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कोरबा

SECL एम्पलाइज थ्रिफ्ट क्रेडिट सोसाइटी में वित्तीय अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच के आदेश, उप पंजीयन अधिकारी के आश्वासन पर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन स्थगित

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​कोरबा। ​एसईसीएल एम्पलाइज थ्रिफ्ट क्रेडिट सोसाइटी लिमिटेड पंजीयन क्रमांक 3131 के प्राधिकृत सदस्यों और प्रबंधन द्वारा समिति के पैसों के कथित मनमाने ढंग से दुरुपयोग एवं भारी वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ सदस्यों में भारी आक्रोश व्याप्त था इस संबंध में उप पंजीयक कोरबा के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराते हुए 26 अक्टूबर 2026 को एक दिवसीय धरना प्रदर्शन की चेतावनी दी गई थी ।

​मामले की गंभीरता को देखते हुए उप पंजीयन अधिकारी कोरबा द्वारा दिनांक 24 अक्टूबर 2026 को एक संयुक्त बैठक बुलाई गई जिसमें सदस्यों की शिकायतों को विस्तार से सुना गया बैठक में प्रशासनिक स्तर पर लिए गए सकारात्मक निर्णयों और ठोस आश्वासनों के बाद संस्था के सदस्यों द्वारा 26 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित धरना प्रदर्शन को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है ।

​ऑडिट रिपोर्ट में सामने आए गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के बिंदु

​सोसाइटी की वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट में निम्नलिखित मदों पर अत्यधिक एवं संदेहास्पद खर्च दिखाए जाने का आरोप है, जिसकी जांच की मांग की जा रही थी:-

मीटिंग खर्चा:- रू.2,65,000/- बिना वास्तविक व्यय के जबरदस्ती बिल बनाने का आरोप
अन्य खर्च एवं आधार खर्च:- दोनों मिलकर लगभग रू.19,00,000/- से अधिक
फर्नीचर खर्चा:- रू.3,65,000/-
​प्रिंटिंग खर्चा:- रू.3,76,000/-
​कंप्यूटर खर्चा:- रू.7,66,000/-
​स्टेशनरी खर्चा:- रू.1,18,000/-
​ऑफिस खर्चा:- रू.10,97,000/-
​पूजा गिफ्ट:- रू.78,000/-
​सदस्यों को गिफ्ट परचेज: रू.59,10,000/-

​संयुक्त बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णय एवं कार्रवाई

​दिनांक 24 अक्टूबर 2026 को हुई बैठक में उप पंजीयन अधिकारी द्वारा निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं:-

  1. ​निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव:- सोसाइटी में जल्द से जल्द निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराए जाएंगे जिसके लिए प्राधिकृत अधिकारी एवं प्रबंधन को प्रस्ताव भेजने हेतु आदेश जारी कर दिए गए हैं ।
  2. ​जांच कमेटी का गठन:- सोसाइटी में हुई अनियमितताओं की जांच के लिए सहकारिता विभाग के निरीक्षकों एल.एन. जायसवाल सहकारी निरीक्षक और एच.के. चौहान सहकारी निरीक्षक की एक जांच कमेटी गठित कर दी गई है ।
  3. ​रिकॉर्ड सीज करने के आदेश:- जांच अधिकारियों को 15 दिवस के भीतर अपनी जांच पूरी करने का निर्देश दिया गया है साथ ही वित्तीय और प्रशासनिक गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए कोऑपरेटिव के समस्त वित्तीय एवं प्रशासनिक रिकॉर्ड कैश बुक बिल वाउचर प्रोसीडिंग रजिस्टर आदि को तत्काल सीज करने के आदेश दिए गए हैं ।
  4. ​वित्तीय प्रतिबंध:- सोसाइटी में पदस्थ कर्मचारियों के वेतन भुगतान को छोड़कर आगामी आदेश तक अन्य सभी मदों के खर्चों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है प्राधिकृत अधिकारियों और प्रबंधन के वित्तीय अधिकारों पावर को सीज करते हुए किसी भी प्रकार की नई राशि खर्च करने पर रोक लगा दी गई है जिसकी प्रतिलिपि भी उपलब्ध कराई गई है ।

