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छत्तीसगढ़

सरगुजा में हाथी ने बुजुर्ग को कुचलकर मार डाला:रतजगा कर ग्रामीणों ने हाथी को खदेड़ा, जिले में विचरण कर रहे 16 हाथी

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सरगुजा,एजेंसी। सरगुजा जिले के टीरंग में शनिवार की रात दंतैल हाथी ने घर के बाहर निकले वृद्ध को कुचलकर मार डाला। हाथी लुण्ड्रा क्षेत्र से बतौली इलाके में पहुंचा था। जहां रातभर गांव में उत्पात मचाया। हाथी को लोगों ने मिलकर जशपुर की ओर खदेड़ दिया है। घटना बतौली थाना क्षेत्र की है।

जानकारी के मुताबिक, लुण्ड्रा वन परिक्षेत्र से निकलकर दंतैल हाथी शनिवार रात सीतापुर वन परिक्षेत्र में पहुंच गया। हाथी रात करीब 11 बजे बतौली ब्लॉक के टीरंग पंचायत में घुस गया। हाथी ने घर के बाहर निकले डेचका राम पैकरा (60) को कुचल दिया। डेचका राम की मौके पर ही मौत हो गई। वो हाथी को रात के अंधेरे में नहीं देख सका और उसके पास पहुंच गया। हाथी ने उसे उठाकर पटक दिया।

ग्रामीण का शव क्षत-विक्षत हालत में मिला।

ग्रामीण का शव क्षत-विक्षत हालत में मिला।

ग्रामीणों ने हाथी को खदेड़ा

हाथी के गांव में घुस आने से टीरंग में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों के दल ने हाथी को एकजुट होकर जशपुर की ओर खदेड़ दिया। हाथी देर रात जशपुर की ओर चला गया है। हाथी को खदेड़ने के लिए लोग पूरी रात जागते रहे। हाथी के वापस लौट आने की आशंका पर निगरानी की जा रही है।

ग्रामीणों ने बताया कि उक्त हाथी ने एक दिन पहले बतौली क्षेत्र के मानपुर में जयनाथ नगेशिया के मकान को क्षतिग्रस्त कर दिया था। वहां से खदेड़े जाने के बाद हाथी टिरंग पहुंच गया। लुण्ड्रा रेंज से एक अन्य हाथी रविवार सुबह मानपुर के खोखरो बहरा जंगल में पहुंच गया है। एक हाथी की मौजूदगी को देखते हुए मानपुर सहित टिरंग, बांसाझाल, आमापानी, घोघरा और आसपास के गांवों में लोगों को अलर्ट कर दिया गया है।

सरगुजा में विचरण कर रहे 16 हाथी

चार दिनों पहले लुण्ड्रा क्षेत्र में विचरण कर रहा 20 हाथियों का दल राजपुर वन परिक्षेत्र में प्रवेश कर गया है। इसके बाद सरगुजा में 16 हाथी विचरण कर रहे हैं। इनमें से एक हाथी को जशपुर खदेड़ दिया गया है। वनविभाग के अनुसार मैनपाट वन परिक्षेत्र में 13, लुण्ड्रा में 3 और सीतापुर वन परिक्षेत्र में 1 हाथी विचरण कर रहा है। वनविभाग हाथियों की निगरानी कर रहा है।

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कुसमुंडा

ऐतिहासिक एवं पौराणिक पहचान वाले लक्ष्मण नाला के अस्तित्व पर संकट, निर्माण कार्य तत्काल बंद कराने की मांग

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निजी कंपनी की सुविधा के लिए स्थानीय धरोहर को नुकसान पहुँचाने की आशंका, कलेक्टर से निष्पक्ष जाँच की मांग

कोरबा/कुसमुंडा। जिले के ग्राम कुचेना कुसमुंडा स्थित ऐतिहासिक एवं पौराणिक लोकमान्यता से जुड़े लक्ष्मण नाला के अस्तित्व पर मंडरा रहे खतरे को लेकर ऊर्जाधानी भूविस्थापित किसान कल्याण समिति ने चिंता व्यक्त की है। समिति के अध्यक्ष सपुरन कुलदीप ने कलेक्टर जिला कोरबा को ज्ञापन सौंपकर लक्ष्मण नाला के आसपास कराए जा रहे सड़क एवं अन्य निर्माण कार्यों पर जाँच पूरी होने तक तत्काल रोक लगाने तथा इस स्थल के संरक्षण के लिए आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है ।

समिति के अनुसार ग्राम कुचेना का लक्ष्मण नाला स्थानीय ग्रामीणों की ऐतिहासिक पौराणिक एवं सांस्कृतिक मान्यताओं से जुड़ा हुआ है। स्थानीय बुजुर्गों एवं ग्रामीणों के बीच प्रचलित लोकमान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम, माता सीता एवं लक्ष्मण जी के वनवास काल से इस स्थान का संबंध माना जाता है। ग्रामीणों के अनुसार यहाँ एक बड़े पत्थर की आकृति भी मौजूद है, जिसे लक्ष्मण जी द्वारा ईंट काटे जाने से संबंधित मान्यता से जोड़कर देखा जाता है। यह स्थल लंबे समय से स्थानीय जनमानस की आस्था एवं सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा रहा है ।

