कोरबा। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं स्वच्छ ऊर्जा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से संचालित छत्तीसगढ़ राज्य इलेक्ट्रिक वाहन योजना ने कोरबा जिले में उल्लेखनीय सफलता दर्ज की है। जिले में लगभग 4 लाख पेट्रोल और डीजल वाहनों के पंजीकृत होने के कारण बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रण में लाने की चुनौती को ध्यान में रखते हुए इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में यह योजना अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो रही है। योजना के तहत इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर वाहन मूल्य का 10 प्रतिशत या अधिकतम एक लाख रुपये तक की सब्सिडी सीधे वाहन स्वामी के खाते में हस्तांतरित की जा रही है। जिला परिवहन कार्यालय कोरबा द्वारा डीलर पॉइंट रजिस्ट्रेशन के दौरान संबंधित वाहन स्वामी के बैंक खाते का विवरण लेकर ई-व्ही पोर्टल में प्रविष्टि एवं दस्तावेजों के सत्यापन उपरांत सब्सिडी राशि का पारदर्शी तरीके से अंतरण किया जाता है। 1 जनवरी 2025 से 31 दिसंबर 2025 तक जिले के 1774 वाहन स्वामियों को कुल 03 करोड़ 27 लाख 3 हजार 865 रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जा चुकी है। बढ़ती मांग और नागरिकों की उत्साहजनक प्रतिक्रिया को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा इस वर्ष 2.50 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट भी स्वीकृत किया गया है। इलेक्ट्रिक वाहनों की लोकप्रियता का प्रमाण उनके पंजीकरण आंकड़े हैं। वर्ष 2024 की तुलना में वर्ष 2025 में इलेक्ट्रिक वाहनों के पंजीकरण में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2024 में कुल 1244 इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत हुए थे, जबकि वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 1488 हो गई। वाहन श्रेणीवार पंजीकरण इस प्रकार बढ़ा-मोटर साइकिल 825 से बढ़कर 938 हुईं, मोपेड 44 से बढ़कर 0, मोटरकारें 49 से बढ़कर 74, ई-रिक्शा (गुड्स) 9 से 12, ई-रिक्शा (पैसेंजर) 23 से 14, तीन पहिया (गुड्स) 51 से 40 और तीन पहिया (पैसेंजर) 206 से बढ़कर 392 हो गईं। मालवाहक श्रेणी में 2 से बढ़कर 17 का पंजीयन हुआ, जबकि वर्ष 2025 में मोटर कैब का पंजीयन नहीं हुआ। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि जिले में इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर लोगों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है और पर्यावरण के प्रति जागरूकता में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। योजना को और प्रभावी तथा व्यापक बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर चार्जिंग प्वाइंट स्थापित करने की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इन चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना से जिले में इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग और सुविधाजनक होगा, पेट्रोल व डीजल पर निर्भरता कम होगी और वायु प्रदूषण में भी महत्वपूर्ण कमी आएगी। इलेक्ट्रिक वाहन योजना ने कोरबा जिले में स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन को नई दिशा दी है। यह योजना न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सार्थक कदम है, बल्कि कोरबा को एक स्वच्छ, हरित और आधुनिक शहर के रूप में विकसित करने में अहम भूमिका निभा रही है।
