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कोरबा

पीएम आवास शहरी 2.0 ने बदली गुंजा साहू की जिंदगी, साकार हुआ पक्के मकान का सपना

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जहां हर बरसात डराती थी, अब वहीं पक्का घर देता है सुकून- हितग्राही- गुंजा साहू

कोरबा। कभी कच्चे मकान की दीवारों और टपकती छत के बीच गुजर-बसर करने वाली काशीनगर निवासी श्रीमती गुंजा साहू के लिए अपना पक्का मकान किसी सपने से कम नहीं था। सीमित आमदनी के कारण परिवार के लिए पक्का घर बनाना आसान नहीं था। बरसात आते ही छत से पानी टपकने लगता था, दीवारों और फर्श में सीलन भर जाती थी और मिट्टी के घर में जहरीले सांप-बिच्छुओं का डर भी हमेशा बना रहता था। ऐसे में हर मौसम परिवार के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होता था।
श्रीमती गुंजा साहू अपने अनुभव साझा करते हुए कहती हैं, “पहले हमारा घर कच्चा था। बारिश के दिनों में छत से पानी टपकता था और दीवारों व फर्श में सीलन हो जाती थी। घर में बच्चों और परिवार के सदस्यों को लेकर हमेशा चिंता रहती थी। मिट्टी के घर में सांप-बिच्छू आने का डर भी बना रहता था। पक्का मकान बनाने की बहुत इच्छा थी, लेकिन परिवार की सीमित आमदनी में यह संभव नहीं हो पा रहा था।”
उनके पति सोनू राम साहू ठेका कर्मी के रूप में कार्य करते हैं। सीमित आय के बीच परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना ही प्राथमिकता थी। ऐसे समय में पीएम आवास शहरी 2.0 योजना उनके लिए उम्मीद की किरण बनकर आई। योजना के तहत आवास निर्माण के लिए उन्हें तीन किश्तों में लगभग 2.50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्राप्त हुई। शासन से मिली सहायता और अपनी बचत की राशि को मिलाकर परिवार ने अपने पक्के मकान का निर्माण पूरा किया।
श्रीमती गुंजा साहू कहती हैं, “जब हमें पीएम आवास योजना का लाभ मिला, तो लगा कि अब हमारा भी पक्का घर बन सकता है। शासन से मिली सहायता ने हमारे लिए यह सपना पूरा करना आसान कर दिया। आज हमारा अपना पक्का मकान है। अब बारिश में छत से पानी टपकने की चिंता नहीं रहती, न दीवारों और फर्श में सीलन की परेशानी है और न ही सांप-बिच्छुओं का डर सताता है। परिवार सुरक्षित माहौल में आराम से रह रहा है।”
पक्का मकान मिलने के बाद केवल घर की तस्वीर ही नहीं बदली, बल्कि परिवार के जीवन में सुरक्षा, सुविधा और आत्मविश्वास भी बढ़ा है। जिस घर में कभी हर बारिश चिंता लेकर आती थी, आज वही पक्का आशियाना परिवार को सुकून और सुरक्षित भविष्य का भरोसा दे रहा है। गुंजा साहू के लिए यह मकान महज ईंट और सीमेंट से बना घर नहीं, बल्कि वर्षों की चिंता से मुक्ति और सम्मानपूर्वक जीवन जीने का आधार बन गया है।
अपने अनुभव को व्यक्त करते हुए श्रीमती गुंजा साहू कहती हैं, “हमने कभी नहीं सोचा था कि हमारा पक्के घर का सपना इतनी जल्दी पूरा होगा। आज अपने घर में परिवार के साथ बहुत खुशी और सुकून मिलता है। हमारे लिए यह घर बहुत बड़ी सौगात है। इसके लिए हम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय  और शासन के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हैं।”
पीएम आवास शहरी 2.0 योजना के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों को केवल पक्की छत ही नहीं मिल रही, बल्कि उनके जीवन में सुरक्षा, सम्मान, स्थायित्व और बेहतर भविष्य की नई उम्मीद भी जुड़ रही है। गुंजा साहू का पक्का मकान इसी बदलाव की एक सशक्त मिसाल है।

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कोरबा

CMD के गेवरा दौरे के बिच भू विस्थापित श्रमिकों के विभिन्न मांगो को लेकर अजय जायसवाल के नेतृत्व मे खदान मे लगातार 6 घंटे काम ठप कर किया जमकर विरोध प्रदर्शन

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कोरबा/गेवरा। आज एक तरफ गेवरा खदान के दौरे मे SECL बिलासपुर CMD कोरबा प्रवास पर रहे वही दूसरी ओर अजय जायसवाल भू विस्थापित श्रमिकों सहित स्थानीय बेरोजगारों रोजगार सहित विभिन्न मांगो को लेकर खदान मे धरने पर बैठ गए।

