सरगुजा, एजेंसी। छत्तीसगढ़ में पिछले 5 दिनों में 3 हाथियों की मौत हुई है। सरगुजा में गुरुवार रात खेतों में फसल बचाने के लिए लगाए गए बिजली वाले तार की चपेट में आने से बेबी एलिफेंट की मौत हो गई। हाथियों का झुंड मौके पर पहुंचा। दल रातभर वहीं घूमता रहा और चिंघाड़ता रहा। घटना उदयपुर वन परिक्षेत्र की है।
एक दिन पहले रायगढ़ में बुधवार को हाथी शावक का शव तालाब में मिला। मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने शव को बाहर निकलवाकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। शुरुआती जांच में आशंका है कि हाथियों के झुंड में दबने के बाद शावक पानी में डूब गया होगा। हालांकि, पोस्टमॉर्टम के बाद मौत की वजह स्पष्ट होगी। घटना तमनार रेंज की है।
वहीं, जशपुर में शनिवार को करंट प्रवाहित तार की चपेट में आने से नर हाथी की मौत हो गई। वन विभाग की जांच के मुताबिक, जंगल और खेत की सीमा पर वन्यजीवों के शिकार के लिए करीब डेढ़ किलोमीटर तक बिजली का तार बिछाया गया था। इसी तार की चपेट में आने से हाथी की मौत होने की आशंका है। घटना दुलदुला वन परिक्षेत्र की है।
फसलों को बचाने के लिए खेतों में बिजली तार लगाया गया था।
बिजली तार की चपेट में आने से हाथी शावक की मौत हो गई।
केस- 1 सरगुजा में करंट की चपेट में आया शावक, मौत
पहली घटना सरगुजा के उदयपुर वन परिक्षेत्र की है। जानकारी के मुताबिक अलकापुरी के जंगल में पिछले कई दिनों से हाथियों का दल घूम रहा है। हाथियों से फसल बचाने के लिए किसानों ने खेतों के चारों ओर 1 किलोमीटर से ज्यादा इलाके में झटका देने वाला तार लगाया है।
बुधवार रात करीब 10 बजे हाथी का शावक इस तार की चपेट में आ गया। उसकी सूंड और पैर में तार फंस गया। करंट लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि जिस खेत के आसपास झटका तार लगाया गया है, वह झिरमिटी सरपंच चंदन एक्का और उनके परिवार के लोगों की जमीन है।
घटना की सूचना मिलने पर वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे।
घटना की सूचना मिलने पर वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे।
27 हाथियों का दल घूम रहा
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि घटना की जांच की जा रही है। जांच के बाद जिम्मेदार लोगों की पहचान कर नियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, क्षेत्र में करीब 27 हाथियों का दल घूम रहा है। वन विभाग की टीम आसपास अवैध हुकिंग की भी जांच कर रही है।
करंट को लेकर स्थानीयों की आशंका
स्थानीय लोगों का कहना है कि झटका मशीन के करंट से किसी जानवर या व्यक्ति की मौत नहीं हो सकती। उनका कहना है कि मामले की जांच होनी चाहिए। स्थानीय लोगों ने आशंका जताई कि तार में सीधे करंट लगाया गया होगा।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, घटना के बाद हाथियों का दल रातभर मौके पर डटा रहा और चिंघाड़ता रहा। हाथियों की आवाज सुनकर आसपास के लोग सहमे रहे। वन विभाग हाथी के बच्चे के शव का पोस्टमॉर्टम कराने के बाद अंतिम संस्कार करेगा।
केस- 2 रायगढ़ में तालाब में डूबने से हाथी शावक की मौत
दूसरी घटना रायगढ़ के तमनार रेंज की है। दरअसल, वन परिक्षेत्र के सामारूमा क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से करीब 50 हाथियों का दल विचरण कर रहा था। यह दल हर शाम सड़कों पर भी आ रहा था। मंगलवार देर रात हाथियों का झुंड छैडोरिया क्षेत्र के एक तालाब में नहाने या पानी पीने उतरा था।
इसी दौरान झुंड में मौजूद शावक पानी में डूब गया और बाहर नहीं निकल सका। बुधवार सुबह वन विभाग को शावक के तालाब में डूबने की जानकारी मिली। इसके बाद एसडीओ, रेंजर समेत वनकर्मी मौके पर पहुंचे और शावक को बाहर निकलवाया। उसकी उम्र करीब 3-4 दिन बताई जा रही है।
