खेल
पेरिस पैरालिंपिक- नितेश कुमार ने बैडमिंटन में गोल्ड जीता:योगेश ने डिस्कस थ्रो में सिल्वर दिलाया; पीएम मोदी ने अवनि लेखरा को दी बधाई
पेरिस ,एजेंसी। पेरिस पैरालिंपिक में भारत ने दूसरा गोल्ड मेडल जीत लिया है। बैडमिंटन मेंस सिंगल्स की SL3 कैटेगरी में नितेश कुमार ने फाइनल जीता। उन्होंने ग्रेट ब्रिटेन के डैनियल बेथेल को 21-14, 18-21, 23-21 से हराया। उनसे पहले डिस्कस थ्रो में योगेश कथुनिया ने आज सिल्वर मेडल जीता था। भारत को पैरालिंपिक गेम्स में शूटर अवनि लेखरा ने पहला गोल्ड मेडल दिलाया। पीएम नरेंद्र मोदी ने 2 दिन बाद आज सोमवार को उनसे फोन पर बात कर बधाई दी। पैरालिंपिक में भारत अब तक 2 गोल्ड, 3 सिल्वर और 4 ब्रॉन्ज जीत चुका है। आज भारत बैडमिंटन, एथलेटिक्स, शूटिंग और आर्चरी में भी मेडल जीत सकता है। पैरा बैडमिंटन मिक्स्ड SH-6 इवेंट में भारत की नित्या श्री सिवान और शिवराजन सोलाईमलाई ब्रॉन्ज मेडल मैच हार गए। उन्हें इंडोनेशिया के सुभान और मर्लिना ने 21-17, 21-12 से हरा दिया। अब सिंगल्स में नित्या श्री सिवान इंडोनेशिया की रीना मर्लिना से ब्रॉन्ज मेडल मैच खेलेंगी।
मोदी बोले, ऐसे ही खेलना जारी रखो
पीएम मोदी ने अवनि से फोन पर कहा, “बहुत-बहुत बधाई अवनि। कैसा लग रहा है आपको।” अवनि बोलीं, “काफी अच्छा लग रहा है सर। दूसरी बार पैरालिंपिक्स में आई हूं, थोड़ी नर्वस थीं, लेकिन आपने कहा था कि उम्मीदों का बोझ मत ले कर जाना, इसलिए वैसा ही खेली।” मोदी ने आगे कहा, “अवनि आप लगातार बहुत अच्छा कर रही हो। मेरी ओर से बहुत बधाई है, आप पूरी मेहनत करो और बेहतर करो।”
नितेश कुमार ने दिलाया दूसरा गोल्ड
बैडमिंटन की SL3 कैटेगरी के इंडिविजुअल इवेंट में नितेश कुमार ने भारत को गोल्ड मेडल दिलाया। उन्होंने ग्रेट ब्रिटेन के डैनियल बेथेल के खिलाफ 3 गेम तक चले मुकाबले को जीता। नितेश ने पहला गेम 21-14 से जीता, दूसरा गेम बेथेल 18-21 से जीत गए।
तीसरे गेम में मामला 21-21 की बराबरी पर पहुंच गया, यहां नितेश ने लगातार 2 पॉइंट्स लिए और गोल्ड जीत लिया। नितेश से पहले अवनि लेखरा ने शूटिंग में गोल्ड जीता था। नितेश SL3 कैटेगरी में खेलते हैं। इस कैटेगरी में वे एथलीट्स आते हैं, जिन्हें चलने में दिक्कत होती है। यानी जिनके एक या दोनों पैर सामान्य नहीं होते।
योगेश ने 42.22 मीटर थ्रो के साथ मेडल जीता
5वें दिन योगेश ने मेंस डिस्कस थ्रो F-56 के फाइनल में अपने पहले थ्रो में 42.22 मीटर स्कोर किया। ये उनका सीजन बेस्ट-थ्रो रहा और इसी के साथ उन्होंने सिल्वर मेडल जीत लिया। F-56 कैटेगरी में प्लेयर डिसेबिलिटी की वजह से बैठकर फील्ड इवेंट में भाग लेता है।

