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खड़गे बोले– शिक्षा संस्थानों में मनुस्मृति को मानने वाले बढ़े:शूद्र से पढ़ने का अधिकार छिना, नड्डा बोले- सबूत दें, सभापति ने रिकॉर्ड से हटाया

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नई दिल्ली, एजेंसी। राज्यसभा में पेपर लीक से जुड़े परीक्षा संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान मल्लिकार्जुन खड़गे के ‘मनुस्मृति’ बयान पर हंगामा हुआ। वे शैक्षणिक संस्थाओं पर RSS के दखल पर बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थानों में मनुस्मृति मानने वाले बढ़ गए हैं, इससे शूद्र को पढ़ने का अधिकार छिन गया है। इस पर सदन में हंगामा शुरू हो गया।

जेपी नड्डा ने टोकते हुए कहा कि खड़गे का बयान तथ्यों से परे है। इससे अशांति फैल सकती है। इसके बाद सभापति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि मनुस्मृति वाला बयान रिकॉर्ड से हटा दिया जाएगा।

यह पूरी बहस पेपर लीक से जुड़े पब्लिक एग्जामिनेशन (अनफेयर मीन्स की रोकथाम) संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान हुई।

इससे पहले, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में पेपर लीक से जुड़ा बिल पेश किया। लोकसभा में बुधवार को करीब 7 घंटे बहस के बाद पेपर लीक से जुड़ा बिल पारित हुआ था।

फैक्ट चैक: खड़गे ने जो सजाएं बताईं, वे मूल मनुस्मृति में नहीं, बल्कि ‘गौतम धर्मसूत्र’ (अध्याय 12, श्लोक 4-6) में लिखी हैं। हालांकि, खड़गे ने बाद में कहा कि गौतम ऋषि ने लिखा है।

सुधांशु त्रिवेदी ने जवाब में कहा- मैं उन्हें बताना चाहूंगा कि विलियम जोन्स कलकत्ता हाईकोर्ट के जज थे। उन्होंने 1790 मनु स्मृति का अनुवाद किया। आधुनिक युग के शेड्यूल कास्ट का मनु काल के वैदिक शूद्र के साथ कोई कनेक्शन नहीं है। विलियम जोन्स से पहले की 2 और मनुस्मृति कहीं अवेलेबल नहीं हैं।

मासिर-ए-आलमगीरी, शाहनामा, जहांगीरनामा, तुज़ुक-ए-बाबरी, फुतूहात-ए-फिरोजशाही और तहकीके हिंद भी उपलब्ध हैं। इसलिए मैंने कहा कि मुझे प्रमाण चाहिए, क्योंकि जो खड़गे ने कहा- उसे अंग्रेजों ने बनाया है। विलियम जोन्स से पहले का कोई टेक्स्ट अवेलेबल नहीं हैं।

फैक्ट चेक: विलियम जोन्स ने मनुस्मृति का पहला अंग्रेजी अनुवाद 1794 में ‘Institutes of Hindu Law, or the Ordinances of Menu’ नाम से पब्लिश किया था। यह किताब आज भी सार्वजनिक डोमेन में है। इसे गूगल बुक्स, इंटरनेट आर्काइव और ब्रिटिश लाइब्रेरी की वेबसाइटों पर मुफ्त में पढ़ा जा सकता है।

सुधांशु त्रिवेदी ने आगे कहा कि बाबा साहेब अंबेडकर कि किताब ‘हू वर द शुद्राज’ के चैप्टर के पहले पेज के पैराग्राफ 3 में लिखा है कि आधुनिक अनुसूचित जातियों और प्राचीन वैदिक काल के शूद्रों के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है।

फैक्ट चेक: अंबेडकर ने लिखा है कि आधुनिक शूद्र और प्राचीन वैदिक काल के शूद्र एक ही वर्ग नहीं थे। प्राचीन शूद्र मूल रूप से क्षत्रिय थे, जिन्हें ब्राह्मणों से विवाद के बाद ‘उपनयन संस्कार’ से वंचित कर दिया गया, जिससे वे चौथे वर्ण में गिर गए। वे आज की अनुसूचित जातियों से अलग थे।

