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छत्तीसगढ़

शराब घोटाला केस…चैतन्य बघेल को 14 दिन की जेल:भूपेश बोले- सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी केंद्र सरकार और ED के गालों पर तमाचा

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रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को ED ने मंगलवार को रायपुर की स्पेशल कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की ज्यूडिशियल रिमांड पर भेज दिया है। इससे पहले ED ने चैतन्य से 5 दिन तक पूछताछ की थी।

बचाव पक्ष के वकील फैजल रिजवी ने कोर्ट में बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा पेश की गई अर्जी पर उन्होंने आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि ED ने बिना समन दिए चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया। इसके लिए जो तीन आधार बताए गए, वे तथ्यात्मक रूप से कमजोर हैं। ED ने तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया।

वहीं सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) को फटकार लगाते हुए कहा कि, राजनीतिक लड़ाइयां चुनाव में लड़ी जानी चाहिए, जांच एजेंसियों के जरिए नहीं। ED का इस तरह इस्तेमाल क्यों हो रहा है?

इस पर पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने ट्वीट कर कहा कि, सुप्रीम कोर्ट की ED को लेकर की गई टिप्पणी केंद्र सरकार के खिलाफ है और यह ED के गालों पर तमाचा है। अब यह स्पष्ट है कि ED भाजपा के एक विंग के रूप में काम कर रही है।

इस केस से जुड़ी तस्वीरें

मंगलवार को चैतन्य बघेल को ED ने रायपुर की स्पेशल कोर्ट में पेश किया।

मंगलवार को चैतन्य बघेल को ED ने रायपुर की स्पेशल कोर्ट में पेश किया।

इससे पहले ED ने चैतन्य बघेल से 5 दिनों तक पूछताछ की है।

इससे पहले ED ने चैतन्य बघेल से 5 दिनों तक पूछताछ की है।

रायपुर की स्पेशल कोर्ट से निकलने के दौरान चैतन्य बघेल हंसते हुए नजर आए।

रायपुर की स्पेशल कोर्ट से निकलने के दौरान चैतन्य बघेल हंसते हुए नजर आए।

वहीं बघेल ने आगे लिखा, इसलिए ही सुप्रीम कोर्ट ने कल ED से कहा कि आप अपना काम करें, राजनीतिज्ञों को राजनीति करने दें। आज पूरे देश में भाजपा अपने राजनीतिक हितों को साधने के लिए ED का दुरुपयोग कर रही है और केवल विपक्ष को टारगेट कर रही है।

अब जानिए ED के आरोप और गिरफ्तारी पर क्या बोले बचाव पक्ष के वकील ?

Yबचाव पक्ष के वकील फैजल रिजवी ने बताया कि पहला मामला सहेली ज्वेलर्स से जुड़े 5 करोड़ रुपए के लोन का है, जिस पर ED ने कहा कि यह बिना ब्याज का संदिग्ध लोन है। इसके जवाब में हमने स्पष्ट किया कि यह लोन 2019 में लिया गया था।

अब तक करीब 2.21 करोड़ रुपए ब्याज के रूप में चुकाए जा चुके हैं। यह जानकारी फरवरी 2025 में सहेली ज्वेलर्स के प्रोपराइटर द्वारा दस्तावेजों सहित ED को दी जा चुकी थी, बावजूद इसके जांच एजेंसी ने कोर्ट के समक्ष भ्रामक तथ्य पेश किए।

फैजल रिजली ने बताया कि दूसरा मामला त्रिलोक सिंह ढिल्लन को 5 करोड़ रुपए में बेचे गए फ्लैट से जुड़ा है, जिसमें ढिल्लन पहले ही जेल में रहते हुए यह स्पष्ट कर चुके हैं कि उनके पास यह राशि कहां से आई। ED ने उनके जवाबों से संतुष्टि जताई थी, इसीलिए चैतन्य बघेल से इस संबंध में कोई पूछताछ नहीं की गई थी।

ED ने फरार आरोपी की खातिरदारी कर उसके बयान पर गिरफ्तारी की

फैजल रिजवी ने बताया कि तीसरा आधार पप्पू बंसल के बयान पर आधारित है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि चैतन्य के पास 1,000 करोड़ रुपए का लेनदेन है। इस पर भी हमने ED को दस्तावेजों और सबूतों सहित जवाब सौंपा, जिसे कोर्ट में भी प्रस्तुत किया गया।

हमने यह भी बताया कि जिस फरार आरोपी लक्ष्मी नारायण के बयान पर कार्रवाई की गई, उसके खिलाफ वारंट जारी है। इसके बावजूद ED ने आरोपी की खातिरदारी कर बयान लिया और चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी की।

अब जानिए ED ने चैतन्य पर क्या आरोप लगाए हैं?

