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छत्तीसगढ़

झीरम केस, ड्राइवर ने बताया-लखमा 10-15 कह रहे थे:हमले से पहले बार-बार कॉल, गोंडी में बातचीत, नंदकुमार ने हिंदी में पूछा तो कहा- डीजल-डीजल

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रायपुर, एजेंसी। झीरम घाटी हमले के 13 साल बाद 16 सितंबर को जगदलपुर की विशेष NIA कोर्ट ने 10 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई। इस मामले की सुनवाई के दौरान दर्ज गवाहियों में हमले से पहले और घटना के दौरान की कई घटनाक्रम की जानकारी सामने आई हैं।

कोर्ट के आदेश में दर्ज नंदकुमार पटेल के ड्राइवर दशाराम सिदार की गवाही में कवासी लखमा के मोबाइल पर बार-बार फोन आने और गोंडी में बातचीत का जिक्र है। दशाराम के बयान के मुताबिक, बातचीत के दौरान लखमा 10-15 कह रहे थे। तब नंदकुमार ने कहा कि, हिंदी में बात करो। 10-15 क्या है, पूछने पर लखमा ने इसे डीजल-डीजल बताया था।

दशाराम की गवाही के अनुसार, हमले के दौरान नक्सलियों ने नंदकुमार पटेल, दिनेश पटेल और कवासी लखमा को सड़क के किनारे बैठाया और चारों तरफ से घेर लिया। इसके बाद लखमा और नक्सली विनोद के बीच गोंडी में बातचीत हुई। करीब एक घंटे बाद नंदकुमार पटेल और दिनेश पटेल के हाथों को बांधकर उन्हें गोली मार दी गई।

हालांकि, कोर्ट के आदेश में लखमा के फोन कॉल या गोंडी में बातचीत को उनकी साजिश में भूमिका साबित करने वाला अलग निष्कर्ष नहीं बताया गया है। लखमा इस मामले में घायल गवाह के तौर पर पेश हुए थे। उनकी गवाही में उन्होंने बताया था कि नक्सलियों ने नंदकुमार पटेल, दिनेश पटेल, उनका और ड्राइवर का परिचय पूछा था। इसके बाद उन्हें और ड्राइवर को छोड़ दिया, तो दोनों बाइक से दरभा थाने आ गए।

घटना के दौरान मौके पर मौजूद ट्रक ड्राइवर की गवाही में महेंद्र कर्मा की बेहरमी से की गई हत्या का भी जिक्र है। गवाह के मुताबिक नक्सलियों ने महेंद्र कर्मा को हाथ ऊपर करवाकर सड़क पर खड़ा किया और फिर जंगल की तरफ ले गए। गवाह ने दावा किया कि उसने कुछ नक्सलियों को कर्मा को पत्थर, बंदूक और लात-घूंसों से मारते देखा था।

2013 में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा रैली के दौरान नक्सलियों ने जंगल में हमला किया था।

2013 में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा रैली के दौरान नक्सलियों ने जंगल में हमला किया था।

लखमा ने अपनी गवाही में क्या बताया?

कवासी लखमा इस मामले में घायल गवाह के तौर पर कोर्ट में पेश हुए थे। उन्होंने बताया कि सुकमा में दोपहर करीब 12 बजे से 2 बजे तक कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा की रैली थी। इसमें वे, नंद कुमार पटेल, अजीत जोगी, विद्याचरण शुक्ल, महेंद्र कर्मा समेत कई कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे।

रैली खत्म होने के बाद सभी को केशलूर में सभा में शामिल होना था। खाना खाने के बाद करीब 3:25 बजे वे केशलूर के लिए रवाना हुए। झीरम घाटी के पास पहुंचने पर ऊपर की तरफ से बम फटने की आवाज आई। उनकी गाड़ी के आगे फॉलोगार्ड की गाड़ी और उसके आगे एक ट्रक फंसा था, इसलिए काफिला आगे नहीं बढ़ पा रहा था।

इसी दौरान गोली या विस्फोट के छर्रे से उनकी गाड़ी का कांच टूट गया और कांच का टुकड़ा उनके दाहिने कान में लगा। इसके बाद लखमा, नंद कुमार पटेल, उनके बेटे और ड्राइवर गाड़ी से उतरकर घाटी की तरफ जाकर छिप गए। तभी नक्सलियों ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया।

