मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्वतंत्रता दिवस पर सात दिवसीय छायाचित्र प्रदर्शनी का किया शुभारंभ
स्वतंत्रता संग्राम की गौरवगाथा से विकसित छत्तीसगढ़ की नई तस्वीर तक को एक मंच पर समेट रही प्रदर्शनी
‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा, स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान और सुशासन की उपलब्धियों का सजीव प्रदर्शन
ऐतिहासिक टाउन हॉल और शहीद स्मारक के संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने की 50-50 लाख रुपये देने की घोषणा
मुख्यमंत्री ने कहा – अपनी विरासत को सहेजते हुए विकास की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा छत्तीसगढ़
21 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह 10.30 से रात 8 बजे तक आम नागरिक कर सकेंगे प्रदर्शनी का अवलोकन
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आज राजधानी रायपुर के कचहरी चौक स्थित ऐतिहासिक टाउन हॉल में जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित सात दिवसीय छायाचित्र प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ के योगदान, अमर सेनानियों के शौर्य एवं बलिदान, ‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा और राज्य में सुशासन एवं विकास की उपलब्धियों को समेटे यह प्रदर्शनी अतीत के गौरव से वर्तमान की उपलब्धियों और भविष्य की आकांक्षाओं तक छत्तीसगढ़ की यात्रा को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर रही है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदर्शनी के विभिन्न खंडों का अवलोकन किया और वहां प्रदर्शित दुर्लभ छायाचित्रों, दस्तावेजों एवं सूचनात्मक सामग्री में विशेष रुचि दिखाई। उन्होंने कहा कि देश की स्वतंत्रता के लिए छत्तीसगढ़ की धरती के अनेक वीर सपूतों ने संघर्ष और बलिदान किया। उनके योगदान और राष्ट्रभक्ति की प्रेरक गाथाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना हमारा दायित्व है। ऐसी प्रदर्शनियां युवाओं को अपने गौरवशाली इतिहास से परिचित कराने के साथ उनमें राष्ट्रप्रेम, कर्तव्यबोध और देश के प्रति समर्पण की भावना को और मजबूत करती हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रदर्शनी केवल इतिहास का स्मरण नहीं कराती, बल्कि विरासत से प्रेरणा लेकर विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के निर्माण के संकल्प को भी सुदृढ़ करती है। एक ओर इसमें स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान की अमर गाथाएं हैं, तो दूसरी ओर जनकल्याणकारी योजनाओं, सुशासन, आधुनिक अधोसंरचना और नई तकनीक के माध्यम से बदलते छत्तीसगढ़ की तस्वीर भी दिखाई गई है।
*‘वंदे मातरम्’—राष्ट्रजागरण के अमर स्वर की 150 वर्षों की यात्रा*
प्रदर्शनी का विशेष आकर्षण राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा पर केंद्रित खंड है। इसमें ‘वंदे मातरम्’ की रचना से लेकर स्वतंत्रता आंदोलन में इसके राष्ट्रजागरण के मंत्र के रूप में स्थापित होने तक की यात्रा को ऐतिहासिक संदर्भों और छायाचित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।
स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ‘वंदे मातरम्’ ने देशवासियों को एक सूत्र में बांधने और मातृभूमि के लिए त्याग एवं बलिदान की भावना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके स्वर ने स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों में नई ऊर्जा का संचार किया। 150 वर्ष की इस ऐतिहासिक यात्रा को प्रदर्शनी में विशेष स्थान देकर नई पीढ़ी को ‘वंदे मातरम्’ के राष्ट्रभाव और उसके ऐतिहासिक महत्व से परिचित कराया गया है।
*छत्तीसगढ़ के वीर सेनानियों की संघर्ष और बलिदान की गौरवगाथा*