ED के अनुसार लीकर स्कैम में पूछताछ में शराब कारोबारी लक्ष्मी नारायण बंसल उर्फ पप्पू ने EOW को बयान दिया था कि, उसने और चैतन्य बघेल ने मिलकर 1000 करोड़ से ज्यादा घोटाले की रकम को हैंडल किया। यह कैश अनवर ढेबर ने दीपेन चावड़ा को पहुंचाया। यह पैसा बाद में राम गोपाल अग्रवाल को दिया गया।

इसकी व्यवस्था चैतन्य बघेल के साथ मिलकर की गई और चैतन्य बघेल के कहने पर 1000 करोड़ में से 100 करोड़ नकद केके श्रीवास्तव को दिया गया। पप्पू बंसल ने पूछताछ में ये भी स्वीकार किया है कि शराब घोटाले से उसे 3 महीने में 136 करोड़ रुपए मिले हैं। अनवर ढेबर और नीतेश पुरोहित के बीच चैट में हुई बातचीत में इसकी जानकारी है।

कौन है लक्ष्मी नारायण बंसल उर्फ ​​​​​​पप्पू बंसल

पप्पू बंसल दुर्ग भिलाई का शराब कारोबारी है। प्रॉपर्टी डीलर का काम करने के दौरान शराब कारोबार से जुड़ा। भूपेश बघेल के करीबी होने के साथ ही कोयले का भी कारोबार है।

चैतन्य के प्रोजेक्ट में 13-15 करोड़ इन्वेस्ट

ED ने अपनी जांच में पाया कि चैतन्य बघेल के विट्ठल ग्रीन प्रोजेक्ट (बघेल डेवलपर्स) में घोटाले के पैसे को इन्वेस्ट किया गया है। इस प्रोजेक्ट से जुड़े अकाउंटेंट के ठिकानों पर छापेमारी कर ED ने रिकॉर्ड जब्त किए।

प्रोजेक्ट के कंसल्टेंट राजेन्द्र जैन ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में वास्तविक खर्च 13-15 करोड़ था। जबकि रिकॉर्ड में 7.14 करोड़ ही दिखाया गया। जब्त डिजिटल डिवाइसेस से पता चला कि बघेल की कंपनी ने एक ठेकेदार को 4.2 करोड़ कैश पेमेंट किया गया, जो रिकॉर्ड में नहीं दिखाया गया।

फर्जी फ्लैट खरीदी के जरिए पैसे की हेराफेरी

ED ने अपनी जांच में पाया है कि त्रिलोक सिंह ढिल्लो ने 19 फ्लैट खरीदने के लिए 5 करोड़ बघेल डेवलपर्स को ट्रांसफर किया। ढिल्लन ने ये फ्लैट अपने कर्मचारियों के नाम पर खरीदे लेकिन पेमेंट त्रिलोक ढिल्लो ने खुद दिया।

ED ने जब ढिल्लन के कर्मचारियों से पूछताछ की तो कर्मचारियों ने बताया कि ये फ्लैट की खरीदी उन्हीं के नाम पर हुई, लेकिन पैसे ढिल्लो ने दिए। ये सारा ट्रांजेक्शन 19 अक्टूबर 2020 को एक ही दिन हुआ। ED ने कहा कि ब्लैक को लीगल करने के लिए यह एक पूर्व-योजना के तहत किया गया लेन-देन था। इसका मकसद पैसे को छिपाकर चैतन्य बघेल तक पहुंचाना था।

ED ने शुक्रवार को गिरफ्तार कर चैतन्य बघेल को रायपुर की स्पेशल कोर्ट में पेश किया।

ED ने शुक्रवार को गिरफ्तार कर चैतन्य बघेल को रायपुर की स्पेशल कोर्ट में पेश किया।

