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कोरबा

सनसनी:मौत का सौदागर बना शिवाय हॉस्पिटल: कमर में दर्द को लेकर पहुंची महिला, तीन दिन बाद निकला शव

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लालूराम कालोनी निवासी श्रीमती सविता जायसवाल के परिजनों में आक्रोश, कहा-एक भी विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं और मल्टी स्पेशिलिटी हॉस्पिटल का नाम
लापरवाही की वजह से गई मेरी माँ की जान-सोनाली
कोरबा। कोरबा में कई ऐसी बड़ी-बड़ी बिल्डिंग बना ली गई और बिना विशेषज्ञ चिकित्सकों के हॉस्पिटल खोल दिए गए और नाम रख दिया गया मल्टी स्पेशिलिटी हॉस्पिटल। 08 मार्च 2026 को नया बस स्टैंड टी पी नगर कोरबा में ऐसा ही एक हॉस्पिटल मंत्री के हाथों उद्घाटित कर दिया गया, जबकि उक्त हॉस्पिटल प्रबंधन ने न तो नर्सिंग होम का लाइसेंस लिया और न ही एक भी स्पेशिलिस्ट डॉक्टर। आज यह हॉस्पिटल मौत का सौदागर बन कर उभरा है।
मामला लालूराम कालोनी निवासी श्रीमती सविता जायसवाल के आकस्मिक निधन का है। सोनाली ने बताया कि 04 अगस्त की रात्रि को माँ की कमर में दर्द उठा और उन्हें नजदीक होने के कारण शिवाय हॉस्पिटल में एडमिट किया गया। भर्ती के समय डाक्टरों ने बताया कि रीढ़ की हड्डी में गेप आ गया है और उन्हें रात्रि को एनआईवी सपोर्ट में रखा गया। तीन दिन बाद उन्हें वेंटिलेटर में रखते ही उनकी मौत हो गई।

एक्स-रे लेने पर पता चला रीढ़ की हड्डी में गेप है

मृतक श्रीमती सविता जायसवाल पति सुनील जायसवाल (62) की पुत्री सोनाली ने रोते हुए बताया कि माँ को एडमिट करने के बाद एक्स-रे किया गया, जहां डाक्टरों ने रीढ़ की हड्डी में गेप होना बताया और उन्हें एनआईवी सपोर्ट दिया गया। सोनाली के अनुसार डाक्टरों ने बताया कि माँ का आक्सीजन और ब्लड लेबल काफी कम है और उन्हें एनआईवी सपोर्ट देना पड़ेगा। रात्रि में माँ एनआईवी सपोर्ट को बार-बार निकाल देती थी, लेकिन रात्रिकालीन ड्यूटी में तैनात चिकित्सकों एवं स्टाफ ने लापरवाही बरती और एनआईवी सपोर्ट निकलने के कारण माँ की जान चली गई। सोनाली ने यह भी बताया कि हमें अंदर ही जाने नहीं दिया जाता था और लापरवाही के कारण माँ की जान चली गई।

बिना चेकअप चिकित्सकों ने फार्म भरा दिया-माँ का कंडीशन क्रिटिकल है-सोनाली
मृतका की बेटी सोनाली ने बताया कि जब माँ को एडमिट किया गया तो यहां के चिकित्सकों ने पहले कोरे फार्म पर साइन कराने की कोशिश की, लेकिन फार्म में लिखकर आने के बात कही गई तो बिना जांच माँ के कंडीशन को क्रिटिकल बताने वाले फार्म में साइन करा लिया, ताकि खुद का बचाव चिकित्सक कर सकें।

मामला बिगड़ते देख वेंटिलेशन में रखा और तत्काल माँ की मौत हो गई-सोनाली
मृतका श्रीमती सविता जायसवाल की बेटी सोनाली ने कहा कि तीन दिन तक माँ के ईलाज में लापरवाही की गई, खासकर रात्रि कालीन ड्यूटी में तैनात चिकित्सकों और स्टाफ की लापरवाही से माँ की जान आकस्मिक चली गई। एनआईवी सपोर्ट को माँ निकाल देती थी, लेकिन मरीज के पास न तो स्टाफ रहते थे और न ही चिकित्सक, जिसके कारण माँ की हालत बिगड़ी।
माँ की हालत बिगड़ते देख चिकित्सकों ने उन्हें वेंटिलेटर में रख दिया और कुछ देर बाद उनकी मौत हो गई। सोनाली ने कहा कि माँ की मौत सामान्य नहीं, बल्कि मेरी माँ की मौत का जिम्मेदार शिवाय हास्पिटल है।