योगेश कथुनिया ने टोक्यो ओलिंपिक 2020 में भी सिल्वर मेडल जीता था।
जेवलिन थ्रोअर सुमित फाइनल खेलेंगे
पैरालिंपिक में दूसरी बार देश का प्रतिनिधित्व कर रहे सुमित अंतिल आज जेवलिन F-64 का फाइनल खेलेंगे। सुमित के अलावा इस गेम में भारत से संजय संदीप और संदीप भी हिस्सा लेंगे। सुमित ने टोक्यो पैरालिंपिक में गोल्ड मेडल जीता था। उन्होंने चीन के हांग्जो के एशियाई पैरा खेलों की में 73.29 मीटर जेवलिन फेंककर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया था।
पेरिस पैरालिंपिक के चौथे दिन देर रात भारत ने 2 मेडल जीते। निषाद कुमार ने हाई जंप इवेंट में देर रात एक बजे भारत को सिल्वर मेडल दिलाया। उन्होंने 2.04 मीटर के सीजन बेस्ट जंप के साथ दूसरा स्थान हासिल किया। उनसे पहले प्रीति पाल ने विमेंस की 200 मीटर रेस में ब्रॉन्ज मेडल जीता था।
रविवार को भारत से बैडमिंटन मेंस के इंडिविजुअल इवेंट में सुहास यथिराज और नितेश कुमार ने फाइनल में जगह बना ली। वहीं विमेंस इंडिविजुअल में मनीषा रामदास और नित्या श्रीसिवान ने सेमीफाइनल में जगह बनाई। कंपाउंड आर्चरी में राकेश कुमार ब्रॉन्ज मेडल मैच हार गए। उनसे पहले 10 मीटर मिक्स्ड एयर राइफल में अवनि लेखरा और सिद्धार्थ बाबू क्वालिफिकेशन राउंड से बाहर हो गए।
चौथे दिन आए 2 मेडल
1. निषाद कुमार ने सीजन बेस्ट स्कोर के साथ सिल्वर जीता
मेंस की टी-47 कैटेगरी के हाई जंप इवेंट में भारत को सिल्वर मेडल मिला। निषाद कुमार ने 2.04 मीटर जंप कर दूसरा स्थान हासिल किया। वर्ल्ड और पैरालिंपिक रिकॉर्ड होल्डर अमेरिका के रोडरिक टाउनसेंड ने गोल्ड जीता। उन्होंने 2.12 मीटर जंप के साथ पहला स्थान हासिल किया। हाई जंप इवेंट में जॉर्जिया के जॉर्जी मारगिव को ब्रॉन्ज मेडल मिला। उनका बेस्ट जंप 2.00 मीटर रहा।
निषाद ने टी-47 कैटेगरी में सिल्वर जीता। इसमें वे एथलीट्स आते हैं, जिनकी कोहनी के नीचे के अंग काम नहीं करते। इसी तरह की विकलांगता या फिर वे एथलीट्स जिनके दोनों पैर समान रूप से काम नहीं करते। इसी इवेंट में भारत के राम पाल 7वें नंबर पर रहे, उन्होंने 1.95 मीटर का बेस्ट जंप किया।

निषाद कुमार ने 2.04 मीटर के सीजन बेस्ट जंप के साथ सिल्वर मेडल जीता।
2. प्रीति ने पर्सनल बेस्ट टाइम के साथ मेडल जीता
200 मीटर विमेंस की टी-35 कैटेगरी रेस में प्रीति ने ब्रॉन्ज मेडल जीता। उन्होंने 30.01 मीटर के पर्सनल बेस्ट टाइम के साथ तीसरा स्थान हासिल किया। चीन की जिया झोऊ को गोल्ड और किआन गुओ को सिल्वर मेडल मिला।
प्रीति ने 100 मीटर रेस में भी ब्रॉन्ज मेडल जीता था। वह ट्रैक इवेंट में भारत के लिए 2 पैरालिंपिक मेडल जीतने वाली पहली ही प्लेयर हैं। प्रीति टी-35 कैटेगरी में खेलती हैं, इसमें वह प्लेयर शामिल होती हैं, जिन्हें हाइपरटोनिया, गतिभंग और एथेटोसिस जैसी बीमारी होती हैं।

