अब तक इंडियन बॉक्स ऑफिस पर 831.40 करोड़ कमाए, पुष्पा के 821 करोड़ को पीछे छोड़ा
मुंबई, एजेंसी। फिल्म धुरंधर रिलीज के 32वें दिन भारत में सबसे अधिक कमाई करने का रिकॉर्ड बनाने वाली हिंदी फिल्म बन गई है। फिल्म अब तक इंडियन बॉक्स ऑफिस पर 831.40 करोड़ रुपए का कलेक्शन कर चुकी है। 6 जनवरी को धुरंधर ने भारत में 5.70 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया। वहीं, फिल्म वर्ल्डवाइड 1253.83 करोड़ रुपए का कलेक्शन कर चुकी है।
इसके साथ ही रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर ने अल्लू अर्जुन की पुष्पा 2 को पीछे छोड़ दिया है। पुष्पा-2 ने हिंदी भाषा में भारतीय बॉक्स ऑफिस पर 821 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया था।
भारत में धुरंधर का कलेक्शन
पहला हफ्ता- 218.00 करोड़ रुपए
दूसरा हफ्ता- 261.50 करोड़ रुपए
तीसरा हफ्ता- 189.30 करोड़ रुपए
चौथा हफ्ता- 115.70 करोड़ रुपए
पांचवां हफ्ता- 35.80 करोड़ रुपए
32वां दिन (सोमवार)- 5.40 करोड़ रुपए
33वां दिन (मंगलवार)- 5.70 करोड़ रुपए
भारत में कुल नेट कलेक्शन- 831.40 करोड़ रुपए
जियो स्टूडियो की तरफ से फिल्म की इस उपलब्धि पर एक पोस्ट शेयर किया गया है, जिसमें कैप्शन में लिखा गया- ‘थैंक्यू इंडिया। आपने धुरंधर को नंबर 1 फिल्म का ताज पहनाया है। धुरंधर भारत की अब तक की सबसे बड़ी हिंदी फिल्म बन गई है।’
पिछले एक महीने से धुरंधर के लगातार बढ़िया प्रदर्शन पर ट्रेड एनालिस्ट अतुल मोहन ने कहा- ‘लोगों को ये फिल्म पसंद आई है, ऐसे में कोई रिकॉर्ड नहीं बचता है। हिंदी सिनेमा के इतिहास में जो भी ब्लॉकबस्टर फिल्में रही हैं, वो लोगों की पसंद की वजह से ही बनी और रिकॉर्ड तो टूटने के लिए ही बनाए जाते हैं। आज के लोगों को जैसी फिल्में चाहिए, मेकर्स ने वैसी ही फिल्म परोसकर दी है। लोगों ने इस फिल्म को हाथों-हाथ लिया है।’
जब हमने अतुल से पूछा किया क्या आने वाली फिल्मों को भी धुरंधर से चुनौती मिलने वाली है? इसके जवाब में वो कहते हैं- ‘हां बिल्कुल। तुरंत रिलीज होने वाली फिल्मों पर इसका असर जरूर दिखेगा। जब कोई भी फिल्म बहुत बड़ी हिट हो जाती है फिर उसके आसपास की 10-12 फिल्में बैकफुट पर आ जाती हैं। मैं कई ऐसे लोगों को जानता हूं, जिन्होंने रिलीज के पहले हफ्ते में धुरंधर को दो बार या उससे अधिक बार देखा है।
ट्रेड एनालिस्ट अतुल मोहन।
ऐसे में जब कोई एक ही फिल्म को इतनी बार देख ले, वो दूसरी फिल्मों को देखने से बचता है। उन्हें लगता है कि जब हमने एक अच्छी फिल्म देख ली, तो अब दूसरी क्यों देखनी। वैसे भी आजकल थिएटर में जाने महंगा हो गया है। धुरंधर के बाद कोई ऐसी फिल्म आई भी नहीं है, जिसे देखने के लिए लोग थिएटर जाए।
जब कोई फिल्म अच्छी और लंबी चलती है तो उसका बहुत इम्पैक्ट पड़ता है। थिएटर वाले भी उसे छेड़ने नहीं चाहते हैं। वो उस फिल्म को ही प्रायोरिटी देंगे और शो कम नहीं करेंगे।’
धुरंधर की इस सफलता पर आदित्य चोपड़ा के प्रोडक्शन हाउस यश राज फिल्म्स ने आदित्य धर और उनकी टीम को भारतीय सिनेमा के लिए नया बेंचमार्क सेट करने पर बधाई दी है।
यशराज की तरफ से लिखा गया- ‘धुरंधर सिर्फ एक फिल्म नहीं है… यह भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक मील का पत्थर है, जिसे हमेशा याद रखा जाएगा। आदित्य धर और जियो स्टूडियोज को बधाई, जिन्होंने अब तक की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म (एक भाषा में) बनने का गौरव हासिल किया है।
