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कोरबा

मानव-हाथी द्वंद्व की रोकथाम और प्रभावितों को समय पर मुआवजा देने के निर्देश

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अवैध हुकिंग पर कलेक्टर ने विद्युत विभाग को कार्यवाही के दिए निर्देश

हाथी प्रभावित क्षेत्रों के धान खरीदी केंद्रों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने पर जोर

कलेक्टर की अध्यक्षता में मानव-हाथी द्वंद रोकने गठित समिति की बैठक आयोजित

कोरबा, 06 अक्टूबर 2026। मानव-हाथी द्वंद्व प्रबंधन के लिए गठित समिति की बैठक आज कलेक्टोरेट सभाकक्ष में कलेक्टर कुणाल दुदावत की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में हाथियों से प्रभावित किसानों को फसल क्षति का मुआवजा समय पर उपलब्ध कराने, संवेदनशील धान खरीदी केंद्रों में सुरक्षा व्यवस्था करने और मानव-हाथी द्वंद्व की घटनाओं को रोकने के उपायों पर चर्चा की गई। बैठक में नगर निगम आयुक्त आशुतोष पांडे सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

कलेक्टर ने निर्देश दिए कि हाथियों से फसल नुकसान की स्थिति में पटवारियों से समय-सीमा के भीतर आवश्यक रिपोर्ट तैयार कराई जाए, ताकि प्रभावित किसानों को क्षतिपूर्ति राशि शीघ्र मिल सके। उन्होंने ग्राम सभाओं के माध्यम से मुआवजा प्रक्रिया और उससे जुड़ी जानकारी ग्रामीणों तक पहुंचाने को भी कहा। हाथियों के विचरण क्षेत्रों में विद्युत तारों से की जाने वाली अवैध हुकिंग पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश विद्युत विभाग को दिए गए। कलेक्टर ने हाथियों को करंट से बचाने के लिए जरूरी कदम उठाने और विद्युत तारों को सुरक्षित ऊंचाई पर रखने को कहा। बैठक में लाइनमैन को अवैध हुकिंग की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए।
हाथी प्रभावित क्षेत्रों में संचालित धान खरीदी केंद्रों को संवेदनशील केंद्रों के रूप में चिह्नित कर वहां सुरक्षा के आवश्यक इंतजाम करने पर चर्चा हुई। कलेक्टर ने उप-पंजीयक सहकारिता और खाद्य विभाग को निर्देशित किया कि केंद्रों में कार्यरत कर्मचारियों को खुले में सोने से रोका जाए और उनके लिए सुरक्षित स्थान की व्यवस्था की जाए। उन्होंने इन केंद्रों में सुरक्षा उपायों के साथ जरूरी अधोसंरचना उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया। बैठक में हाथियों से प्रभावित मृतकों के परिजनों और घायलों को मुआवजा सहायता देने की प्रक्रिया समय पर पूरी करने के निर्देश पुलिस और वन विभाग को दिए गए। जंगलों में अवैध शराब निर्माण की शिकायतों पर चर्चा करते हुए कलेक्टर ने आबकारी विभाग को पुलिस और वन विभाग के समन्वय से प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।
वन मंडलाधिकारी जितेंद्र उपाध्याय ने बैठक के एजेंडे प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि सर्पदंश, किंग कोबरा सहित जहरीले सांपों के रेस्क्यू के लिए वन विभाग के साथ नोवा नेचर की टीम उपलब्ध रहती है। सूचना मिलने पर टीम सामान्यतः 10 से 15 मिनट के भीतर पहुंच सकती है। आवश्यकता पड़ने पर कोई भी विभाग टीम को सूचित कर सकता है। किसानों की ओर से जंगली हाथियों और जंगली सूअरों से फसलों तथा सब्जियों की सुरक्षा के लिए खेतों और बाड़ियों की घेराबंदी पर भी चर्चा की गई। बाजार में तार फेंसिंग के लिए उपयोग होने वाले तारों की बिक्री संबंधी सूची वन परिक्षेत्र कार्यालय में उपलब्ध कराने का सुझाव दिया गया, ताकि जरूरत पड़ने पर आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

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कोरबा

सेजेस पाली में नुक्कड़ नाटक के माध्यम से महिला सशक्तिकरण का संदेश

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नमो सेवा गाथा पर विद्यार्थियों की प्रभावशाली प्रस्तुति, लगभग 495 लोग हुए शामिल
कोरबा, 07 अक्टूबर 2026। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत सेजेस अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, पाली में ‘नमो सेवाकृअनकही कहानियां’ कार्यक्रम के तहत नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से महिला सशक्तिकरण और नमो सेवा गाथा पर प्रभावशाली प्रस्तुति दी।
विद्यार्थियों की शानदार प्रस्तुति से ग्रामीणजन, जनप्रतिनिधि, पालक और छात्र-छात्राएं उत्साहित नजर आए। कार्यक्रम में स्कूली विद्यार्थियों, जनप्रतिनिधियों और पालकों सहित लगभग 495 लोग उपस्थित रहे।

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कोरबा

मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल से दिव्यांगजनों की राह हुई आसान