प्रीति ने 100 मीटर रेस में भी ब्रॉन्ज मेडल जीता था। यह उनका पहला मेडल था।
तीसरे दिन शूटर रुबीना फ्रांसिस ने दिलाया ब्रॉन्ज
पैरा शूटर रुबीना फ्रांसिस ने तीसरे दिन शनिवार, 31 अगस्त को विमेंस 10 मीटर एयर पिस्टल के SH1 कैटेगरी में ब्रॉन्ज मेडल जीता। उन्होंने फाइनल में 211.1 स्कोर किया। यह भारत का इन गेम्स में 5वां मेडल था।
शुक्रवार 30 अगस्त को भारत ने 4 मेडल जीते थे। इनमें अवनि लेखरा ने गोल्ड और मोना अग्रवाल ने विमेंस शूटिंग में ब्रॉन्ज मेडल जीता। जबकि मेंस शूटिंग के 10 मीटर एयर पिस्टल शूटिंग में मनीष नरवाल ने सिल्वर दिलाया था। विमेंस की 100 मीटर टी-35 कैटेगरी रेस में प्रीति पाल ने ब्रॉन्ज मेडल जीता।

रुबीना विमेंस 10 मीटर एयर पिस्टल के क्वालिफिकेशन राउंड में छठे नंबर पर रही थीं।
खेल
पहली बार छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी का इंडिया A में चयन:आयुष पांडेय श्रीलंका के खिलाफ खेलेंगे, 25 जून से होने वाले 4 दिवसीय-सीरीज में दिखेंगे
रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ क्रिकेट के लिए बड़ी उपलब्धि सामने आई है। प्रदेश के रणजी खिलाड़ी और बाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज आयुष पांडे का चयन भारतीय ए टीम में हुआ है। राज्य में यह पहली बार है, जब किसी खिलाड़ी का चयन भारतीय ए टीम के लिए हुआ है।

आयुष 25 जून 2026 से शुरू होने वाली श्रीलंका ए के खिलाफ चार दिवसीय सीरीज में भारत ए टीम का हिस्सा होंगे। आयुष पांडे ने पिछले रणजी ट्रॉफी सीजन में छत्तीसगढ़ की ओर से शानदार प्रदर्शन किया था।
उन्होंने 7 मैचों की 13 पारियों में 57.30 की औसत से 573 रन बनाए। इस दौरान उनके बल्ले से 2 शतक और 2 अर्धशतक निकले। उनका सर्वोच्च स्कोर 183 रन रहा। रणजी ट्रॉफी में लगातार अच्छे प्रदर्शन के दम पर आयुष का चयन दलीप ट्रॉफी के लिए भी हुआ था।
वहां भी उन्होंने अपनी बल्लेबाजी से प्रभावित किया। दलीप ट्रॉफी में 2 मैचों की 3 पारियों में उन्होंने 53.92 की औसत से 102 रन बनाए।
भारत A टीम क्या है?
भारत A टीम को भारतीय क्रिकेट की “दूसरी राष्ट्रीय टीम” या राष्ट्रीय टीम की फीडर टीम कहा जाता है। इसमें घरेलू क्रिकेट (रणजी ट्रॉफी, दलीप ट्रॉफी, विजय हजारे आदि) में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को मौका दिया जाता है।
इसका मुख्य उद्देश्य सीनियर भारतीय टीम के संभावित खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर जैसी प्रतिस्पर्धा में परखना होता है।

भारत A टीम का रोल क्या होता है?
- सीनियर भारतीय टीम के लिए खिलाड़ियों की तैयारी करना।
- घरेलू क्रिकेट और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के बीच की खाई को कम करना।
- चयनकर्ताओं को यह देखने का मौका देना कि खिलाड़ी विदेशी या मजबूत विपक्ष के खिलाफ कैसा प्रदर्शन करता है।
- टेस्ट क्रिकेट के संभावित खिलाड़ियों को लंबे प्रारूप के मैचों में परखना।
खेल
कवर्धा: उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने राष्ट्रीय पदक विजेता बेसबॉल खिलाडि़यों का किया सम्मान
कवर्धा के पांच खिलाडि़यों ने राष्ट्रीय प्रतियोगिता में जीते 3 स्वर्ण और 2 रजत पदक


कवर्धा। ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित 31वीं राष्ट्रीय सब जूनियर बेसबॉल बालक एवं बालिका प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश का गौरव बढ़ाने वाले कवर्धा के खिलाडि़यों से उप मुख्यमंत्री एवं विधायक कवर्धा विजय शर्मा ने अपने कवर्धा स्थित निवास कार्यालय में मुलाकात कर उन्हें शुभकामनाएं दीं तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

