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उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा मंजूर:संसद भी नहीं पहुंचे, विदाई समारोह में शामिल नहीं होंगे, विपक्ष बोला- वजह स्वास्थ्य नहीं, कुछ और

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नई दिल्ली,एजेंसी। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंजूर कर लिया। राज्यसभा में पीठासीन घनश्याम तिवाड़ी ने यह जानकारी दी। दूसरी तरफ, राज्यसभा के उपसभापति और JDU सांसद हरिवंश ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की।

हरिवंश ने ही आज सुबह 11 बजे जगदीप धनखड़ की जगह, राज्यसभा की कार्यवाही शुरू की थी। धनखड़ आज सदन की कार्यवाही में भी शामिल नहीं हुए थे। इससे पहले खबर आई थी कि धनखड़ विदाई समारोह में भी शामिल नहीं होंगे। PM नरेंद्र मोदी ने कहा कि मैं धनखड़ के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता हूं।

राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की।

राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की।

जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई की रात अचानक देश के 14वें उपराष्ट्रपति के पद से इस्तीफा दे दिया था। 74 साल के धनखड़ का कार्यकाल 10 अगस्त 2027 तक था। उन्होंने 10 जुलाई को एक कार्यक्रम में कहा था, ‘ईश्वर की कृपा रही तो अगस्त, 2027 में रिटायर हो जाऊंगा।’

उपराष्ट्रपति के इस्तीफे की 2 थ्योरी पहली: राष्ट्रपति को लिखे त्यागपत्र में धनखड़ ने पद छोड़ने की वजह स्वास्थ्य बताया था। दूसरी: विपक्ष इस्तीफे पर सवाल कर रहा है। कह रहा है कि इसकी वजह कुछ और है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मंगलवार को बताया, ’21 जुलाई को दोपहर 12:30 बजे श्री जगदीप धनखड़ ने राज्यसभा की कार्य मंत्रणा समिति (BAC) की अध्यक्षता की। इस बैठक में सदन के नेता जेपी नड्डा और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू समेत ज़्यादातर सदस्य मौजूद थे। थोड़ी देर की चर्चा के बाद तय हुआ कि समिति की अगली बैठक शाम 4:30 बजे फिर से होगी।

शाम 4:30 बजे धनखड़ जी की अध्यक्षता में समिति के सदस्य दोबारा बैठक के लिए इकट्ठा हुए। सभी नड्डा और रिजिजू का इंतज़ार करते रहे, लेकिन वे नहीं आए। सबसे हैरानी की बात यह थी कि धनखड़ जी को व्यक्तिगत रूप से यह नहीं बताया गया कि दोनों मंत्री बैठक में नहीं आएंगे। स्वाभाविक रूप से उन्हें इस बात का बुरा लगा और उन्होंने BAC की अगली बैठक आज दोपहर 1 बजे के लिए टाल दी।

इससे साफ है कि कल दोपहर 1 बजे से लेकर शाम 4:30 बजे के बीच जरूर कुछ गंभीर बात हुई है, जिसकी वजह से जेपी नड्डा और किरेन रिजिजू ने जानबूझकर शाम की बैठक में हिस्सा नहीं लिया।

अब एक बेहद चौंकाने वाला कदम उठाते हुए, श्री जगदीप धनखड़ ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने इसकी वजह अपनी सेहत को बताया है। हमें इसका मान रखना चाहिए। लेकिन सच्चाई यह भी है कि इसके पीछे कुछ और गहरे कारण हैं। श्री जगदीप धनखड़ का इस्तीफा उनके बारे में बहुत कुछ कहता है। साथ ही, यह उन लोगों की नीयत पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है, जिन्होंने उन्हें उपराष्ट्रपति पद तक पहुंचाया था।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश और अजय माकन सोमवार को संसद परिसर में।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश और अजय माकन सोमवार को संसद परिसर में।