एनआईवी सपोर्ट की जगह पाईप क्यों नहीं लगाया चिकित्सकों ने
एक्स-रे और ईसीजी करने के बाद चिकित्सकों ने एनआईवी सपोर्ट लगाया, जबकि माँ उसे निकाल दिया करती थी। केस बिगड़ते देख डाक्टरों ने पाईप के जरिये ऑक्सिजन लेबल सामान्य करने के लिए बाद में पाईप लगाया, जबकि पहले ही लगा देना था। सोनाली ने शिवाय हास्पिटल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए यह बात कही और कहा कि मेरी माँ की मौत का जिम्मेदार रात्रि कालीन स्टाफ है।

डाक्टरों से बात न कर पाएं, इसलिए बड़े-बड़े बाउंसर तैनात किए- शिवम

मृतका श्रीमती सविता जायसवाल के पुत्र शिवम ने माँ का कंडीशन जानने के लिए ईलाज कर रहे चिकित्सकों से मिलने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने बताया कि शिवाय हास्पिटल प्रबंधन कई गुंडे किस्म के बाउंसर रख लिए हैं, जो डाक्टरों से मिलने ही नहीं दिए और कहते रहे जो भी बात करनी है हमसे करो और चिकित्सकों से मिलने ही नहीं दिए। शिवाय हास्पिटल में ईलाज हो न हो, गुंडागर्दी हो रही है। हास्पिटल जैसे मंदिर की जगह में सेवा होनी चाहिए, वहां गुंडागर्दी हो रही है। हास्पिटल जैसी जगह में बाउंसर रखना कहां तक उचित है? शिवम ने कहा- क्या डाक्टरों को अपने ईलाज में खुद को विश्वास नहीं है? नहीं तो बाउंसर रखने की जरूरत ही क्यों पड़ती?

ईलाज के नाम पर सिर्फ लूट का धंधा-प्रदीप जायसवाल

मृतका के जेठ एवं पूर्व अनुविभागीय अधिकारी (जल संसाधन) प्रदीप जायसवाल ने बताया कि भाई बहू श्रीमती सविता जायसवाल की मौत लापरवाही की वजह से हुई है। शिवाय हास्पिटल में न तो विशेषज्ञ चिकित्सक हैं और न ही यहां ढंग से ईलाज होता है। ईलाज के नाम पर सिर्फ मेडिकल लूट का धंधा खोल दिया गया है।

07 को सविता जायसवाल ने अंतिम सांस ली

लालू राम कॉलोनी निवासी प्रदीप जायसवाल के छोटे भाई सुनील जायसवाल की धर्मपत्नी सविता जायसवाल का 07 अगस्त को आकस्मिक निधन हो गया। दूसरे दिन दिनांक 8/8/26 दिन शनिवार को सुबह 11 बजे मोती सागरपारा मुक्तिधाम में सवित जायसवाल का अंतिम संस्कार किया गया।

दशगात्र के बाद मच सकता है बवाल
स्व.श्रीमती सविता जायसवाल की पुत्री सोनाली ने कहा कि अभी पूरा परिवार शोक में है, लेकिन हमारी माँ यूं ही नहीं चली गई। शिवाय हास्पिटल वाले रिफर भी नहीं किए और न ही बाहर से विशेषज्ञ चिकित्सक बुलाए और ईलाज में पूरी लापरवाही बरती गई। डाक्टर फीस लूटने में लगे रहे और अच्छी खासी माँ चली गई। शिवाय हास्पिटल नहीं ले जाते तो माँ हमारी हमारे बीच ही रहती। अभी हम शोक में हैं, लेकिन माँ की मौत का हिसाब होगा।

बिना लायसेंस अवैध हास्पिटल का हो गया था आरंभ

नर्सिंगहोम एक्ट के तहत शिवाय हास्पिटल ने बिना लायसेंस मंत्री से 08 मार्च को लोकार्पण करा दिया था, जो अवैध माना जा रहा था, लेकिन मंत्री के हाथों फीता कटवाने के बाद आखिर प्रबंधन को किसका डर!

