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कोरबा

25 सितंबर को भारत रचेगा इतिहास, करोड़ों विद्यार्थी, शिक्षक, नागरिक एक साथ, एक समय, एक स्वर में सामूहिक रूप से गायेंगे पूर्ण वंदे मातरम

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छत्तीसगढ़ की होगी महत्वपूर्ण सहभागिता
25 सितंबर को प्रातः ठीक 11 बजे होगा सामूहिक पूर्ण वंदे मातरम गान
गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज होगा आयोजन

कोरबा। हम सभी गौरवान्वित एवं हर्षित हैं कि इस वर्ष सम्पूर्ण भारत वंदे मातरम गीत की 150वीं वर्षगांठ मना रहा है।
वंदे मातरम केवल एक राष्ट्रगीत नहीं, बल्कि भारत की देशभक्ति, स्वाभिमान एवं राष्ट्रीय चेतना का अमर स्वर है। वंदे मातरम गीत के 150 वर्ष पूर्ण होने का यह ऐतिहासिक अवसर हमें स्वतंत्रता संग्राम के वीर सेनानियों के त्याग, संघर्ष और मातृभूमि के प्रति उनके समर्पण का स्मरण कराता है।

राष्ट्रीय जागरण के 150वें वर्ष के इस अवसर पर विद्या भारती द्वारा अखिल भारतीय स्तर पर सामूहिक पूर्ण वंदे मातरम गीत का आयोजन किया जा रहा है। सम्पूर्ण देश में 25 सितंबर 2026 को प्रातः 11 बजे एक साथ, एक स्वर में लाखों विद्यार्थी, शिक्षक, नागरिक वंदे मातरम गीत का पूर्ण सामूहिक गायन करेंगे। यह आयोजन गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज होगा।
उल्लेखनीय है कि विद्या भारती भारत का सबसे बड़ा गैर-सरकारी (स्वैच्छिक) शैक्षिक नेटवर्क है। विद्या भारती भारत देश के 684 जिलों में अपनी सेवा दे रही है, जिसमें शहरी क्षेत्र के साथ-साथ ग्रामीण, जनजातीय (आदिवासी) और दूरदराज के सीमावर्ती क्षेत्र भी शामिल हैं। विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के पूरे भारत में 12 हजार से अधिक विद्यालय (इसके अलावा देशभर में लगभग 8,000 से अधिक अनौपचारिक शिक्षा केंद्र भी संचालित हैं), सरस्वती शिशु मंदिरों में देश भर में कुल आचार्य (शिक्षक) 1.53 लाख से अधिक, कुल 35.33 लाख विद्यार्थी हैं।

सरस्वती शिशु मंदिरों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा (जैसे एआई और रोबोटिक्स) के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, योग, संगीत और नैतिक मूल्यों (संस्कारों) की शिक्षा प्रमुख है।
हमारा छत्तीसगढ़ भी सामूहिक पूर्ण वंदे मातरम गान के इस देशभक्ति पूर्ण आयोजन में पूरे उत्साह एवं ऊर्जा के साथ सम्मिलित हो रहा है।
छत्तीसगढ़ प्रांत के समस्त 1100 से अधिक सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय और उनमें अध्ययनरत तीन लाख विद्यार्थी एवं ग्यारह हजार शिक्षकों के साथ इस आयोजन में सहभागी होगा। इस आयोजन में छत्तीसगढ़ के समस्त युवा, नागरिक भी सम्मिलित हों यह भी प्रयास चल रहा है।
25 सितंबर को प्रातः 11 बजे छत्तीसगढ़ के समस्त सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालयों में आयोजित होने वाले कार्यक्रम को लेकर जोर-शोर से तैयारियां चल रही हैं। चूंकि यह आयोजन गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में सम्मिलित होगा इस हेतु उसके समस्त प्रोटोकॉल के अनुसार पूरी कार्ययोजना बन रही है।
सामूहिक वंदे मातरम पूर्ण गायन के दिन सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालयों के आसपास स्थित अन्य विद्यालय एवं महाविद्यालय भी इस आयोजन में सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय पहुंचकर इस गौरवपूर्ण आयोजन में सम्मिलित हों यह आह्वान भी समस्त शैक्षणिक संस्थाओं से किया जा रहा है।
आज इस पत्रकार वार्ता के माध्यम से हम छत्तीसगढ़ के समस्त युवाओं, नागरिकों से देशभक्ति पूर्ण इस गौरवमयी आयोजन में सम्मिलित होने का आह्वान करते हैं।