रायगढ़ में तालाब में डूबने से हाथी शावक की मौत हो गई।
पोस्टमॉर्टम के बाद स्पष्ट होगी मौत की वजह
घरघोड़ा सब डिवीजन के SDO आशुतोष मंडावा ने बताया कि छैडोरिया गांव के पास तालाब में डूबने से हाथी शावक की मौत हुई है। पोस्टमॉर्टम के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
केस- 3 जशपुर में करंट के तार की चपेट में नर हाथी की गई जान
तीसरी घटना जशपुर के दुलदुला वन परिक्षेत्र की है। 24 सितंबर की सुबह ढोढ़ीआरा गांव के नोनपानी जंगल में हाथी का शव मिला। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। घटनास्थल को सुरक्षित कर जांच शुरू की गई।
जांच में पता चला कि जंगल और खेत की सीमा पर करीब 1.5 किलोमीटर तक करंट वाले तार बिछाए गए थे। वन विभाग के मुताबिक, जंगली सूअर या अन्य वन्यजीवों के शिकार के लिए तार बिछाए जाने की आशंका है। इसी तार के संपर्क में आने से हाथी की मौत होने की बात सामने आई है।
जांच के दौरान संदिग्ध लोगों से अलग-अलग पूछताछ की गई। इसके बाद टीम ने ढोढ़ीआरा गांव में तीन मकानों की तलाशी ली। यहां बिजली का करंट लगाने में इस्तेमाल होने वाले तार और अन्य सामग्री मिली। एक मकान से मोर के पंख और वन्यजीवों के शिकार में इस्तेमाल होने वाला फंदा भी बरामद हुआ।
24 सितंबर की सुबह ढोढ़ीआरा गांव के नोनपानी जंगल में हाथी का शव मिला था।
निशानदेही पर जंगल से भी बिजली तार बरामद
वन विभाग के मुताबिक, पोनहारी गांव के सलिंदर और रूपेश से पूछताछ के बाद उनकी निशानदेही पर जंगल में करीब 1 किलोमीटर दूर नाले के पास छिपाकर रखा बिजली तार बरामद किया गया। तार बिछाने के रास्ते, घटनास्थल और बरामदगी की प्रक्रिया की फोटो और वीडियोग्राफी भी कराई गई।
11 लोगों के समूह के शामिल होने की जानकारी
वन विभाग के अनुसार, पूछताछ में करीब 11 लोगों के वन्यजीवों के शिकार के लिए करंट प्रवाहित तार बिछाने में शामिल होने की जानकारी सामने आई है। आरोप है कि हाथी की मौत के बाद तार को घटनास्थल से हटाकर कुछ सामग्री घर और कुछ सामान जंगल में छिपा दिया गया था।
जांच में सामने आए तथ्यों और बरामद साक्ष्यों के आधार पर वन विभाग ने आरोपितों की गिरफ्तारी की कार्रवाई शुरू की।
वन विभाग की टीम ने मौत मामले में 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
18 घंटे में 6 गिरफ्तार, 5 की तलाश जारी
वन विभाग के मुताबिक, घटना की सूचना मिलने के करीब 18 घंटे के भीतर संदिग्ध आरोपियों की तलाश, गिरफ्तारी और न्यायिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। अब तक छह आरोपित गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
गिरफ्तार आरोपियों में समीर टोप्पो निवासी धुरीअंबा, अगसतुस एक्का निवासी कोहड़ाफारी, रूपेश एक्का निवासी धुरीअंबा, दिनेश राम निवासी ढोढ़ीआरा, सलिंद्र राम निवासी कोहड़ाफारी और तरसियुस राम निवासी कोहड़ाफारी शामिल हैं।
गिरफ्तार आरोपियों का मेडिकल कराया गया। इसके बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया गया,जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज गया है।
कोरबा, 01 अक्टूबर 2026। राज्य शासन के निर्देशानुसार कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन में जिले में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक संचालित “सेवा संकल्प अभियान” के अंतर्गत आम नागरिकों तक विभिन्न शासकीय सेवाओं एवं योजनाओं का लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से नगरीय निकाय एवं जनपद पंचायत क्षेत्रों में 01 अक्टूबर से विशेष शिविर आयोजित किए जा रहें। इसी क्रम में 02 अक्टूबर को नगर पालिका परिषद दीपका कार्यालय एवं नगर पंचायत छुरीकला अंतर्गत बस स्टैंड छुरी के समीप शिविर आयोजित किए जाएंगे। आम नागरिकों से अपील की गई है कि अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर शिविर का लाभ उठायें।