लखमा के मुताबिक, नक्सली गोंडी में चिल्लाकर कह रहे थे कि वहां क्यों छिपे हो और पुलिस वाले हथियार छोड़ दें। लखमा ने भी गोंडी में जवाब दिया कि वहां कोई पुलिस वाला नहीं है, फिर बंदूक कौन छोड़ेगा।

महिला नक्सली और विनोद

लखमा ने आगे अपने बयान में बताया कि इसके बाद नक्सली चारों को पकड़कर ऊपर की तरफ ले गए। वहां मौजूद एक महिला नक्सली कह रही थी कि ऊपर से आदेश आने और विनोद दादा के कहने के बाद ही उन्हें छोड़ा जाएगा।

करीब 15-20 मिनट बाद एक नक्सली वहां आया और सबसे पहले नंद कुमार पटेल से उनका परिचय पूछा। पटेल ने बताया कि वे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हैं। इसके बाद उनके बेटे, लखमा और ड्राइवर से भी परिचय पूछा गया।

लखमा ने बताया कि नीचे सड़क पर उनके काफिले की तरफ लगातार गोलियां चल रही थीं। करीब 15 मिनट बाद विनोद नाम का नक्सली वहां आया। उसने पूछा कि क्या वे उसे जानते हैं। जब सभी ने मना किया तो उसने अपना नाम विनोद बताया और कहा कि वहां से भागने की कोशिश न करें, वरना नक्सली उन्हें मार देंगे।

लखमा ने नक्सलियों को गोंडी में जवाब दिया कि वहां कोई पुलिस वाला नहीं है, फिर बंदूक कौन छोड़ेगा।

लखमा ने नक्सलियों को गोंडी में जवाब दिया कि वहां कोई पुलिस वाला नहीं है, फिर बंदूक कौन छोड़ेगा।

लखमा और ड्राइवर को छोड़ दिया, नंद कुमार पटेल और दिनेश को नहीं

लखमा के बयान के अनुसार इसके बाद नंद कुमार पटेल ने विनोद से पूछा कि वह कौन है। इस पर विनोद नाराज हो गया और उसने एक नक्सली से कहा कि इन्हें बांध दो। इसके बाद नंद कुमार पटेल और उनके बेटे को रस्सी से बांध दिया गया। विनोद वहां से उस तरफ चला गया, जहां गोलियां चल रही थीं।

लखमा के अनुसार, करीब एक घंटे तक गोलीबारी होती रही। इसके बाद 40-50 नक्सली वहां आए और सभी को उठाकर ऊपर ले जाने लगे। करीब 10 कदम चलने के बाद उन्हें फिर बैठा दिया गया।

कुछ देर बाद नक्सलियों ने लखमा और ड्राइवर को वहां से जाने के लिए कहा। लखमा ने कहा कि वे चारों साथ जाएंगे। लेकिन नक्सलियों ने मना कर दिया और उन पर बंदूक तान दी। डर के कारण लखमा और ड्राइवर वहां से सड़क की तरफ आ गए।

सड़क पर पहुंचने के बाद उन्हें फिर गोलियां चलने की आवाज सुनाई दी। इसके बाद दोनों सड़क पर पड़ी एक मोटरसाइकिल लेकर दरभा थाने पहुंचे, जहां पहले से काफी भीड़ जमा थी।

महेंद्र ने कहा- हम सरेंडर कर रहे

झीरम की गवाहियों में महेंद्र कर्मा की हत्या का विवरण भी है। मलकीत सिंह गेंदू ने बताया कि गोलीबारी के बीच महेंद्र कर्मा ने लोगों से नीचे लेटने को कहा। बाद में जब माओवादियों ने गोलीबारी रोककर लोगों को बाहर आने के लिए कहा तो कर्मा ने अपनी पहचान बताते हुए कहा कि वे महेंद्र कर्मा हैं और गोलीबारी बंद करने की बात कही।