हमारा काम मरीज की जान बचाना-डॉ. दिविक मित्तल

प्रतिक्रिया जानने शिवाय हास्पिटल के डायरेक्टर डॉ. दिविक मित्तल से सम्पर्क किया गया, तो उन्होंने कहा-सविता जायसवाल का ईलाज हालांकि मैंने नहीं किया, लेकिन जो जानकारी है, उसके तहत मैं कह सकता हूं कि सविता जायसवाल क्रिटिकल कंडीशन में आई थीं, उनके लंग्स और किडनी में इंफेक्शन था। हमारा काम मरीज की जान बचाना होता है। मैं उनकी पूरी रिपोर्ट देखने के बाद ही पूरी जानकारी दे सकता हूं। इसे फोन पर नहीं बताया जा सकता, हास्पिटल में आकर मिलना पड़ेगा।

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संकल्प से शिखर तक की यात्रा

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17 सितम्बर:प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन पर विशेष लेख


देश में जितने भी महान व्यक्तित्व हुए हैं, उनका जन्म कहीं न कहीं से शुभ नक्षत्र और देवपुरूषों की जयंती से जुड़ा हुआ है। 17 सितम्बर को आदिशिल्पी भगवान विश्वकर्मा की जयंती होती है। 17 सितम्बर को ही देश को सशक्त नेतृत्व देने वाले सक्षम प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदर भाई मोदी का भी जन्मदिन है। पूरे भारतवर्ष में भाजपा 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर 2026 तक एक माह तक सेवा संकल्प अभियान के तहत विभिन्न रचनात्मक कार्यों को अंजाम देगा। प्रथम दिन 17 सितम्बर को संध्या गोधूली बेला में भाजपा कार्यकर्ता देश के कोने-कोने में आशीर्वाद का दीया जलाएंगे। यह शाम ऐतिहासिक होगी और दिवाली की तरह यह शाम भी जगमग होगी।
17 सितम्बर 1950 में गुजरात के वडनगर में दामोदर दास मोदी-हीरा बेन के घर में एक बालक का जन्म हुआ, जो आगे चलकर देश का प्रधानमंत्री बना।
संघर्षों से रहा नाता
नरेन्द्र दामोदर भाई मोदी का प्रधानमंत्री के रूप में जनता ने यूं ही राजतिलक नहीं किया, बल्कि उनका बचपन से लेकर युवा कार्यकाल तक का काल संघर्षों से भरा रहा। रेलवे स्टेशन में चाय बेचने वाले परिवार से निकल कर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक और भाजपा संगठन में बतौर कार्यकर्ता के रूप में मोदी जी ने राजनीति के गुर सीखे और संघर्षों का रास्ता तय करते हुए माँ भारती की सेवा के लिए स्वयं को समर्पित कर दिया और आज एक साथ सबसे लम्बे समय तक प्रधानमंत्री बनने वाले प्रथम व्यक्ति बन गए। 2001 से 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने गुजरात माडल देश को दिया, उनके कार्यकाल में गुजरात विकास के नए सोपानों को तय किया और मोदी जी ने गुजरात माडल ऑफ डेवलपमेंट को देश के सामने रखा।
2014 में पहली बार और फिर 2019 तथा 2024 में लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनकर नया इतिहास रच दिया। अब तक के उनके कार्यकाल को सख्त फैसलों वाला कहा जा सकता है। जम्मू-कश्मीर में धारा 370, अनुच्छेद 35ए को हटाना, नोट बंदी, पूरे देश में जीएसटी लागू, पाक के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करना प्रमुख फैसले थे। उनकी योजनाओं में स्वच्छ भारत मिशन ने देश की तस्वीर ही बदल दी। जनधन, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत, डीजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्टार्ट अफ इंडिया से सीधा लाभ जनता को मिला। आज मोदी वैश्विक नेता बन चुके हैं। यूं कहें तो संकल्प से शिखर तक रही उनकी यात्रा।

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HMS की सदस्यता में भारी गिरावट, गेवरा/दीपका क्षेत्र में 1,107 सदस्य घटे, रू.11.07 लाख का नुकसान

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कोरबागेवरा/दीपका/। कोयला मजदूर सभा (HMS) के SECL गेवरा–दीपका एवं CEWS गेवरा क्षेत्रों में वर्ष 2026 के यूनियन सदस्यता सत्यापन के आंकड़ों ने संगठन के जनाधार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार वर्ष 2025 की तुलना में 2026 में HMS की सदस्यता में रिकॉर्ड तोड़ 1,107 सदस्यों की भारी गिरावट दर्ज की गई है ।

सदस्यता सत्यापन 2025 बनाम 2026

वर्ष 2025 में जहाँ HMS को 1,326 श्रमिकों का मजबूत समर्थन हासिल था, वहीं वर्ष 2026 में यह आंकड़ा सिमटकर मात्र 219 रह गया है ।