​चेतावनी

​उपरोक्त निर्णयों और त्वरित कार्रवाई के मद्देनजर दिनांक 26 अक्टूबर 2026 को आयोजित होने वाला धरना प्रदर्शन फिलहाल स्थगित कर दिया गया है हालांकि संस्था के सदस्यों ने स्पष्ट किया है कि यदि तय समय-सीमा के भीतर निष्पक्ष जांच की कार्रवाई पूरी नहीं होती है या किसी भी प्रकार का टालमटोल रवैया अपनाया जाता है तो संस्था के समस्त सदस्यगण पुनः बड़े पैमाने पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे ।

New Doc 10-24-2026 19.43
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कोरबा

कोरबा जिले में भूजल स्तर बढ़ाने के लिए बनाए जा रहे 234 बोरवेल रिचार्ज सैंड फिल्टर पिट

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विकसित भारत-जी राम जी के तहत रू1.32 करोड़ से अधिक के कार्य स्वीकृत

जल संरक्षण एवं संवर्धन के साथ ग्रामीणों को मिल रहा रोजगार, 180 से अधिक ग्राम पंचायतों में हो रहा निर्माण

मोर गांव मोर पानी अभियान के तहत जल सरंक्षण एवं संवर्धन सम्बंधी संरचनाओं को प्राथमिकता

कोरबा, 26 अक्टूबर 2026। जिले में गिरते भूजल स्तर को बढ़ाने तथा वर्षा जल के संरक्षण और पुनर्भरण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम के तहत 234 बोरवेल रिचार्ज सैंड फिल्टर पिट का निर्माण कराया जा रहा है। इन कार्यों के लिए कुल 1 करोड़ 32 लाख 97 हजार रुपये की स्वीकृति दी गई है। इन संरचनाओं के निर्माण से जहां ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं, वहीं भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देकर जल संकट की चुनौती से निपटने में भी मदद मिलेगी।

कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देशन तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत प्रतीक जैन के मार्गदर्शन में जिले में जल संरक्षण एवं जल संवर्धन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। ‘मोर गांव, मोर पानी’ अभियान के तहत वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण तथा जल स्रोतों के संरक्षण के लिए विभिन्न संरचनाओं का निर्माण कराया जा रहा है।

बारिश के पानी को जमीन के भीतर पहुंचाने में मिलेगी मदद

बोरवेल रिचार्ज सैंड फिल्टर पिट ऐसी संरचना है, जिसके माध्यम से वर्षा जल को रेत एवं अन्य फिल्टर सामग्री की सहायता से छानकर जमीन के भीतर पहुंचाया जाता है। इससे भूजल पुनर्भरण में मदद मिलती है तथा बोरवेल और आसपास के जलस्रोतों के जलस्तर को बनाए रखने में सहायता मिल सकती है। ग्राम पंचायतों, शासकीय भवनों, स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और सामुदायिक भवनों में ऐसी संरचनाएं जल संरक्षण की दृष्टि से उपयोगी हैं।

पांचों विकासखंडों में हो रहा निर्माण

जिले की 180 से अधिक ग्राम पंचायतों में मांग एवं आवश्यकता के अनुसार सामुदायिक बोरवेल रिचार्ज सैंड फिल्टर पिट का निर्माण कराया जा रहा है। विकासखंडवार स्थिति के अनुसार करतला में 64, कटघोरा में 30, कोरबा में 66, पाली में 13 तथा पोड़ी उपरोड़ा में 61 रिचार्ज पिट बनाए जा रहे हैं।

इन संरचनाओं से विशेषकर उन ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल पुनर्भरण को प्रोत्साहन मिलेगा, जहां जलस्तर में गिरावट की समस्या है। वर्षा जल का बेहतर उपयोग होने से जल उपलब्धता बढ़ाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी सहायता मिलेगी।

विकसित भारत- जी राम जी से जिले में जल संरक्षण एवं संवर्धन के इन प्रयासों के माध्यम से रोजगार सृजन के साथ जल सुरक्षा को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ भविष्य के लिए भी जल संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सके।