प्रदर्शनी में स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ की भूमिका को विस्तार से प्रदर्शित किया गया है। प्रदेश के स्वतंत्रता सेनानियों, जननायकों और अमर बलिदानियों के योगदान से जुड़े दुर्लभ छायाचित्र, दस्तावेज और ऐतिहासिक प्रसंग यहां दर्शकों को स्वतंत्रता आंदोलन के उस दौर से रूबरू कराते हैं, जब छत्तीसगढ़ की धरती पर भी ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष और जनजागरण की आवाज बुलंद हुई थी।
महात्मा गांधी के छत्तीसगढ़ प्रवास तथा यहां के सामाजिक एवं राष्ट्रीय आंदोलनों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों को प्रदर्शनी में विशेष स्थान दिया गया है। इन ऐतिहासिक दस्तावेजों के माध्यम से नई पीढ़ी यह जान सकेगी कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ का योगदान कितना व्यापक और गौरवपूर्ण रहा है।
*टाउन हॉल और शहीद स्मारक के लिए 50-50 लाख रुपये की घोषणा*
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर की दो महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरों – टाउन हॉल और शहीद स्मारक – के संरक्षण, साज-सज्जा एवं नवीनीकरण के लिए 50-50 लाख रुपये प्रदान करने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीद स्मारक राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों की स्मृतियों को संजोए हुए है, जबकि ऐतिहासिक टाउन हॉल रायपुर की समृद्ध विरासत और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इन धरोहरों का संरक्षण हमारी गौरवशाली विरासत के प्रति सम्मान की अभिव्यक्ति है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ‘विरासत से विकास तक’ की सोच के साथ आगे बढ़ रही है। हमारा प्रयास है कि आधुनिक विकास की गति के साथ प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों की गरिमा भी अक्षुण्ण रहे। इन स्थलों को बेहतर स्वरूप मिलने से नई पीढ़ी अपने इतिहास, संस्कृति और बलिदान की परंपरा को और निकटता से जान सकेगी।
*योजनाओं ने बदली जिंदगी – महिलाओं से किसानों और युवाओं तक विकास की झलक*
प्रदर्शनी का एक महत्वपूर्ण खंड राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और उनसे आम नागरिकों के जीवन में आए सकारात्मक बदलावों पर केंद्रित है। इसमें महिलाओं, किसानों, युवाओं, श्रमिकों और जरूरतमंद परिवारों के जीवन को बेहतर बनाने वाली योजनाओं एवं पहलों को छायाचित्रों और सूचनात्मक सामग्री के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है।
महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण, कृषक उन्नति योजना से किसानों को मिल रहे संबल तथा प्रधानमंत्री आवास योजना से जरूरतमंद परिवारों के पक्के घर के सपने के साकार होने की तस्वीर यहां दिखाई गई है। युवाओं के लिए शिक्षा, कौशल, रोजगार एवं नए अवसरों के विस्तार और श्रमिकों सहित विभिन्न वर्गों के लिए संचालित कल्याणकारी योजनाओं को भी प्रमुखता से स्थान दिया गया है।
प्रदर्शनी यह संदेश देती है कि सुशासन का वास्तविक उद्देश्य योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाकर उसके जीवन में सकारात्मक और स्थायी बदलाव लाना है।
*सुशासन और आधुनिक अधोसंरचना से उभरते विकसित छत्तीसगढ़ की तस्वीर*
प्रदर्शनी में राज्य की विकास यात्रा को भी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है। डिजिटल पंजीयन के माध्यम से प्रशासन में पारदर्शिता, सुशासन तिहार के माध्यम से जनसमस्याओं के समाधान, हरित छत्तीसगढ़ की दिशा में किए जा रहे प्रयास तथा शिक्षा और अधोसंरचना के विस्तार की झलक यहां देखने को मिलती है।
