3,300 मेट्रिक टन स्क्रैप निस्तारण से मिलेगा राजस्व, ई-वेस्ट प्रबंधन, रिकॉर्ड समीक्षा और लंबित कार्यों के निपटारे पर रहेगा विशेष जोर
बिलासपुर/कोरबा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) ने प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग, भारत सरकार के विशेष अभियान 6 के तहत 40 लाख वर्गफीट क्षेत्र की सफाई और 3,300 मेट्रिक टन स्क्रैप के निस्तारण का लक्ष्य निर्धारित किया है। अभियान के तहत एसईसीएल के विभिन्न प्रतिष्ठानों में 225 स्थलों को चिन्हित किया गया है। 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले इस अभियान में स्वच्छता के साथ ई-वेस्ट प्रबंधन, कार्यालयीन स्थानों के बेहतर उपयोग, रिकॉर्ड प्रबंधन और प्रशासनिक लंबित कार्यों के निपटारे पर विशेष जोर रहेगा।
अभियान के दौरान चिन्हित 225 स्थलों पर लगभग 40 लाख वर्गफीट क्षेत्र की सफाई की जाएगी। वहीं 3,300 मेट्रिक टन स्क्रैप के निस्तारण का लक्ष्य रखा गया है, जिससे स्क्रैप के निस्तारण के साथ राजस्व भी प्राप्त होगा।
ई-वेस्ट के प्रभावी प्रबंधन पर विशेष जोर
इस वर्ष विशेष अभियान 6 में ई-वेस्ट के प्रभावी संग्रहण, पृथक्करण एवं जिम्मेदाराना निस्तारण को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। इसके तहत एसईसीएल के विभिन्न कार्यालयों एवं प्रतिष्ठानों में इलेक्ट्रॉनिक कचरे की व्यवस्थित पहचान, संग्रहण एवं पृथक्करण के साथ निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुरूप उसके निस्तारण की कार्रवाई की जाएगी।
इसके साथ ही कर्मचारियों एवं अन्य हितधारकों के बीच ई-वेस्ट के पर्यावरणीय रूप से जिम्मेदार प्रबंधन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए भी विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। रिकॉर्ड प्रबंधन और लंबित कार्यों के निपटारे पर भी फोकस
विशेष अभियान 6 के दौरान प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से रिकॉर्ड प्रबंधन और लंबित कार्यों के निपटारे पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। एसईसीएल ने अभियान अवधि में 500 भौतिक फाइलों की समीक्षा, 200 भौतिक फाइलों का निस्तारण, 7,000 ई-फाइलों की समीक्षा तथा 3,000 ई-फाइलों को बंद करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
इन प्रयासों का उद्देश्य अनावश्यक एवं पुराने रिकॉर्ड को व्यवस्थित करना, कार्यालयीन स्थान का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना तथा कार्यप्रणाली को अधिक सुव्यवस्थित एवं प्रभावी बनाना है।
विशेष अभियान 5 की उपलब्धियों को आगे बढ़ाएगा विशेष अभियान 6
विशेष अभियान 5 के दौरान एसईसीएल में 203 के लक्ष्य के मुक़ाबले 229 स्थलों पर स्वच्छता गतिविधियां संचालित की गई थीं। इस दौरान 43 लाख वर्गफीट से अधिक क्षेत्र की सफाई की गई तथा 6,400 मीट्रिक टन से अधिक स्क्रैप का निस्तारण किया गया। इससे लगभग 24 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था।
अभियान की निर्धारित अवधि के बाद भी स्वच्छता एवं स्थान प्रबंधन से जुड़े प्रयास जारी रहे। नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के दौरान लगभग 2.52 लाख वर्गफीट अतिरिक्त क्षेत्र की सफाई की गई।
क्या है विशेष अभियान 6 और इसका उद्देश्य?