आज दिनांक 27/10/2026 को गेवरा खदान मे कार्यरत निजी ठेका कंपनी PNC सहित अन्य कंपनी मे कार्यरत भू विस्थापित श्रमिकों के द्वारा 6 महीने पूर्व से हाई पावर कमेटी के अनुसार पेमेंट, भविष्य निधि ,सुरक्षा, बोनस, पेमेंट स्लिप, जॉइनिंग लेटर सहित 2 महीने से लंबित भुगतान को लेकर कई बार पत्राचार किया जा चूका है, परन्तु प्रबंधन और कंपनी के द्वारा किसी प्रकार का सुनवाई नहीं किया, जिसको लेकर भू विस्थापित श्रमिकों के द्वारा अजय जायसवाल पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष कोरबा को सूचित किया। तत्पश्चात अजय जायसवाल के द्वारा आज खदान पहुंच भू विस्थापितों के विभिन्न मुद्दे को लेकर खदान मे धरने पर बैठ गए और सभी श्रमिकों के द्वारा 6 घंटा काम बंद कर काम ठप कर आंदोलन कर दिया गया, जिसके उपरांत SECL प्रबंधन और pnc कंपनी के अधिकारी वार्ता हेतु पहुंचे और हड़ताल स्थगित करने निवेदन किया गया। तत्पश्चात दिनांक 29/10/2026 को 12 बजे SECL गेवरा CGM ऑफिस मे वार्ता करते हुए मांग पूरा करने का आश्वासन दिया गया, साथ ही वार्ता मे विभिन्न मुद्दों पर बात करने सहमति बनी, जिसमे सभी –

1 श्रमिकों को हाई पावर कमेटी के अनुसार पेमेंट
2 सभी श्रमिकों का id कार्ड, सुरक्षा,
3 पेमेंट स्लिप
4 स्थानीय बेरोजगरों को रोजगार
5 जॉइनिंग लेटर, सहित बोनस पर बात करने और मांग पूरा करने का आश्वासन दिया गया।
उक्त हड़ताल मे भू विस्थापित श्रमिकों के साथ अजय जायसवाल पूर्व उपाध्यक्ष जिला पंचायत कोरबा, शेत मसीह सांसद प्रतिनिधि, मधुसूदन दस नेता प्रतिपक्ष बांकी मोंगरा, गोविंदा सारथी, कमलेश प्रजापति, संतोष यादव, प्रकाश सागर, फिरोज, राजकुमार पटवा, राकेश राजपूत,संजय यादव, सुजीत महंत, गौरव साहू, अनिल सागर, सहित कम्पनी मे कार्यरत हेल्फर, ड्राइवर सहित ग्रामीण सैकड़ो की संख्या मे उपस्थित रहे।

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कोरबा

न्यायाधीश ने बंदियों को अधिकारों की जानकारी दी

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कोरबा। प्रथम जिला व अपर सत्र न्यायाधीश व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव गरिमा शर्मा ने जिला जेल कोरबा के बंदियों को कानूनी अधिकारों की जानकारी दी। न्यायाधीश शर्मा जेल में बंदियों की भोजन, स्वास्थ्य और स्वच्छता संबंधी सुविधाओं का जायजा लिया। बंदियों से व्यक्तिगत चर्चा कर, उनकी समस्याओं और आवश्यकताओं का अवलोकन किया। न्यायाधीश शर्मा ने कहा कि पात्र बंदियों को निशुल्क विधिक सहायता देंेगे। बंदियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी दिवसों में न्यायालयों में उपस्थित कराने की व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बंदियों को उनके अधिकारों और न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। प्राधिकरण का मानना है कि जरूरतमंद और पात्र व्यक्तियों को निशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराना केवल एक दायित्व नहीं बल्कि समाज में समानता और न्याय का अधिकार भी है।

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कोरबा

पाली-लाफा रोड पर पेड़ों की डंगाल की छंटनी नहीं, मोड़ पर हादसे का डर

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कोरबा/पाली। पाली-लाफा मार्ग पर कई अंधे मोड़ हैं, इनके आसपास सड़क किनारे पेड़ों की डंगाल की छंटनी नहीं कराने पर सड़क हादसे का डर बना हुआ है। 8 किलोमीटर सड़क के रास्ते पर 5 से अधिक मोड़ है, जहां पर सुरक्षित आवाजाही में खतरा बना हुआ है। सामने से आ रहे वाहन पेड़ों की झुकी डंगाल के कारण नजर नहीं आते हैं और वाहनों के टकराने से सड़क दुर्घटना हो चुकी है। चैतुरगढ़ स्थित मां महिषासुर मर्दिनी का ऐतिहासिक मंदिर जाने का भी यह रास्ता है। पाली से चैतुरगढ़ की दूरी लगभग 32 किलोमीटर है। इसी मार्ग पर लाफा तक कई अंधे मोड़ से चालकों का सफर मुश्किल हो रहा है। चैतुरगढ़ में मां महिषासुर मर्दिनी का मंदिर होने के साथ यह क्षेत्र घने जंगलों से घिरा हुआ है।

इस कारण जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल में से एक है। इसकी प्राकृतिक सुंदरता के कारण छत्तीसगढ़ का कश्मीर भी कहा जाता है। पर्यटक पाली-लाफा मार्ग से चैतुरगढ़ के लिए आवाजाही करते हैं। जिला पंचायत सदस्य कौशल नेटी ने मांग की है कि पाली से लाफा होते हुए चैतुरगढ़ जाने वाले मार्ग का निरीक्षण कराया जाए। सड़क किनारे दृश्यता रोकने वाली डालियों की नियमानुसार कटाई-छंटाई कराई जाए। दुर्घटना की दृष्टि से संवेदनशील मोड़ों को चिह्नित किया जाए। वहां जरूरी सुरक्षा उपाय किए जाएं।

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