बेहतर सड़क एवं रेल संपर्क, औद्योगिक अधोसंरचना, निवेश और रोजगार के नए अवसरों सहित विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे बदलावों को भी प्रदर्शित किया गया है। इस प्रकार प्रदर्शनी छत्तीसगढ़ के गौरवशाली अतीत और तेजी से आकार लेते भविष्य को एक साथ प्रस्तुत करती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष से हमें राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों की प्रेरणा मिलती है और यही प्रेरणा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में हमारी ऊर्जा बनती है।
*एआई से जुड़ा विरासत और पर्यटन का अभिनव अनुभव*
प्रदर्शनी में आधुनिक तकनीक और छत्तीसगढ़ की विरासत का अभिनव संगम भी आकर्षण का केंद्र है। विशेष एआई आधारित पहल के माध्यम से आगंतुक प्रदेश के प्रमुख तीर्थ और पर्यटन स्थलों की पृष्ठभूमि के साथ अपनी डिजिटल तस्वीर तैयार करा सकते हैं। विशेष रूप से बच्चों और युवाओं में इसे लेकर उत्साह देखा जा रहा है।
इस पहल के माध्यम से तकनीक का उपयोग कर नई पीढ़ी को प्रदेश की पर्यटन, सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत से रोचक तरीके से जोड़ने का प्रयास किया गया है। आगंतुक इन डिजिटल तस्वीरों को प्रदर्शनी की स्मृति के रूप में भी प्राप्त कर सकते हैं।
*विजिटर डायरी और विशेष डॉक्यूमेंट्री भी बनी आकर्षण का केंद्र*
प्रदर्शनी स्थल पर रखी गई विजिटर डायरी में आगंतुक स्वतंत्रता दिवस, राष्ट्रप्रेम और छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा से जुड़े अपने विचार एवं अनुभव दर्ज कर सकते हैं। राज्य की उपलब्धियों, जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास यात्रा पर आधारित विशेष डॉक्यूमेंट्री फिल्म का भी प्रदर्शन किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने विजिटर बुक में अपने विचार दर्ज करते हुए प्रदेशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित प्रदर्शनी की सराहना करते हुए कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान और शासन की योजनाओं एवं उपलब्धियों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का यह उपयोगी प्रयास है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों, विशेषकर युवाओं और विद्यार्थियों से प्रदर्शनी देखने की अपील करते हुए कहा कि अपने इतिहास और विरासत को जानना हमें वर्तमान के प्रति अपने कर्तव्यों का बोध कराता है और बेहतर भविष्य के निर्माण की प्रेरणा देता है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार आर. कृष्णा दास, विधायक पुरंदर मिश्रा, जनसंपर्क आयुक्त रजत बंसल, कलेक्टर गौरव सिंह, अपर संचालक उमेश मिश्रा, संजीव तिवारी, आलोक देव सहित जनसंपर्क विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।
उल्लेखनीय है कि कचहरी चौक स्थित ऐतिहासिक टाउन हॉल में यह सात दिवसीय प्रदर्शनी 15 से 21 अगस्त 2026 तक प्रतिदिन सुबह 10.30 बजे से रात 8 बजे तक आम नागरिकों के अवलोकन के लिए खुली रहेगी।
जगदलपुर/ रायपुर, एजेंसी। 2013 में झीरम घाटी में कांग्रेस नेताओं समेत 29 लोगों की हत्या के मामले में जगदलपुर NIA कोर्ट ने 10 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। इनमें 2 महिला और 8 पुरुष शामिल हैं।
25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर नक्सली हमला हुआ था। इसमें कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, महेंद्र कर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत 29 लोगों की मौत हुई थी।
करीब 13 साल चली सुनवाई में 101 गवाहों के बयान और दस्तावेज दर्ज किए गए। यह सजा हाईकोर्ट के आदेश के बाद ही लागू होगी। तब तक सभी दोषी केंद्रीय जेल जगदलपुर में रहेंगे। 30 दिन के अंदर हाईकोर्ट में अपील कर सकते हैं। अभियोजन पक्ष ने फांसी की मांग की थी, जबकि बचाव पक्ष ने दलील में सजा कम करने की मांग की थी।
परिजन बोले- कोसा नक्सली नहीं था