4 नवंबर को कुसमुंडा खदान बंद के साथ कोल परिवहन रोकने की चेतावनी
प्रभावितों को नहीं मिल रहा 100% वैकल्पिक रोजगार 30% के नाम पर भू विस्थापितों का अधिकार छीना जा रहा है: प्रशांत झा
कोरबा। छत्तीसगढ़ किसान सभा ने एसईसीएल की कुसमुंडा खदान क्षेत्र में आउट सोर्सिंग कंपनियों के माध्यम से होने वाले कामों में प्रभावित भू विस्थापितों और स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार देने सहित विभिन्न मांगों को लेकर कुसमुंडा से बाइक रैली कलेक्टर कार्यालय तक निकालने के बाद कोसाबाड़ी चौक में प्रदर्शन कर कलेक्टर कोरबा और एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र के महाप्रबंधक को ज्ञापन सौंपा है। किसान सभा ने ज्ञापन के माध्यम से मांगो पर सकारात्मक पहल नहीं होने पर 4 नवंबर 2026 को कुसमुंडा खदान बंद करने के साथ कोल परिवहन को पूर्ण रूप से रोकने की चेतावनी भी दी है। इस आंदोलन को भू विस्थापित रोजगार एकता संघ ने भी अपना समर्थन दिया है।
किसान सभा ने कहा कि SECL में जमीन अधिग्रहण के बाद हर गांव के भू विस्थापित रोजगार के लिए भटक रहे हैं जमीन अधिग्रहण के समय कई नियमों को बनाकर विस्थापित होने वाले छोटे किसानों को रोजगार से वंचित कर दिया जाता है और आऊट सोर्सिंग के माध्यम से भी होने वाले काम में आऊट सोर्सिंग कंपनियों द्वारा मनमानी की जा रही है जिससे भू विस्थापित रोजगार के लिए भटक रहे हैं।आऊट सोर्सिंग कंपनियों के मनमानी के खिलाफ छत्तीसगढ़ किसान सभा और भू विस्थापित रोजगार एकता संघ ने विरोध करने का निर्णय लिया है।
छत्तीसगढ़ किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष प्रशांत झा ने कहा की एसईसीएल में जमीन अधिग्रहण के बाद हजारों भू विस्थापित रोजगार के लिए भटक रहे हैं और प्रबंधन आऊट सोर्सिंग कंपनियों के साथ सांठ गांठ कर रोजगार को बेचने का काम कर रही है जिसका विरोध हमारे द्वारा किया जा रहा है कुसमुंडा और गेवरा में होने वाले कार्यों में प्रभावितों को प्राथमिकता नहीं दिया जा रहा है जिसका विरोध की शुरवात आज कुसमुंडा में किया गया है और मांगो पर सकारात्मक पहल नहीं हुआ तो 4 नवंबर को कुसमुंडा खदान बंद के साथ कोल परिवहन को पूर्ण रूप से रोका जाएगा और कुसमुंडा क्षेत्र से कोयला परिवहन की गाड़ियों को रोका जाएगा।
किसान सभा के जिला अध्यक्ष जय कौशिक और सचिव दीपक साहू ने कहा की खदान विस्तार के लिए ग्रामीणों की पूरी जमीन ली जाती है लेकिन रोजगार देते समय 100% रोजगार प्रभावित ग्रामीणों को नहीं दिया जा रहा है 30% बाहर के लोगों के नाम पर प्रभावितों के हक के रोजगार को बेचा जा रहा है। विकास के नाम पर अपनी गांव और जमीन से बेदखल कर दीये गए विस्थापित परिवारों की जीवन स्तर सुधरने के बजाय और भी बदतर हो गई है। हजारों छोटे किसानों को खेती किसानी से अलग कर रोजगार से वंचित रखा गया है। विकास की जो नींव कोरबा में रखी गई है उसमें प्रभावित परिवारों की अनदेखी हो रही है। लगातार संघर्ष के बाद खानापूर्ति के नाम पर कुछ लोगों को वैकल्पिक रोजगार दिया जा रहा है। प्रभावितों के पास अब संघर्ष के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा है।