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कोरबा

सेजेस पाली में नुक्कड़ नाटक के माध्यम से महिला सशक्तिकरण का संदेश

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नमो सेवा गाथा पर विद्यार्थियों की प्रभावशाली प्रस्तुति, लगभग 495 लोग हुए शामिल
कोरबा, 07 अक्टूबर 2026। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत सेजेस अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, पाली में ‘नमो सेवाकृअनकही कहानियां’ कार्यक्रम के तहत नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से महिला सशक्तिकरण और नमो सेवा गाथा पर प्रभावशाली प्रस्तुति दी।
विद्यार्थियों की शानदार प्रस्तुति से ग्रामीणजन, जनप्रतिनिधि, पालक और छात्र-छात्राएं उत्साहित नजर आए। कार्यक्रम में स्कूली विद्यार्थियों, जनप्रतिनिधियों और पालकों सहित लगभग 495 लोग उपस्थित रहे।

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मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल से दिव्यांगजनों की राह हुई आसान

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कोरबा, 7 अक्टूबर 2026। समाज कल्याण विभाग द्वारा आज प्रतीक जैन मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत कोरबा, ओएसडी तरुण कुमार किरण की उपस्थिति में पात्र दिव्यांगजनों को मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल वितरित की गई। दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के उद्देश्य से दी गई इस सहायता से उनके आवागमन में सुविधा होगी और वे दैनिक कार्य अधिक सुगमता से कर सकेंगे।
मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल प्राप्त करने वाले हितग्राहियों में रेल्वे कॉलोनी, कोरबा निवासी 55 वर्षीय सैय्यद याकूब, पिता सैय्यद अब्दुल कादर, सुभाष ब्लॉक, कोरबा निवासी 44 वर्षीय श्रीमती सुनीता दास, पिता बाबू राज, शांति नगर, कुसमुंडा निवासी 34 वर्षीय श्रीमती सीमा कुमारी, पिता अदरू, तथा गुरसिया, कटघोरा निवासी 20 वर्षीय प्रदीप कुमार उरांव, पिता हरिराम शामिल हैं।
ट्राईसाइकिल मिलने पर हितग्राहियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए शासन और समाज कल्याण विभाग के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि इस सहायता से उनकी गतिशीलता बढ़ेगी और वे अपने दैनिक कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय अधिक आत्मनिर्भर बन सकेंगे।

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कोरबा

रंग-बिरंगी दीवारों से बदली आंगनबाड़ी की तस्वीर, बरपाली के नौनिहालों को मिला सुरक्षित माहौल और सीखने का अवसर

