रायपुर,एजेंसी। पुणे में हाल ही में नेशनल डिफेंस एकेडमी की पासिंग आउट परेड हुई। इस सैन्य इंस्टीट्यूट में सीना ताने छत्तीसगढ़ के देवेंद्र साहू भी मार्च पास्ट कर रहे थे। पासिंग आउट परेड पुणे के खड़गवासला स्थित NDA परिसर में हुई।
रिटायर्ड सेना प्रमुख जनरल वी के सिंह ने परेड की सलामी ली। उन्होंने कैडेट्स को प्रेसिडेंट्स अवॉर्ड दिए। इसी के साथ भिलाई के देवेंद्र अब भारतीय नौ सेना में लेफ्टिनेंट बन चुके हैं।
देवेंद्र साहू अब भारतीय नौसेना में लेफ्टिनेंट हैं।
5 से 6 घंटे पढ़कर की तैयारी
देवेंद्र ने बताया- 10वीं के बाद मैंने सोच लिया था कि NDA में जाना है। मैंने स्कूल में टॉप किया था, बाकी के साथी जेईई या नीट करने में लगे थे। मैंने पता किया और NDA की जानकारी ली। ऐसा लगा कि मुझे ऑफिस वर्क वाली जिंदगी नहीं चाहिए थी। जो लाइफ स्टाइल फौज देती है वो पंसद आई, तो तैयारी शुरू की।
सीनियर्स ने गाइड किया एनडीए में कि कौन सी सेना को चुना जाए तो नेवी का वर्क कल्चर देखते हुए नेवी को ही अपने विकल्प में चुना। पांच से छ: घंटे की पढ़ाई की। पहले ही अटेंप्ट में कामयाबी मिली।
पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने पासिंग आउट परेड की सलामी ली।
इंग्लिश कमजोर थी तो मिरर के सामने प्रैक्टिस की
देवेंद्र ने बताया- मेरी स्कूलिंग रिसाली भिलाई CBSE स्कूल से हुई। फौज में सारे काम अंग्रेजी में ही होते हैं, सीनियर्स के साथ अंग्रेजी में बात करना होता है, वो फौज की प्रिफर्ड भाषा है। मेरी इंग्लिश स्ट्रॉन्ग नहीं थी, ग्रामर की गलती करता था। तो इसके लिए मैं अंग्रेजी के अखबार पढ़ता था, मिरर के सामने अंग्रेजी की बुक पढ़ता था।
फेस के एक्सप्रेशन देखता था, किन शब्दों में कैसे बात कर रहा हूं, पता चलता था। मिरर के सामने 15 से 20 मिनट प्रैक्टिस करता था। फोन में अपनी बात रिकॉर्ड करता था, बाद में देखता था तो मिस्टेक पता चलती है। ऐसे मुझे पता चला तो ठीक किया खुद को।
NDA की इसी मेस में सभी कैडेट साथ खाते हैं खाना।
टेबल एटिकेट सीखे
देवेंद्र ने बताया- ऑफिसर के जैसी क्वॉलिटी हमारे अंदर डेवलप की जाती है, वहां नाइफ फोक से खाने का कल्चर है। हमारे घर पर नहीं है। जो खाना है उसे वैसे ही पूरी तहजीब से खाना है। नॉनवेज वेज सब। हमें सीनियर अलॉट होते हैं, वो हमें मेंटॉर करते हैं।
खाने की टेबल पर सीनियर की परमिशन लेकर बैठा जाता है, डायरेक्ट नहीं बैठ सकते। उठते समय भी ऐसा ही करना है। मुझे पता नहीं था हम जाकर बैठ गए, फिर पता चला कि परमिशन लेनी होती है। फोक स्पून से खाना सिखाया गया। वहां मुंह खोलकर नहीं खाना है, क्रॉस टेबल बातें नहीं कर सकते। NDA के बारे में नॉलेज होना जरूरी होती है, पूछने पर बताना होता है वर्ना कई गिलास पानी पीना पड़ता है।
वायुसेना प्रमुख एयरचीफ मार्शल एपी सिंह से मिल चुके हैं देवेंद्र।
एयरचीफ से मिली इंस्पिरेशन
देवेंद्र ने वर्तमान वायुसेना प्रमुख से मुलाकात के बारे में बताया- एयरफोर्स के चीफ एयर मार्शल अमर प्रीत सिंह भी NDA से पास आउट हैं। वो हमसे मिलने आए थे, उन्होंने मोटिवेट किया, उन्होंने मुझे एयरफोर्स का कॉइन दिया था, मैंने संभालकर रखा है।