भू विस्थापित रोजगार एकता संघ के रेशम यादव और दामोदर श्याम ने कहा की जिनकी जमीन गई है उन्हें ना तो स्थाई रोजगार मिल रहा है ना ही उनके परिवार को आऊट सोर्सिंग में काम सभी के हक को बेचा जा रहा है इसके विरोध में एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र के महाप्रबंधक कार्यालय और कलेक्ट्रेट के सामने प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा गया है समस्याओं का जल्द समाधान नहीं हुआ तो और उग्र प्रदर्शन होगा।
प्रदर्शन में प्रमुख रूप से जय कौशिक,दामोदर श्याम,रेशम यादव,उत्तम दास,सम्मेलाल,गणेश बिंझवार,दिलीप कंवर,विकास बिंझवार,आनंद पाल, महेंद्रा,संजय,जीवन सारथी,हरि साहू, हुसैन,राजेश्वर दास, नटवर लाल,मनोज महंत,मनीष,हरिहर साहू,श्याम सुंदर महंत,गुड्डू राठौर,रामकुमार,जयचंद,हेमंत पटेल,शशि यादव,गुरु शरण,मनोजके साथ बड़ी संख्या में भू विस्थापित और ठेका मजदूर उपस्थित थे।
मांगे
खदान विस्तार के लिए पूर्व एवं वर्तमान में जिन गांव की जमीन अधिग्रहण हुई है उन गांव के बेरोजगारों को पहली प्राथमिकता के साथ आउट सोर्सिंग कंपनियों में वैकल्पिक रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
खनन प्रभावित क्षेत्र एवं जिले के ही बेरोजगारों को आऊट सोर्शिंग कंपनियों में रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
आउट सोर्सिंग कंपनियों का काम समाप्त होने पर चालू होने वाले नए कंपनियों में पुराने कर्मचारियों को कार्य में पुनः रखा जाए। (वर्तमान में गोदावरी कंपनी बंद होने के कारण जिले के सैकड़ों कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं )।
आउट सोर्सिंग कंपनियों में 70 और 30% रोजगार देने का खेल समाप्त किया जाए। जिनकी जमीन अधिग्रहण हुई है उन्हे पहली प्राथमिकता के साथ खनन प्रभावित जिले के बेरोजगारों को खनन कार्य में 100% रोजगार दिया जाए।
किताबों से निकल कर अडानी पॉवर प्लांट पहुँचे हायर सेकेंडरी स्कूल सिमगा के छात्र-छात्राएं, बच्चों ने प्लांट भ्रमण कर प्रत्यक्ष देखी बिजली उत्पादन की प्रक्रिया
कोरबा।जिले के वनांचल स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिमगा, विकासखण्ड-पोड़ीउपरोड़ा के छात्र-छात्राओं के शैक्षणिक एवं बौद्धिक विकास हेतु प्राचार्य श्री सतीश प्रकाश सिंह के मार्गदर्शन में दिनांक 26 अक्टूबर 2026 को अडानी कोरबा पॉवर प्लांट पताड़ी उरगा में “उड़ान प्रोजेक्ट” के तहत एक दिवसीय औद्योगिक शैक्षणिक भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किया।
हायर सेकेंडरी स्कूल सिमगा के विद्यार्थियों को अडानी पॉवर प्लांट के शैक्षणिक औद्योगिक भ्रमण कार्यक्रम के दौरान कक्षा की चारदीवारी और किताबों से बाहर निकल कर विज्ञान और तकनीक के व्यवहारिक पक्ष को समझने का अवसर मिला। भ्रमण के दौरान प्राचार्य सतीश प्रकाश सिंह ने बच्चों को बताया कि स्कूल में पढ़े गये ऊर्जा और विज्ञान के सिद्धांत वास्तविक जीवन में कैसे काम करते हैं। अडानी पॉवर प्लांट के उड़ान प्रोजेक्ट के भ्रमण प्रभारी अधिकारी प्रेम शंकर साहू ने बच्चों की जिज्ञासा का समाधान कर बताया कि बिजली उत्पादन की आधुनिक तकनीक और कार्यप्रणाली कैसे काम करती हैं। बच्चों ने संयंत्र की विशाल मशीनरी, पाइपलाइन, कंट्रोल रूम, अत्याधुनिक कोल हैंडलिंग प्रणाली का अवलोकन किया प्लांट भ्रमण के दौरान सभी विद्यार्थियों को औद्योगिक परिसर में अपनाए जाने वाले सुरक्षा मानकों, नियमों के पालन, कर्मचारियों की कार्यप्रणाली, टीमवर्क और अनुशासन के महत्व से भी परिचित कराया गया।