5 करोड़ कैश के बदले फर्जी ट्रांसफर

ED के मुताबिक भिलाई के एक ज्वेलर्स ने चैतन्य बघेल को 5 करोड़ रुपए उधार दिए लेकिन ED की जांच में सामने आया कि जो 5 करोड़ रुपए चैतन्य की दो कंपनियों को लोन के रूप में दिया गया ।

बाद में इसी ज्वेलर्स ने बघेल की कंपनी से 6 प्लॉट खरीदे जिसकी कीमत 80 लाख थी। ED ने बताया कि यह पैसा शराब घोटाले से आया हुआ कैश था। यह पैसा बैंक के जरिए ट्रांसफर किया गया। ताकि कैश को लीगल दिखाया जा सके।

पैसा छुपाने के लिए फ्रंट कंपनियों का इस्तेमाल

ईडी का दावा है कि चैतन्य बघेल ने घोटाले का पैसा पाने के लिए दूसरे लोगों और कंपनियों का इस्तेमाल किया ताकि ED और अन्य एजेंसियां ट्रैक न कर सकें। जैसे ढिल्लन सिटी मॉल में पैसा आया, फिर ढिल्लन ड्रिंक्स से कर्मचारियों को पैसा ट्रांसफर हुआ, फिर वही पैसा बघेल डेवलपर्स को दिया गया। ED का दावा है कि चैतन्य बघेल के पास 16.70 करोड़ के अवैध घोटाले के पैसे आए।

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छत्तीसगढ़

चौकीदार को बंधक बनाकर बंद फैक्ट्री में 17-लाख की लूट:एक हफ्ते तक की रेकी, फिर 8 बदमाशों ने दिया वारदात को अंजाम, 3 गिरफ्तार

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रायपुर, एजेंसी। रायपुर के हीरापुर में बंद पड़ी इस्पात फैक्ट्री में बदमाशों ने लूट की वारदात को अंजाम दिया। रात में 7-8 बदमाश फैक्ट्री में पहुंचे और सबसे पहले चौकीदार को रस्सी से बांध दिया। इसके बाद ऑफिस और फैक्ट्री में रखा एल्युमिनियम, कॉपर और दूसरे कीमती सामान लूटकर फरार हो गए। मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से करीब 17 लाख रुपए का सामान बरामद किया है। वारदात में इस्तेमाल टाटा एस वाहन, स्कूटी और दूसरे औजार भी जब्त किए गए हैं। घटना में शामिल बाकी आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश की जा रही है।

एक हफ्ते तक फैक्ट्री की रेकी, फिर रात में वारदात

घटना 22 अक्टूबर की रात करीब 1:30 बजे की है। हीरापुर के तेंदुआ रोड पर स्थित अमरनाथ इस्पात फैक्ट्री साल 2020 से बंद है। यहां दिलीप कुमार वर्मा चौकीदारी करते हैं।

घटना के समय वे ऑफिस के पोर्च में बैठे थे। तभी उन्हें बाउंड्रीवॉल के अंधेरे हिस्से से एक व्यक्ति आता दिखाई दिया। चौकीदार ने उसे आवाज देकर रोकने की कोशिश की, तो वह पत्थर फेंकने लगा। इसी दौरान चेहरे पर कपड़ा बांधे 7-8 और लोग वहां पहुंच गए।

चौकीदार के हाथ बांधकर फैक्ट्री से 17 लाख का सामान लूटा

बदमाशों ने चौकीदार के दोनों हाथ पीछे की ओर रस्सी से बांध दिए। इसके बाद ऑफिस में घुसकर एल्युमिनियम वायर के बंडल, कॉपर का सामान, एल्युमिनियम प्लेट, हैलोजन लाइट, नकदी, पैनल कार्ड और कॉपर कॉइल लूट लिया।

वे सारा सामान टाटा एस वाहन में लोडकर ले गए। भागने के लिए बदमाशों ने फैक्ट्री की दीवार तोड़ी और खेत के रास्ते रिंग रोड की ओर फरार हो गए।

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने वारदात से पहले करीब एक सप्ताह तक फैक्ट्री की रेकी की थी। वे वहां की गतिविधियों और सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रख रहे थे। योजना के तहत टाटा एस और स्कूटी से फैक्ट्री पहुंचे थे।