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कोरबा

वरिष्ठ पत्रकार सुभाष अग्रवाल को भ्रात शोक

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कोरबा। प्रेस क्लब के सदस्य एवं दैनिक तरूण छत्तीसगढ़ के संपादक सुभाष अग्रवाल के अनुज भ्राता (छोटे भाई) शहर के प्रतिष्ठित नागरिक एवं होटल रिलैक्स इन के संचालक सतीश अग्रवाल पिता स्वर्गीय ओमप्रकाश अग्रवाल का आज सोमवार दिनांक 26/10/2026 की देर शाम 7.30 बजे निधन हो गया। वे कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। वे अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनका अंतिम संस्कार कल मंगलवार दिनांक 27/10/2026 को सुबह 11 बजे स्थानीय मोती सागर पारा मुक्तिधाम में संपन्न होगा। इससे पूर्व अग्रोहा मार्ग स्थित उनके निवास से अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। उनके निधन पर कोरबा प्रेस क्लब परिवार ने शोक व्यक्त किया है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में परम शांति प्रदान करे एवं शोकाकुल परिवार को यह असह्य दुःख सहन करने की शक्ति दे।

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बेबी एलिफेंट की छठी मनाई, नाम रखा ‘काशी’:7 गांवों के ग्रामीण शामिल हुए, स्वस्थ जीवन की कामना की, जिले में 48 हाथियों की मौजूदगी

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कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा वन मंडल के करतला रेंज में 9 हाथियों का झुंड घूम रहा है। झुंड में नन्हे हाथी के जन्म की खुशी में रविवार को 7 गांवों के ग्रामीणों ने उसकी छठी मनाई और उसका नाम ‘काशी’ रखा।

कार्यक्रम काशीपानी जंगल के कारीपानी मंदिर के नीचे गौठान टिकरापारा में आयोजित किया गया। इसमें रामभाठा, लबेद, पाहराभांठा, काशीपानी, छातापाठ, जामपानी और छुईडुंगा गांव के ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए।

मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद ग्रामीणों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई। ग्रामीणों ने हाथी के बच्चे के स्वस्थ जीवन की कामना की।

बेबी एलिफेंट का नाम ‘काशी’ रखा गया है।

बेबी एलिफेंट का नाम ‘काशी’ रखा गया है।

छठी कार्यक्रम काशीपानी जंगल के कारीपानी मंदिर के नीचे गौठान टिकरापारा में आयोजित किया गया।

छठी कार्यक्रम काशीपानी जंगल के कारीपानी मंदिर के नीचे गौठान टिकरापारा में आयोजित किया गया।

रविवार को 7 गांवों के ग्रामीणों ने उसकी छठी मनाई।

रविवार को 7 गांवों के ग्रामीणों ने उसकी छठी मनाई।

जिले में 48 हाथियों की मौजूदगी

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, 9 हाथियों का झुंड फिलहाल काशीपानी के जंगल में घूम रहा है। इसके अलावा कुदमुरा रेंज में 32 हाथी और चचिया क्षेत्र में 7 हाथी मौजूद हैं। हाल के दिनों में हाथियों ने 17 किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाया है।

20 साल से जंगल में आ रहे हाथी

ग्रामीणों ने बताया कि करीब 20 साल से हाथी इस जंगल में आते हैं। वे लंबे समय तक यहां रुकने के बाद वापस चले जाते हैं। यह हाथियों का पुराना कॉरिडोर है।

SDO मणिकांत वर्मा ने ग्रामीणों से हाथियों से छेड़छाड़ नहीं करने और सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि फसल नुकसान के मामलों में नियमानुसार मुआवजा दिया जाता है। जनहानि रोकने के लिए सतर्क रहना जरूरी है।

साल 2000 में पहली बार आए थे हाथी

जिले में साल 2000 में पहली बार कुदमुरा रेंज के आमटिकरा गांव में हाथी आए थे। इसके बाद धीरे-धीरे उनकी संख्या बढ़ती गई। कई बार जिले में हाथियों की संख्या 150 तक पहुंच चुकी है।

धिनारा गांव से शुरू हुई छठी मनाने की परंपरा

बेबी एलिफेंट की छठी मनाने की परंपरा धिनारा गांव से शुरू हुई थी। ग्रामीण अब हाथियों को लेकर जागरूक हो रहे हैं। पहले जहां हाथियों को भगवान मानकर पूजा की जाती थी, वहीं अब ग्रामीण सुरक्षित दूरी बनाए रखने पर जोर देते हैं।

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