैं। यहां सुबह से ही मेले जैसा माहौल बना रहता है। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि पूर्व महापौर राजकिशोर प्रसाद एवं पूर्व सभापति श्यामसुंदर सोनी ने भी अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम स्थल पर हर आयु वर्ग के लोगों के लिए नारियल फेंक, गेड़ी दौड़ सहित अनेक पारंपरिक खेल स्पर्धाओं का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को मुख्य अतिथि व अन्य मंचस्थ अतिथियों के हाथों पुरूस्कृत किया गया। आज के कार्यक्रम में कोरबा के लोक कलाकार थीरमन दास अपने दल के साथ रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी। इस अवसर पर उपस्थित बड़ी संख्या में महिलाओं ने हरीतिमा का प्रतीक हरे रंग की साड़ियां पहन रखी थीं। उपस्थित लगभग एक हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम का संचालन अंचल के प्रसिद्ध रंगमंच कर्मी घनश्याम श्रीवास ने किया तथा आभार प्रदर्शन समिति के महासचिव प्यारे लाल चौधरी ने व्यक्त किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में संरक्षक मोहन प्रधान, महासचिव प्यारे लाल चौधरी, संगठन सचिव सुरेश कुमार द्विवेदी, आर.के. पाण्डेय, गीता महंत, सपना चौहान, द्रोपती तिवारी, कुसुम द्विवेदी, अमृता निषाद, ममता अग्रवाल, दिनेश कुमार केंवट, ममता कटकवार, वरिष्ठ संरक्षक हरिशचंद्र निषाद, यू.आर. महिलांगे, रामाधार पटेल, थिरमन दास, रजनीश निषाद, पवन जांगड़े, रमेश श्रीवास, डिगम्बर कर्ष, रामेश्वर महंत, दिलहरण महंत, निर्मल राज, छतराम यादव, एन डी कोलियर, श्याम बाई महंत, झलकुंवर, राजमति यादव आदि का सराहनीय योगदान रहा। इस अवसर पर कृपाराम साहू, डॉ.रामगोपाल कुर्रे, नारायण कुर्रे, बद्री किरण, मुकेश राठौर, सुभाष राठौर, सुकसागर निर्मलकर, मनक साहू, आनंद पालीवाल, पालुराम साहू, सुरेश सहगल, अनिवाशा बंजारे, प्रदीप पुरायणे, झलकुंवर, शालु पनरिया, शांता मण्डावे सहित बड़ी संख्या में कोरबा शहर व ग्रामीण अंचल के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
विकसित भारत-जी राम जी के तहत रू1.32 करोड़ से अधिक के कार्य स्वीकृत
जल संरक्षण एवं संवर्धन के साथ ग्रामीणों को मिल रहा रोजगार, 180 से अधिक ग्राम पंचायतों में हो रहा निर्माण
मोर गांव मोर पानी अभियान के तहत जल सरंक्षण एवं संवर्धन सम्बंधी संरचनाओं को प्राथमिकता
कोरबा, 26 अक्टूबर 2026। जिले में गिरते भूजल स्तर को बढ़ाने तथा वर्षा जल के संरक्षण और पुनर्भरण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम के तहत 234 बोरवेल रिचार्ज सैंड फिल्टर पिट का निर्माण कराया जा रहा है। इन कार्यों के लिए कुल 1 करोड़ 32 लाख 97 हजार रुपये की स्वीकृति दी गई है। इन संरचनाओं के निर्माण से जहां ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं, वहीं भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देकर जल संकट की चुनौती से निपटने में भी मदद मिलेगी।
कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देशन तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत प्रतीक जैन के मार्गदर्शन में जिले में जल संरक्षण एवं जल संवर्धन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। ‘मोर गांव, मोर पानी’ अभियान के तहत वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण तथा जल स्रोतों के संरक्षण के लिए विभिन्न संरचनाओं का निर्माण कराया जा रहा है।
बारिश के पानी को जमीन के भीतर पहुंचाने में मिलेगी मदद
बोरवेल रिचार्ज सैंड फिल्टर पिट ऐसी संरचना है, जिसके माध्यम से वर्षा जल को रेत एवं अन्य फिल्टर सामग्री की सहायता से छानकर जमीन के भीतर पहुंचाया जाता है। इससे भूजल पुनर्भरण में मदद मिलती है तथा बोरवेल और आसपास के जलस्रोतों के जलस्तर को बनाए रखने में सहायता मिल सकती है। ग्राम पंचायतों, शासकीय भवनों, स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और सामुदायिक भवनों में ऐसी संरचनाएं जल संरक्षण की दृष्टि से उपयोगी हैं।
पांचों विकासखंडों में हो रहा निर्माण