भारत सरकार के प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (DARPG) के मार्गदर्शन में विशेष अभियान का संचालन किया जाता है। इसका उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता को संस्थागत रूप देना, लंबित मामलों को कम करना तथा सरकारी संसाधनों के बेहतर एवं प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देना है। विशेष अभियान 6 में इस वर्ष ई-वेस्ट के प्रभावी संग्रहण, पृथक्करण एवं निस्तारण पर विशेष जोर दिया गया है।
विशेष अभियान 6 का तैयारी चरण 15 से 30 सितंबर 2026 तक चल रहा है। इस दौरान अभियान के लक्ष्यों की पहचान, स्वच्छता स्थलों का चयन, पुराने रिकॉर्ड एवं लंबित मामलों की समीक्षा तथा स्क्रैप एवं ई-वेस्ट की पहचान जैसे कार्य किए जा रहे हैं। इसके बाद 2 से 31 अक्टूबर 2026 तक अभियान का कार्यान्वयन चरण चलेगा।
इस वर्ष अभियान में विशेष रूप से ई-वेस्ट के प्रभावी संग्रहण, पृथक्करण एवं निस्तारण पर जोर दिया गया है। इसके साथ स्वच्छता, स्थान का बेहतर उपयोग, स्क्रैप प्रबंधन, रिकॉर्ड प्रबंधन, डिजिटलाइजेशन तथा प्रशासनिक लंबित कार्यों में कमी लाना भी अभियान के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।
नमो सेवा गाथा पर विद्यार्थियों की प्रभावशाली प्रस्तुति, लगभग 495 लोग हुए शामिल कोरबा, 07 अक्टूबर 2026। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत सेजेस अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, पाली में ‘नमो सेवाकृअनकही कहानियां’ कार्यक्रम के तहत नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से महिला सशक्तिकरण और नमो सेवा गाथा पर प्रभावशाली प्रस्तुति दी। विद्यार्थियों की शानदार प्रस्तुति से ग्रामीणजन, जनप्रतिनिधि, पालक और छात्र-छात्राएं उत्साहित नजर आए। कार्यक्रम में स्कूली विद्यार्थियों, जनप्रतिनिधियों और पालकों सहित लगभग 495 लोग उपस्थित रहे।
कोरबा, 7 अक्टूबर 2026। समाज कल्याण विभाग द्वारा आज प्रतीक जैन मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत कोरबा, ओएसडी तरुण कुमार किरण की उपस्थिति में पात्र दिव्यांगजनों को मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल वितरित की गई। दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के उद्देश्य से दी गई इस सहायता से उनके आवागमन में सुविधा होगी और वे दैनिक कार्य अधिक सुगमता से कर सकेंगे। मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल प्राप्त करने वाले हितग्राहियों में रेल्वे कॉलोनी, कोरबा निवासी 55 वर्षीय सैय्यद याकूब, पिता सैय्यद अब्दुल कादर, सुभाष ब्लॉक, कोरबा निवासी 44 वर्षीय श्रीमती सुनीता दास, पिता बाबू राज, शांति नगर, कुसमुंडा निवासी 34 वर्षीय श्रीमती सीमा कुमारी, पिता अदरू, तथा गुरसिया, कटघोरा निवासी 20 वर्षीय प्रदीप कुमार उरांव, पिता हरिराम शामिल हैं। ट्राईसाइकिल मिलने पर हितग्राहियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए शासन और समाज कल्याण विभाग के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि इस सहायता से उनकी गतिशीलता बढ़ेगी और वे अपने दैनिक कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय अधिक आत्मनिर्भर बन सकेंगे।
