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दिल्ली में CRPF स्कूल के पास ब्लास्ट:फोरेंसिक एक्सपर्ट बोले- क्रूड बम जैसा मटेरियल; NIA-NSG की टीम पहुंची, गृह मंत्रालय ने रिपोर्ट मांगी

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नई दिल्ली ,एजेंसी। दिल्ली में रोहिणी सेक्टर 14 के प्रशांत विहार इलाके में रविवार सुबह करीब 7:30 बजे CRPF स्कूल के पास धमाका हुआ। इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ। लेकिन CRPF स्कूल की दीवार, आस-पास की दुकानें और कुछ कारों को नुकसान पहुंचा है।

नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) और नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) की टीम जांच के लिए पहुंची है। मामले को लेकर गृह मंत्रालय ने दिल्ली पुलिस से रिपोर्ट मांगी है।

इसके अलावा जांच के लिए बम निरोधक दस्ता, फोरेंसिक टीम, क्राइम ब्रांच और स्पेशल सेल के साथ-साथ फायर ब्रिगेड के अधिकारी भी पहुंचे है।

फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) टीम के सूत्रों के मुताबिक, शुरुआती जांच में क्रूड बम जैसा मटेरियल मिला है। हालांकि, पूरी रिपोर्ट मिलने के बाद ही आधिकारिक जानकारी मिल पाएगी।

पुलिस ने बताया कि CRPF स्कूल के पास धमाके का CCTV फुटेज भी सामने आया है। इसको लेकर भी जांच की जा रही है।

दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी ने कहा कि राजधानी में कानून-व्यवस्था भाजपा की केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है। लेकिन वह अपना 99% समय चुनी हुई सरकार के काम को रोकने में लगाती है।

पुलिस को PCR कॉल पर धमाके की जानकारी मिली

पुलिस अधिकारियों ने बताया, “रविवार सुबह 07:47 बजे, एक PCR कॉल आया। कॉलर ने बताया कि रोहिणी के सेक्टर 14 में CRPF स्कूल के पास बहुत शोर के साथ एक ब्लास्ट हुआ है। इसके बाद SHO और स्टाफ मौके पर पहुंचे। आस-पास की दुकानों के शीशे और दुकान के पास खड़ी एक कार भी क्षतिग्रस्त हुई है।”

स्थानीय लोग बोले- हमें लगा गैस सिलेंडर में ब्लास्ट हुआ है

विस्फोट की आवाज सुनकर लोग अपने घरों और दुकानों से बाहर निकल आए। घटनास्थल के करीब चश्मे की दुकान चलाने वाले सुमित ने कहा, “मेरी दुकान की खिड़की के शीशे टूट गए। मेरी दुकान के अंदर का सारा सामान जमीन पर गिर गया। यह बहुत तेज धमाका था।”

स्थानीय राकेश गुप्ता ने कहा, “सुबह करीब 7.30 बजे हमने बहुत तेज आवाज सुनी। हमें लगा कि पास में ही कोई एलपीजी सिलेंडर फट गया है। कई दुकानों के शीशे टूट गए हैं।”

सीएम आतिशी बोलीं- चरमराती सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुली

दिल्ली की सीएम आतिशी ने इस ब्लास्ट के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने X पोस्ट में लिखा- बम ब्लास्ट की घटना दिल्ली की चरमराती सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल रही है। दिल्ली में लॉ एंड ऑर्डर की जिम्मेदारी भाजपा की केंद्र सरकार के पास है। लेकिन भाजपा अपना ये काम छोड़कर सारा समय दिल्ली की चुनी हुई सरकार के कामों को रोकने में लगाती है।

उन्होंने लिखा कि यही कारण है आज दिल्ली में 1990 के दशक के मुंबई अंडरवर्ल्ड के दौर जैसा हाल हो गया है। शहर में सरेआम गोलियां चल रही है, गैंगस्टर वसूली कर रहे हैं और अपराधियों का मनोबल बढ़ा हुआ है। भाजपा के पास ना काम करने की नीयत है ना काबिलियत।

आतंकी हमले के एंगल से भी जांच

दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि आस-पास के पुलिस थानों को भी सतर्कता और जांच बढ़ाने के लिए अलर्ट जारी किया गया है। बाजारों में पैदल गश्त भी बढ़ा दी गई है। लोगों से अनुरोध है कि अगर उन्हें कोई संदिग्ध वस्तु दिखे तो वे तुरंत पुलिस को सूचित करें।