उन्होंने एक बात कही कि वर्क लाइफ और पर्सनल लाइफ को बैलेंस बनाकर रखना है। उन्होंने बताया कि 24 घंटे सीरियस मत रहिए और हमेशा पार्टी मूड में भी नहीं रहना है। बैलेंस बनाकर काम करना होगा। कठिनाई में हंसकर काम करना होता है, हंसते-हंसते बड़े से बड़ा काम किया जा सकता है। अच्छे मन से किया काम जल्दी पूरा होता है।
रायपुर की संस्था में देवेंद्र और उनके माता-पिता को सम्मानित किया गया।
इंटरव्यू में पूछा गया यूक्रेन वॉर का सवाल
देवेंद्र ने बताया- SSB के समय 128 लोग आए थे। मैं प्रेशर में था कि मेरा पहला अटेंप्ट था और सब के सब एक्सपीरियंस वाले थे। प्रेशर लग रहा था, न्यू कमर होने का। शायद मैं पीछे रह जाउंगा। इंटरव्यू अच्छा गया था।
मुझसे यूक्रेन-रशिया वॉर को लेकर पूछा कि मैं किसकी तरफ हूं, मैंने कहा था कि मैं दोनों को सपोर्ट नहीं करता, बार-बार मुझसे कहा गया कि डिप्लोमेटिक आंसर नहीं दे सकते, मैंने अपनी बात पर टिका रहा कि इंडिया जिसे सपोर्ट करेगा मैं उसके साथ हूं।
35 किलोमीटर की रनिंग और तैरना मुश्किल था
फिजिकल ट्रेनिंग को लेकर देवेंद्र ने बताया- ट्रेनिंग के समय अलग-अलग तरह की रन होती है। 30 से 35 किलोमीटर भागकर जाना हाेता है, वो भी दिए गए टास्क को पूरा करते हुए। हमें एक ग्रुप में बांटा जाता है, पूरा ग्रुप कम से कम समय में टास्क को पूरा करे ये देखना होता है।
ऐसा नहीं चलेगा कि कोई एक 35 किलोमीटर तेज भाग जाए, सबको एक साथ पूरा करना है कोई भी पीछे रह गया तो पूरी टीक को नेगेटिव मार्किंग मिलेगी। रायफल और पानी लेकर, करीब 20 से 25 किलो का वेट लेकर दौड़ना होता है। पुणे में खड़गवासला लेक है, उसमें स्विम करना होता है, जब मैं यहां से गया तो उतनी अच्छी तैराकी नहीं आती थी। वहीं सीखी है मैंने, अब तो तैर लेता हूं।
जानिए कैसे ज्वाइन करें NDA
डिफेंस एजुकेशन एक्सपर्ट इंडियन नेवी से रिटायर RK साहू ने बताया- NDA एक ऑफिसर एंट्री होती है। 11th पास बच्चे कोई भी विषय वाले (गणित, विज्ञान, कला, वाणिज्य) जिनकी आयु 16.5 से 18.5 होती है, वो इस एग्जाम को दे सकते हैं। NDA का एग्जाम UPSC द्वारा लिया जाता है।
NDA मे पहले रिटन एग्जाम होता है, फिर 5 दिन का SSB होता है। इसमें मेंटल लेवल पर एग्जाम होता है, फिर मेडिकल टेस्ट होता है। उसके बाद मेरिट लिस्ट बनती है। मेरिट मे नाम आने के बाद सिलेक्शन होता है और फिर ट्रेनिंग के लिए बुलाया जाता है। इस ट्रेनिंग के बाद सेना में अफसर के पद पर ज्वाइनिंग मिलती है।
माय भारत युवा कार्यक्रम“ अंतर्गत ”नशामुक्त भारत अभियान -2026“ जिला स्तरीय सांस्कृतिक प्रतियोगिता- ”युवा की उड़ान – नशा मुक्त भारत का निर्माण“ थीम पर सफलतापूर्वक हुई संपन्न
कोरबा। युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कोरबा जिले में कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन में ”माय भारत युवा कार्यक्रम“ का प्रभावी संचालन किया जा रहा हैं।
इस कड़ी में ”माय भारत युवा कार्यक्रम“ के अंतर्गत 27 जुलाई को नशामुक्त भारत अभियान-2026 ”युवा की उड़ान, नशा मुक्त भारत का निर्माण“ थीम पर जिला स्तरीय सांस्कृतिक प्रतियोगिता श्री अग्रसेन कन्या महाविद्यालय कोरबा में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। कार्यक्रम के समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आशुतोष पाण्डेय (आईएएस) आयुक्त नगर पालिक निगम कोरबा उपस्थित थे। इस अवसर पर नगर निगम आयुक्त आशुतोष पाण्डेय ने सभी प्रतिभागियों एवं युवाओं का उत्साहवर्धन करते हुए ”युवा शक्ति“ का महत्व बताया तथा युवाओं की ऊर्जा को देश और राष्ट्र के विकास में लगाते हुए स्वयं का भविष्य संवर्धन करने के लिए प्रेरित किए। उन्होंने युवाओं की ऊर्जा को राष्ट्र के उन्नति के लिए सर्वोपरि बताया।