जिले की 180 से अधिक ग्राम पंचायतों में मांग एवं आवश्यकता के अनुसार सामुदायिक बोरवेल रिचार्ज सैंड फिल्टर पिट का निर्माण कराया जा रहा है। विकासखंडवार स्थिति के अनुसार करतला में 64, कटघोरा में 30, कोरबा में 66, पाली में 13 तथा पोड़ी उपरोड़ा में 61 रिचार्ज पिट बनाए जा रहे हैं।
इन संरचनाओं से विशेषकर उन ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल पुनर्भरण को प्रोत्साहन मिलेगा, जहां जलस्तर में गिरावट की समस्या है। वर्षा जल का बेहतर उपयोग होने से जल उपलब्धता बढ़ाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी सहायता मिलेगी।
विकसित भारत- जी राम जी से जिले में जल संरक्षण एवं संवर्धन के इन प्रयासों के माध्यम से रोजगार सृजन के साथ जल सुरक्षा को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ भविष्य के लिए भी जल संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सके।
कोरबा। प्रेस क्लब के सदस्य एवं दैनिक तरूण छत्तीसगढ़ के संपादक सुभाष अग्रवाल के अनुज भ्राता (छोटे भाई) शहर के प्रतिष्ठित नागरिक एवं होटल रिलैक्स इन के संचालक सतीश अग्रवाल पिता स्वर्गीय ओमप्रकाश अग्रवाल का आज सोमवार दिनांक 26/10/2026 की देर शाम 7.30 बजे निधन हो गया। वे कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। वे अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनका अंतिम संस्कार कल मंगलवार दिनांक 27/10/2026 को सुबह 11 बजे स्थानीय मोती सागर पारा मुक्तिधाम में संपन्न होगा। इससे पूर्व अग्रोहा मार्ग स्थित उनके निवास से अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। उनके निधन पर कोरबा प्रेस क्लब परिवार ने शोक व्यक्त किया है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में परम शांति प्रदान करे एवं शोकाकुल परिवार को यह असह्य दुःख सहन करने की शक्ति दे।
कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा वन मंडल के करतला रेंज में 9 हाथियों का झुंड घूम रहा है। झुंड में नन्हे हाथी के जन्म की खुशी में रविवार को 7 गांवों के ग्रामीणों ने उसकी छठी मनाई और उसका नाम ‘काशी’ रखा।
कार्यक्रम काशीपानी जंगल के कारीपानी मंदिर के नीचे गौठान टिकरापारा में आयोजित किया गया। इसमें रामभाठा, लबेद, पाहराभांठा, काशीपानी, छातापाठ, जामपानी और छुईडुंगा गांव के ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए।
मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद ग्रामीणों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई। ग्रामीणों ने हाथी के बच्चे के स्वस्थ जीवन की कामना की।
बेबी एलिफेंट का नाम ‘काशी’ रखा गया है।
छठी कार्यक्रम काशीपानी जंगल के कारीपानी मंदिर के नीचे गौठान टिकरापारा में आयोजित किया गया।
रविवार को 7 गांवों के ग्रामीणों ने उसकी छठी मनाई।
जिले में 48 हाथियों की मौजूदगी
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, 9 हाथियों का झुंड फिलहाल काशीपानी के जंगल में घूम रहा है। इसके अलावा कुदमुरा रेंज में 32 हाथी और चचिया क्षेत्र में 7 हाथी मौजूद हैं। हाल के दिनों में हाथियों ने 17 किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाया है।
20 साल से जंगल में आ रहे हाथी
ग्रामीणों ने बताया कि करीब 20 साल से हाथी इस जंगल में आते हैं। वे लंबे समय तक यहां रुकने के बाद वापस चले जाते हैं। यह हाथियों का पुराना कॉरिडोर है।
SDO मणिकांत वर्मा ने ग्रामीणों से हाथियों से छेड़छाड़ नहीं करने और सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि फसल नुकसान के मामलों में नियमानुसार मुआवजा दिया जाता है। जनहानि रोकने के लिए सतर्क रहना जरूरी है।
साल 2000 में पहली बार आए थे हाथी
जिले में साल 2000 में पहली बार कुदमुरा रेंज के आमटिकरा गांव में हाथी आए थे। इसके बाद धीरे-धीरे उनकी संख्या बढ़ती गई। कई बार जिले में हाथियों की संख्या 150 तक पहुंच चुकी है।
धिनारा गांव से शुरू हुई छठी मनाने की परंपरा
बेबी एलिफेंट की छठी मनाने की परंपरा धिनारा गांव से शुरू हुई थी। ग्रामीण अब हाथियों को लेकर जागरूक हो रहे हैं। पहले जहां हाथियों को भगवान मानकर पूजा की जाती थी, वहीं अब ग्रामीण सुरक्षित दूरी बनाए रखने पर जोर देते हैं।