CCTV फुटेज और मुखबिर की मदद से पकड़ में आए आरोपी

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने फैक्ट्री और आसपास के रास्तों पर लगे CCTV कैमरों के फुटेज खंगाले। संदिग्धों की आवाजाही का पता लगाने के लिए घटना से पहले और बाद के फुटेज का मिलान किया गया। पुलिस ने तकनीकी जांच और मुखबिरों की मदद से सरोना के संदीप नेताम को पकड़ा। पूछताछ और मिले सबूतों के आधार पर अजीत भारती और उमेन्द्र ठाकुर उर्फ उमेन को भी गिरफ्तार किया गया।

पुलिस के मुताबिक, तीनों ने साथियों के साथ मिलकर वारदात को अंजाम देना स्वीकार किया है। उनके कब्जे से एलुमिनियम वायर, एल्युमिनियम और कॉपर के सामान, प्लेट, हैलोजन लाइट, पैनल कार्ड और कॉपर कॉइल सहित करीब 17 लाख रुपए का सामान जब्त किया गया। वारदात में इस्तेमाल टाटा एस, स्कूटी, कटर मशीन और ड्रिल मशीन भी जब्त की गई है।

पहले भी आपराधिक मामलों में जेल जा चुके हैं आरोपी

पुलिस के अनुसार, संदीप नेताम पहले गुढ़ियारी थाने के चोरी और मारपीट के मामले में, उमेन्द्र ठाकुर उर्फ उमेन टिकरापारा के नकबजनी के मामले में और अजीत भारती डीडी नगर के प्रतिबंधात्मक मामले में जेल जा चुका है।

गिरफ्तार आरोपियों में संदीप नेताम (35), अजीत भारती (30) और उमेन्द्र ठाकुर उर्फ उमेन (27) शामिल हैं। पुलिस अब वारदात में शामिल बाकी आरोपियों की तलाश कर रही है।

पुलिस की संयुक्त कार्रवाई

यह कार्रवाई पुलिस उपायुक्त (क्राइम एवं साइबर) स्मृति रजनाला और पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) रॉबिन्सन गुरिया की निगरानी में एंटी क्राइम एवं साइबर यूनिट और कबीर नगर पुलिस ने की।

पुलिस के मुताबिक, रायपुर कमिश्नरेट में अब तक चोरी, नकबजनी, मोबाइल छिनतई, लूट और डकैती के 150 मामलों में 237 आरोपियों को गिरफ्तार कर करीब 4.66 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की गई है।

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छत्तीसगढ़

जंगल से CRPF ने नक्सलियों का डंप बरामद किया:सुकमा में 79 जिलेटिन स्टिक, इलेक्ट्रिक वायर, कॉम्बैट बेल्ट और वर्दी जब्त की गई

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सुकमा, एजेंसी। सुकमा जिले के भेज्जी थाना क्षेत्र में सीआरपीएफ की 219वीं बटालियन की सी कंपनी ने अभियान चलाकर 79 जिलेटिन स्टिक और नक्सली उपयोग की अन्य सामग्री बरामद की है। जवानों ने ग्राम मोसलमुडगु के बाहरी जंगल में छिपाकर रखे गए सामान को जब्त किया। सीआरपीएफ के अनुसार, इस कार्रवाई से विस्फोटक सामग्री के संभावित इस्तेमाल का खतरा टालने में मदद मिली।

सीआरपीएफ की 219वीं बटालियन को 24 अक्टूबर को सूचना मिली थी कि मोसलमुडगु के बाहरी इलाके में नक्सलियों ने विस्फोटक और अन्य सामान छिपाकर रखा है। इसके आधार पर 25 अक्टूबर को शाम 4 बजे एरिया डोमिनेशन अभियान शुरू किया गया।

डॉग स्क्वॉड की मदद से की तलाशी

अभियान के दौरान शाम करीब 5:35 बजे जवान संदिग्ध स्थान पर पहुंचे। यहां DSMD और K9 डॉग स्क्वॉड की मदद से सघन तलाशी ली गई। इस दौरान एक छोटा नीला कंटेनर मिला, जिसमें विस्फोटक सामग्री और नक्सली गतिविधियों से जुड़ा सामान रखा था।