दोषी ठहराए गए कोसा के ममेरे भाई ने कहा कि कोसा नक्सली नहीं था। क्या नक्सली गांव में रहते हैं। जिस समय कोसा को पकड़ा गया, वह घर में खाना बना रहा था। मौत की सजा की जानकारी मिली है। वकील ने बताया है कि 30 दिन के अंदर हाईकोर्ट जाना पड़ेगा।
NIA के दिए दस्तावेज कोर्ट ने सही पाए
वहीं अभियोजन पक्ष के वकील ने परिजनों के आरोपों पर कहा कि कोर्ट आरोपों से नहीं सबूतों से चलती है। NIA के दिए दस्तावेजों को कोर्ट ने सही पाया, इसलिए मौत की सजा सुनाई गई है। 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे।
FIR में और बहुत सारे लोगों के नाम थे। उनमें अज्ञात और नामजद लोग भी हैं। उनकी पहचान की जाएगी। 11 लोग पकड़े गए थे। ट्रायल के दौरान एक की मौत हो गई। 10 लोगों की सजा सुनाई गई है।
25 मई 2013 को हुआ था झीरम नक्सली हमला
13 साल पहले बस्तर में कांग्रेस अपनी परिवर्तन यात्रा निकाल रही थी। 25 मई 2013 की शाम यह यात्रा सुकमा की ओर से लौट रही थी। काफिला जब दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी से गुजर रहा था, तभी माओवादियों ने घात लगाकर हमला कर दिया।
हमले की शुरुआत IED विस्फोट से हुई। इसके बाद सड़क पर पेड़ गिराकर रास्ता बंद किया गया और जंगल से काफिले पर गोलियां बरसाई गई। कुछ ही देर में पूरा इलाका गोलियों की आवाज से गूंज उठा। नक्सलियों ने नेताओं और सुरक्षाकर्मियों को अलग-अलग किया।
माओवादियों का खास निशाना महेंद्र कर्मा थे। नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल और कई अन्य लोगों की भी हत्या कर दी गई। एक ही हमले में कांग्रेस की उस समय की प्रदेश की शीर्ष नेतृत्व पंक्ति लगभग खत्म हो गई थी।
2013 में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा रैली के दौरान नक्सलियों ने जंगल में हमला किया था।
जान गंवाने वाले कांग्रेस नेताओं के नाम
नंदकुमार पटेल (तत्कालीन कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष) महेंद्र कर्मा (पूर्व नेता प्रतिपक्ष), विद्याचरण शुक्ल (पूर्व केंद्रीय मंत्री), दिनेश पटेल, उदय मुदलियार, भागीरथी पालिया, राजकुमार, गोपीचंद माधवानी, अल्लानूर, योगेंद्र शर्मा, राजेश चंद्राकर, मनोज जोशी, अभिषेक गोलचा, गनपथ नाग, सदा सिंह, चंद्रहास ध्रुव, दीपक उपाध्याय, तरुण देशमुख, प्रहलाद, चंदर राम मांझी, पैतृक खलखो, पवन कोंद्रा, सियाराम सिंह, पुलिसकर्मी- प्रधान आरक्षक प्रफुल्ल शुक्ला, अशोक कुमार, राहुल प्रताप सिंह और इमैनुअल केरकेट्टा।
हमला खत्म करने के बाद हथियार भी लूटकर ले गए
नक्सलियों ने काफिले की गाड़ियों और मारे गए सुरक्षाकर्मियों के हथियारों को भी अपने कब्जे में लिया था। 25 सितंबर 2014 को NIA की चार्जशीट के मुताबिक हमले के बाद एक 9 एमएम पिस्टल के साथ 2 मैगजीन और 20 कारतूस, दो AK-47 राइफलें, 14 मैगजीन और 455 कारतूस और 10 हैंड ग्रेनेड और वॉकी टॉकी और अन्य डिवाइस लूटे थे।
इसके साथ ही घटनास्थल से मिले विस्फोटकों की फोरेंसिक जांच में अमोनियम नाइट्रेट, PETN और अमाटोल जैसे पदार्थों का इस्तेमाल सामने आया था।
भूपेश बघेल ने कहा था- मेरी जेब में साजिश के सबूत
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल लंबे समय से इसे सिर्फ नक्सली हमला नहीं, बल्कि बड़ी साजिश बताते रहे हैं। वे यह भी कहते रहे हैं कि झीरम की साजिश के सबूत उनकी जेब में हैं। सीनियर जर्नलिस्ट सुनील कुमार इसी सवाल को सबसे अहम मानते हैं।
उनका कहना है कि भूपेश बघेल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं, प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं और मुख्यमंत्री भी रहे हैं। जिस पार्टी ने झीरम में अपनी पूरी टॉप लीडरशिप का बड़ा हिस्सा खो दिया, उस पार्टी के एक जिम्मेदार नेता के तौर पर अगर उनके पास साजिश के सबूत हैं तो उन्हें सामने रखना चाहिए।
क्या 10 लोवर कैडर ही पूरी साजिश के जिम्मेदार थे?