विपक्ष के अन्य नेताओं के बयान

  • सांसद जेबी माथेर, कांग्रेस ‘यह वास्तव में बहुत चौंकाने वाला है। उपराष्ट्रपति ने आज सुबह (21 जुलाई) भी राज्यसभा सत्र की अध्यक्षता की। यह एक बहुत ही अप्रत्याशित घटनाक्रम है। अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं और प्रत्येक मुद्दे को देखने के हमारे नजरिए के कारण हमारे बीच मतभेद हो सकते हैं। वे जल्द स्वस्थ हों।’
  • दानिश अली, कांग्रेस ‘रहस्यमयी चीजें हो रही हैं, जो देश के हित में नहीं हैं। धनखड़ के इस्तीफे का कारण स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं नहीं लगतीं। सुनने में आया था कि भाजपा के कुछ टॉप लीडर्स उनके पद की गरिमा के मुताबिक बयान नहीं दे रहे थे। ऐसा लगता है कि जस्टिस यादव और जस्टिस वर्मा को लेकर सरकार से उनके मतभेद थे। उन्होंने कई बार कहा है कि वह कभी किसी के दबाव में नहीं आएंगे।’
  • सुखदेव भगत, कांग्रेस ‘ईश्वर जगदीप धनखड़ को स्वस्थ जीवन प्रदान करे, लेकिन राजनीति में कुछ भी अचानक नहीं होता। पटकथा पहले से ही लिखी जाती है। बिहार चुनाव नजदीक हैं। यह एक पहलू हो सकता है। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की इच्छा के मुताबिक बहुत सी अप्रत्याशित चीजें होती हैं।’
  • देश के पहले उपराष्ट्रपति जिनके खिलाफ महाभियोग लाया गया था
  • देश में 72 साल के संसदीय लोकतंत्र के इतिहास में धनखड़ पहले ऐसे राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति रहे, जिनके खिलाफ दिसंबर 2024 में महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था। जो बाद में तकनीकी कारणों से खारिज हो गया था।
  • विपक्ष धनखड़ पर पक्षपात का आरोप लगाता रहा है। विपक्ष का दावा था कि वह सिर्फ विपक्ष की आवाज व उनके सांसदों द्वारा उठाए गए सवालों को दबाते हैं।
  • धनखड़ के पिछले कार्यकाल को देखें तो कई अहम पदों पर रहे, लेकिन वे अपना कार्यकाल पूरा होते नहीं देख पाए। एक बार विधायक के तौर पर उनके पांच साल एकमात्र अपवाद है।
  • उपराष्ट्रपति रहते धनखड़ के चर्चित बयान
  • ममता बनर्जी पर: 2022 में कहा था- ममता सरकार एक खास वर्ग को ही मदद देती है, जबकि संविधान सबके साथ समान व्यवहार की बात करता है। जनवरी 2022 में बंगाल को लोकतंत्र का गैस चैंबर बताया था।
  • कोर्ट पर: संविधान का ‘अनुच्छेद 142’ ऐसा परमाणु मिसाइल बन गया है जो लोकतांत्रिक ताकतों के खिलाफ न्यायपालिका के पास 24 घंटे मौजूद रहता है।
  • जज के घर कैश मिलने पर पर: अब समय आ गया है कि ‘कीड़ों से भरे डब्बे’ और ‘कंकालों से भरी अलमारी’ को सार्वजनिक किया जाए।
  • ट्रम्प के दावे पर: दुनिया में ऐसी कोई ताकत नहीं है जो भारत को यह निर्देश दे सके कि उसे अपने मामलों को कैसे संभालना है।
  • धर्मांतरण पर: देश में शुगर-कोटेड फिलॉसफी बेची जा रही है। सनातन विष नहीं फैलाता, सनातन स्व शक्तियों का संचार करता है।
  • संविधान पर: किसी भी संविधान की प्रस्तावना उसकी आत्मा होती है। भारत के अलावा दुनिया के किसी भी देश की संविधान की प्रस्तावना में बदलाव नहीं हुआ। लेकिन भारत की प्रस्तावना को 1976 में 42वें संविधान संशोधन अधिनियम के तहत बदल दिया गया, उसमें ‘समाजवादी’, ‘धर्मनिरपेक्ष’ और ‘अखंडता’ जैसे शब्द जोड़ दिए गए। ये जोड़े गए शब्द नासूर हैं। ये उथल-पुथल पैदा करेंगे।
  • कोचिंग सेंटर्स पर: कोचिंग सेंटर अब पोचिंग सेंटर बन चुके हैं। देशभर में अनियंत्रित रूप से फैल रहे हैं, जो युवाओं के लिए गंभीर संकट बनते जा रहे हैं। इस बुराई से निपटना ही होगा। हम अपनी शिक्षा को इस तरह कलंकित व दूषित नहीं होने दे सकते।
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कोरबा

नम: सामूहिक विवाह का दिव्य आयोजन:108 दिव्यांग/निर्धन जोड़ों को मिला पंडित धीरेंद्र शास्त्री का सानिध्य एवं राज्यपाल रमेन डेका सहित लाखों हाथों का शुभ आशीर्वाद