बम निरोधक दस्ते ने सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए सामग्री को सुरक्षित तरीके से बरामद किया। इसके बाद आसपास के इलाके में अन्य डंप की तलाश भी की गई।

डंप से ये सामग्री मिली

  • 79 जिलेटिन स्टिक
  • पीले रंग के इलेक्ट्रिक वायर के 4 बंडल
  • हरे रंग के इलेक्ट्रिक वायर के 3 बंडल
  • 7 हरे सिंथेटिक कॉम्बैट बेल्ट
  • नक्सली वर्दी के काले कपड़े के 3 बंडल
  • 1 छोटा नीला कंटेनर
  • 7 पेन
  • 1 छोटा कैलकुलेटर
  • 1 पॉकेट डायरी

शाम 7:20 बजे कैंप लौटे जवान

सर्च ऑपरेशन पूरा करने के बाद जवान शाम 7:20 बजे बरामद सामग्री के साथ सुरक्षित भेज्जी कैंप लौट आए। सीआरपीएफ के अनुसार, इलाके में नक्सली गतिविधियों पर नियंत्रण और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अभियान लगातार चलाए जा रहे हैं।

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छत्तीसगढ़

धमतरी के जंगल में 3500 पेड़ों का होगा इलाज:गर्डलिंग से पहुंचा नुकसान, विशेषज्ञों की टीम वैज्ञानिक तकनीकों से बचाने में जुटी

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धमतरी, एजेंसी। धमतरी जिले के करका वन क्षेत्र में पेड़ों की छाल काटकर उन्हें नुकसान पहुंचाया गया है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व ने ऐसे 3500 क्षतिग्रस्त पेड़ों को बचाने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है।

पेड़ों की स्थिति की जांच कर वैज्ञानिक तरीके से उनका उपचार किया जा रहा है। इस काम में बेंगलुरु के वृक्ष संरक्षण विशेषज्ञ विजय निशांत भी मदद कर रहे हैं। उनकी संस्था प्रोजेक्ट वृक्ष फाउंडेशन इस अभियान में तकनीकी सहयोग दे रही है।

पेड़ों के तने के चारों ओर छाल काटने की प्रक्रिया को ‘गर्डलिंग’ कहते हैं। इससे पेड़ों में भोजन और पोषक तत्वों के परिवहन पर असर पड़ता है। नुकसान अधिक होने पर पेड़ सूखकर मर सकते हैं। करका वन क्षेत्र में इसी तरह क्षतिग्रस्त हुए पेड़ों को बचाने के लिए वन विभाग और विशेषज्ञों की टीम काम कर रही है।

पेड़ों की स्थिति के आधार पर तय होगा उपचार

वन विभाग और विशेषज्ञों की टीम ने चिह्नित 3500 पेड़ों को उनकी स्थिति और जीवित रहने की संभावना के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटा है। जिन पेड़ों को तत्काल उपचार की जरूरत है, उन्हें प्राथमिकता दी जा रही है। गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त पेड़ों के लिए विशेष तकनीकों और नियमित निगरानी की व्यवस्था की जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ पेड़ों के बचने की संभावना बेहतर है, जबकि कुछ को लंबे समय तक उपचार और देखभाल की जरूरत होगी। पूरी तरह मृत पेड़ों के संबंध में भी विशेषज्ञों की जांच के बाद ही जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

उपचार की योजना बनाते समय पेड़ की प्रजाति, उम्र, तने की मोटाई, क्षति की गंभीरता और छाल काटे जाने के बाद बीते समय को ध्यान में रखा जा रहा है। प्रत्येक पेड़ को एक क्रमांक दिया गया है। उसका रिकॉर्ड तैयार किया गया है, ताकि उपचार के बाद उसकी स्थिति में होने वाले बदलावों पर नजर रखी जा सके।

ब्रिज ग्राफ्टिंग तकनीक से बचाने की कोशिश

क्षतिग्रस्त पेड़ों के उपचार में ‘ब्रिज ग्राफ्टिंग’ जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें तने के प्रभावित हिस्से के ऊपर जीवित ऊतकों के बीच दोबारा संपर्क स्थापित करने की कोशिश की जाती है। इससे पेड़ में पोषक तत्वों का परिवहन बहाल करने में मदद मिल सकती है।