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कोरबा, 7 अक्टूबर 2026। समाज कल्याण विभाग द्वारा आज प्रतीक जैन मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत कोरबा, ओएसडी तरुण कुमार किरण की उपस्थिति में पात्र दिव्यांगजनों को मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल वितरित की गई। दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के उद्देश्य से दी गई इस सहायता से उनके आवागमन में सुविधा होगी और वे दैनिक कार्य अधिक सुगमता से कर सकेंगे।
मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल प्राप्त करने वाले हितग्राहियों में रेल्वे कॉलोनी, कोरबा निवासी 55 वर्षीय सैय्यद याकूब, पिता सैय्यद अब्दुल कादर, सुभाष ब्लॉक, कोरबा निवासी 44 वर्षीय श्रीमती सुनीता दास, पिता बाबू राज, शांति नगर, कुसमुंडा निवासी 34 वर्षीय श्रीमती सीमा कुमारी, पिता अदरू, तथा गुरसिया, कटघोरा निवासी 20 वर्षीय प्रदीप कुमार उरांव, पिता हरिराम शामिल हैं।
ट्राईसाइकिल मिलने पर हितग्राहियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए शासन और समाज कल्याण विभाग के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि इस सहायता से उनकी गतिशीलता बढ़ेगी और वे अपने दैनिक कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय अधिक आत्मनिर्भर बन सकेंगे।

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कोरबा

रंग-बिरंगी दीवारों से बदली आंगनबाड़ी की तस्वीर, बरपाली के नौनिहालों को मिला सुरक्षित माहौल और सीखने का अवसर

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सुरक्षित छत और रंगीन दीवारों ने बदला माहौल, बरपाली आंगनबाड़ी में बढ़ी नौनिहालों की उपस्थिति
कोरबा, 07 अक्टूबर 2026। कभी जर्जर भवन की दीवारों और असुविधाओं के बीच संचालित होने वाला आंगनबाड़ी केंद्र अब बच्चों की खिलखिलाहट और रंग-बिरंगे चित्रों से गुलजार है। जहां पहले पालकों को अपने छोटे बच्चों को केंद्र भेजते समय उनकी सुरक्षा की चिंता रहती थी, वहीं अब ग्राम पंचायत बरपाली का नया आंगनबाड़ी भवन नौनिहालों के लिए सुरक्षित, सुंदर और सहज वातावरण बन गया है। जिला प्रशासन द्वारा डीएमएफ मद से 11.69 लाख की लागत से निर्मित नए भवन में पक्की छत, मजबूत दीवार, पक्का फर्श, रंगीन चित्र और बच्चों के लिए खिलौनों सहित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसका असर बच्चों की उपस्थिति में भी दिखाई दे रहा है और 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चे नियमित रूप से आंगनबाड़ी पहुंच रहे हैं।
पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के बरपाली स्थित इस आंगनबाड़ी केंद्र में वर्तमान में 30 बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें 6 माह से 3 वर्ष आयु वर्ग के 17 तथा 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के 13 बच्चे शामिल हैं। इसके साथ ही 2 गर्भवती महिलाएं, 3 शिशुवती माताएं और 6 किशोरी बालिकाएं भी केंद्र की सेवाओं से लाभान्वित हो रही हैं। नए भवन के बाद बच्चों के लिए उपलब्ध स्थान और वातावरण में आए बदलाव ने केंद्र की गतिविधियों को भी अधिक व्यवस्थित किया है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती शिवकला बताती हैं कि पुराने भवन की स्थिति ऐसी थी कि बच्चों को केंद्र में रखते समय उनकी सुरक्षा को लेकर हमेशा चिंता बनी रहती थी। भवन जर्जर होने के कारण पालक भी बच्चों को आंगनबाड़ी भेजने में सहज महसूस नहीं करते थे। नए भवन के बनने से सबसे बड़ा बदलाव बच्चों की सुरक्षा और उनके सहज वातावरण में आया है। अब पक्की छत, मजबूत दीवार और पक्के फर्श वाले भवन में बच्चे आराम से बैठते हैं, खेलते हैं और विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं।
श्रीमती शिवकला के अनुसार नए भवन की दीवारों पर बने रंग-बिरंगे चित्र बच्चों को खूब आकर्षित करते हैं। बच्चे चित्रों को देखकर उनके बारे में जानने की उत्सुकता दिखाते हैं और आसपास की वस्तुओं को पहचानने का प्रयास करते हैं। खिलौनों और आकर्षक वातावरण के कारण उनमें केंद्र आने की रुचि भी बढ़ी है। पहले की तुलना में अब बच्चे अधिक संख्या में आंगनबाड़ी पहुंचते हैं और 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की नियमित उपस्थिति दिखाई देती है। बच्चों के लिए केंद्र अब केवल आने-जाने की जगह नहीं रहा, यहां वे खेलते हुए सीखते हैं और सहज माहौल में अपनी प्रारंभिक शिक्षा की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।
आंगनबाड़ी सहायिका श्रीमती चमेली बाई बताती हैं कि नए भवन में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने और उन्हें भोजन कराने में भी काफी सुविधा हुई है। निर्धारित साप्ताहिक मेन्यू के अनुसार सुबह बच्चों को मीठा या नमकीन दलिया दिया जाता है। इसके बाद दाल, चावल और सब्जी सहित भोजन उपलब्ध कराया जाता है। सुरक्षित और सुविधाजनक भवन में बच्चों को भोजन कराने तथा उनकी देखभाल करने में आसानी होती है। बच्चों का नियमित रूप से केंद्र आना उनके लिए भी उत्साह का विषय है।

कार्यकर्ता श्रीमती शिवकला कहती हैं कि पहले भवन की स्थिति के कारण बच्चों और पालकों में जो संकोच था, वह अब दूर हुआ है। नए भवन ने बच्चों को सुरक्षित जगह दी है और आकर्षक वातावरण ने उनके मन में आंगनबाड़ी के प्रति अपनापन बढ़ाया है। बच्चे सुबह केंद्र आने के लिए उत्साहित रहते हैं और यहां होने वाली गतिविधियों में रुचि के साथ शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए ऐसी बेहतर सुविधा उपलब्ध होने से उन्हें अपने कार्य में भी संतोष और उत्साह मिलता है। नौनिहालों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराने की इस पहल के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया।

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