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शुभता का संदेश:नवदम्पत्तियों का जीवन सुख-समृद्ध एवं खुशहाल बने-नमन पाण्डेय

कोरबा/ढपढप। अपना आश्रम सेवा समिति के आयोजकत्व में माँ सर्वमंगला देवी मंदिर दुरपा प्रबंधन की पहल पर 108 दिव्यांग एवं निर्धन कन्याएं ढपढप की पावन धरती में परिणय सूत्र में आबद्ध हुए। नवदाम्पत्य जीवन में प्रवेश करने पर अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का जहां सानिध्य मिला, वहीं छत्तीसगढ़ के महामहिम राज्यपाल रमेन डेका सहित लाखों हाथों का शुभ आशीर्वाद मिला। माँ सर्वमंगला देवी मंदिर के प्रबंधक, पुजारी एवं राजपुरोहित पंडित नमन पाण्डेय (नन्हा महराज) ने शुभता का संदेश दिया और कहा कि नवयुगल नवदाम्पत्य जीवन में सुख-समृद्धि एवं खुशहाल जीवन को प्राप्त करें। श्री पाण्डेय ने कहा कि मातारानी के आशीर्वाद से हमें यह सौभाग्य प्राप्त हुआ कि हम इतना विशाल और भव्यता के साथ यह नेक कार्य कर सके।
पंडित धीरेंद्र शास्त्री की दिव्य वाणी से गूंजता रहा मंत्रोच्चार

ढपढप की पावन धरती में जब 108 दिव्यांग एवं निर्धन कन्याएं शादी के जोड़े में सजधज कर कथा स्थल/विवाह स्थल पहुंचे तो हजारों लोग जहां कन्यादान के लिए घराती बने, वहीं दुल्हों की ओर से भी बाराती के रूप में हजारों लोग शामिल हुए और जब सौभाग्यकांक्षी, चिरंजीवियों का मिलन हुआ, तो चारों तरफ से सुख-समृद्धि एवं खुशहाल जीवन का आशीर्वाद के लिए पुष्पवर्षा हुई और जब युगल सात फेरे ले रहे थे, तो हनुमंत भक्त पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के श्रीमुख से दिव्य मंत्रोच्चार चारों तरफ गूंजने लगा। घराती-बाराती इस दिव्य नम: सामूहिक विवाह से उल्लास और उमंग के साथ नाचने, गाने लगे। इस दिव्य दृश्य को देखकर हर कोई रोमांचित हो रहा था। दिव्यांगों और निर्धनों के इस अनुपम परिणय उत्सव को देखकर ऐसा लग रहा था, मानो प्रकृति ने भी अपनी सारी खुशी इन नवयुगलों के जीवन में उड़ेल दिया हो और इन्हें आशीर्वाद दे रही हो। पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के सानिध्य में यह जीवन का उत्सव सम्पन्न हुआ और उनका शुभ आशीर्वाद भी प्राप्त हुआ।
राज्यपाल रमेन डेका ने नवयुगलों को दिया शुभ आशीर्वाद, 05-05 हजार देने की घोषणा

प्रोटोकाल के तहत छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ठीक 11.00 बजे परिणय स्थल ढपढप पहुंचे और नवयुगलों को अपना शुभ आशीर्वाद प्रदान किया। उन्होंने राज्य सरकार की ओर से सभी नवदम्पत्तियों को 05-05 हजार देने की घोषणा की।
आयोजन समिति ने उपहार देकर नवदम्पत्तियों को विदा किया

आयोजन समिति दिव्यांगों एवं निर्धन कन्याओं का अभिभावक के रूप में शादी का खर्चा उठाया और नवयुगलों को उपहार दिया। आयोजन समिति ने 108 निर्धन/दिव्यांग कन्याओं को नवदाम्पत्य जीवन में प्रवेश करने पर अपना शुभ आशीर्वाद प्रदान किया।
लाखों हाथों ने दिया शुभ आशीर्वाद

कोरबा में पहली बार दिव्यता, भव्यता और इतना बड़ा विशाल जनसमूह ढपढप की पावन धरती पर दिखा। एक तरफ 05 दिवसीय दिव्य श्रीहनुमंत कथा सम्पन्न हो रही थी, दूसरी तरफ 108 निर्धन एवं दिव्यांग कन्याओं का घर बस रहा था। करीब 01.00 लाख लोग यहां मौजूद थे। लाखों हाथों ने इन दिव्य एवं गरीब कन्याओं को पूरे मन से अपना शुभ आशीर्वाद प्रदान किया और खुशहाल, समृद्ध जीवन के लिए प्रभु से कामना की।
शुभता का संदेश:नवयुगलों का जीवन सुख-समृद्ध एवं खुशहाल बने-नमन पाण्डेय