एमेच्योर बेसबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया के तत्वावधान में 24 से 29 मई तक आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रयास स्पोर्ट्स अकादमी कवर्धा के पांच खिलाडि़यों का छत्तीसगढ़ टीम में चयन हुआ था। इनमें बालक वर्ग से चंद्रेश कोर्राम, पंकज मेरावी और शुभम सेन तथा बालिका वर्ग से चांदनी साहू और जयश्री घृतलहरे शामिल थीं। प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ की बालक टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया, जबकि बालिका टीम ने रजत पदक जीतकर प्रदेश का नाम रोशन किया।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने खिलाडि़यों को बधाई देते हुए कहा कि ग्रामीण अंचलों से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करना पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और उन्हें बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है। खिलाडि़यों की यह सफलता आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनेगी।
अकादमी के प्रशिक्षक राजा जोशी ने बताया कि खिलाडि़यों का चयन राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर हुआ था। राष्ट्रीय प्रतियोगिता के दौरान छत्तीसगढ़ की बालक टीम ने मध्यप्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, राजस्थान और दिल्ली जैसी मजबूत टीमों को हराकर फाइनल में महाराष्ट्र को 6-2 से पराजित कर राष्ट्रीय खिताब अपने नाम किया। फाइनल मुकाबले में चंद्रेश कोर्राम ने शानदार होमरन लगाकर टीम की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में तीन होमरन लगाए।
वहीं बालिका वर्ग में छत्तीसगढ़ टीम ने दिल्ली, तेलंगाना और मेजबान ओडिशा को हराकर फाइनल में प्रवेश किया। हालांकि फाइनल मुकाबले में महाराष्ट्र के खिलाफ टीम को हार का सामना करना पड़ा, लेकिन रजत पदक जीतकर खिलाडि़यों ने शानदार प्रदर्शन किया। चांदनी साहू और जयश्री घृतलहरे ने टीम की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान दिया। खिलाडि़यों की इस राष्ट्रीय उपलब्धि पर खेल प्रेमियों, अभिभावकों और जिलेवासियों में उत्साह का माहौल है। सभी ने खिलाडि़यों एवं उनके प्रशिक्षकों को बधाई देते हुए भविष्य में और बड़ी सफलताओं की शुभकामनाएं दी हैं।
खेल
20 साल के प्रज्ञानानंदा ने रचा इतिहास, प्रतिष्ठित ‘नार्वे शतरंज’ का खिताब जीतने वाले बने पहले भारतीय
ओस्लो/नई दिल्ली/चेन्नई, एजेंसी। भारतीय ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानानंदा (R Praggnanandhaa) ने वैश्विक शतरंज की दुनिया में एक नया इतिहास रच दिया है। उन्होंने सबसे कड़े और प्रतिष्ठित टूर्नामेंटों में से एक ‘नार्वे शतरंज’ (Norway Chess) का खिताब अपने नाम कर लिया है। वह इस महामुकाबले को जीतने वाले देश के पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। अंतिम दौर (लास्ट राउंड) के करो या मरो के मुकाबले में चेन्नई के इस 20 वर्षीय युवा खिलाड़ी ने जर्मनी के दिग्गज विन्सेंट कीमर को क्लासिकल बाजी में मात देकर पूरे 3 अंक बटोरे और एलीट शतरंज की सबसे चमचमाती ट्रॉफी अपने नाम कर ली। प्रज्ञानानंदा ने आखिरी दिन की शुरुआत 15 अंक के साथ तीसरे स्थान से की।

उन्होंने सबसे अहम मौके पर बेहतरीन खेल दिखाया और क्लासिकल बाजी में जीत हासिल करके पूरे तीन अंक बटोरे। इस तरह वे 18 अंक पर पहुंचे और एलीट शतरंज की सबसे प्रतिष्ठित ट्रॉफियों में से एक अपने नाम की। चेन्नई के इस 20 वर्षीय खिलाड़ी ने वह उपलब्धि हासिल की जो 2013 में टूर्नामेंट की शुरुआत के बाद से भारतीय शतरंज के दिग्गज विश्वनाथन आनंद और मौजूदा विश्व चैंपियन डी गुकेश जैसे खिलाड़ी भी हासिल नहीं कर पाए थे।