पीएम जनमन के अंतर्गत लगभग 167.20 लाख रुपये की लागत से अटल चौक से जंगल पारा तक बना 2.38 किलोमीटर मार्ग कोरबा, 01 अक्टूबर 2026। विकासखंड पाली के दूरस्थ ग्राम डोंगानाला के जंगल पारा में रहने वाले बिरहोर परिवारों के लिए बारिश का मौसम बड़ी परेशानी लेकर आता था। अटल चौक से बस्ती तक जाने वाला कच्चा रास्ता कीचड़ से भर जाता था। पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता था और बच्चे स्कूल जाने से कतराते थे। अब प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) के अंतर्गत बनी पक्की सड़क ने उनकी रोजमर्रा की यात्रा आसान कर दी है।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत अटल चौक से जंगल पारा तक लगभग 2.38 किलोमीटर सड़क का निर्माण लगभग 167.20 लाख रुपये की लागत से किया गया है। मार्ग में सीसी सड़क के साथ डामर सड़क भी बनाई गई है। इससे बस्ती में रहने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति बिरहोर समुदाय के लगभग 40 परिवारों को आवागमन में सुविधा मिल रही है। बस्ती के सुनहर सिंह बिरहोर बताते हैं कि पक्की सड़क बनने से अब आने-जाने में आसानी होती है। गीता बाई के अनुसार उन्हें रास्ते में पहले जैसी परेशानी नहीं होती और बच्चे भी आसानी से स्कूल आ-जा सकते हैं। गाँव के किसान पुनो राम पटेल पुराने दिनों को याद करते हुए बताते हैं कि बारिश में रास्ते पर घुटनों तक कीचड़ हो जाता था। अब पक्की सड़क बनने से उस परेशानी से राहत मिली है। जंगल पारा के परिवारों के लिए यह सड़क स्कूल और आवश्यक सेवाओं तक पहुँचने का सुगम रास्ता बन गई है। बारिश के दिनों में जिस मार्ग से गुजरना कठिन था, उसी पर अब ग्रामीण अधिक आसानी से आ-जा रहे हैं।
उद्यानिकी विभाग की सहायता से अपनाई ड्रिप सिंचाई, प्लास्टिक मल्चिंग और उन्नत खेती कोरबा, 01 अक्टूबर 2026। पोड़ी-उपरोड़ा विकासखंड के ग्राम नगौई बछेरा निवासी किसान गुरुचरण मरार पहले परंपरागत तरीके से धान की खेती करते थे। वर्ष में एक ही फसल लेने के कारण खेती से होने वाली आय सीमित थी। सिंचाई का साधन नहीं था और कृषि कार्य के लिए ट्रैक्टर व अन्य मशीनें किराये पर लानी पड़ती थीं। ऐसे में छह सदस्यीय परिवार की जरूरतें पूरी करना कठिन होता था। गांव के भ्रमण के दौरान उद्यानिकी विभाग के कर्मचारियों ने श्री मरार को विभागीय योजनाओं और आधुनिक खेती की जानकारी दी। इसके बाद उन्होंने शासकीय उद्यान रोपणी, नगौई में आवेदन किया। राष्ट्रीय बागवानी मिशन और राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत उन्हें ड्रिप सिंचाई प्रणाली, प्लास्टिक मल्चिंग तथा ग्राफ्टेड बैंगन रोपण के लिए कुल 46 हजार रुपये का विभागीय अनुदान मिला। इन संसाधनों और विभागीय मार्गदर्शन की मदद से श्री मरार ने खेती के तरीके में बदलाव किया। अब वे वर्ष में दो से तीन फसलें लेते हैं और वर्तमान में भिंडी की खेती से भी आय अर्जित कर रहे हैं। विभाग को दी गई जानकारी के अनुसार, उनकी अनुमानित वार्षिक आय पहले लगभग 45 हजार रुपये थी, जो अब लगभग ढाई से तीन लाख रुपये तक पहुंच गई है। बढ़ी हुई आय से परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरी है। वे गांव के अन्य किसानों को भी खेती से जुड़ी जानकारी देते हैं। श्री मरार कहते हैं कि उद्यानिकी विभाग से योजनाओं की जानकारी मिलने पर उनका आधुनिक खेती के प्रति उत्साह बढ़ा। वे आगे भी विभागीय मार्गदर्शन लेकर खेती करना चाहते हैं और मिली सहायता के लिए आभार व्यक्त करते हैं।