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कोरबा

अब सूरज से रोशन होता है घर, बिजली बिल की चिंता हुई दूर

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प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना से आयुष अग्रवाल के परिवार को मिली आर्थिक राहत, स्वच्छ ऊर्जा से पर्यावरण संरक्षण की ओर बढ़े कदम

कोरबा। सूरज की रोशनी अब केवल घर को उजाला देने का माध्यम नहीं रही, बल्कि परिवारों के लिए बचत और आत्मनिर्भरता का जरिया भी बन रही है। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना ने आम परिवारों को अपने घर की छत पर सौर ऊर्जा का उत्पादन करने का अवसर दिया है। इससे जहां बिजली खर्च में राहत मिल रही है, वहीं स्वच्छ और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ रहा है।
कोरबा जिले के डीडीएम रोड निवासी आयुष अग्रवाल के परिवार ने भी इस योजना का लाभ उठाकर अपने घर की ऊर्जा जरूरतों को सौर ऊर्जा से जोड़ दिया है। संयुक्त परिवार में रहने वाले आयुष के घर में बिजली की खपत अपेक्षाकृत अधिक थी। पंखे, कूलर, फ्रिज, एसी सहित कई घरेलू उपकरणों के नियमित उपयोग के कारण सामान्य दिनों में भी बिजली की खपत लगभग 700 यूनिट रहती थी, जबकि गर्मियों में यह बढ़कर 1200 से 1300 यूनिट तक पहुंच जाती थी। ऐसे में हर महीने आने वाला बिजली बिल परिवार के बजट पर अच्छा-खासा असर डालता था।
आयुष बताते हैं कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना की जानकारी उन्हें अपने जीजा जी के माध्यम से मिली। योजना के बारे में जानकारी मिलने के बाद उन्होंने इसका लाभ लेने का निर्णय लिया। उन्होंने अपने ताऊ जी के नाम से आवेदन कर अपने घर की छत पर 10 किलोवाट क्षमता का सोलर पैनल सिस्टम स्थापित कराया। योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी और जिला प्रशासन एवं ऊर्जा विभाग से प्राप्त आवश्यक मार्गदर्शन के कारण सोलर संयंत्र स्थापित करने की प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी हो सकी।
सोलर पैनल स्थापित होने के बाद आयुष के परिवार के बिजली खर्च में बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां हर महीने बिजली बिल के रूप में हजारों रुपये खर्च होते थे, वहीं अब बिजली बिल लगभग शून्य के करीब पहुंच गया है। बिजली खर्च में हुई इस बचत से परिवार को आर्थिक राहत के साथ मानसिक सुकून भी मिला है। अब उन्हें न मीटर की रीडिंग की चिंता रहती है और न ही हर महीने बिजली बिल आने का इंतजार रहता है।
आयुष कहते हैं, “हमारे संयुक्त परिवार में बिजली की खपत काफी ज्यादा थी। सामान्य दिनों में करीब 700 यूनिट और गर्मियों में 1200 से 1300 यूनिट तक बिजली की खपत हो जाती थी। प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के तहत सोलर पैनल लगवाने के बाद बिजली बिल लगभग खत्म हो गया है। अब जो राशि बिजली बिल में खर्च होती थी, वह बचत के रूप में हमारे काम आ रही है।”
सौर ऊर्जा अपनाने से आर्थिक लाभ के साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी आयुष का परिवार अपनी भूमिका निभा रहा है। वे कहते हैं, “अब मैं गर्व से कह सकता हूं कि हमारे घर की बिजली की जरूरत स्वच्छ और हरित ऊर्जा से पूरी हो रही है। सूरज से मिलने वाली ऊर्जा का उपयोग कर हम अपने परिवार के खर्च को कम करने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे रहे हैं।”
प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना ने आयुष जैसे परिवारों के लिए ऊर्जा आत्मनिर्भरता का नया रास्ता खोला है। घर की छत पर स्थापित सोलर पैनल अब उनके लिए केवल बिजली उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि आर्थिक बचत, स्वच्छ ऊर्जा और बेहतर भविष्य की उम्मीद बन गए हैं। आवश्यकता से अधिक बिजली उत्पादन होने पर उसे ग्रिड में भेजने की संभावनाओं ने इस योजना को और भी उपयोगी बना दिया है।
आयुष अग्रवाल की कहानी यह संदेश देती है कि जब आधुनिक तकनीक और जनकल्याणकारी योजनाएं एक-दूसरे से जुड़ती हैं, तो उसका सीधा लाभ परिवार की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण दोनों को मिलता है। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के माध्यम से कोरबा में भी घरों की छतें अब केवल धूप सेंकने की जगह नहीं, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और आत्मनिर्भरता के नए केंद्र बन रही हैं। सूरज की हर किरण अब परिवारों की बचत और पर्यावरण के संरक्षण की नई कहानी लिख रही है।

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कोरबा

CMD के गेवरा दौरे के बिच भू विस्थापित श्रमिकों के विभिन्न मांगो को लेकर अजय जायसवाल के नेतृत्व मे खदान मे लगातार 6 घंटे काम ठप कर किया जमकर विरोध प्रदर्शन

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कोरबा/गेवरा। आज एक तरफ गेवरा खदान के दौरे मे SECL बिलासपुर CMD कोरबा प्रवास पर रहे वही दूसरी ओर अजय जायसवाल भू विस्थापित श्रमिकों सहित स्थानीय बेरोजगारों रोजगार सहित विभिन्न मांगो को लेकर खदान मे धरने पर बैठ गए।