दिल्ली पुलिस की ATS घटना की जांच आतंकी एंगल से कर रही है। सीवर लाइन और सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की जा रही है। नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) को भी सूचित कर दिया गया है। वे जल्द ही घटनास्थल पर पहुंच सकते हैं।

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टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का इस्तीफा:फरवरी 2027 तक जिम्मेदारी संभालते रहेंगे, नोएल टाटा से मतभेद, ट्रस्ट में खींचतान बनी वजह

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मुंबई, एजेंसी। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने आज 12 अगस्त को इस्तीफा दे दिया है। उनका इस्तीफा 18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की एजीएम से ठीक पहले आया है। हालांकि, वे फरवरी 2027 तक पद पर बने रहेंगे।

चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल को लेकर टाटा ट्रस्ट्स के साथ सहमति नहीं बन पाई थी। नए कारोबारों में भारी निवेश, उनके प्रदर्शन और टाटा संस के भविष्य को लेकर मतभेद इस फैसले की बड़ी वजह बने।

एन चंद्रशेखरन के इस्तीफे की खबर के बाद टाटा ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में गिरावट है। टीसीएस, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील और टाटा कंज्यूमर के शेयर 3% तक नीचे हैं।

चंद्रशेखरन ने इस्तीफा देते हुए क्या कहा

चंद्रशेखरन ने कहा कि, “टाटा संस के चेयरमैन के रूप में मेरा मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को खत्म हो रहा है। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास करके मेरे अगले 5 साल के कार्यकाल के विस्तार की सिफारिश की थी।

इसे टाटा संस की नॉमिनेशन एंड रेमुनरेशन कमेटी और बोर्ड ने दर्ज किया था और आगे बढ़ाने की सिफारिश की थी। इसके बाद, यह प्रस्ताव 24 फरवरी 2026 को टाटा संस बोर्ड के सामने रखा गया था।

हालांकि, यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका क्योंकि बोर्ड के एक सदस्य ने इसका समर्थन नहीं किया। सर्वसम्मत समर्थन न मिलने की वजह से मैंने इस फैसले को टालने का विकल्प चुना। उस बोर्ड मीटिंग को हुए 6 महीने बीत चुके हैं और आज तक कोई फैसला नहीं हो पाया है।

टाटा संस एक बहुत बड़ा संस्थान है और कई बड़े रणनीतिक प्रोजेक्ट्स अभी अहम मोड़ पर हैं। फरवरी 2027 के बाद ग्रुप की अगुआई करने के लिए न सिर्फ एक लीडर का होना जरूरी है, बल्कि कर्मचारियों, निवेशकों, पार्टनर्स और बाकी स्टेकहोल्डर्स के लिए लीडरशिप को लेकर स्पष्टता होना भी बहुत जरूरी है।”

इस्तीफे की 4 बड़ी वजह

चंद्रशेखरन का कार्यकाल बढ़ाने पर मतभेद

फरवरी 2026 में टाटा संस बोर्ड ने चंद्रशेखरन के अगले 5 साल के कार्यकाल की सिफारिश की थी। बाद में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने इसका विरोध किया और सिर्फ 2 साल का कार्यकाल देने की वकालत की।

24 फरवरी 2026 को 5 साल के विस्तार का प्रस्ताव बोर्ड के सामने रखा गया। एक सदस्य के समर्थन न देने से इस पर सहमति नहीं बन सकी है।

नए कारोबारों के प्रदर्शन पर सवाल

चंद्रशेखरन के कार्यकाल में टाटा ग्रुप ने एविएशन, डिजिटल कारोबार, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और बैटरी जैसे नए क्षेत्रों में बड़े निवेश किए। इनमें से कुछ कारोबार अभी घाटे में हैं।

एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस को FY26 में कुल रू.22,238 करोड़ का घाटा हुआ, जबकि टाटा डिजिटल का घाटा रू.4,974 करोड़ रहा। इन्हीं मुद्दों पर नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन के प्रदर्शन को लेकर आपत्ति जताई थी।