क्षेत्रवार तुलनात्मक आंकड़े

गेवरा प्रोजेक्ट 562 (2025) ➔ 146 (2026) (कमी 416)
गेवरा क्षेत्रीय कार्यालय 147 (2025) ➔ 21 (2026) (कमी 126)
CEWS–गेवरा 50 (2025) ➔ 03 (2026) (कमी 47)
दीपका क्षेत्र 567 (2025) ➔ 49 (2026) (कमी 518)
कुल योग 1,326 से घटकर 219 (कुल कमी 1,107)

बैठकों और अपीलों का नहीं दिखा कोई असर

सत्यापन के दौरान यूनियन संगठन के केंद्रीय शीर्ष नेतृत्व पदाधिकारियों की उपस्थिति व कई दौर की बैठकों के बावजूद आंकड़ों में कोई सुधार नहीं हो सका ।

स्थानीय नेतृत्व और जनाधार पर उठे सवाल

दीपका क्षेत्र के क्षेत्रीय पदाधिकारियों द्वारा अपने समाज व सहकर्मियों से की गई अपीलों का भी कोई असर नहीं पड़ा, अपने ही गृह क्षेत्र दीपका में सदस्यता 567 से गिरकर 49 पर आ जाने को लेकर विज्ञप्ति में तीखा व्यंग्य करते हुए, इसे अपने ही घर में औंधे मुंह गिरने जैसा बताया गया है और उनके जनाधार पर सवाल खड़े किए गए हैं ।

रू.11.07 लाख का वित्तीय घाटा

प्रति सदस्य रू.1,000 सदस्यता शुल्क के आधार पर वर्ष 2025 में जहाँ संगठन को रू.13.26 लाख का राजस्व मिला था, वहीं 2026 में यह घटकर मात्र रू.2.19 लाख रह गया है। इसके चलते HMS को सीधे तौर पर रू.11.07 लाख का सीधा वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा है ।

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मालगाड़ी के इंजन पर पत्थर फेंकने वाला गिरफ्तार:लोको पायलट घायल हुआ था, नशे में घटना, रेलवे कोर्ट ने भेजा जेल

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कोरबा। कोरबा में मालगाड़ी के इंजन पर पत्थर फेंकने के मामले में रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने युवक को गिरफ्तार किया है। पत्थर लगने से इंजन में मौजूद लोको पायलट घायल हो गया था। आरोपी की पहचान दीपका के कृष्णानगर निवासी रोशन तिवारी (26) के रूप में हुई है। उसे बिलासपुर रेलवे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

घटना 10 सितंबर की रात करीब 2 बजे की है। मालगाड़ी नंबर एन बॉक्स/15 जूनाडीह से दीपका एसईसीएल साइडिंग की ओर जा रही थी। दीपका बाजार फाटक के पास अचानक इंजन पर पत्थर फेंका गया। पत्थर लगने से लोको पायलट को चोट लगी।

रेलवे एक्ट की धारा 153 में दर्ज हुआ केस

घटना के बाद RPF पोस्ट कोरबा में रेलवे अधिनियम की धारा 153 के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच के दौरान RPF ने दीपका पुलिस की मदद से एक संदिग्ध को हिरासत में लिया।

पूछताछ में आरोपी ने कबूली पत्थर फेंकने की बात

पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम रोशन तिवारी, पिता स्व. दुर्गा प्रसाद तिवारी, निवासी वार्ड नंबर 07, कृष्णानगर दीपका बताया। RPF के अनुसार, उसने पूछताछ में पत्थर फेंकने की बात कबूल की। आरोपी ने बताया कि घटना के समय वह शराब के नशे में था और इसी हालत में उसने मालगाड़ी के इंजन पर पत्थर फेंका।

15 सितंबर को कोर्ट में पेश किया, जेल भेजा गया

आरोपी को पहले से दर्ज मामले में गिरफ्तार कर 15 सितंबर 2026 को बिलासपुर रेलवे कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। रेलवे एक्ट की धारा 153 के तहत जेल और जुर्माने का प्रावधान है।

RPF ने लोगों से की पत्थरबाजी नहीं करने की अपील

RPF ने लोगों से रेलवे ट्रैक और ट्रेनों के आसपास पत्थरबाजी जैसी हरकतें नहीं करने की अपील की है। इससे रेल कर्मचारी घायल हो सकते हैं और बड़ा रेल हादसा भी हो सकता है।

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