आज दिनांक 27/10/2026 को गेवरा खदान मे कार्यरत निजी ठेका कंपनी PNC सहित अन्य कंपनी मे कार्यरत भू विस्थापित श्रमिकों के द्वारा 6 महीने पूर्व से हाई पावर कमेटी के अनुसार पेमेंट, भविष्य निधि ,सुरक्षा, बोनस, पेमेंट स्लिप, जॉइनिंग लेटर सहित 2 महीने से लंबित भुगतान को लेकर कई बार पत्राचार किया जा चूका है, परन्तु प्रबंधन और कंपनी के द्वारा किसी प्रकार का सुनवाई नहीं किया, जिसको लेकर भू विस्थापित श्रमिकों के द्वारा अजय जायसवाल पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष कोरबा को सूचित किया। तत्पश्चात अजय जायसवाल के द्वारा आज खदान पहुंच भू विस्थापितों के विभिन्न मुद्दे को लेकर खदान मे धरने पर बैठ गए और सभी श्रमिकों के द्वारा 6 घंटा काम बंद कर काम ठप कर आंदोलन कर दिया गया, जिसके उपरांत SECL प्रबंधन और pnc कंपनी के अधिकारी वार्ता हेतु पहुंचे और हड़ताल स्थगित करने निवेदन किया गया। तत्पश्चात दिनांक 29/10/2026 को 12 बजे SECL गेवरा CGM ऑफिस मे वार्ता करते हुए मांग पूरा करने का आश्वासन दिया गया, साथ ही वार्ता मे विभिन्न मुद्दों पर बात करने सहमति बनी, जिसमे सभी –

1 श्रमिकों को हाई पावर कमेटी के अनुसार पेमेंट
2 सभी श्रमिकों का id कार्ड, सुरक्षा,
3 पेमेंट स्लिप
4 स्थानीय बेरोजगरों को रोजगार
5 जॉइनिंग लेटर, सहित बोनस पर बात करने और मांग पूरा करने का आश्वासन दिया गया।
उक्त हड़ताल मे भू विस्थापित श्रमिकों के साथ अजय जायसवाल पूर्व उपाध्यक्ष जिला पंचायत कोरबा, शेत मसीह सांसद प्रतिनिधि, मधुसूदन दस नेता प्रतिपक्ष बांकी मोंगरा, गोविंदा सारथी, कमलेश प्रजापति, संतोष यादव, प्रकाश सागर, फिरोज, राजकुमार पटवा, राकेश राजपूत,संजय यादव, सुजीत महंत, गौरव साहू, अनिल सागर, सहित कम्पनी मे कार्यरत हेल्फर, ड्राइवर सहित ग्रामीण सैकड़ो की संख्या मे उपस्थित रहे।

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कोरबा

न्यायाधीश ने बंदियों को अधिकारों की जानकारी दी

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कोरबा। प्रथम जिला व अपर सत्र न्यायाधीश व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव गरिमा शर्मा ने जिला जेल कोरबा के बंदियों को कानूनी अधिकारों की जानकारी दी। न्यायाधीश शर्मा जेल में बंदियों की भोजन, स्वास्थ्य और स्वच्छता संबंधी सुविधाओं का जायजा लिया। बंदियों से व्यक्तिगत चर्चा कर, उनकी समस्याओं और आवश्यकताओं का अवलोकन किया। न्यायाधीश शर्मा ने कहा कि पात्र बंदियों को निशुल्क विधिक सहायता देंेगे। बंदियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी दिवसों में न्यायालयों में उपस्थित कराने की व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बंदियों को उनके अधिकारों और न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। प्राधिकरण का मानना है कि जरूरतमंद और पात्र व्यक्तियों को निशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराना केवल एक दायित्व नहीं बल्कि समाज में समानता और न्याय का अधिकार भी है।

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कोरबा

पाली-लाफा रोड पर पेड़ों की डंगाल की छंटनी नहीं, मोड़ पर हादसे का डर

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कोरबा/पाली। पाली-लाफा मार्ग पर कई अंधे मोड़ हैं, इनके आसपास सड़क किनारे पेड़ों की डंगाल की छंटनी नहीं कराने पर सड़क हादसे का डर बना हुआ है। 8 किलोमीटर सड़क के रास्ते पर 5 से अधिक मोड़ है, जहां पर सुरक्षित आवाजाही में खतरा बना हुआ है। सामने से आ रहे वाहन पेड़ों की झुकी डंगाल के कारण नजर नहीं आते हैं और वाहनों के टकराने से सड़क दुर्घटना हो चुकी है। चैतुरगढ़ स्थित मां महिषासुर मर्दिनी का ऐतिहासिक मंदिर जाने का भी यह रास्ता है। पाली से चैतुरगढ़ की दूरी लगभग 32 किलोमीटर है। इसी मार्ग पर लाफा तक कई अंधे मोड़ से चालकों का सफर मुश्किल हो रहा है। चैतुरगढ़ में मां महिषासुर मर्दिनी का मंदिर होने के साथ यह क्षेत्र घने जंगलों से घिरा हुआ है।

इस कारण जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल में से एक है। इसकी प्राकृतिक सुंदरता के कारण छत्तीसगढ़ का कश्मीर भी कहा जाता है। पर्यटक पाली-लाफा मार्ग से चैतुरगढ़ के लिए आवाजाही करते हैं। जिला पंचायत सदस्य कौशल नेटी ने मांग की है कि पाली से लाफा होते हुए चैतुरगढ़ जाने वाले मार्ग का निरीक्षण कराया जाए। सड़क किनारे दृश्यता रोकने वाली डालियों की नियमानुसार कटाई-छंटाई कराई जाए। दुर्घटना की दृष्टि से संवेदनशील मोड़ों को चिह्नित किया जाए। वहां जरूरी सुरक्षा उपाय किए जाएं।

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