झीरम का हमला कोई सामान्य नक्सली वारदात नहीं थी। निशाना कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा थी और हमले में प्रदेश कांग्रेस की शीर्ष राजनीतिक लीडरशिप खत्म हो गई। ऐसे में दूसरा बड़ा सवाल है कि क्या इतने बड़े हमले की पूरी योजना सिर्फ उन 10 लोगों तक सीमित थी, जिन्हें कोर्ट ने दोषी ठहराया है?
सीनियर जर्नलिस्ट सुदीप ठाकुर का कहना है कि पहली नजर में जिन 10 लोगों को दोषी ठहराया गया है, वे नक्सली संगठन के लोअर कैडर के लोग दिखाई देते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि इतने बड़े राजनीतिक हमले की प्लानिंग और उसे अंजाम देने के पीछे इससे बड़ा नेटवर्क था या नहीं?
मास्टर प्लान किस स्तर पर बना था? किसने टारगेट तय किया?
अगर हमला इतना बड़ा था तो स्वाभाविक सवाल है कि इसका मास्टर प्लान किस स्तर पर बना था? किसने टारगेट तय किया? काफिले की जानकारी कैसे मिली? इतने बड़े नेताओं की मौजूदगी की सूचना नक्सलियों तक कैसे पहुंची? हमले की पूरी तैयारी किस स्तर पर हुई?
NIA ने मामले में प्रतिबंधित CPI (माओवादी) के अलग-अलग कैडर और सैन्य इकाइयों की भूमिका की जांच की थी। लेकिन मौजूदा फैसला ट्रायल में शामिल 10 आरोपियों की दोषसिद्धि तक पहुंचा है। यहीं से सवाल उठता है कि क्या हमले के पीछे मौजूद पूरे नेटवर्क की तस्वीर सामने आई है?
इंटेलिजेंस सिस्टम कहां फेल हुआ?
वरिष्ठ पत्रकार सुदीप ठाकुर के मुताबिक झीरम मामले में सिर्फ नक्सलियों की भूमिका देखना पर्याप्त नहीं है। एक बड़ा सवाल इंटेलिजेंस फेलियर और सिस्टम की जिम्मेदारी का भी है।
इतना बड़ा राजनीतिक काफिला बस्तर के बेहद संवेदनशील इलाके से गुजर रहा था। नक्सलियों ने इतनी बड़ी संख्या में हमला किया। ऐसे में सवाल है कि सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई? क्या पहले से कोई इनपुट था? अगर था तो उस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? अगर इनपुट नहीं था तो इंटेलिजेंस सिस्टम कहां फेल हुआ? जो फैसला आया है उससे यह कही भी जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय नहीं हई है?
सुदीप ठाकुर का कहना है कि मौजूदा फैसला सिस्टम के लैप्स और उसकी जिम्मेदारी की तस्वीर साफ नहीं करता है।
बड़े नक्सली नेताओं नहीं हुई पूछताछ
झीरम में मारे गए महेंद्र कर्मा के परिवार की ओर से भी जांच को लेकर सवाल उठते रहे हैं। सीनियर जर्नलिस्ट सुदीप ठाकुर के कहा कि महेंद्र कर्मा की बेटी ने भी सवाल उठाया है कि घटना के सबसे पहले वे घटनास्थल पर पहुंची थी। लेकिन NIA ने उनसे भी पूछताछ नहीं की है। इसके साथ ही कई ऐसे लोगों को और गवाह थे जिनसे जांच के दौरान NIA ने पूछताछ के लिए कभी बुलाया ही नहीं।
4,184 पेज की जांच आयोग की रिपोर्ट, अब तक सार्वजनिक नहीं
झीरम की कहानी में सबसे दिलचस्प और अब तक अनसुलझे अध्यायों में से एक है न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट। 2013 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में जांच आयोग बनाया था। आयोग ने कई साल तक सुनवाई की। 2021 में करीब 4,184 पेज की रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपी गई।
लेकिन रिपोर्ट पेश होने के बाद नया विवाद शुरू हो गया। तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि रिपोर्ट अधूरी है, इसलिए इसे सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।