टाटा संस की लिस्टिंग हो या नहीं

टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट किया जाए या निजी कंपनी ही रखा जाए, इस पर टाटा ट्रस्ट्स के अंदर अलग-अलग राय सामने आई। नोएल टाटा लिस्टिंग के पक्ष में नहीं बताए जाते हैं, जबकि कुछ ट्रस्टी लिस्टिंग की वकालत कर चुके हैं।

टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच तालमेल

टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66% हिस्सेदारी है, इसलिए दोनों के बीच बड़े फैसलों पर सहमति बेहद अहम है। नए कारोबारों की रणनीति, निवेश और चंद्रशेखरन के कार्यकाल को लेकर मतभेदों से दोनों के बीच तालमेल का सवाल भी सामने आया।

चंद्रशेखरन का 9 साल का सफर: रेवेन्यू रू.16.24 लाख करोड़ पहुंचा

चंद्रशेखरन के 2017 में कमान संभालने के बाद टाटा ग्रुप का दायरा काफी बढ़ा है। चंद्रशेखरन ने ग्रुप को एविएशन, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, बैटरी और डिजिटल बिजनेस जैसे नए क्षेत्रों में उतारा।

  • रेवेन्यू: वित्त वर्ष 2020 में ग्रुप का रेवेन्यू रू.7.89 लाख करोड़ था, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर रू.16.24 लाख करोड़ हो गया।
  • मुनाफा: ग्रुप का मुनाफा रू.32,000 करोड़ से बढ़कर रू.1.71 लाख करोड़ हो गया।
  • मार्केट कैप: लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 2020 के रू.9.31 लाख करोड़ से बढ़कर 2026 में रू.24.39 लाख करोड़ पहुंच गया।

टाटा ग्रुप, टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स में फर्क

  • टाटा ग्रुपः टाटा नाम से चलने वाली अलग-अलग कंपनियों और कारोबारों को मिलाकर टाटा ग्रुप बनता है। जैसे- टीसीएस, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा पावर और एअर इंडिया।
  • टाटा संसः टाटा संस, टाटा ग्रुप की मुख्य कंपनी है। यह ग्रुप की बड़ी कंपनियों में हिस्सेदारी रखती है और बड़े फैसलों में अहम भूमिका निभाती है।
  • टाटा ट्रस्ट्सः टाटा ट्रस्ट्स सामाजिक और परोपकारी काम करने वाले ट्रस्टों का समूह है। इसके पास टाटा संस की करीब 66% हिस्सेदारी है।

कैसे चुना जाएगा नया चैयरमैन

टाटा संस के चेयरमैन को चुनने की प्रक्रिया में पहले चयनसमिति उम्मीदवारों पर विचार करती है। इस समिति में टाटा ट्रस्ट्स की ओर से नामित सदस्य, टाटा संस बोर्ड का एक सदस्य और एक स्वतंत्र बाहरी सदस्य शामिल होते हैं।

समिति उम्मीदवार के नाम की सिफारिश टाटा संस के बोर्ड से करती है। बोर्ड उम्मीदवार की योग्यता और ग्रुप की जरूरतों को देखते हुए अंतिम नियुक्ति का फैसला करता है। अगर मौजूदा चेयरमैन को ही जारी रखना हो, तो उनके कार्यकाल के विस्तार पर भी इसी प्रक्रिया के तहत फैसला होता है।

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खुदरा महंगाई लगातार सातवें महीने बढ़ी, खाने-पीने की चीजें महंगी:जुलाई में 4.45% रही, दूसरे महीने RBI के 4% के अनुमान से ज्यादा

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मुंबई, एजेंसी। आलू-प्याज जैसे खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने से रिटेल महंगाई लगातार सातवें महीने बढ़ी है। जुलाई में यह 4.45% रही। एक महीने पहले जून में यह 4.38% पर थी। आज 12 अगस्त को रिटेल महंगाई के आंकड़े जारी किए गए हैं।

खाने-पीने के सामानों की महंगाई यानी फूड इंफ्लेशन जुलाई में बढ़कर 5.52% पर पहुंच गई है। जून में यह आंकड़ा 5.32% पर था।

RBI के 4% टारगेट से लगातार दूसरे महीने ऊपर

रिजर्व बैंक ने रिटेल महंगाई दर का लक्ष्य 4% तय किया है। यह लगातार दूसरा महीना होगा जब रिटेल महंगाई आरबीआई के तय कम्फर्ट जोन 4% से ऊपर दर्ज की गई है।

महंगाई कैसे बढ़ती-घटती है?