इसके अलावा ट्री बैंडेजिंग, घावों की देखभाल और जड़ों को मजबूत करने के उपाय भी किए जा रहे हैं। उपचार का तरीका प्रत्येक पेड़ की स्थिति के अनुसार तय किया जा रहा है, ताकि जहां संभव हो, वहां पेड़ प्राकृतिक रूप से दोबारा स्वस्थ हो सकें।

100 से ज्यादा वनकर्मी अभियान में जुटे

इस अभियान में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के 100 से अधिक मैदानी वनकर्मी जुटे हैं। इनके साथ ट्री डॉक्टर विजय निशांत, उद्यानिकी विशेषज्ञ और ग्राफ्टिंग के जानकार भी काम कर रहे हैं।

अभियान का उद्देश्य क्षतिग्रस्त पेड़ों को बचाने के साथ वनकर्मियों को वैज्ञानिक उपचार का व्यावहारिक प्रशिक्षण देना भी है। इससे भविष्य में ऐसे मामलों में समय पर उपचार किया जा सकेगा। उपचार के बाद प्रत्येक पेड़ की नियमित निगरानी होगी और उसकी स्थिति में होने वाले बदलावों का रिकॉर्ड रखा जाएगा।

कुछ पेड़ों में नए ऊतक विकसित होने के संकेत

मैदानी निरीक्षण के दौरान कुछ ऐसे पेड़ भी मिले हैं, जिनके क्षतिग्रस्त तनों पर नए ऊतक विकसित होते दिखाई दिए हैं। यह संकेत है कि कुछ पेड़ों में घाव भरने की प्रक्रिया प्राकृतिक रूप से शुरू हो चुकी है।

विशेषज्ञ इन पेड़ों का अध्ययन करेंगे, ताकि यह समझा जा सके कि किन परिस्थितियों में पेड़ अपने आप स्वस्थ हो सकते हैं और किन मामलों में सर्जरी या अतिरिक्त उपचार की जरूरत पड़ती है। इस अध्ययन के आधार पर भविष्य में वृक्ष संरक्षण की रणनीति को और प्रभावी बनाने का प्रयास किया जाएगा।

एक दशक में 1.25 लाख से ज्यादा पेड़ नष्ट होने का दावा

ड्रोन और सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से पता चला है कि पिछले एक दशक में करका वन क्षेत्र में 1.25 लाख से ज्यादा पेड़ नष्ट हुए हैं। अतिक्रमण बढ़ने से जंगल और जैव विविधता को नुकसान पहुंचने की चिंता बढ़ी है।

करका वन क्षेत्र पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यह पैरी नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र का हिस्सा है। ऐसे में यहां पेड़ों को होने वाला नुकसान केवल वन्यजीवों के आवास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर मिट्टी के संरक्षण, जैव विविधता और जलग्रहण क्षेत्र पर भी पड़ सकता है।

क्षतिग्रस्त पेड़ों को बचाने के साथ अतिक्रमण पर नियंत्रण, शेष वन क्षेत्र का संरक्षण और लगातार निगरानी करना भी जरूरी है।

डिप्टी डायरेक्टर बोले- पेड़ों के उपचार के बाद होगी नियमित निगरानी

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर वरुण जैन ने बताया कि करका क्षेत्र में क्षतिग्रस्त पेड़ों को बचाने के लिए वैज्ञानिक तरीके से उपचार किया जा रहा है। विशेषज्ञों की मदद से पेड़ की स्थिति का आकलन कर उसके अनुसार उपचार की योजना बनाई गई है।

उन्होंने बताया कि अभियान में वनकर्मियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है, ताकि उपचार के साथ उनकी तकनीकी क्षमता भी बढ़ाई जा सके। उपचार के बाद पेड़ों की नियमित निगरानी की जाएगी और परिणामों का रिकॉर्ड रखा जाएगा।

इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि कौन-सी तकनीक किस तरह के पेड़ों के लिए अधिक प्रभावी है। वन विभाग का प्रयास है कि अधिक से अधिक क्षतिग्रस्त पेड़ों को बचाकर करका क्षेत्र की प्राकृतिक विरासत का संरक्षण किया जा सके।

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