प्रमोद तिवारी ने एक किताब दिखाते हुए कहा कि यह इनके कार्यकाल में छपी है, चल रही है, प्रतिबंधित नहीं है। अगर ये कह रहे हैं, दिखा रहे हैं, तो गलती इनकी है।12 साल से इनकी सरकार है।

जेपी नड्डा ने कहा कि ब्रिटिश टाइम से पहले का ओरिजिनल टेक्स्ट लाइए। सबूत दीजिए।

सरकार दबाव में झुकी

सरकार को छात्रों के आंदोलन और जनदबाव के आगे झुकना पड़ा। धर्मेंद्र प्रधान को हटाना और संशोधन बिल लाना छात्रों के हित में नहीं, बल्कि सरकार की कुर्सी बचाने की मजबूरी थी।

सिर्फ सजा बढ़ाने से नहीं रुकेगा पेपर लीक

जुर्माना 1 करोड़ से 10 करोड़ करना, सजा कड़ी करना, स्पेशल टास्क फोर्स और फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाना पर्याप्त नहीं है। असली जरूरत परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने की है।

152 परीक्षाओं के पेपर लीक

कुछ सालों में 152 परीक्षाओं के पेपर लीक हुए, लेकिन किसी दोषी को सजा नहीं मिली। NTA के कई पद खाली हैं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के बजाय RSS से जुड़े लोगों की नियुक्तियां की जा रही हैं।

अमित शाह जवाब दें

शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया। अगर गृह मंत्री अमित शाह इस पर जवाब नहीं दे सकते तो इस्तीफा दें।

शूद्र वाले बयान पर हंगामा

नए सिलेबस में ऐसे संदर्भ जोड़े जा रहे हैं, जिनमें शूद्रों के वेदपाठ सुनने या बोलने पर कठोर दंड का उल्लेख है। उन्होंने कहा कि ऐसी सोच रखने वालों को शिक्षा व्यवस्था से बाहर किया जाना चाहिए। इस बयान पर सत्ता पक्ष ने जोरदार हंगामा किया।

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धनतेरस पर बाजारों में रौनक, सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट से ज्वेलर्स को बंपर बिक्री की उम्मीद

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मुंबई, एजेंसी। धनतेरस के पर्व पर बाजारों में रौनक छाई हुई है और आभूषण विक्रेताओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। सोने-चांदी की कीमतों में नरमी और ग्राहकों की अच्छी अग्रिम बुकिंग से ज्वेलर्स को इस बार बेहतर कारोबार की उम्मीद है। सुबह से ही आभूषणों की दुकानों पर ग्राहकों का पहुंचना शुरू हो गया है। खुदरा विक्रेताओं को उम्मीद है कि दिन चढ़ने के साथ खरीदारी में तेजी आएगी और देर रात तक बाजारों में रौनक बनी रहेगी।

अखिल भारतीय रत्न एवं आभूषण घरेलू परिषद (जीजेसी) के चेयरमैन राजेश आर. ने कहा कि आभूषण विक्रेताओं ने सुबह आठ बजे से ही अपनी दुकानें खोल दी थीं। उन्होंने कहा, ”ग्राहकों का आना अभी शुरू हुआ है। ज्यादातर ग्राहक पहले से बुक कराए गए आभूषण लेने आ रहे हैं। हमें उम्मीद है कि खुदरा विक्रेता देर रात तक दुकानें खुली रखेंगे और कारोबार करेंगे।” 

उन्होंने कहा, ”अमेरिका में चुनाव और सोने-चांदी की कीमतों में कमजोरी से उपभोक्ताओं की धारणा को समर्थन मिल रहा है। ऐसे में हमें उम्मीद है कि इस साल बिक्री की मात्रा पिछले साल के बराबर या उससे थोड़ी अधिक रहेगी।” उन्होंने कहा कि इस साल उपभोक्ता मुख्य रूप से हल्के वजन वाले और 18 कैरेट के आभूषणों तथा अन्य किफायती वस्तुओं को पसंद कर रहे हैं। धनतेरस को हिंदू पंचांग में कीमती धातुएं खरीदने के लिए सबसे शुभ दिन माना जाता है। 