सुरक्षित छत और रंगीन दीवारों ने बदला माहौल, बरपाली आंगनबाड़ी में बढ़ी नौनिहालों की उपस्थिति कोरबा, 07 अक्टूबर 2026। कभी जर्जर भवन की दीवारों और असुविधाओं के बीच संचालित होने वाला आंगनबाड़ी केंद्र अब बच्चों की खिलखिलाहट और रंग-बिरंगे चित्रों से गुलजार है। जहां पहले पालकों को अपने छोटे बच्चों को केंद्र भेजते समय उनकी सुरक्षा की चिंता रहती थी, वहीं अब ग्राम पंचायत बरपाली का नया आंगनबाड़ी भवन नौनिहालों के लिए सुरक्षित, सुंदर और सहज वातावरण बन गया है। जिला प्रशासन द्वारा डीएमएफ मद से 11.69 लाख की लागत से निर्मित नए भवन में पक्की छत, मजबूत दीवार, पक्का फर्श, रंगीन चित्र और बच्चों के लिए खिलौनों सहित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसका असर बच्चों की उपस्थिति में भी दिखाई दे रहा है और 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चे नियमित रूप से आंगनबाड़ी पहुंच रहे हैं। पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के बरपाली स्थित इस आंगनबाड़ी केंद्र में वर्तमान में 30 बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें 6 माह से 3 वर्ष आयु वर्ग के 17 तथा 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के 13 बच्चे शामिल हैं। इसके साथ ही 2 गर्भवती महिलाएं, 3 शिशुवती माताएं और 6 किशोरी बालिकाएं भी केंद्र की सेवाओं से लाभान्वित हो रही हैं। नए भवन के बाद बच्चों के लिए उपलब्ध स्थान और वातावरण में आए बदलाव ने केंद्र की गतिविधियों को भी अधिक व्यवस्थित किया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती शिवकला बताती हैं कि पुराने भवन की स्थिति ऐसी थी कि बच्चों को केंद्र में रखते समय उनकी सुरक्षा को लेकर हमेशा चिंता बनी रहती थी। भवन जर्जर होने के कारण पालक भी बच्चों को आंगनबाड़ी भेजने में सहज महसूस नहीं करते थे। नए भवन के बनने से सबसे बड़ा बदलाव बच्चों की सुरक्षा और उनके सहज वातावरण में आया है। अब पक्की छत, मजबूत दीवार और पक्के फर्श वाले भवन में बच्चे आराम से बैठते हैं, खेलते हैं और विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं। श्रीमती शिवकला के अनुसार नए भवन की दीवारों पर बने रंग-बिरंगे चित्र बच्चों को खूब आकर्षित करते हैं। बच्चे चित्रों को देखकर उनके बारे में जानने की उत्सुकता दिखाते हैं और आसपास की वस्तुओं को पहचानने का प्रयास करते हैं। खिलौनों और आकर्षक वातावरण के कारण उनमें केंद्र आने की रुचि भी बढ़ी है। पहले की तुलना में अब बच्चे अधिक संख्या में आंगनबाड़ी पहुंचते हैं और 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की नियमित उपस्थिति दिखाई देती है। बच्चों के लिए केंद्र अब केवल आने-जाने की जगह नहीं रहा, यहां वे खेलते हुए सीखते हैं और सहज माहौल में अपनी प्रारंभिक शिक्षा की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। आंगनबाड़ी सहायिका श्रीमती चमेली बाई बताती हैं कि नए भवन में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने और उन्हें भोजन कराने में भी काफी सुविधा हुई है। निर्धारित साप्ताहिक मेन्यू के अनुसार सुबह बच्चों को मीठा या नमकीन दलिया दिया जाता है। इसके बाद दाल, चावल और सब्जी सहित भोजन उपलब्ध कराया जाता है। सुरक्षित और सुविधाजनक भवन में बच्चों को भोजन कराने तथा उनकी देखभाल करने में आसानी होती है। बच्चों का नियमित रूप से केंद्र आना उनके लिए भी उत्साह का विषय है।
कार्यकर्ता श्रीमती शिवकला कहती हैं कि पहले भवन की स्थिति के कारण बच्चों और पालकों में जो संकोच था, वह अब दूर हुआ है। नए भवन ने बच्चों को सुरक्षित जगह दी है और आकर्षक वातावरण ने उनके मन में आंगनबाड़ी के प्रति अपनापन बढ़ाया है। बच्चे सुबह केंद्र आने के लिए उत्साहित रहते हैं और यहां होने वाली गतिविधियों में रुचि के साथ शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए ऐसी बेहतर सुविधा उपलब्ध होने से उन्हें अपने कार्य में भी संतोष और उत्साह मिलता है। नौनिहालों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराने की इस पहल के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया।