पेरिस, एजेंसी। यूरोप के सबसे प्रतिष्ठित फुटबॉल टूर्नामेंट UEFA Champions League का खिताब जीतने के बाद फ्रांसीसी क्लब पेरिस सेंट-जर्मेन (Paris Saint-Germain (PSG) के समर्थकों का जश्न राजधानी Paris में कई जगह हिंसा और उपद्रव में बदल गया। देर रात हजारों प्रशंसक सड़कों पर उतर आए, लेकिन कुछ इलाकों में स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई और आगजनी, तोड़फोड़ तथा पुलिस के साथ झड़पों की घटनाएं सामने आईं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चैंपियंस लीग फाइनल में PSG की जीत के बाद करीब 20 हजार समर्थक शहर के प्रमुख इलाकों, खासकर Arc de Triomphe और Champs-Élysées के आसपास जमा हो गए। लोग फ्लेयर जलाकर, पटाखे छोड़कर और नारे लगाकर जीत का जश्न मना रहे थे। सुबह 3 बजे के बाद भी आगजनी, लूटपाट, तोड़फोड़ और पुलिस के साथ झड़पें जारी रहीं। कई इलाकों में हालात तनावपूर्ण रहे और सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया गया।
जश्न के दौरान कुछ उपद्रवी समूहों ने दुकानों और सार्वजनिक संपत्तियों को निशाना बनाया। कई वाहनों में आग लगा दी गई और एक पुलिस स्टेशन में घुसने की कोशिश भी की गई। पुलिस ने हालात काबू करने के लिए बल प्रयोग किया, जिसके बाद कई जगह झड़पें हुईं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, Eiffel Tower के आसपास भी आगजनी की घटनाएं दर्ज की गईं। हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार आग सीधे एफिल टावर में नहीं लगी, बल्कि उसके आसपास के क्षेत्रों में उपद्रवियों द्वारा आग लगाने की घटनाएं हुईं।
अधिकारियों ने बताया कि हालात बिगड़ने के बाद बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। रात 10 बजे तक सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया जा चुका था। झड़पों के दौरान कम से कम एक पुलिसकर्मी घायल हुआ। पेरिस की मुख्य रिंग रोड पर भी भारी जाम लग गया और कई इलाकों में यातायात प्रभावित रहा।पिछले वर्ष भी PSG की जीत के बाद हुए जश्न में हिंसा हुई थी, जिसमें दो लोगों की मौत तक हो गई थी। इसी अनुभव को देखते हुए इस बार पूरे फ्रांस में लगभग 22,000 और अकेले पेरिस में 8,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था।
इसके बावजूद कुछ स्थानों पर उपद्रवी तत्वों ने सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देते हुए हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया। PSG की ऐतिहासिक जीत फ्रांस के लिए गर्व का क्षण थी, लेकिन जश्न के दौरान हुई हिंसा और आगजनी ने इस उपलब्धि की चमक को फीका कर दिया। प्रशासन अब नुकसान का आकलन कर रहा है और उपद्रव में शामिल लोगों की पहचान के लिए जांच जारी है।
तेल अवीव, एजेंसी। इजराइल में विपक्षी नेता गादी आइजनकोट ने नई सरकार बनाने के लिए 4 शर्तें रखी हैं। इजराइली मीडिया वायनेट के मुताबिक, इनमें हरेदी समुदाय को सैन्य सेवा देना अनिवार्य होगा।
इसके अलावा इजराइल को यहूदी और लोकतांत्रिक देश बनाए रखना और गाजा से हमास का शासन खत्म करना शामिल है। आइजनकोट ने कहा कि इन शर्तों को मानने वाले दलों के लिए गठबंधन में शामिल होने का रास्ता खुला है।
दरअसल, 27 अक्टूबर को हुए चुनाव में किसी भी गठबंधन को बहुमत नहीं मिला। 120 सीटों वाली संसद में सरकार बनाने के लिए 61 सीटें जरूरी हैं।
आइजनकोट की पार्टी याशार 21 सीटें जीतकर विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी बनी है। वे प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के लिए अलग-अलग दलों के नेताओं से बातचीत कर रहे हैं।
आइजनकोट की शर्तें…
पहली शर्त- इजराइल यहूदी और लोकतांत्रिक देश बना रहे
आइजनकोट चाहते हैं कि इजराइल की पहचान यहूदी और लोकतांत्रिक देश के रूप में बनी रहे। सरकार सभी नागरिकों को बराबर अधिकार दे और धर्म या समुदाय के आधार पर किसी से भेदभाव न करे। यानी देश में हर नागरिक की आजादी और अधिकारों का सम्मान हो।
दूसरी शर्त- सभी नागरिकों के लिए सैन्य सेवा जरूरी हो
इजराइल के हर नागरिक को सेना, राष्ट्रीय या नागरिक सेवा करनी जरूरी हो। यानी देश की सेवा की जिम्मेदारी सभी नागरिकों की हो।
फिलहाल इजराइल में यहूदी नागरिकों के लिए सेना में सेवा करना जरूरी है, लेकिन बेहद धार्मिक हरेदी समुदाय को इससे छूट मिलती रही है। इस समुदाय के लोगों का कहना है कि वह धार्मिक पढ़ाई करते हैं इसलिए सेना में भर्ती नहीं हो सकते।
आइजनकोट की पार्टी का कहना है कि जब देश सुरक्षा चुनौतियों और युद्ध का सामना कर रहा है, तो सेना में सेवा की जिम्मेदारी किसी एक वर्ग पर नहीं, बल्कि सभी नागरिकों पर होनी चाहिए।
इजराइल में हरेदी समुदाय की आबादी करीब 10 लाख हो गई है। यह कुल आबादी का लगभग 13% है।
तीसरी शर्त- आजादी के समय तय सिद्धांतों का पालन हो
आइजनकोट चाहते हैं कि नई सरकार 1948 में इजराइल की आजादी के समय तय सिद्धांतों के मुताबिक काम करे। इनमें इजराइल को यहूदी देश बनाए रखने के साथ लोकतंत्र, आजादी, न्याय और सभी नागरिकों को बराबर अधिकार देने की बात शामिल है।
यह शर्त इसलिए जरूरी है क्योंकि नेतन्याहू सरकार के न्यायपालिका में बदलाव करने के फैसले पर विवाद हुआ है। विरोधियों का आरोप है कि इन बदलावों से लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर हो सकती हैं। आइजनकोट ने इन विवादित कानूनों को रद्द करने की भी बात कही है।
चौथी शर्त- गाजा से हमास का शासन खत्म हो
आइजनकोट चाहते हैं कि गाजा में हमास का शासन खत्म हो और उसकी सैन्य ताकत भी खत्म की जाए।
हमास ने 7 अक्टूबर 2023 को इजराइल पर हमला किया था। इसमें कई लोग मारे गए और कई को बंधक बना लिया गया। इसके जवाब में इजराइल ने गाजा में सैन्य कार्रवाई शुरू की, जिसमें भारी तबाही हुई और बड़ी संख्या में फिलिस्तीनी मारे गए।
आइजनकोट का मानना है कि इजराइल की सुरक्षा के लिए हमास को दोबारा गाजा की सत्ता में आने से रोकना जरूरी है।
7 अक्टूबर 2023 को 25 साल की नोआ अर्गमानी को हमास के लड़ाकों ने ट्राइब ऑफ नोवा ट्रान्स फेस्टिवल पर हमला करने के बाद उसके दोस्त से अलग करके किडनैप कर लिया था।
इजराइल में सरकार बनाने के लिए 42 दिन मिलते हैं
इजराइल में चुनाव के बाद राष्ट्रपति सभी दलों के नेताओं से बात करते हैं। इसके बाद वे किसी एक सांसद को सरकार बनाने की जिम्मेदारी सौंपते हैं। उस सांसद को तय समय में संसद का विश्वास हासिल करना होता है।
इजराइल में सरकार बनाने के लिए चुने गए नेता को शुरुआत में 28 दिन का समय मिलता है। जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति इसे 14 दिन और बढ़ा सकते हैं। यानी सरकार बनाने के लिए कुल 42 दिन मिल सकते हैं।
इस दौरान नेता को दूसरी पार्टियों से बातचीत कर समर्थन जुटाना होता है। इसके लिए पार्टियों के बीच नीतियों और मंत्रिपदों को लेकर समझौते हो सकते हैं।
चुनाव नतीजे आने के बाद से ही आइजनकोट नेतन्याहू विरोधी दलों के नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं। उनकी कोशिश ज्यादा से ज्यादा सांसदों का समर्थन जुटाकर राष्ट्रपति इसाक हर्जोग के सामने सरकार बनाने का दावा मजबूत करने की है।
याशार पार्टी के नेता गादी आइजनकोट और डेमोक्रेट पार्टी के नेता यायर गोलान ने 29 अक्टूबर को मुलाकात की थी।
लिकुड पर याशार के सांसदों को तोड़ने की कोशिश का आरोप
याशार पार्टी ने नेतन्याहू की लिकुड पार्टी पर उसके सांसदों को अपने पाले में लाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। पार्टी के मुताबिक, लिकुड के कुछ नेता उसके सांसदों को फोन कर नेतन्याहू का समर्थन करने के लिए मना रहे हैं।
जारी बयान में याशार ने कहा कि चुनाव में हार के बाद लिकुड के नेता परेशान हैं और उसके सांसदों से संपर्क कर रहे हैं।
ओमान, एजेंसी। होर्मुज में गुरुवार को 27 भारतीय क्रू सदस्यों वाले तेल टैंकर MT लुईस 1 पर हमला हुआ। पनामा के झंडे वाले इस टैंकर के पास एक छोटी नाव पहुंची थी। नाव से आए लोगों ने जहाज के बाहरी हिस्से (हुल) पर दो लिम्पेट माइंस चिपका दीं और वहां से चले गए।
कुछ देर बाद दोनों विस्फोटकों में धमाका हुआ, जिससे इंजन रूम में आग लग गई। इसकी वजह से जहाज का इंजन कुछ समय के लिए बंद हो गया। हालांकि, क्रू ने आग पर काबू पा लिया और जहाज को सुरक्षित कर लिया।
हमले के पीछे किसका हाथ है, इसकी पुष्टि नहीं हुई है। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बताया कि जहाज पर सवार सभी 27 भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। किसी को चोट नहीं आई है।
पहली बार लिम्पेट माइंस से सफल हमला
रॉयटर्स के मुताबिक, फरवरी में अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद होर्मुज में पहली बार लिम्पेट माइंस से सफल हमला हुआ है।
इससे पहले सितंबर में भी इसी तरह के विस्फोटक लगाने की कोशिश की गई थी, लेकिन उनमें धमाका नहीं हुआ था। ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी UKMTO के मुताबिक, टैंकर पर हमला ओमान के खासाब शहर से करीब 46 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में हुआ।
लिम्पेट माइंस छोटे आकार के विस्फोटक होते हैं, जिन्हें गोताखोर या छोटी नाव से जहाज के बाहरी हिस्से पर चिपकाया जा सकता है। इनमें चुंबक लगे होते हैं, जिससे ये जहाज पर चिपक जाते हैं। इनका इस्तेमाल आमतौर पर जहाजों को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जाता है।
एक दिन में दो तेल टैंकरों पर हमला
29 अक्टूबर को लाइबेरिया के झंडे वाले तेल टैंकर एमटी अरजानाह पर भी हमला हुआ था। इस जहाज पर दो भारतीय नागरिक सवार थे। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल के मुताबिक, दोनों भारतीय सुरक्षित हैं।
इस तरह एक ही दिन में होर्मुज के आसपास दो तेल टैंकरों पर हमले हुए। दोनों जहाजों पर कुल 29 भारतीय नाविक सवार थे। सभी सुरक्षित हैं।
होर्मुज में अब तक 122 जहाजों पर हमला
इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) के मुताबिक, 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से 30 अक्टूबर तक फारस की खाड़ी, होर्मुज और ओमान की खाड़ी में 122 जहाजों पर हमला हुआ।
होर्मुज दुनिया का एक अहम समुद्री रास्ता है। यहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल दूसरे देशों तक पहुंचता है। लगातार हो रहे हमलों से तेल की सप्लाई और दुनियाभर के कारोबार पर असर पड़ सकता है।
अमेरिकी चुनाव के बाद ईरान पर फिर हमले की तैयारी
अमेरिका और इजराइल 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर फिर हमला कर सकते हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, दोनों देश तेज सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं। इसमें ईरान के तेल-गैस ठिकानों, परमाणु केंद्रों और मिसाइलों-ड्रोन के ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने मिडिल ईस्ट में अपनी तैयारी बढ़ा दी है। कुछ संवेदनशील ठिकानों से सैनिकों को हटाया जा रहा है और हथियारों का भंडार बढ़ाया जा रहा है। इजराइल की सुरक्षा के लिए पैट्रियट मिसाइल सिस्टम भी भेजा जा रहा है। यह सिस्टम दुश्मन की मिसाइलों और लड़ाकू विमानों को हवा में ही मार गिराता है। हालांकि, ट्रम्प ने अभी हमले का अंतिम फैसला नहीं लिया है।
नई दिल्ली, एजेंसी। दुनिया का सबसे बड़ा क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज बाइनेंस हैक हो गया है। इसे इतिहास की सबसे बड़ी क्रिप्टो हैकिंग माना जा रहा है। कंपनी ने निकासी पर रोक लगा दी है। यानी, सुरक्षा जांच पूरी होने तक बाइनेंस अकाउंट में मौजूद पैसा या क्रिप्टो बाहर निकाला जा सकता है।
इस हैकिंग में साइबर हमलावरों ने बाइनेंस के ट्रांजैक्शन वॉलेट्स से महज 20 मिनट में 6.3 बिलियन डॉलर यानी करीब 60,000 करोड़ रुपए के क्रिप्टो एसेट्स चुरा लिए। घटना के बाद बिटकॉइन समेत कुछ अन्य क्रिप्टो में 5% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है।
ब्लॉकचेन रिसर्च फर्म TRM लैब्स के मुताबिक इस हैकिंग के पीछे नॉर्थ कोरिया का हाथ है। क्रिप्टोकरेंसी एक तरह का डिजिटल पैसा है, जिसे ऑनलाइन खरीदा-बेचा जा सकता है। इसे कोई सरकार या बैंक जारी नहीं करता, बल्कि यह ब्लॉकचेन तकनीक से चलता है।