इसके बाद आयोग को नए अध्यक्ष और सदस्य के साथ आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया। जस्टिस सतीश के. अग्निहोत्री को नया अध्यक्ष और जस्टिस जी. मिन्हाजुद्दीन को सदस्य बनाया गया। जांच के दायरे में नए बिंदु भी जोड़े गए। लेकिन इसके खिलाफ मामला हाईकोर्ट पहुंच गया।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 2022 में पुनर्गठित जांच आयोग के कामकाज पर आगामी आदेश तक रोक लगा दी। यानी झीरम की एक जांच NIA के स्तर पर चली, दूसरी न्यायिक आयोग के स्तर पर। दोनों के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी चलते रहे। लेकिन आम लोगों के सामने पूरी तस्वीर अब भी साफ नहीं है।
10 को सजा, लेकिन 33 अब भी फरार
कोर्ट ने प्रमिला मोडियम, चैतू लेकाम उर्फ मुन्ना, सुमित्रा पुनेम, मोडियम मुक्का, मंडवी कोसा कवासी उर्फ कोसाराम, आयाता मरकाम, मड़ाकामी देवा, जोगा मड़ाकामी, बंजामी सन्ना उर्फ चामरू उर्फ डेंगा और महादेव नाग को दोषी माना है।
मामले में नामजद कई अन्य आरोपी अब भी फरार हैं। करीब 33 आरोपी अदालत की पकड़ से बाहर बताए जा रहे हैं। इनमें कुछ ऐसे आरोपी भी हैं, जिन्होंने बाद में छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और तेलंगाना में सरेंडर कर दिया।
जांच रिकॉर्ड के मुताबिक, थिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी घटना के समय माओवादी संगठन की क्षेत्रीय कमान (SRUC) में सीनियर कमांडर था। वहीं, बारसे सुक्का उर्फ देवा दरभा डिवीजन कमेटी का सचिव रहा और बाद में बटालियन-1 का कमांडर बना। जांच में दोनों की भूमिका झीरम हमले से जुड़ी बताई गई है।
NIA ने 23 दिसंबर 2023 को जारी वांटेड इश्तहार में देवजी और देवा समेत 19 नक्सलियों की जानकारी सार्वजनिक की थी। इसमें देवजी का नाम और फोटो भी शामिल था। देवजी ने 24 फरवरी 2026 को तेलंगाना में सरेंडर किया, जबकि देवा ने 2 जनवरी 2026 को तेलंगाना में सरेंडर किया। सरेंडर के बाद थिप्पिरी तिरुपति देवजी ने मई में इंटरमीडिएट सेकंड ईयर की तेलुगु परीक्षा भी दी थी। आरोप है कि इस मामले में पुलिस ने अब तक उससे पूछताछ नहीं की है।
मई 2026 में देवजी ने 12वीं की परीक्षा दी थी।
इस मामले में कट्कम सुदर्शन को भी आरोपी बनाया गया था, लेकिन 2023 में उसकी मौत हो गई। वहीं, सबसे बड़ा वांछित आरोपी मुपल्ला लक्ष्मणा राव उर्फ गणपति अब तक पकड़ से बाहर है। घटना के समय वह CPI (माओवादी) का महासचिव था।
17 सितम्बर:प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन पर विशेष लेख
देश में जितने भी महान व्यक्तित्व हुए हैं, उनका जन्म कहीं न कहीं से शुभ नक्षत्र और देवपुरूषों की जयंती से जुड़ा हुआ है। 17 सितम्बर को आदिशिल्पी भगवान विश्वकर्मा की जयंती होती है। 17 सितम्बर को ही देश को सशक्त नेतृत्व देने वाले सक्षम प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदर भाई मोदी का भी जन्मदिन है। पूरे भारतवर्ष में भाजपा 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर 2026 तक एक माह तक सेवा संकल्प अभियान के तहत विभिन्न रचनात्मक कार्यों को अंजाम देगा। प्रथम दिन 17 सितम्बर को संध्या गोधूली बेला में भाजपा कार्यकर्ता देश के कोने-कोने में आशीर्वाद का दीया जलाएंगे। यह शाम ऐतिहासिक होगी और दिवाली की तरह यह शाम भी जगमग होगी। 