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कोरबा

मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल से दिव्यांगजनों की राह हुई आसान

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कोरबा, 7 अक्टूबर 2026। समाज कल्याण विभाग द्वारा आज प्रतीक जैन मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत कोरबा, ओएसडी तरुण कुमार किरण की उपस्थिति में पात्र दिव्यांगजनों को मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल वितरित की गई। दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के उद्देश्य से दी गई इस सहायता से उनके आवागमन में सुविधा होगी और वे दैनिक कार्य अधिक सुगमता से कर सकेंगे।
मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल प्राप्त करने वाले हितग्राहियों में रेल्वे कॉलोनी, कोरबा निवासी 55 वर्षीय सैय्यद याकूब, पिता सैय्यद अब्दुल कादर, सुभाष ब्लॉक, कोरबा निवासी 44 वर्षीय श्रीमती सुनीता दास, पिता बाबू राज, शांति नगर, कुसमुंडा निवासी 34 वर्षीय श्रीमती सीमा कुमारी, पिता अदरू, तथा गुरसिया, कटघोरा निवासी 20 वर्षीय प्रदीप कुमार उरांव, पिता हरिराम शामिल हैं।
ट्राईसाइकिल मिलने पर हितग्राहियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए शासन और समाज कल्याण विभाग के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि इस सहायता से उनकी गतिशीलता बढ़ेगी और वे अपने दैनिक कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय अधिक आत्मनिर्भर बन सकेंगे।

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कोरबा

सेजेस पाली में नुक्कड़ नाटक के माध्यम से महिला सशक्तिकरण का संदेश

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नमो सेवा गाथा पर विद्यार्थियों की प्रभावशाली प्रस्तुति, लगभग 495 लोग हुए शामिल
कोरबा, 07 अक्टूबर 2026। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत सेजेस अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, पाली में ‘नमो सेवाकृअनकही कहानियां’ कार्यक्रम के तहत नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से महिला सशक्तिकरण और नमो सेवा गाथा पर प्रभावशाली प्रस्तुति दी।
विद्यार्थियों की शानदार प्रस्तुति से ग्रामीणजन, जनप्रतिनिधि, पालक और छात्र-छात्राएं उत्साहित नजर आए। कार्यक्रम में स्कूली विद्यार्थियों, जनप्रतिनिधियों और पालकों सहित लगभग 495 लोग उपस्थित रहे।

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कोरबा

रंग-बिरंगी दीवारों से बदली आंगनबाड़ी की तस्वीर, बरपाली के नौनिहालों को मिला सुरक्षित माहौल और सीखने का अवसर

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सुरक्षित छत और रंगीन दीवारों ने बदला माहौल, बरपाली आंगनबाड़ी में बढ़ी नौनिहालों की उपस्थिति
कोरबा, 07 अक्टूबर 2026। कभी जर्जर भवन की दीवारों और असुविधाओं के बीच संचालित होने वाला आंगनबाड़ी केंद्र अब बच्चों की खिलखिलाहट और रंग-बिरंगे चित्रों से गुलजार है। जहां पहले पालकों को अपने छोटे बच्चों को केंद्र भेजते समय उनकी सुरक्षा की चिंता रहती थी, वहीं अब ग्राम पंचायत बरपाली का नया आंगनबाड़ी भवन नौनिहालों के लिए सुरक्षित, सुंदर और सहज वातावरण बन गया है। जिला प्रशासन द्वारा डीएमएफ मद से 11.69 लाख की लागत से निर्मित नए भवन में पक्की छत, मजबूत दीवार, पक्का फर्श, रंगीन चित्र और बच्चों के लिए खिलौनों सहित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसका असर बच्चों की उपस्थिति में भी दिखाई दे रहा है और 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चे नियमित रूप से आंगनबाड़ी पहुंच रहे हैं।
पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के बरपाली स्थित इस आंगनबाड़ी केंद्र में वर्तमान में 30 बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें 6 माह से 3 वर्ष आयु वर्ग के 17 तथा 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के 13 बच्चे शामिल हैं। इसके साथ ही 2 गर्भवती महिलाएं, 3 शिशुवती माताएं और 6 किशोरी बालिकाएं भी केंद्र की सेवाओं से लाभान्वित हो रही हैं। नए भवन के बाद बच्चों के लिए उपलब्ध स्थान और वातावरण में आए बदलाव ने केंद्र की गतिविधियों को भी अधिक व्यवस्थित किया है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती शिवकला बताती हैं कि पुराने भवन की स्थिति ऐसी थी कि बच्चों को केंद्र में रखते समय उनकी सुरक्षा को लेकर हमेशा चिंता बनी रहती थी। भवन जर्जर होने के कारण पालक भी बच्चों को आंगनबाड़ी भेजने में सहज महसूस नहीं करते थे। नए भवन के बनने से सबसे बड़ा बदलाव बच्चों की सुरक्षा और उनके सहज वातावरण में आया है। अब पक्की छत, मजबूत दीवार और पक्के फर्श वाले भवन में बच्चे आराम से बैठते हैं, खेलते हैं और विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं।
श्रीमती शिवकला के अनुसार नए भवन की दीवारों पर बने रंग-बिरंगे चित्र बच्चों को खूब आकर्षित करते हैं। बच्चे चित्रों को देखकर उनके बारे में जानने की उत्सुकता दिखाते हैं और आसपास की वस्तुओं को पहचानने का प्रयास करते हैं। खिलौनों और आकर्षक वातावरण के कारण उनमें केंद्र आने की रुचि भी बढ़ी है। पहले की तुलना में अब बच्चे अधिक संख्या में आंगनबाड़ी पहुंचते हैं और 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की नियमित उपस्थिति दिखाई देती है। बच्चों के लिए केंद्र अब केवल आने-जाने की जगह नहीं रहा, यहां वे खेलते हुए सीखते हैं और सहज माहौल में अपनी प्रारंभिक शिक्षा की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।
आंगनबाड़ी सहायिका श्रीमती चमेली बाई बताती हैं कि नए भवन में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने और उन्हें भोजन कराने में भी काफी सुविधा हुई है। निर्धारित साप्ताहिक मेन्यू के अनुसार सुबह बच्चों को मीठा या नमकीन दलिया दिया जाता है। इसके बाद दाल, चावल और सब्जी सहित भोजन उपलब्ध कराया जाता है। सुरक्षित और सुविधाजनक भवन में बच्चों को भोजन कराने तथा उनकी देखभाल करने में आसानी होती है। बच्चों का नियमित रूप से केंद्र आना उनके लिए भी उत्साह का विषय है।