महंगाई का बढ़ना-घटना प्रोडक्ट की डिमांड-सप्लाई पर निर्भर करता है। अगर लोगों के पास पैसे ज्यादा होंगे तो वे ज्यादा चीजें खरीदेंगे। इससे चीजों की डिमांड बढ़ेगी और सप्लाई नहीं होने पर इनकी कीमत बढ़ेगी। वहीं अगर डिमांड कम होगी और सप्लाई ज्यादा तो महंगाई कम होगी।

4.45% महंगाई दर का क्या मतलब है?

1. तुलना पिछले साल से होती है (साल-दर-साल)

जब हम कहते हैं कि जूलाई 2026 में महंगाई 4.45% है, तो इसका मतलब है कि हम इसकी तुलना जुलाई 2025 से कर रहे हैं। यह पूरे एक साल का बदलाव है। 4.45% एक औसत नंबर है जिसे ‘कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स’ कहते हैं। इसमें आपके जीवन की सैकड़ों चीजें शामिल हैं:

  • किसी चीज के दाम बहुत ज्यादा बढ़े होंगे।
  • किसी चीज के दाम घटे भी होंगे।
  • जब इन सबको एक साथ मिलाया गया, तो औसतन खर्च 4.45% बढ़ गया।

2. रू.100 की चीज अब रू.104.45 की हो गई

इसका गणित बहुत सीधा है। अगर जुलाई 2025 में आपने कोई सामान जैसे राशन रू.100 में खरीदा था, तो वही सामान जुलाई 2026 में रू.104.45 का हो गया है।

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शाह बोले- स्पीकर चर्चा के लिए घंटे तय करें:मैं सदन में रहूंगा, ओम बिरला को लेटर लिखा, राहुल बोले- हमें लेक्चर नहीं सुनना

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नई दिल्ली, एजेंसी। गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को लेटर लिखा। उन्होंने नीट पेपर लीक पर छात्रों के प्रदर्शन के मुद्दे पर चर्चा के लिए समय तय करने की मांग की।

शाह ने लेटर में लिखा, ‘मेरा अनुरोध है कि स्पीकर विपक्ष से चर्चा करें और आपसी सहमति के आधार पर आज से इस मुद्दे पर चर्चा के लिए जितना समय, दिन या घंटे उचित समझें, निर्धारित करें।

मैं तय समय के दौरान सदन में मौजूद रहूंगा और इस मुद्दे पर चर्चा में हिस्सा लेने के लिए तैयार हूं। विपक्ष की ओर से उठाए गए सभी सवालों का जवाब देने के लिए भी मैं तैयार हूं।”

इससे पहले दिन में सदन के बाहर शाह ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा को तैयार है, लेकिन विपक्ष सदन को चलने दे।

इस पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा, ‘हमें उनका लेक्चर नहीं सुनना है। पहले ये बताएं कि जंतर-मंतर पर छात्रों पर गोलियां किसने चलवाईं। उन्होंने आदेश नहीं दिया तो वे इस्तीफा दें।’

इस बीच सरकार ने FCRA संशोधन बिल, 2026 को जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी यानी JPC के पास भेजने का प्रस्ताव लोकसभा में रखा, जिसे मंजूरी मिल गई। समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य होंगे।

राहुल बोले- शाह सदन में क्यों नहीं आए

राहुल ने कहा- स्टूडेंट्स को गोली किसने मारी? स्टूडेंट्स को कीलों वाली लाठियों से पीटने का ऑर्डर किसने दिया? क्या अमित शाह ने हमारे बच्चों को गोली मारने का ऑर्डर दिया था? अगर उन्होंने दिया है, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।

राहुल ने आगे कहा- शाह घर के सामने हजार पुलिस वाले खड़े होते हैं। 30 गाड़ियां उनके आगे पीछे होती हैं कि कहीं कोई बच्चा न आ जाए। पिछले 20 दिनों से अमित शाह गायब हैं। गृह मंत्री में हिम्मत नहीं है। वह सदन में नहीं आ सकते।

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