निजी कंपनी की सुविधा के लिए निर्माण, निष्पक्ष जाँच जरूरी

सपुरन कुलदीप ने कहा कि प्राप्त जानकारी के अनुसार क्षेत्र में किसानों की निजी भूमि खरीदकर कोयला डिस्पैच के लिए स्टॉक एवं सड़क निर्माण का कार्य कराया जा रहा है। आशंका है कि इस निर्माण से लक्ष्मण नाला की प्राकृतिक संरचना जल प्रवाह तथा उससे जुड़ी ऐतिहासिक-पौराणिक पहचान को नुकसान पहुँच सकता है ।

उन्होंने कहा कि यदि किसी निजी कंपनी की व्यावसायिक सुविधा के लिए सड़क निर्माण किया जा रहा है, तो उसकी आवश्यकता स्वीकृति जनहित एवं स्थानीय धरोहर पर पड़ने वाले प्रभाव की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए। किसानों की भूमि खरीदी जाने, भूमि के मूल्य तथा निर्माण से संबंधित दस्तावेजों की भी जाँच की जानी चाहिए, ताकि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सके ।

विकास का विरोध नहीं, धरोहर की सुरक्षा जरूरी

समिति अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि संगठन विकास कार्यों का विरोधी नहीं है, लेकिन विकास के नाम पर किसी महत्वपूर्ण प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहर के अस्तित्व को खतरे में डालना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि लक्ष्मण नाला केवल जल निकासी का माध्यम नहीं बल्कि स्थानीय ग्रामीणों की लोकस्मृति और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा स्थल है एक बार ऐसी धरोहर नष्ट हो जाने पर उसकी भरपाई संभव नहीं होगी ।

समिति की प्रमुख मांगें

समिति ने कलेक्टर से मांग की है कि:—

  1. लक्ष्मण नाला के आसपास चल रहे निर्माण कार्यों पर जाँच पूरी होने तक तत्काल रोक लगाई जाए ।
  2. राजस्व विभाग संबंधित ग्राम पंचायत एवं अन्य सक्षम विभागों की संयुक्त टीम बनाकर स्थल का निरीक्षण एवं सीमांकन कराया जाए ।
  3. नाले की प्राकृतिक संरचना जल प्रवाह और स्थानीय ऐतिहासिक-पौराणिक मान्यताओं का दस्तावेजीकरण कराया जाए ।
  4. किसानों की भूमि खरीदी भूमि के मूल्य सड़क निर्माण की आवश्यकता तथा निजी कंपनी को होने वाले संभावित लाभ की निष्पक्ष जाँच की जाए ।
  5. सड़क निर्माण की स्वीकृति नक्शा वैधानिक अनुमति एवं अन्य संबंधित अभिलेखों की जाँच कराई जाए ।
  6. लक्ष्मण नाला को सुरक्षित रखने के लिए संरक्षण योजना बनाई जाए तथा आवश्यकता होने पर वैकल्पिक सड़क मार्ग पर विचार किया जाए ।
  7. जाँच एवं की गई कार्रवाई की जानकारी ग्रामवासियों और समिति को लिखित रूप में दी जाए ।

कलेक्टर से तत्काल हस्तक्षेप की अपील

सपुरन कुलदीप ने जिला प्रशासन से आग्रह किया है कि जनभावनाओं प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था एवं स्थानीय सांस्कृतिक विरासत को ध्यान में रखते हुए, मामले में तत्काल हस्तक्षेप किया जाए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य से किसी प्रकार की अपूरणीय क्षति होने से पहले स्थल की वास्तविक स्थिति का आकलन कर संरक्षण सुनिश्चित किया जाना चाहिए ।

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कोरबा

महाराजा अग्रसेन सम्मान-2026 से सम्मानित होने पर अशोक मोदी ने बाबूलाल अग्रवाल को दी हार्दिक शुभकामनाएँ

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कोरबा। छ.ग.प्रांतीय अग्रवाल संगठन के चेयरमेन अशोक मोदी ने अपनी तथा छ.ग.प्रांतीय अग्रवाल संगठन के समस्त सदस्यों की ओर से छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सामाजिक समरसता के संरक्षण, संवर्धन एवं समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किए जाने वाले प्रतिष्ठित राज्य स्तरीय अलंकरण “महाराजा अग्रसेन सम्मान-2026” हेतु चयनित किये जाने पर बाबूलाल अग्रवाल को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रेषित की है।

अशोक मोदी ने बताया कि बाबूलाल अग्रवाल बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी, कर्मठ, सेवाभावी एवं अत्यंत समर्पित समाजसेवी हैं। उन्होंने सदैव समाजहित को सर्वाेपरि रखते हुए निःस्वार्थ सेवा, समर्पण एवं सकारात्मक सोच के साथ सामाजिक दायित्वों का निर्वहन किया है। उनका कार्यक्षेत्र केवल अग्रवाल समाज तक सीमित नहीं है, बल्कि वे सर्वसमाज के उत्थान, सामाजिक एकता, आपसी सद्भाव एवं समरसता को सुदृढ़ बनाने के लिए भी निरंतर सक्रिय रहते हैं। उनके प्रयासों से समाज के विभिन्न वर्गों को लाभ मिला है तथा सामाजिक एवं रचनात्मक गतिविधियों को नई दिशा और प्रेरणा प्राप्त हुई है।