राष्ट्रीय राजधानी में सोने की कीमत बृहस्पतिवार को 19 प्रतिशत टूटकर 1,48,800 रुपए प्रति 10 ग्राम (24 कैरेट, कर सहित) रह गई। यह 29 जनवरी, 2026 को दर्ज 1,83,000 रुपए के रिकॉर्ड स्तर से कम है। हालांकि, कीमतें पिछले साल 18 अक्टूबर को धनतेरस के दिन दर्ज 1,32,400 रुपए के स्तर से अब भी काफी अधिक हैं। चांदी की कीमत भी 29 जनवरी को दर्ज 4,04,500 रुपए प्रति किलोग्राम के उच्चतम स्तर से 52 प्रतिशत घटकर 1,94,500 रुपए प्रति किलोग्राम रह गई है। हालांकि, यह धनतेरस 2025 पर दर्ज 1,70,000 रुपए प्रति किलोग्राम के भाव से अब भी अधिक है। 

जीजेसी के उपाध्यक्ष अविनाश गुप्ता ने कहा कि ग्राहकों का आना अभी शुरू हुआ है और खुदरा विक्रेताओं को उम्मीद है कि दोपहर करीब दो बजे ग्राहकों की आवाजाही सबसे अधिक होगी और यह देर रात तक जारी रहेगी। उन्होंने कहा, ”पिछले तीन दिनों में हमें अग्रिम बुकिंग की बहुत उत्साहजनक संख्या देखने को मिली है। हमें उम्मीद है कि शुभ अवसर होने के कारण ये बुकिंग आज अच्छी बिक्री में तब्दील होंगी।” 

उन्होंने कहा, ”इस साल उपभोक्ता मुख्य रूप से हल्के वजन वाले और 18 कैरेट के आभूषण पसंद कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि सोने और चांदी दोनों की बिक्री की मात्रा पिछले साल के स्तर के बराबर रहेगी।” खुदरा विक्रेता ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए विशेष पेशकश और योजनाएं भी ला रहे हैं। चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता और दुनिया के सबसे बड़े आयातकों में से एक है।  

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शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स 80,100 के पार पहुंचा, निफ्टी 24,734 पर

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मुंबई, एजेंसी। सेंसेक्स और निफ्टी शुक्रवार को बढ़त के साथ कारोबार करते दिखे। बीएसई सेंसेक्स 849.98 अंक (1.07%) चढ़कर 80,159.99 अंक पर और एनएसई निफ्टी 197.40 (0.80%) अंक की तेजी के साथ 24,734 अंक पर कारोबार कर रहा है।

सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों में से महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयर में चार प्रतिशत से अधिक की तेजी आई। कंपनी का जुलाई-सितंबर तिमाही में एकीकृत शुद्ध लाभ 25 प्रतिशत बढ़कर 4,587.88 करोड़ रुपए रहा जिससे उसके शेयर में तेजी आई है। टाइटन, एचसीएल टेक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इन्फोसिस और भारती एयरटेल के शेयर में भी तेजी रही। 

वहीं, एशियन पेंट्स, पावर ग्रिड, बजाज फाइनेंस और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयर गिरावट में रहे। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की 225, चीन का एसएसई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग काफी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं। अमेरिकी शेयर बाजार बृहस्पतिवार को भारी गिरावट के साथ बंद हुए थे। नैस्डैक कम्पोजिट 5.52 प्रतिशत लुढ़क गया, एसएंडपी 500 में 4.36 प्रतिशत की गिरावट आई और डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज 3.44 प्रतिशत नीचे रहा। 

अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट कच्चा तेल का भाव 2.35 प्रतिशत बढ़कर 100.6 डॉलर प्रति बैरल पर था। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बृहस्पतिवार को 14,974.68 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे थे। सेंसेक्स बृहस्पतिवार को 2,008.61 अंक यानी 2.60 प्रतिशत उछलकर और निफ्टी 576 अंक यानी 2.40 प्रतिशत चढ़कर बंद हुआ था।