इस दिव्य आयोजन की सफलता के लिए आयोजन समिति और कोरबा वासियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए नमन पाण्डेय ने दिव्यांग/निर्धन 108 कन्याओं के नवजीवन में प्रवेश करने पर शुभता का संदेश दिया और कहा कि मातारानी नवदम्पत्तियों के जीवन में खुशहाली एवं समृद्धि लाए और उनके जीवन को वैभवशाली बनाए।

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कोरबा

जंगल की पवित्र धरती पर इतिहास: राज्यपाल रमेन डेका की उपस्थिति में 108 निर्धन कन्याओं का विवाह, दिव्य श्री हनुमंत कथा का भव्य समापन

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अपना घर सेवा समिति ने रचा सेवा, संस्कार और सनातन वैभव का अद्भुत अध्याय — नन्हा महाराज के सहयोग से ढपढप बना आस्था का महासंगम

कोरबा/बांकीमोंगरा। कोरबा जिले के वनांचल क्षेत्र स्थित ग्राम ढपढप (बांकीमोंगरा) की पावन धरती पर आयोजित दिव्य श्री हनुमंत कथा का समापन ऐसा ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और भावनात्मक दृश्य बनकर सामने आया, जिसने पूरे क्षेत्र को भक्ति, सेवा और सनातन चेतना से सराबोर कर दिया।
घने जंगलों और प्राकृतिक शांति के बीच आयोजित यह पांच दिवसीय आयोजन केवल कथा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आस्था, मानवता, नारी सम्मान, सामाजिक समरसता और लोककल्याण का विराट महायज्ञ बन गया।
इस भव्य आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि 108 निर्धन कन्याओं का सामूहिक विवाह अत्यंत गरिमामय और धार्मिक वातावरण में संपन्न कराया गया और इस पावन अवसर को और भी ऐतिहासिक बना दिया छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका की उपस्थिति ने, जिन्होंने स्वयं उपस्थित होकर सभी नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद प्रदान किया तथा उनके समक्ष वरमाला के साथ विवाह समारोह का शुभारंभ हुआ।
राज्यपाल की उपस्थिति ने इस आयोजन की गरिमा को कई गुना बढ़ा दिया और यह कार्यक्रम पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय बन गया।

अपना घर सेवा समिति ने किया ऐतिहासिक और अनुकरणीय आयोजन

इस पूरे विराट और सुव्यवस्थित धार्मिक-सामाजिक आयोजन को अपना घर सेवा समिति ने अत्यंत समर्पण, सेवा भाव और शानदार व्यवस्थाओं के साथ संपन्न कराया।
समिति ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि संकल्प सेवा का हो और भावना लोककल्याण की हो, तो जंगल के बीचों-बीच भी ऐसा दिव्य और ऐतिहासिक आयोजन संभव है, जिसे लोग वर्षों तक याद रखें।
कथा स्थल की व्यवस्था, श्रद्धालुओं के स्वागत, विवाह कार्यक्रम, धार्मिक अनुशासन, सेवाकार्य, मंचीय गरिमा और आयोजन की भव्यता—हर स्तर पर अपना घर सेवा समिति की सक्रिय और प्रेरक भूमिका स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
नन्हा महाराज का मिला विशेष सहयोग, आयोजन की गरिमा हुई और ऊंची

इस पुण्य और भव्य आयोजन में सर्वमंगल मंदिर के नन्हा महाराज का भी विशेष सहयोग, सहभागिता और आध्यात्मिक समर्थन प्राप्त हुआ।
उनकी उपस्थिति और सहयोग ने आयोजन को और अधिक श्रद्धामय, ऊर्जावान और धार्मिक स्वरूप प्रदान किया।
नन्हा महाराज ने इस पूरे आयोजन में अपनी आध्यात्मिक सहभागिता से इसे केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति के महापर्व का स्वरूप प्रदान किया।
जंगल के बीचों-बीच उमड़ा आस्था का ऐसा सैलाब कि पंडाल भी पड़ गया छोटा