कार्यकर्ता श्रीमती शिवकला कहती हैं कि पहले भवन की स्थिति के कारण बच्चों और पालकों में जो संकोच था, वह अब दूर हुआ है। नए भवन ने बच्चों को सुरक्षित जगह दी है और आकर्षक वातावरण ने उनके मन में आंगनबाड़ी के प्रति अपनापन बढ़ाया है। बच्चे सुबह केंद्र आने के लिए उत्साहित रहते हैं और यहां होने वाली गतिविधियों में रुचि के साथ शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए ऐसी बेहतर सुविधा उपलब्ध होने से उन्हें अपने कार्य में भी संतोष और उत्साह मिलता है। नौनिहालों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराने की इस पहल के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया।

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कोरबा

बिहान योजना से रीमा की बदली राह, कपड़ा-मनिहारी दुकान से बढ़ी आमदनी

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अब अपनी दुकान से हो रही आमदनी, परिवार की जरूरतें पूरी करने में मिल रही मदद” – रीमा यादव
कोरबा 07 अक्टूबर 2026। ग्रामीण महिलाओं को संगठित कर उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने और अपने पैरों पर खड़े होने के अवसर देने में बिहान योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। स्व सहायता समूहों के माध्यम से मिलने वाली आर्थिक सहायता और बैंक ऋण ने महिलाओं के लिए स्वरोजगार की नई राह खोली है। कोरबा विकासखंड के ग्राम बरबसपुर की श्रीमती रीमा यादव की कहानी भी इसी बदलाव से जुड़ी है।
श्रीमती रीमा यादव बिहान योजना के अंतर्गत राधा स्व सहायता समूह की सक्रिय सदस्य हैं। समूह से जुड़ने से पहले उनके लिए नियमित आय का कोई निश्चित साधन नहीं था। परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए घरेलू संसाधनों पर निर्भरता बनी रहती थी। स्व सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें समूह की गतिविधियों के साथ आर्थिक अवसरों की जानकारी मिली और आगे बढ़ने का भरोसा मिला।
राधा स्व सहायता समूह को 3 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। इसी राशि में से 50 हजार रुपये का उपयोग कर रीमा यादव ने कपड़ा एवं मनिहारी की दुकान शुरू की। दुकान के माध्यम से वे नियमित रूप से आजीविका अर्जित कर रही हैं। ग्राहकों की जरूरत के अनुसार कपड़े और मनिहारी सामग्री उपलब्ध कराने से उनकी आमदनी का साधन तैयार हुआ है।
दुकान शुरू होने के बाद रीमा की आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव आया है। अपनी मेहनत से अर्जित आय का उपयोग वे परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में कर रही हैं। घरेलू जरूरतों के साथ बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरी खर्चों में भी उनकी आय सहयोग दे रही है। अपने काम से जुड़ी जिम्मेदारियों को संभालते हुए रीमा को आर्थिक रूप से मजबूत बनने का अवसर मिला है।
रीमा यादव कहती हैं, “बिहान योजना से स्व सहायता समूह से जुड़ने के बाद मुझे आगे बढ़ने का अवसर मिला। समूह को मिले ऋण से मैंने 50 हजार रुपये लगाकर कपड़ा और मनिहारी की दुकान शुरू की। अब दुकान से आमदनी हो रही है और अपनी कमाई से परिवार की जरूरतों को पूरा करने में सहयोग कर पा रही हूं। शासन की योजना और समूह से मिले सहयोग ने मेरे लिए रोजगार का नया रास्ता तैयार किया है।”

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