17 सितम्बर 1950 में गुजरात के वडनगर में दामोदर दास मोदी-हीरा बेन के घर में एक बालक का जन्म हुआ, जो आगे चलकर देश का प्रधानमंत्री बना। संघर्षों से रहा नाता नरेन्द्र दामोदर भाई मोदी का प्रधानमंत्री के रूप में जनता ने यूं ही राजतिलक नहीं किया, बल्कि उनका बचपन से लेकर युवा कार्यकाल तक का काल संघर्षों से भरा रहा। रेलवे स्टेशन में चाय बेचने वाले परिवार से निकल कर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक और भाजपा संगठन में बतौर कार्यकर्ता के रूप में मोदी जी ने राजनीति के गुर सीखे और संघर्षों का रास्ता तय करते हुए माँ भारती की सेवा के लिए स्वयं को समर्पित कर दिया और आज एक साथ सबसे लम्बे समय तक प्रधानमंत्री बनने वाले प्रथम व्यक्ति बन गए। 2001 से 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने गुजरात माडल देश को दिया, उनके कार्यकाल में गुजरात विकास के नए सोपानों को तय किया और मोदी जी ने गुजरात माडल ऑफ डेवलपमेंट को देश के सामने रखा। 2014 में पहली बार और फिर 2019 तथा 2024 में लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनकर नया इतिहास रच दिया। अब तक के उनके कार्यकाल को सख्त फैसलों वाला कहा जा सकता है। जम्मू-कश्मीर में धारा 370, अनुच्छेद 35ए को हटाना, नोट बंदी, पूरे देश में जीएसटी लागू, पाक के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करना प्रमुख फैसले थे। उनकी योजनाओं में स्वच्छ भारत मिशन ने देश की तस्वीर ही बदल दी। जनधन, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत, डीजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्टार्ट अफ इंडिया से सीधा लाभ जनता को मिला। आज मोदी वैश्विक नेता बन चुके हैं। यूं कहें तो संकल्प से शिखर तक रही उनकी यात्रा।
कोरबागेवरा/दीपका/। कोयला मजदूर सभा (HMS) के SECL गेवरा–दीपका एवं CEWS गेवरा क्षेत्रों में वर्ष 2026 के यूनियन सदस्यता सत्यापन के आंकड़ों ने संगठन के जनाधार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार वर्ष 2025 की तुलना में 2026 में HMS की सदस्यता में रिकॉर्ड तोड़ 1,107 सदस्यों की भारी गिरावट दर्ज की गई है ।
सदस्यता सत्यापन 2025 बनाम 2026
वर्ष 2025 में जहाँ HMS को 1,326 श्रमिकों का मजबूत समर्थन हासिल था, वहीं वर्ष 2026 में यह आंकड़ा सिमटकर मात्र 219 रह गया है ।
क्षेत्रवार तुलनात्मक आंकड़े
गेवरा प्रोजेक्ट 562 (2025) ➔ 146 (2026) (कमी 416) गेवरा क्षेत्रीय कार्यालय 147 (2025) ➔ 21 (2026) (कमी 126) CEWS–गेवरा 50 (2025) ➔ 03 (2026) (कमी 47) दीपका क्षेत्र 567 (2025) ➔ 49 (2026) (कमी 518) कुल योग 1,326 से घटकर 219 (कुल कमी 1,107)
बैठकों और अपीलों का नहीं दिखा कोई असर
सत्यापन के दौरान यूनियन संगठन के केंद्रीय शीर्ष नेतृत्व पदाधिकारियों की उपस्थिति व कई दौर की बैठकों के बावजूद आंकड़ों में कोई सुधार नहीं हो सका ।
स्थानीय नेतृत्व और जनाधार पर उठे सवाल
दीपका क्षेत्र के क्षेत्रीय पदाधिकारियों द्वारा अपने समाज व सहकर्मियों से की गई अपीलों का भी कोई असर नहीं पड़ा, अपने ही गृह क्षेत्र दीपका में सदस्यता 567 से गिरकर 49 पर आ जाने को लेकर विज्ञप्ति में तीखा व्यंग्य करते हुए, इसे अपने ही घर में औंधे मुंह गिरने जैसा बताया गया है और उनके जनाधार पर सवाल खड़े किए गए हैं ।
रू.11.07 लाख का वित्तीय घाटा
प्रति सदस्य रू.1,000 सदस्यता शुल्क के आधार पर वर्ष 2025 में जहाँ संगठन को रू.13.26 लाख का राजस्व मिला था, वहीं 2026 में यह घटकर मात्र रू.2.19 लाख रह गया है। इसके चलते HMS को सीधे तौर पर रू.11.07 लाख का सीधा वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा है ।