जिला स्तरीय सांस्कृतिक प्रतियोगिता के समापन सत्र में युवाओं को सम्बोधित करते हुए ”माय भारत युवा कार्यक्रम“ के जिला नोडल अधिकारी सतीश प्रकाश सिंह ने जिले में संचालित किए जा रहे ”माय भारत युवा कार्यक्रम“ के राष्ट्रीय महत्व तथा उद्देश्यों के बारें में विस्तार से बताया। जिला नोडल अधिकारी श्री सिंह ने कहा कि जिले के शहरी- ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं एवं छात्र-छात्राओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं हैं, युवाओं के अंदर छिपी हुई प्रतिभा को एक नया आयाम देने के लिए उन्हें ”माय भारत युवा कार्यक्रम“ का सशक्त प्लेटफार्म प्रदान किया जा रहा हैं। जहां युवा, छात्र-छात्राएं नशे के दुष्परिणाम को समझ कर, नशे से दूर रहकर ”नशा मुक्त भारत“ के नव निर्माण के लिए अपनी सकारात्मक ऊर्जा को लगा रहें हैं। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित प्रतीक चतुर्वेदी नगर पुलिस अधीक्षक कोरबा ने युवाओं को नशे से दूर रहकर अपने कैरियर को संवारने के लिए प्रेरित किये। उन्होंने ”माय भारत युवा कार्यक्रम“ की सराहना करते हुए पुलिस का पूर्ण सहयोग देने की बात कहीं। इससे पूर्व कार्यक्रम के प्रारम्भ में अतिथियों के द्वारा माँ सरस्वती के तैल चित्र पर माल्यार्पण कर एवं दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की गई। इस अवसर पर अग्रसेन कन्या महाविद्यालय की छात्राओं के द्वारा सरस्वती वंदना, स्वागत गीत की आकर्षक प्रस्तुति दी गई। उद्घाटन सत्र में जिला नोडल अधिकारी सतीश प्रकाश सिंह के द्वारा उपस्थित सभी प्रतिभागी छात्र-छात्राओं एवं युवाओं को नशामुक्त भारत के निर्माण के लिए ”नशामुक्त प्रतिज्ञा“ दिलाई गई। इस अवसर पर जिला युवा अधिकारी सुश्री ईशा गौतम ने सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए माय भारत युवा कार्यक्रम से जुड़ने के लिए कहा। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में बजरंग अग्रवाल अध्यक्ष अग्रवाल सभा कोरबा, गोपाल अग्रवाल अध्यक्ष शिक्षण समिति श्रीअग्रसेन कन्या महाविद्यालय कोरबा, दीपक अग्रवाल सचिव शिक्षण समिति श्रीअग्रसेन कन्या महाविद्यालय कोरबा,श्री छेदीलाल अग्रवाल पूर्व अध्यक्ष शिक्षण समिति श्रीअग्रसेन कन्या महाविद्यालय कोरबा, विक्रम अग्रवाल अध्यक्ष शिक्षण समिति श्रीअग्रसेन विद्यालय कोरबा, डॉ मनोज कुमार झा प्राचार्य श्रीअग्रसेन कन्या महाविद्यालय कोरबा उपस्थित थे। जिला स्तरीय सांस्कृतिक प्रतियोगिता के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि एवं अन्य अतिथियों के द्वारा सभी विधाओं में प्रतिभागियों तथा विजेता रहें छात्र-छात्राओं, युवाओं को प्रमाणपत्र एवं मोमेंटो भेंट कर पुरुस्कृत किया गया। इस अवसर पर जिला नोडल अधिकारी सतीश प्रकाश सिंह एवं जिला युवा अधिकारी सुश्री ईशा गौतम ने सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट करके सम्मानित किया। जिला स्तरीय प्रतियोगिता के सभी विधाओं में चयनित हुए प्रतिभागी राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में कोरबा जिले का प्रतिनिधित्व करेंगे। समापन सत्र में उमंग दिव्यांग विद्यालय कोरबा के बच्चों के द्वारा सुमधुर गीतों की प्रस्तुति दी गई। मंच संचालन डॉ. रुचिका कल्ला सहायक प्राध्यापक श्रीअग्रसेन कन्या महाविद्यालय के द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. बी.एल.साय प्राध्यापक ई.व्ही.पी.जी.कॉलेज कोरबा ने आभार प्रदर्शन किया। जिला स्तरीय प्रतियोगिता के समापन कार्यक्रम में डॉ. अर्चना दीवान सहायक प्राध्यापक शासकीय प्यारे लाल कंवर महाविद्यालय भैसमा,डॉ. मधु कंवर सहायक प्राध्यापक, डॉ. अजय पटेल सहायक प्राध्यापक ई.व्ही.पी.जी. कॉलेज कोरबा, डॉ.किरण बाजपेई सहायक प्राध्यापक, डॉ. शकुंतला जायसवाल सहायक प्राध्यापक श्रीअग्रसेन कन्या महाविद्यालय, डॉ.वर्षा सिंह तंवर सहायक प्राध्यापक मिनी माता कन्या महाविद्यालय, सहायक प्राध्यापक डॉ रश्मि शुक्ला कमला नेहरू महाविद्यालय कोरबा, डॉ. कार्तिकेश्वर दुबे सहायक प्राध्यापक शासकीय ग्राम्य भारती महाविद्यालय हरदीबाजार सहित अन्य महाविद्यालयों, विद्यालयों से आये हुए सहायक प्राध्यापकगण,प्रभारी शिक्षकगण, युवा छात्र-छात्राएं, ”माय भारत यूथ वालेंटिययर्स“, समाजसेवीजन एवं नागरिकगण उपस्थित थे।
कोरबा। न्याय को सरल एवं सुलभ तरीके से घर-घर तक पहंचाने तथा आपसी सहभाविता और सहमति से न्याय की भावना को मूर्त रूप देने के लिए भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा समाधान समारोह 2026 का आयोजन 21 अप्रैल 2026 से शुरू किया गया है जिसकी परिणति 21, 22 तथा 23 अगस्त 2026 को विशेष लोक अदालत के आयोजन के साथ होगी। जिसमें सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मामले शामिल किया जायेगा। विशेष लोक अदालत पूर्व सुलह बैठकों का आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं तालुका विधिक सेवा समिति स्थित मध्यस्थता केन्द्र में किया जा रहा है इस सुलह वार्ता का आयोजन 21 अप्रैल 2026 को समाधान समारोह के आरम्भ के साथ शुरू किया गया है। इस समाधान समारोह (विशेष लोक अदालत) के आयोजन का उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय में लंबित उपयुक्त मामलों का सुलह एवं आपसी सहमति से निष्पादन करना है। जिसमें अधिक से अधिक संख्या में संबंधित पक्षकारों/अधिवक्तागणों को सम्मिलित होने हेतु आमंत्रित कर समाधान समारोह में आपसी सहमति एवं वार्ता से समाधान तलाशने का प्रयास किया जा रहा है। इन सुलह-बैठकों का आयोजन प्रधान जिला न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोरबा के निर्देशन में गठित न्यायाधीशों की कमेटी (प्रशिक्षित मध्यस्थ) द्वारा पक्षकारों को सुलह-प्रयास हेतु बैठकों/वार्ताओं में व्यक्तिगत रूप से अथवा विडियों कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से शामिल कर आपसी सुलह/वार्ता से प्रयास किया जा रहा है। श्रीमती गरिमा शर्मा, प्रथम जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश कोरबा, श्रीमती ममता भोजवानी, द्वितीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश कोरबा व सुनिल कुमार नन्दे, तृतीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश कोरबा द्वारा प्रकरणों में 27 जुलाई को प्री-सिटिंग/री-सिटिंग हेतु भौतिक रूप से एवं विडियों कॉन्फ्रेसिंग से उपस्थित पक्षकारों के साथ आपसी सुलह-वार्ता का प्रयास किया गया है तथा सुलह हेतु पक्षकार को सुझाव दिया गया है जिससे आपसी सहमति के आधार पर प्रकरणों का निराकरण राजीनामा के आधार पर सुनिश्चित किया जा सकें।