नार्वे शतरंज में दूसरी बार हिस्सा ले रहे प्रज्ञानानंदा की शुरुआत धीमी रही थी लेकिन टूर्नामेंट के दूसरे हाफ में उन्होंने रफ्तार पकड़ी और लगातार चार जीत हासिल की। प्रज्ञानानंदा के अभियान की सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने नार्वे शतरंज के सात बार के चैंपियन और दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को क्लासिकल बाजी में दो बार हराया। मौजूदा विश्व चैंपियन गुकेश के अंतिम चरण में खिताब की दौड़ से बाहर होने के बाद प्रज्ञानानंदा ने भारत की उम्मीदों को जीवंत रखा और आखिरकार खिताब अपने नाम किया।
अमेरिकी ग्रैंडमास्टर वेस्ली सो आखिरी दौर से पहले 15.5 अंक के साथ सबसे आगे थे लेकिन अलीरेजा फिरोजा के खिलाफ उनकी क्लासिकल बाजी ड्रॉ रही जिससे मुकाबला आर्मागेडन टाईब्रेक में चला गया। इस नतीजे ने प्रज्ञानानंदा के लिए रास्ता खोल दिया। उन्हें पता था कि कीमर के खिलाफ क्लासिकल बाजी में जीत उन्हें अंक तालिका में सबसे ऊपर पहुंचा देगी और यादगार खिताब दिला देगी।

हालांकि वेस्ली सो ने टाईब्रेक जीत लिया लेकिन उस जीत से उन्हें सिर्फ डेढ़ अंक मिला जिससे उनके कुल अंक 17 रहे जबकि प्रज्ञानानंदा ने 18 अंक के साथ खिताब जीता। खिताब जीतने की उम्मीद के साथ आखिरी दौर में उतरे अलीरेजा 15.5 अंक के साथ तीसरे स्थान पर रहे। मैच के बाद प्रज्ञानानंदा ने बताया कि चेन्नई में अपनी मां से हुई बातचीत ने उनका हौसला बढ़ाया था।
उन्होंने कहा, उन्होंने मेरे से कहा था कि जून का महीना मेरे लिए अच्छा रहेगा और उनकी यह भविष्यवाणी सच साबित हुई। प्रज्ञानंदा ने कहा, मैं एक जून को अलीरेजा के खिलाफ मुकाबले से पहले अपनी मां से बात कर रहा था और वह मुझे कह रही थी, ‘यह नया महीना है, तुम अच्छा खेलोगे।’ यह वैसी ही बात है जो मां हमेशा कहती हैं और फिर मैंने ये चार बाजी जीतीं। मुझे लगता है कि उन्हें कुछ पता था।
इसके बाद प्रज्ञानानंदा ने लगातार चार जीत हासिल कीं। यहां तक कि कार्लसन ने भी प्रज्ञानानंदा की जमकर तारीफ की और पूरे टूर्नामेंट में इस युवा भारतीय खिलाड़ी के प्रदर्शन को ‘शानदार’ बताया। कार्लसन ने प्रसारणकर्ता से कहा, ”यह वाकई कमाल की बात है। यह बहुत ही निर्णायक और जबरदस्त प्रदर्शन था और इससे पता चलता है कि अगर मैं भी इसी तरह का नतीजा हासिल करता तो मेरे लिए भी यह मुमकिन हो सकता था लेकिन हां यह अविश्वसनीय है।

वह एक जबरदस्त फाइटर है और उसे इसका इनाम मिलते देखना अच्छा लगता है। इस बीच गुकेश का निराशाजनक सफर जारी रहा। टूर्नामेंट में उनकी तीसरी मौजूदगी भी उस कामयाबी के बिना खत्म हुई जिसकी उन्हें उम्मीद थी विशेषकर ऐसे साल में जब उन्हें चैलेंजर जावोखिर सिंदारोव के खिलाफ अपने विश्व खिताब का बचाव करना है।
आखिरी दौर में सफेद मोहरों से खेलते हुए कार्लसन ने क्लासिकल बाजी में 20 साल के गुकेश को हराकर तीन अंक हासिल किए। नार्वे का यह दिग्गज हालांकि इस जीत के बावजूद 13 अंक के साथ पांचवें स्थान पर रहा।
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