इस अवसर पर प्राचार्य सतीश प्रकाश सिंह ने इस पहल के लिए अडानी फाउंडेशन और संयंत्र प्रबंधन के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि इस तरह के औद्योगिक शैक्षणिक एक्सपोजर विजिट से ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों के मन में तकनीकी शिक्षा के प्रति रुचि बढ़ती हैं और भविष्य में उर्जा, तकनीकी व इंजीनियरिंग के क्षेत्र में कैरियर बनाने की नई राहें खुलती हैं।
भ्रमण कार्यक्रम में विद्यार्थियों के साथ संस्था के व्याख्याता सुश्री दिव्या कुजूर, श्रीमती रुक्मणी पुरैना, उमाशंकर टोंडें सहित छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
31वें सप्ताह में हुआ था जन्म, सांस की परेशानी और गंभीर संक्रमण जैसी जटिलताओं से जूझ रहे थे दोनों बच्चे
कोरबा। समय से पहले जन्म और बेहद कम वजन के कारण गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करने वाले जुड़वां बच्चों ने आखिरकार जिंदगी की जंग जीत ली। NKH सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, कोरबा की नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में लगभग एक महीने तक चले उपचार और विशेष देखभाल के बाद 12 अक्टूबर को दोनों बच्चों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। दोनों बच्चों का जन्म गर्भावस्था के 31वें सप्ताह में हुआ था। जन्म के समय एक शिशु का वजन महज 870 ग्राम, जबकि दूसरे का वजन 1 किलो 60 ग्राम था। समयपूर्व जन्म के कारण दोनों को सांस लेने में परेशानी, सेप्सिस (गंभीर संक्रमण) और एनीमिया जैसी जटिलताओं का सामना करना पड़ा। इनमें से एक शिशु में ब्लड शुगर की कमी और समयपूर्व जन्म से जुड़ी आंखों की बीमारी रेटिनोपैथी ऑफ प्रीमैच्योरिटी (ROP) की समस्या भी सामने आई।
विशेषज्ञों की निगरानी में हुआ उपचार
बाल एवं नवजात रोग विशेषज्ञ डॉ. अजीत ठोकल के मार्गदर्शन में NICU में दोनों बच्चों की सांस, ऑक्सीजन स्तर, हृदय गति, ब्लड शुगर, शरीर के तापमान और पोषण की लगातार निगरानी की गई। आवश्यकता के अनुसार श्वसन सहायता, दवाइयां और विशेष पोषण उपलब्ध कराया गया। निरंतर उपचार से 870 ग्राम वजन वाले शिशु का वजन बढ़कर 1 किलो 450 ग्राम हो गया। दोनों की स्थिति में सुधार के बाद उन्हें घर भेज दिया गया।
समय पर अस्पताल का चयन बेहद जरूरी
यह मामला समयपूर्व जन्म लेने वाले बच्चों के लिए विशेषज्ञ चिकित्सा और सुसज्जित NICU की अहमियत को रेखांकित करता है। चिकित्सकीय विशेषज्ञों के अनुसार, जुड़वां गर्भावस्था या समयपूर्व प्रसव की आशंका होने पर पहले से ऐसी स्वास्थ्य सुविधा की योजना बनानी चाहिए, जहां नवजात विशेषज्ञ, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ और आवश्यक श्वसन सहायता उपलब्ध हो। अस्पताल से छुट्टी के बाद भी प्रीमैच्योर बच्चों को नियमित चिकित्सकीय जांच, उचित पोषण और विशेष देखभाल की जरूरत होती है। आंखों की जांच सहित डॉक्टर द्वारा सुझाए गए फॉलो-अप समय पर कराना महत्वपूर्ण है। इन दोनों बच्चों की घर वापसी नवजात चिकित्सा में समय पर उपचार, निरंतर निगरानी और समर्पित देखभाल के महत्व का संदेश देती है।