ग्राम ढपढप जैसे वनांचल क्षेत्र में श्रद्धालुओं का ऐसा अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ा कि विशाल पंडाल भी छोटा पड़ गया। कोरबा जिले के साथ-साथ पूरे छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से श्रद्धालु बड़ी संख्या में कथा स्थल पहुंचे।
सड़कें, रास्ते, गांव की गलियां, कथा स्थल और आसपास का पूरा क्षेत्र श्रद्धालुओं की भीड़ से भरा नजर आया।
स्थानीय ग्रामीणों और गांववासियों के लिए यह दृश्य किसी चमत्कार से कम नहीं था।
लोग आश्चर्यचकित थे कि जंगलों के बीच स्थित एक छोटे से ग्राम में इतना विराट धार्मिक आयोजन, इतनी विशाल भीड़ और इतनी भव्य व्यवस्था देखने को मिलेगी।
पूरा वातावरण “जय श्रीराम”, “जय बजरंगबली” और “बागेश्वर धाम सरकार की जय” के जयघोष से गूंजता रहा।
श्रद्धा, भक्ति और सनातन ऊर्जा का ऐसा दृश्य पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक रूप से झंकृत करता रहा।
108 निर्धन कन्याओं का विवाह बना आयोजन का सबसे पावन और प्रेरक अध्याय

इस पांच दिवसीय दिव्य श्री हनुमंत कथा का सबसे पुण्यदायी और भावुक क्षण वह रहा, जब 108 निर्धन कन्याओं का सामूहिक विवाह वैदिक मंत्रोच्चार, धार्मिक परंपराओं और सामाजिक गरिमा के साथ संपन्न कराया गया।
यह केवल विवाह कार्यक्रम नहीं था, बल्कि समाजसेवा, संस्कार और नारी सम्मान का जीवंत उत्सव बन गया।
उपस्थित हजारों श्रद्धालु इस आयोजन में बाराती भी बने और घराती भी, जिससे पूरा वातावरण पारिवारिक, आध्यात्मिक और भावनात्मक हो उठा। जहां एक ओर बेटियों के हाथ पीले हुए, वहीं दूसरी ओर हजारों लोगों ने यह अनुभव किया कि सच्चा धर्म वही है, जो किसी के जीवन में खुशियां भर दे।
निर्धन कन्याओं का विवाह क्यों माना जाता है महान पुण्य?

सनातन संस्कृति में कन्यादान को सबसे श्रेष्ठ दानों में से एक माना गया है। जब समाज किसी निर्धन कन्या के विवाह में सहयोग करता है, तब वह केवल एक विवाह नहीं कराता, बल्कि—
एक बेटी का जीवन संवारता है
एक परिवार की चिंता दूर करता है
समाज में सहयोग और समरसता बढ़ाता है
दहेज और दिखावे जैसी कुरीतियों को कमजोर करता है
धर्म को व्यवहारिक रूप में स्थापित करता है
इस दृष्टि से देखा जाए तो ढपढप की धरती पर हुआ 108 निर्धन कन्याओं का विवाह वास्तव में महादान, महापुण्य और लोकसेवा का अद्भुत उदाहरण बन गया।
जंगल की यह धरती अब केवल ग्राम नहीं, तीर्थ बन गई

ग्राम ढपढप का यह वनांचल क्षेत्र पहले अपनी प्राकृतिक शांति और ग्रामीण सादगी के लिए जाना जाता था, लेकिन अब यह स्थान भक्ति, सेवा और सनातन संस्कृति की नई पहचान बन गया है।
जहां हनुमंत कथा गूंजी हो,
जहां संतों का आशीर्वाद मिला हो,
जहां 108 बेटियों के विवाह संपन्न हुए हों,
और जहां राज्यपाल की उपस्थिति में वरमाला का शुभारंभ हुआ हो—
वह भूमि केवल भूमि नहीं रहती, वह तीर्थधाम बन जाती है।
श्रद्धालुओं का मानना रहा कि इस आयोजन के बाद ढपढप की धरती और भी अधिक पवित्र, पूज्य और पुण्यमयी हो गई है।
कथा ने जगाई भक्ति, सेवा ने जीत लिया सबका मन