गवाहों के मुताबिक, माओवादियों ने उन्हें पकड़ लिया और जंगल की ओर ले गए। गवाह फूलोदेवी नेताम ने बताया कि उन्होंने गोलीबारी रोकने के लिए आवाज लगाई थी। इसके बाद कर्मा ने भी सामने आकर कहा कि वह आत्मसमर्पण कर रहे हैं। गवाह के अनुसार, माओवादियों ने कर्मा के हाथ ऊपर करवाए और उन्हें जंगल की तरफ ले गए थे। और उनकी बेरहमी से हत्या की और उनके शव के सामने नाचते रहे।

झीरम में हमले के दौरान फंसे ट्रक ड्राइवर की गवाही में महेंद्र कर्मा की बेरहमी से की गई हत्या का जिक्र है।

झीरम में हमले के दौरान फंसे ट्रक ड्राइवर की गवाही में महेंद्र कर्मा की बेरहमी से की गई हत्या का जिक्र है।

ट्रक में बैठे लोगों ने भी देखा घटनाक्रम

फाल्गुन सिंह ठाकुर ने गवाही में बताया कि वह ट्रक से झीरम घाटी से गुजर रहा था। फायरिंग में ट्रक के टायर और केबिन पर गोलियां लगीं। कुछ लोगों को गोली लगी। इसके बाद नक्सली ट्रक के पास आए और पूछा कि वे पुलिस वाले हैं या नहीं। मोबाइल छीनने के बाद उन्हें जमीन पर लेटने को कहा।

गवाही के मुताबिक बाद में नक्सलियों ने महेंद्र कर्मा को हाथ ऊपर करवाकर सड़क पर खड़ा किया और फिर जंगल की तरफ ले गए। गवाह ने दावा किया कि उसने कुछ नक्सलियों को कर्मा को पत्थर, बंदूक और लात-घूंसों से मारते देखा था।

नाले किनारे रिहर्सल, वायरसेट पर सूचना मिलते ही शुरू हुई फायरिंग

झीरम घाटी हमले की सुनवाई के दौरान अदालत में दर्ज बयानों में नक्सलियों की तैयारी, टीमों की तैनाती और हमले के दौरान की गई कार्रवाई का सिलसिलेवार जिक्र आया है। अभियुक्त चैतु लेकाम उर्फ मुन्ना के बयान में दावा किया गया है कि घटना से करीब एक सप्ताह पहले नक्सली टीमों ने नाले के किनारे सुबह-शाम रिहर्सल की थी। वहीं दूसरे बयान में टीसीओसी की बैठक में अलग-अलग इलाकों की जिम्मेदारी बांटे जाने की बात सामने आई है।

टीसीओसी बैठक में बांटी गई थी जिम्मेदारी

बयान के मुताबिक झीरम घटना से पहले टीसीओसी की बैठक हुई थी। इसमें देवजी, श्याम, रमेश, वेंकटेश, मेनक्का, माधवी, हिड़मा और सुरेंदर समेत अन्य लोग शामिल हुए थे। बैठक में भर्ती, ट्रेनिंग, हमला, एजुकेशन डिप्लॉयमेंट और दक्षिण क्षेत्र की जिम्मेदारियों पर चर्चा हुई।

इसमें तय किया गया कि किस इलाके में कौन-सी कंपनी जाएगी। वेंकटेश को गंगालूर और श्याम व सुरेंदर को दरभा डिविजन की जिम्मेदारी दी गई। दरभा डिविजन में सीआरसी की प्लाटून, कंपनी-02 के दो सेक्शन और दरभा डिविजन के लोगों को मिलाकर हमले के लिए टीम बनाई गई।

इसकी जिम्मेदारी सुरेंदर, जयलाल, देवा, विनोद और श्याम को दी गई थी। हालांकि, जिस साक्षी ने यह जानकारी दी, उसने प्रतिपरीक्षण में स्वीकार किया कि वह झीरम घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं था।

पीडिया के जंगल से दरभा घाटी तक पहुंचे

अभियुक्त चैतु लेकाम उर्फ मुन्ना के बयान के अनुसार, मई 2013 के पहले सप्ताह में नक्सली पीडिया के जंगल में मौजूद थे। वहां प्लाटून कमांडर हेमला मासा ने बताया कि गणेश अन्ना के कहने पर सभी को दरभा घाटी जाना है।

चैतु के मुताबिक वह अपनी इंसास राइफल के साथ, ज्योति प्रमिला 12 बोर बंदूक और हेमला मासा एके-47 लेकर निकले। रीता तेलाम के पास हैंड ग्रेनेड था। अन्य लोग भी अपने हथियारों के साथ पीडिया से निकले और गम्पुर पहुंचे।