रिहायशी क्षेत्रों से हाथियों को दूर रखने वन विभाग की टीमें रहें सतर्क: कलेक्टर
मुआवजा प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिए ऑनलाइन सॉफ्टवेयर विकसित करने के दिए निर्देश
कोरबा। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी कुणाल दुदावत की अध्यक्षता में आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में मानव-हाथी द्वंद्व की रोकथाम, हाथी प्रभावित परिवारों के मुआवजा प्रकरणों के त्वरित निराकरण तथा हाथियों की सुरक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर जिला स्तरीय समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में वन, विद्युत, राजस्व, पुलिस एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ मानव-हाथी द्वंद्व की वर्तमान स्थिति की विस्तृत समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने वन विभाग की हाथी निगरानी टीमों को पूरी सतर्कता एवं मुस्तैदी के साथ कार्य करने के निर्देश देते हुए कहा कि हाथियों को हरसंभव प्रयास कर रिहायशी क्षेत्रों से दूर रखा जाए, ताकि जनहानि एवं अन्य दुर्घटनाओं की संभावना न्यूनतम रहे। उन्होंने कहा कि हाथी प्रभावित गांवों में समय पर सूचना पहुंचाना तथा ग्रामीणों को सतर्क रखना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। भीड़ नियंत्रण की स्थिति में पुलिस एवं वन विभाग को आपसी समन्वय के साथ तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में हाथियों से हुई जनहानि, फसल क्षति, मकान एवं अन्य संपत्ति नुकसान से संबंधित मुआवजा प्रकरणों की समीक्षा की गई। कलेक्टर ने मुआवजा वितरण में किसी भी प्रकार का विलंब नहीं होने देने के निर्देश देते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, सरल एवं समयबद्ध बनाने के लिए विशेष ऑनलाइन सॉफ्टवेयर विकसित किया जाए। इसके माध्यम से प्रकरणों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग, लंबित मामलों की समीक्षा तथा भुगतान की प्रगति पर प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जा सकेगी। कलेक्टर ने हाथी विचरण क्षेत्रों से गुजरने वाली 11 केवी विद्युत लाइनों के लो-हैंगिंग प्वाइंट्स का तत्काल सर्वे कर उन्हें मानक ऊंचाई तक सुधारने के निर्देश विद्युत विभाग को दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विद्युत तारों के संपर्क में आने से किसी भी हाथी की मृत्यु नहीं होनी चाहिए। वन एवं विद्युत विभाग को संयुक्त निरीक्षण कर झूलते तारों, क्षतिग्रस्त विद्युत खंभों तथा कम ऊंचाई वाली विद्युत लाइनों में शीघ्र सुधार करने के निर्देश दिए गए। साथ ही अवैध विद्युत हुकिंग तथा खेतों में करंटयुक्त तार लगाने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने को कहा गया। बैठक में हाथी