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सुरक्षित छत और रंगीन दीवारों ने बदला माहौल, बरपाली आंगनबाड़ी में बढ़ी नौनिहालों की उपस्थिति
कोरबा, 07 अक्टूबर 2026। कभी जर्जर भवन की दीवारों और असुविधाओं के बीच संचालित होने वाला आंगनबाड़ी केंद्र अब बच्चों की खिलखिलाहट और रंग-बिरंगे चित्रों से गुलजार है। जहां पहले पालकों को अपने छोटे बच्चों को केंद्र भेजते समय उनकी सुरक्षा की चिंता रहती थी, वहीं अब ग्राम पंचायत बरपाली का नया आंगनबाड़ी भवन नौनिहालों के लिए सुरक्षित, सुंदर और सहज वातावरण बन गया है। जिला प्रशासन द्वारा डीएमएफ मद से 11.69 लाख की लागत से निर्मित नए भवन में पक्की छत, मजबूत दीवार, पक्का फर्श, रंगीन चित्र और बच्चों के लिए खिलौनों सहित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसका असर बच्चों की उपस्थिति में भी दिखाई दे रहा है और 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चे नियमित रूप से आंगनबाड़ी पहुंच रहे हैं।
पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के बरपाली स्थित इस आंगनबाड़ी केंद्र में वर्तमान में 30 बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें 6 माह से 3 वर्ष आयु वर्ग के 17 तथा 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के 13 बच्चे शामिल हैं। इसके साथ ही 2 गर्भवती महिलाएं, 3 शिशुवती माताएं और 6 किशोरी बालिकाएं भी केंद्र की सेवाओं से लाभान्वित हो रही हैं। नए भवन के बाद बच्चों के लिए उपलब्ध स्थान और वातावरण में आए बदलाव ने केंद्र की गतिविधियों को भी अधिक व्यवस्थित किया है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती शिवकला बताती हैं कि पुराने भवन की स्थिति ऐसी थी कि बच्चों को केंद्र में रखते समय उनकी सुरक्षा को लेकर हमेशा चिंता बनी रहती थी। भवन जर्जर होने के कारण पालक भी बच्चों को आंगनबाड़ी भेजने में सहज महसूस नहीं करते थे। नए भवन के बनने से सबसे बड़ा बदलाव बच्चों की सुरक्षा और उनके सहज वातावरण में आया है। अब पक्की छत, मजबूत दीवार और पक्के फर्श वाले भवन में बच्चे आराम से बैठते हैं, खेलते हैं और विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं।
श्रीमती शिवकला के अनुसार नए भवन की दीवारों पर बने रंग-बिरंगे चित्र बच्चों को खूब आकर्षित करते हैं। बच्चे चित्रों को देखकर उनके बारे में जानने की उत्सुकता दिखाते हैं और आसपास की वस्तुओं को पहचानने का प्रयास करते हैं। खिलौनों और आकर्षक वातावरण के कारण उनमें केंद्र आने की रुचि भी बढ़ी है। पहले की तुलना में अब बच्चे अधिक संख्या में आंगनबाड़ी पहुंचते हैं और 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की नियमित उपस्थिति दिखाई देती है। बच्चों के लिए केंद्र अब केवल आने-जाने की जगह नहीं रहा, यहां वे खेलते हुए सीखते हैं और सहज माहौल में अपनी प्रारंभिक शिक्षा की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।
आंगनबाड़ी सहायिका श्रीमती चमेली बाई बताती हैं कि नए भवन में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने और उन्हें भोजन कराने में भी काफी सुविधा हुई है। निर्धारित साप्ताहिक मेन्यू के अनुसार सुबह बच्चों को मीठा या नमकीन दलिया दिया जाता है। इसके बाद दाल, चावल और सब्जी सहित भोजन उपलब्ध कराया जाता है। सुरक्षित और सुविधाजनक भवन में बच्चों को भोजन कराने तथा उनकी देखभाल करने में आसानी होती है। बच्चों का नियमित रूप से केंद्र आना उनके लिए भी उत्साह का विषय है।

कार्यकर्ता श्रीमती शिवकला कहती हैं कि पहले भवन की स्थिति के कारण बच्चों और पालकों में जो संकोच था, वह अब दूर हुआ है। नए भवन ने बच्चों को सुरक्षित जगह दी है और आकर्षक वातावरण ने उनके मन में आंगनबाड़ी के प्रति अपनापन बढ़ाया है। बच्चे सुबह केंद्र आने के लिए उत्साहित रहते हैं और यहां होने वाली गतिविधियों में रुचि के साथ शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए ऐसी बेहतर सुविधा उपलब्ध होने से उन्हें अपने कार्य में भी संतोष और उत्साह मिलता है। नौनिहालों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराने की इस पहल के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया।

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