वहां जयलाल कंपनी कमांडर दक्षिण बस्तर की दो प्लाटून लेकर आया, जिनमें महिला और पुरुष दोनों शामिल थे। इसके बाद टीम डेंगुर, पालनार, गरियुम, ताड़बोड़ा होते हुए कुसुम गांव पहुंची। यहां ओडिशा और दरभा घाटी की नक्सली पार्टी के करीब 150 लोग मौजूद थे।

गांव वालों को चावल लेकर मीटिंग में बुलाने का बयान

रामू बघेल के बयान में भी नक्सलियों की गतिविधियों और ग्रामीणों को उनके लिए काम करने के लिए बुलाने का जिक्र है। उसने बताया कि उसके गांव में सोनाधर, विनोद, सुमित्रा, फूलो और लक्ष्मण ने बैठक लेकर चावल और पैसे की मांग की थी। इसके बाद गांव से चावल लेकर लोग कांदानार में महादेव के पास पहुंचे। फिर उन्हें भडरीमडु की बैठक में वही चावल लेकर आने को कहा गया।

रामू के मुताबिक जंगल में सोनाधर, विनोद, डोकरा, लक्ष्मण, कांदानार का महादेव और चांदामेटा का बोटी मौजूद थे। बाद में उसे और दूसरे ग्रामीणों को एलंगनार के पहले रोककर खाना बनाने के लिए कहा गया। नक्सली सड़क की ओर चले गए।

कर्मा के शरीर पर कम से कम 69 घाव दर्ज किए गए

कोर्ट के आदेश में दर्ज पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक, महेंद्र कर्मा के शरीर पर कई गंभीर चोटें थीं। सिर पर धारदार हथियार के घाव, शरीर पर चाकू के घाव, चेहरे पर चोट, पसलियों और अंदरूनी अंगों को नुकसान और पीठ में गोली लगने के निशान मिले।

पोस्टमॉर्टम में दोनों गोली के घाव पीठ की तरफ बताए गए। गोली लगने से पसलियों और फेफड़ों को नुकसान हुआ था। इसके अलावा शरीर के कई हिस्सों में धारदार हथियार और दूसरी चोटों के निशान थे।।

पोस्टमॉर्टम में कर्मा के शरीर पर कम से कम 69 घाव दर्ज किए गए थे। गवाह ने यह भी बताया कि माओवादियों ने कर्मा को मारने के बाद उनके शव पर चाकू से वार किए और उनके आसपास नारे लगाए।

नंदकुमार पटेल को 2 गोलियां मारी गई थी

तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में दो गोली के घाव मिले। एक गोली बाएं कंधे की तरफ से लगी और अंदर जाकर पसलियों, फेफड़े और दिल के आसपास के हिस्से को नुकसान पहुंचा।

दूसरी गोली बाएं पेट की तरफ लगी और अंदर आंत, पेट और लीवर तक पहुंची थी। रिपोर्ट में मौत का कारण गोली लगने से हुए शॉक और अधिक रक्तस्राव को बताया गया था।

दिनेश पटेल को सिर पर धारदार हथियार और पीठ में गोली

नंदकुमार पटेल के बेटे दिनेश पटेल की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सिर पर कई धारदार हथियार के घाव मिले थे। सिर की हड्डी टूटने और मस्तिष्क को गंभीर नुकसान का जिक्र है। इसके अलावा पीठ में गोली का घाव था, जिससे पसली और दायां फेफड़ा प्रभावित हुआ था। जांघ पर भी चाकू से चोट के निशान मिले। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, सिर और गोली की चोटें मौत के लिए पर्याप्त थीं।

गाड़ियों पर 206 गोलियों के निशान

जांच में वाहनों पर करीब 206 गोलियों के निशान मिलने की बात भी कोर्ट के आदेश की रिपोर्टिंग में सामने आई है। हमले में बड़ी संख्या में हथियार भी लूटे गए थे, जिनमें AK-47, INSAS, 9 एमएम पिस्टल और SLR शामिल थे।