प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीण परिवारों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत पात्र परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर अधिक से अधिक पक्के आवास स्वीकृत करने के निर्देश दिए गए। संबंधित विभागों को ऐसे परिवारों का सर्वेक्षण कर शीघ्र प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया। कलेक्टर श्री दुदावत ने भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) द्वारा चिन्हित हाथी गलियारों में हाथियों के सुरक्षित एवं निर्बाध आवागमन को बनाए रखने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि चिन्हित एलीफेंट कॉरिडोर में किसी भी विकास अथवा निर्माण कार्य से पूर्व वन विभाग से आवश्यक अनुमति एवं अभिमत प्राप्त किया जाए तथा विकास योजनाओं में हाथियों के पारंपरिक आवागमन मार्गों को किसी भी प्रकार से बाधित न किया जाए। उन्होंने लेमरू हाथी रिजर्व क्षेत्र तथा राष्ट्रीय राजमार्गों के चौड़ीकरण के दौरान भी हाथियों के सुरक्षित आवागमन का विशेष ध्यान रखने को कहा। कलेक्टर ने हाथी प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय ग्रामीणों की आजीविका सुदृढ़ करने के लिए लघु वनोपज आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लघु वनोपज के संग्रहण, प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएं, जिससे ग्रामीणों की आय में वृद्धि हो तथा वन क्षेत्रों पर अनावश्यक दबाव कम हो। साथ ही वनांचल क्षेत्रों में अवैध महुआ लाहान एवं महुआ शराब के निर्माण तथा भंडारण के विरुद्ध लगातार प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए। बैठक में हाथियों के लिए पेयजल एवं प्राकृतिक खाद्य स्रोतों की उपलब्धता बढ़ाने, हाथी विचरण क्षेत्रों में हाईमास्ट एवं सोलर लाइट लगाने, जीपीएस तकनीक से हाथियों की लोकेशन ट्रैक करने, मोबाइल अलर्ट, दीवार लेखन, सूचना संकेतक, सीसीटीवी एवं थर्मल ड्रोन से निगरानी, श्गज संकेतश् एवं श्सजगश् एप के माध्यम से सूचना प्रसारित करने तथा प्रभावित ग्रामीणों को स्वरोजगार से जोड़ने जैसे नवाचारों की भी जानकारी दी गई। कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया कि प्रत्येक शनिवार चयनित विद्यालयों के विद्यार्थियों का वन विभाग के जागरूकता केंद्रों में भ्रमण कराया जाए, ताकि उन्हें हाथियों के व्यवहार, उनसे बचाव, वन संरक्षण, पौधारोपण, मृदा संरक्षण एवं वन अग्नि से बचाव संबंधी व्यवहारिक जानकारी दी जा सके। बैठक में वनमण्डलाधिकारी कटघोरा कुमार निशांत ने मानव-हाथी द्वंद्व की वर्तमान स्थिति, हाथियों के विचरण क्षेत्र, मुआवजा प्रकरणों की प्रगति तथा विभाग द्वारा किए जा रहे रोकथाम एवं जनजागरूकता कार्यों की जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि हाथी प्रभावित प्रकरणों के मुआवजा वितरण के लिए राशि की कोई कमी नहीं है तथा आवश्यक प्रतिवेदन प्राप्त होते ही प्रकरणों का शीघ्र निराकरण किया जा रहा है। बैठक में वनमण्डलाधिकारी कोरबा श्रीमती प्रेमलता यादव, नगर पालिक निगम कोरबा के आयुक्त आशुतोष पांडेय, जिले के सभी अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), विद्युत, कृषि, उद्यानिकी, पुलिस तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।