एक डायरेक्टर के रूप में, आदित्य धर के उद्देश्य की स्पष्टता, निडर कहानी कहने की शैली और उत्कृष्टता के प्रति अटूट कमिटमेंट ने इंडियन सिनेमा के लिए एक नया बेंचमार्क सेट किया है। हम इस शानदार फिल्म के सभी स्टारकास्ट, टेक्नीशियन को भी उनके पूरे योगदान के लिए बधाई देते हैं।
आप ही वो धुरंधर हैं जिन्होंने फिल्म के विचार को बड़े पर्दे पर इतनी भव्यता और प्रभावशाली ढंग से साकार किया। हमें ऐसी फिल्में देने के लिए धन्यवाद जो हमें क्रिएटिव एक्सीलेंस की खोज में आगे बढ़ने के लिए इंस्पायर करती हैं।’
वहीं, पिछले वीक, धुरंधर ने पठान को पीछे छोड़ते हुए नॉर्थ अमेरिका में सबसे अधिक कमाई करने वाली बॉलीवुड फिल्म का खिताब हासिल किया। सैकनिल्क के अनुसार, चौथे मंगलवार के आखिर में फिल्म ने नॉर्थ अमेरिका में 17.50 मिलियन डॉलर का आंकड़ा पार कर लिया है।
इससे पहले यहां शाहरुख खान की पठान ने 17.49 मिलियन डॉलर का कलेक्शन किया था। इसके साथ ही धुरंधर नॉर्थ अमेरिका में सबसे अधिक कमाई करने वाली बॉलीवुड फिल्म बन गई है।
धुरंधर के मेकर्स का कहना है कि फिल्म ने ‘पुष्पा 2’ के हिंदी भाषा के 821 करोड़ रुपए के आंकड़े को भी पार कर लिया है, जिससे यह फिल्म एक भाषा में सबसे अधिक कमाई करने वाली भारतीय फिल्म बन गई है। पुष्पा 2 ने तेलुगु, तमिल, मलयालम और कन्नड़ भाषाओं में 400 करोड़ रुपए से अधिक की कमाई की थी।
बता दें कि धुरंधर एक स्पाई थ्रिलर फिल्म है। फिल्म में रणवीर सिंह, अर्जुन रामपाल, अक्षय खन्ना, संजय दत्त और आर. माधवन अहम भूमिकाओं में हैं। इनके अलावा सारा अर्जुन, राकेश बेदी और दानिश पंडोर ने भी काम किया। अब धुरंधर का सीक्वल 19 मार्च 2026 को रिलीज होने वाला है।
अयोध्या, एजेंसी।‘चंपत राय बेदाग और निष्कलंक हैं। यह मैं अपने अनुभव के आधार पर कह रहा हूं। उनका भोलापन उनके लिए मुसीबत बन गया। उन्होंने सब पर विश्वास करके गलती की। लोगों की पहचान करने में उनसे चूक हुई।’
‘ट्रस्ट के दायित्व निभाने में कुछ कमियां रही हैं। अगर कोई कमी नहीं होती तो चोरी कैसे हो सकती थी? जहां कमी रही है, वहां सुधार किया जाएगा। चोरी करने वालों को सजा जरूर मिलनी चाहिए।’
ये बातें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नए महासचिव गोविंद देव गिरि महाराज ने कहीं।
श्रीहरिकोटा, एजेंसी। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने गुरुवार देर रात 2:55 बजे EOS-05 इमेजिंग सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। इसे श्रीहरिकोटा से GSLV-F17 रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेजा गया।
EOS-05 करीब 36 हजार किलोमीटर की ऊंचाई पर जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में रहकर तस्वीरें लेगा। ऐसा करने वाला भारत का यह पहला सैटेलाइट है। इससे पहले भारत के सभी इमेजिंग सैटेलाइट निचली कक्षा में थे।
EOS-05 भारत और आसपास के बड़े इलाकों की लगातार तस्वीरें भेज सकेगा। इससे पाकिस्तान-चीन सीमा समेत संवेदनशील और रणनीतिक इलाकों पर नजर रखने में मदद मिलेगी।
सैटेलाइट का इस्तेमाल बाढ़, चक्रवात और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी के लिए भी किया जाएगा। इससे आपदा की स्थिति का जल्दी पता लगाने और समय पर चेतावनी देने में मदद मिलेगी।
इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने बताया कि संगठन का इस साल छह और मिशन लॉन्च करने का लक्ष्य है। करीब आठ महीने बाद ISRO का यह पहला लॉन्च है। इससे पहले जनवरी 2026 और मार्च 2025 में उसके दो मिशन सफल नहीं हो पाए थे।
सैटेलाइट EOS-05 को GSLV-F17 रॉकेट से लॉन्च किया गया।
GSLV-F17 श्रीहरिकोटा के लॉन्चपैड तक ले जाया गया।
ट्रांसफर ऑर्बिट में पहुंचा EOS-05
GSLV-F17 भारत के जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल कार्यक्रम की 19वीं उड़ान थी। EOS-05 को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के सेकेंड पैड से लॉन्च किया।
EOS-05 लॉन्च के करीब 18 मिनट बाद सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में पहुंचा दिया गया। इसके बाद सैटेलाइट को 36000km पर मौजूद अपनी अंतिम कक्षा तक पहुंचना है।
जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में क्या फायदा है?
जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट पृथ्वी से करीब 35,786 किमी ऊपर की कक्षा है। इसमें सैटेलाइट पृथ्वी का एक चक्कर करीब 24 घंटे में पूरा करता है। यानी उसकी गति पृथ्वी के घूमने के साथ बनी रहती है।
वहीं, LEO (लो-अर्थ ऑर्बिट) पृथ्वी के काफी करीब होती है और आमतौर पर 2,000 किमी से कम ऊंचाई पर होती है। यहां सैटेलाइट बहुत तेजी से पृथ्वी का चक्कर लगाता है, इसलिए वह किसी एक इलाके के ऊपर थोड़े समय के लिए ही रहता है।
जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट का फायदा यह है कि सैटेलाइट भारत और आसपास के बड़े इलाके पर लगातार नजर रख सकता है। इसकी तस्वीरों और डेटा से चक्रवात, भारी बारिश, बाढ़ और जंगल की आग जैसे खतरों की पहचान, निगरानी और नुकसान का आकलन तेजी से किया जा सकेगा।
दो खास कैमरों से बड़े इलाके की निगरानी
EOS-05 में दो मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजर यानी ऐसे कैमरे लगे हैं, जो धरती की तस्वीरें अलग-अलग तरह की प्रकाश तरंगों में लेते हैं।
इससे सामान्य तस्वीर के अलावा जमीन, पेड़-पौधों, पानी और पर्यावरण में हो रहे बदलावों की जानकारी मिल सकती है। इनमें से एक इमेजर की रिजॉल्यूशन 42 मीटर प्रति पिक्सल है, यानी तस्वीर का एक पिक्सल जमीन के करीब 42×42 मीटर हिस्से की जानकारी देता है।
EOS-05 की खासियत बहुत छोटी चीजों की बारीक तस्वीर लेना नहीं, बल्कि करीब 36 हजार किमी की ऊंचाई से बड़े इलाके की बार-बार तस्वीरें लेना है।
2021 में GISAT-1 मिशन हुआ था फेल
अगस्त 2021 में इसरो ने जीएसएलवी-एफ10 से GISAT-1 लॉन्च करने की कोशिश की थी। क्रायोजेनिक स्टेज में रॉकेट को समस्या आने के बाद मिशन फेल हो गया था। इसके चलते सैटेलाइट ऑर्बिट तक नहीं पहुंच पाया।
GISAT-1 को जियोस्टेशनरी ऑर्बिट से भारतीय उपमहाद्वीप की करीब-करीब रियल टाइम इमेजिंग के लिए तैयार किया गया था।
ISRO के पिछले 2 लॉन्च फेल हुए
PSLV-C62- 12 जनवरी 2026 को यह रॉकेट रक्षा DRDO के ‘अन्वेषा’ उपग्रह और 15 अन्य उपग्रहों को ले जा रहा था, लेकिन तीसरे चरण में बेकाबू होने के कारण मिशन फेल हो गया।
PSLV-C61-18 मई 2025 को इस मिशन का उद्देश्य अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट EOS-09 को कक्षा में स्थापित करना था, लेकिन तीसरे चरण में कंबशन चैंबर प्रेशर अचानक गिरने से मिशन असफल रहा।
आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से PSLV-C62 12 जनवरी को 10.18 बजे लॉन्च हुआ था।
श्रीनगर, एजेंसी। श्रीनगर एयरपोर्ट पर इंडिगो का विमान 6E 225 (VT-NOG) पार्किंग के दौरान खंभे से टकरा गया। फ्लाइट शुक्रवार सुबह नवी मुंबई से श्रीनगर पहुंची थी। घटना करीब सुबह 9 बजे बे नंबर-6 पर विमान को पार्क करते समय हुई। विमान में सवार सभी 200 यात्री और क्रू मेंबर सुरक्षित हैं। किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।
घटना के बाद यात्रियों और क्रू को मैनुअल एयरक्राफ्ट सीढ़ियों की मदद से विमान से सुरक्षित उतारा गया। हादसे की वजह का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। फिलहाल श्रीनगर एयरपोर्ट का संचालन सामान्य है और सभी फ्लाइट्स निर्धारित समय के अनुसार चल रही हैं।
विमान जिस खंभे से टकराया, वह विजुअल डॉकिंग गाइडेंस सिस्टम (VDGS) का हिस्सा है। यह सिस्टम विमान को पार्किंग बे में सही जगह लाने और सुरक्षित तरीके से पार्क कराने में मदद करता है।
घटना से जुड़ी तस्वीरें…
खंभे से टकराने के कारण प्लेन की नोज यानी अगला हिस्सा टूट गया।
विमान की नोज यानी आगे का हिस्सा करीब एक फुट तक अंदर चला गया।
पोल से विमान के टकराने की संभावित वजहें…
विमान का अलाइनमेंट थोड़ा बिगड़ना- पार्किंग के दौरान विमान निर्धारित सेंटरलाइन से हट गया हो।
संकेत को सही तरह से फॉलो न कर पाना- VDGS के डिस्प्ले/लाइट के संकेत में भ्रम या मानवीय गलती।
पायलट की विजिबिलिटी कम होना- बारिश, धुंध, रात या किसी अन्य वजह से पोल/मार्किंग स्पष्ट न दिखना।
VDGS में तकनीकी खराबी- सिस्टम गलत दूरी या दिशा दिखा रहा हो।
विमान की गति या ब्रेकिंग में मामूली गड़बड़ी- पार्किंग में विमान को रोकते समय ब्रेक नहीं लग पाना।
VDGS विमान को पार्क करने में मदद करता है
विजुअल डॉकिंग गाइडेंस सिस्टम (VDGS) एयरपोर्ट के पार्किंग बे में लगा होता है। यह पायलट को विमान को सही सेंटरलाइन पर रखते हुए तय जगह पर रोकने में मदद करता है। डिस्प्ले के जरिए विमान की दिशा, सेंटरलाइन से उसकी स्थिति और रुकने की जगह के संकेत मिलते हैं।
आधुनिक VDGS विमान का प्रकार पहचानने के साथ यह भी बता सकता है कि पार्किंग पोजिशन तक कितनी दूरी बाकी है और विमान किस गति से आगे बढ़ रहा है। सेंसर विमान की स्थिति का पता लगाते हैं और उसी के आधार पर डिस्प्ले पर निर्देश दिए जाते हैं।
विमान के आगे का कवर रडार को सुरक्षित रखता है
विमान के सबसे आगे लगे बाहरी कवर को रेडोम कहते हैं। इसके पीछे आमतौर पर वेदर रडार होता है, जो उड़ान के दौरान बारिश, तूफान और खराब मौसम का पता लगाने में मदद करता है। रेडोम रडार को सुरक्षित रखता है, लेकिन रेडियो तरंगों को आसानी से आने-जाने देता है।
विमान की नोज और उसके आसपास पिटोट ट्यूब, एंगल ऑफ अटैक सेंसर, टेम्परेचर सेंसर और एंटीना जैसे उपकरण भी लगे होते हैं। इनमें से कई विमान की बाहरी सतह पर होते हैं।
टक्कर में रेडोम या वेदर रडार के अलावा सेंसर भी डैमेज हो सकते हैं। इससे विमान की गति, ऊंचाई या हवा से जुड़ी जानकारी प्रभावित हो सकती है। इसलिए नोज पर टक्कर के बाद विमान को उड़ाने से पहले उसकी पूरी जांच जरूरी होती है।