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कोरबा

रबी सीजन में टोकन और क्यूआर कोड से उर्वरक वितरण शुरू

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नई डिजिटल व्यवस्था से खाद की उपलब्धता और बिक्री पर रहेगी निगरानी

कोरबा 05 नवंबर 2026। रबी सीजन 2026-27 में रासायनिक उर्वरकों का पारदर्शी और सुव्यवस्थित वितरण सुनिश्चित करने के लिए जिले में आज से ‘फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल’ (एफएफएस) सॉफ्टवेयर के माध्यम से टोकन आधारित व्यवस्था शुरू की गई है। इसके तहत किसान मोबाइल ऐप से खाद की प्री-बुकिंग कर ई-टोकन प्राप्त कर सकते हैं। दुकान पर टोकन का क्यूआर कोड स्कैन करने के बाद उर्वरक दिया जाएगा।

नई व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को समय पर उचित मूल्य पर खाद उपलब्ध कराना, वितरण में पारदर्शिता बढ़ाना और कालाबाजारी पर रोक लगाना है। एफएफएस सॉफ्टवेयर के जरिए विक्रेताओं के स्टॉक, उर्वरक की प्राप्ति, दैनिक बिक्री और शेष उपलब्धता का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाएगा। यूरिया, डीएपी, एसएसपी, एमओपी, एनपीके सहित अन्य उर्वरकों की बिक्री और स्टॉक की जानकारी के आधार पर अधिकारी मांग, आपूर्ति और वितरण की नियमित समीक्षा कर सकेंगे।
जिले के किसान आधार कार्ड या फार्मर आईडी की सहायता से ऐप में लॉगिन कर सकते हैं। ऐप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। किसान घर बैठे खाद की प्री-बुकिंग कर सकते हैं। बुकिंग के बाद 48 घंटे के भीतर संबंधित दुकान पर टोकन का क्यूआर कोड स्कैन कराना जरूरी होगा। निर्धारित समय में स्कैन नहीं कराने पर बुकिंग स्वतः निरस्त हो जाएगी। किसान कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के माध्यम से भी टोकन प्राप्त कर सकते हैं।
आज मोबाइल ऐप के माध्यम से ई-टोकन जारी किए गए। नई प्रक्रिया के तहत उर्वरक प्राप्त करने वाले किसानों ने व्यवस्था को सहज बताया। इसके सुचारू संचालन के लिए कृषि विभाग और सहकारी समितियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है तथा किसानों के बीच जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
उप संचालक कृषि ने जिले के किसानों से एफएफएस ऐप के माध्यम से ही खाद की बुकिंग और खरीदी करने की अपील की है। ऐप पर टोकन बनाने में किसी प्रकार की समस्या आने पर किसान नजदीकी कृषि विभाग कार्यालय या सहकारी समिति के अधिकारियों-कर्मचारियों से संपर्क कर सकते हैं।

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कोरबा

सेवा सेतु से बढ़ी शासकीय सेवाओं तक पहुंच, नागरिकों को मिल रही सुविधा

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आवेदन के तीन दिन में मिला आय प्रमाण पत्र, सेवा सेतु से आसान हुई राह