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अमेरिकी बाजार में हाहाकार से अरबपतियों को झटका, एलन मस्क के डूबे 79.7 अरब डॉलर

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नई दिल्ली, एजेंसी। अमेरिकी शेयर बाजार में गुरुवार को आई भारी गिरावट का असर दुनिया के सबसे अमीर कारोबारियों की संपत्ति पर भी देखने को मिला। AI सेक्टर में बढ़ती अनिश्चितता और कंपनियों के भारी निवेश पर संभावित सरकारी नियंत्रण की आशंका से निवेशकों ने जमकर बिकवाली की। इसका नतीजा यह हुआ कि दुनिया के टॉप 10 अरबपतियों की नेटवर्थ में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। सबसे ज्यादा नुकसान दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क को हुआ, जिनकी संपत्ति एक ही दिन में 79.7 अरब डॉलर कम हो गई।

ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के मुताबिक, इस गिरावट के बाद मस्क की कुल नेटवर्थ घटकर 785 अरब डॉलर रह गई। उनकी कंपनियों के शेयरों में आई गिरावट ने उनकी संपत्ति को बड़ा झटका दिया। गुरुवार को स्पेसएक्स के शेयर 9.05 फीसदी और टेस्ला के शेयर 10.77 फीसदी टूट गए। हालांकि, इस साल अब तक मस्क की नेटवर्थ में 312 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हो चुकी है।

जेफ बेजोस से जकरबर्ग तक, इन अरबपतियों को भी नुकसान

अमेरिकी बाजार की बिकवाली का असर टेक्नोलॉजी सेक्टर के बड़े कारोबारियों पर भी पड़ा। Nvidia के शेयरों में गिरावट के कारण कंपनी के सीईओ जेंसन हुआंग की नेटवर्थ 15.1 अरब डॉलर घटकर 151 अरब डॉलर रह गई। वह अमीरों की वैश्विक सूची में 13वें स्थान पर पहुंच गए।

वहीं, डेल टेक्नोलॉजीज के माइकल डेल की संपत्ति में 19.4 अरब डॉलर की कमी आई और उनकी नेटवर्थ 190 अरब डॉलर रह गई।

Amazon के संस्थापक जेफ बेजोस को 4.99 अरब डॉलर का नुकसान हुआ, जबकि लैरी पेज की संपत्ति 4.24 अरब डॉलर घट गई। सर्गेई ब्रिन को 3.88 अरब डॉलर और Meta के मार्क जकरबर्ग को 8.41 अरब डॉलर का झटका लगा। इसके अलावा वॉरेन बफे की नेटवर्थ 2.26 अरब डॉलर और लैरी एलिसन की संपत्ति 10.1 अरब डॉलर कम हो गई।

अडानी-अंबानी की दौलत में बढ़ोतरी

जहां अमेरिकी अरबपतियों की संपत्ति में गिरावट आई, वहीं भारतीय उद्योगपतियों के लिए गुरुवार का दिन बेहतर रहा। भारतीय शेयर बाजार में तेजी के चलते गौतम अडानी और मुकेश अंबानी की नेटवर्थ में इजाफा हुआ।

ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार, गौतम अडानी की संपत्ति 1.12 अरब डॉलर बढ़कर 117 अरब डॉलर पहुंच गई। वह दुनिया के अमीरों की सूची में 18वें स्थान पर हैं।

दूसरी ओर, रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी की नेटवर्थ में 51 करोड़ डॉलर की बढ़ोतरी हुई। इसके साथ उनकी कुल संपत्ति 87.3 अरब डॉलर हो गई और वह दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची में 22वें स्थान पर पहुंच गए।

इस तरह अमेरिकी बाजार की गिरावट ने जहां दुनिया के कई बड़े अरबपतियों की संपत्ति घटा दी, वहीं भारतीय शेयर बाजार की तेजी ने अडानी और अंबानी को राहत दी।

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