उन्होने कहा कि किसी भी व्यक्ति के वर्षों के निःस्वार्थ सेवाभाव, समर्पण और समाज के प्रति प्रतिबद्धता का जब शासन स्तर पर सम्मान होता है, तो वह केवल उस व्यक्ति का सम्मान नहीं, बल्कि उससे जुड़े समस्त समाज और संगठन के लिए भी गौरव का क्षण बन जाता है। बाबूलाल अग्रवाल को प्राप्त यह सम्मान उनके सतत सामाजिक योगदान, सेवा भावना एवं समर्पित कार्यशैली का सम्मान है।

मोदी ने विश्वास व्यक्त किया कि बाबूलाल अग्रवाल भविष्य में भी इसी उत्साह, निष्ठा एवं सेवाभाव के साथ सामाजिक एवं रचनात्मक कार्यों में अपना महत्वपूर्ण योगदान देते रहेंगे तथा समाज की नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बने रहेंगे। उन्होंने पुनः इस उपलब्धि पर उन्हें हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान संपूर्ण अग्रवाल समाज के लिए गर्व, गौरव एवं हर्ष का विषय है।

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कोरबा

बच्चों की सुरक्षा, उज्जवल भविष्य और जागरूकता का संदेश-कोरबा में सुरक्षित बचपन की पहल

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कोरबा 31 अक्टूबर 2026। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के निर्देशन में लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (पॉक्सो अधिनियम) के संबंध में अखिल भारतीय विद्यालय जागरूकता अभियान “सुरक्षित बचपन अभियान” के प्रथम चरण का आयोजन दिनांक 26 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक किया जा रहा है। उक्त के परिपालन में आयोजित शिविर में सुश्री सीमा प्रताप चन्द्रा, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश (एफ.टी.सी.) कोरबा के द्वारा सरस्वती शिशु मंदिर, हायर सेकेण्डरी स्कूल(सी.एस.ई.बी.) कोरबा में सम्मिलित होकर उनके द्वारा बच्चों को जागरूक करते हुए कहा गया कि बच्चों को न केवल अनजान व्यक्तियों से सतर्क रहना चाहिए, बल्कि किसी परिचित व्यक्ति, पड़ोसी अथवा रिश्तेदार पर भी आँख बंद करके विश्वास नहीं करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति उन्हें किसी प्रकार का लालच देकर, बहला-फुसलाकर अथवा किसी अन्य प्रलोभन के माध्यम से अपने साथ चलने के लिए कहता है, तो वे उसके साथ न जाएँ। बच्चों को अपनी सुरक्षा के प्रति सदैव सजग रहना चाहिए तथा किसी भी असहज या संदिग्ध परिस्थिति में तत्काल अपने माता-पिता, शिक्षक अथवा किसी विश्वसनीय व्यक्ति को इसकी जानकारी देनी चाहिए, बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है तथा उनकी सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए जागरूकता और सतर्कता अत्यंत आवश्यक है। इसी कड़ी में उन्होंने यह भी कहा कि माता-पिता द्वारा बच्चों को डाँटना उनके प्रति चिंता, स्नेह एवं उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए आर्शिवाद स्वरूप है। बच्चों को माता-पिता की बातों को सकारात्मक रूप से समझना चाहिए तथा किसी भी परिस्थिति में निराश होकर गलत कदम के बारे में नहीं सोचना चाहिए। जीवन अनमोल है और जीवन में आने वाली कठिनाइयों का सामना धैर्य एवं साहस के साथ करना चाहिए। उन्होने बताया कि 16-17 वर्ष की आयु जीवन का अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ाव होता है। इस उम्र में प्रेम-प्रसंग जैसे रिश्तों के चलते घर से अन्यत्र किसी के साथ चले जाना कई बार अनजाने में कानूनी समस्याओं एवं आपराधिक प्रकरणों का कारण बन सकता है। उन्होंने कहा कि यह उम्र प्रेम-प्रसंग में पड़कर अपने भविष्य को प्रभावित करने की नहीं, बल्कि शिक्षा प्राप्त करने, अपने लक्ष्य निर्धारित करने एवं अपने सुनहरे भविष्य के निर्माण की है। बच्चों को भावनाओं में बहकर कोई भी ऐसा कदम नहीं उठाना चाहिए, जिससे उनका भविष्य प्रभावित हो।
जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश ने बच्चों को शुभकामनाएँ व्यक्त करते हुए कहा कि कोरबा जिले में बच्चों से संबंधित या पॉक्सो अधिनियम संबंधित एक भी मामला सामने न आए तथा किसी भी परिवार को किसी प्रकार के हृदय विदारक घटना का सामना न करना पड़े।

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