पांच दिनों तक चले इस आयोजन में श्री बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी महाराज की कथा, प्रवचन और आध्यात्मिक संदेशों ने श्रद्धालुओं के मन में भक्ति, संस्कार और सनातन चेतना का नया संचार किया।
उनकी वाणी ने केवल धार्मिक भाव नहीं जगाए, बल्कि समाज को सेवा, धर्म, राष्ट्र, संस्कृति और मानवता का भी संदेश दिया।
समापन दिवस पर कथा स्थल में उपस्थित श्रद्धालुओं की संख्या इस बात का प्रमाण थी कि यह आयोजन जन-जन की आस्था का केंद्र बन चुका था।
भक्ति, सेवा और संस्कार का अमिट इतिहास रच गया ढपढप

ग्राम ढपढप (बांकीमोंगरा) में संपन्न यह आयोजन आने वाले समय में कोरबा जिले के सबसे भव्य, सबसे पुण्यदायी और सबसे ऐतिहासिक धार्मिक आयोजनों में गिना जाएगा।
इस आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि—
जहां सेवा हो,
जहां संतों का आशीर्वाद हो,
जहां बेटियों के जीवन संवरें,
जहां समाज एक परिवार बन जाए,
वहीं सच्चे अर्थों में सनातन का वैभव प्रकट होता है।
ढपढप की यह पावन धरती अब केवल एक गांव नहीं, बल्कि आस्था, सेवा, संस्कार और सनातन एकता का जीवंत प्रतीक बन चुकी है।

उक्त आयोजन में मां सर्वमंगला मंदिर के पुरोहित मयंक पांडेय, राणा मुखर्जी, जिला पंचायत अध्यक्ष पवन सिंह, सुबोध सिंह अमरजीत सिंह,अखिलेश अग्रवाल, विजय राठौर , इत्यादि की अहम भूमिका रही।

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देश

HDFC, PNB और Bandhan Bank ग्राहकों के लिए जरूरी खबर, ATM नियमों में बदलाव

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मुंबई, एजेंसी। नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही तीन बड़े बैंकों ने आम लोगों की जेब पर बोझ बढ़ा दिया है। 1 अप्रैल 2026 से देश के कई बड़े बैंकों HDFC Bank, Punjab National Bank और Bandhan Bank ने ATM ट्रांजैक्शन से जुड़े नियमों में अहम बदलाव किए हैं। इन बदलावों का सीधा असर ग्राहकों की फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट, कैश निकासी और अतिरिक्त चार्जेस पर पड़ेगा।

HDFC Bank: UPI निकासी भी अब लिमिट में

HDFC Bank ने ATM से UPI के जरिए होने वाली कैश निकासी को मासिक फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट में शामिल कर दिया है। अब UPI से निकासी भी सामान्य ATM ट्रांजैक्शन मानी जाएगी। तय सीमा (आमतौर पर 5 ट्रांजैक्शन) पार करने पर हर अतिरिक्त ट्रांजैक्शन पर 23 रुपए (टैक्स अलग) शुल्क लगेगा।

PNB: डेली विड्रॉल लिमिट घटी

पंजाब नेशनल बैंक ने कई डेबिट कार्ड्स पर दैनिक कैश निकासी सीमा कम कर दी है।

  • पहले: रू.1 लाख → अब: रू.50,000
  • प्रीमियम कार्ड: रू.1.5 लाख → अब: रू.75,000
  • यह बदलाव RuPay, Visa और Mastercard नेटवर्क के कई कार्ड्स पर लागू होगा।

Bandhan Bank: फ्री ट्रांजैक्शन में बदलाव

बंधन बैंक ने ATM इस्तेमाल से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। अब अपने बैंक के ATM पर ग्राहक महीने में 5 फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन फ्री कर सकते हैं, जबकि नॉन-फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन पर कोई लिमिट नहीं है। दूसरे बैंकों के ATM पर मेट्रो शहरों में 3 और नॉन-मेट्रो में 5 फ्री ट्रांजैक्शन मिलेंगे। इसके बाद हर फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन पर 23 रुपए और नॉन-फाइनेंशियल पर 10 रुपए शुल्क लगेगा। बैलेंस कम होने पर फेल ट्रांजैक्शन के लिए 25 रुपए पेनल्टी भी देनी होगी।

ग्राहकों के लिए क्या मतलब?

इन बदलावों से साफ है कि अब ATM इस्तेमाल पहले से ज्यादा सोच-समझकर करना होगा। UPI निकासी को भी लिमिट में शामिल करने, डेली विड्रॉल घटने और फ्री ट्रांजैक्शन कम होने से ग्राहकों को अपने कैश उपयोग की बेहतर योजना बनानी होगी, ताकि अतिरिक्त शुल्क से बचा जा सके।

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