समय और धन दोनों बचे, तीन दिन में मिल गया प्रमाण पत्र” – सुश्री पायल नेटी

कोरबा  05 नवम्बर 2026। आवश्यक शासकीय दस्तावेज बनवाने के लिए पहले नागरिकों को कार्यालयों के चक्कर लगाने, बार-बार आने-जाने और अपना समय व धन खर्च करने जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। छत्तीसगढ़ शासन की सेवा सेतु पहल से शासकीय सेवाओं तक पहुंच आसान हो रही है। अब च्वाइस सेंटर के माध्यम से आवेदन कर आवश्यक प्रमाण पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक बन रही है।
पाली तहसील अंतर्गत ग्राम नांनबांका निवासी सुश्री पायल नेटी, पुत्री भगवान सिंह नेटी, को भी इस सुविधा का लाभ मिला। उन्होंने 30 सितंबर को आवश्यक दस्तावेजों के साथ ग्राम सुतर्रा स्थित अशोक च्वाइस सेंटर के माध्यम से आय प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया। आवेदन के महज तीन दिन बाद, 3 अक्टूबर को उनका आय प्रमाण पत्र जारी हो गया। कम समय में प्रमाण पत्र मिलने से उन्हें अनावश्यक भागदौड़ और कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिली।
पायल नेटी अपने अनुभव साझा करते हुए बताती हैं, “पहले आय प्रमाण पत्र बनवाने के लिए कार्यालयों में जाना पड़ता था। आने-जाने में समय लगता था और पैसे भी खर्च होते थे। अब च्वाइस सेंटर के माध्यम से आवेदन करने पर मुझे केवल तीन दिन में आय प्रमाण पत्र मिल गया। इसके लिए न तो अनावश्यक भागदौड़ करनी पड़ी और न ही बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़े। इससे मेरे समय और धन दोनों की बचत हुई है।”
पायल के अनुसार, सेवा सेतु के माध्यम से जरूरी शासकीय दस्तावेज प्राप्त करने की प्रक्रिया पहले से अधिक आसान हुई है। च्वाइस सेंटर के जरिए आवेदन की सुविधा मिलने से लोगों को अपने आवश्यक कार्यों के लिए बार-बार कार्यालय जाने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे शासकीय सेवाओं तक आम नागरिकों की पहुंच बढ़ रही है और उनका समय भी बच रहा है।
सेवा सेतु की इस पहल की सराहना करते हुए पायल नेटी एवं उनके पिता भगवान नेटी ने बताया सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से शासकीय सेवाओं का लाभ लेना पहले की तुलना में काफी सरल हुआ है। आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन करने पर महज तीन दिनों में आय प्रमाण पत्र जारी होना उनके लिए सुखद अनुभव रहा। उन्होंने इस सुविधा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताते हुए कहा, “सरकार की इस पहल से आम नागरिकों को बड़ी राहत मिल रही है। कम समय में जरूरी प्रमाण पत्र मिल जाने से भागदौड़ कम हुई है और समय व धन की बचत भी हो रही है। मैं चाहती हूं कि ऐसी सुविधाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे। जनसुविधा को प्राथमिकता देने वाली इस पहल के लिए उन्होंने  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को धन्यवाद दिया।

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कोरबा

आयुष्मान योजना में अनियमितता पर हरिकृष्णा केयर हॉस्पिटल का पंजीयन एक वर्ष के लिए निलंबित

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अस्पताल को नए मरीज भर्ती नहीं करने और योजना से संबंधित प्रचार सामग्री हटाने के निर्देश

कोरबा 05 नवंबर 2026। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत मरीजों को गुणवत्तापूर्ण एवं निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा अस्पतालों की नियमित निगरानी एवं जांच की जा रही है। इसी क्रम में 30 सितंबर 2026 को कटघोरा स्थित हरिकृष्णा केयर हॉस्पिटल ( HOSP22P147364) का औचक निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण के दौरान जांच दल ने अस्पताल में कई अनियमितताएं पाईं। इनमें मरीजों के परिजनों से नगद राशि लिए जाने संबंधी बयान, भर्ती अभिलेखों में गलत मोबाइल नंबर दर्ज होना, भर्ती फाइलों में दर्ज 68 मोबाइल नंबरों का गलत अथवा उपयोग में नहीं होना, नवजात शिशुओं के उपचार से संबंधित अनियमितताएं तथा पैथोलॉजी और अल्ट्रासोनोग्राफी से जुड़े अभिलेख उपलब्ध न होना शामिल है।
इन अनियमितताओं के संबंध में अस्पताल को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया था। अस्पताल प्रबंधन द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण संतोषजनक एवं तथ्यों के अनुरूप नहीं पाया गया। मरीजों से संबंधित अभिलेखों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच में गंभीर वित्तीय एवं प्रक्रियागत अनियमितताएं सामने आईं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस. एन. केशरी ने बताया कि अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा जुलाई 2026 में जारी दिशा-निर्देशों की कंडिका 6.4.1 के तहत कार्रवाई की गई है। इसके अंतर्गत हरिकृष्णा केयर हॉस्पिटल, कटघोरा का आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पंजीयन एक वर्ष के लिए निलंबित किया गया है। इस अवधि में अस्पताल को योजना के तहत नए मरीज भर्ती नहीं करने तथा अस्पताल एवं परिसर से योजना से संबंधित प्रचार-प्रसार सामग्री हटाने के निर्देश दिए गए हैं।

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