छत्तीसगढ़
दरभा में नाले में बही कार…पति-पत्नी, 2 बच्चों की मौत:बस्तर में बाढ़…6 लोगों को हेलीकॉप्टर से निकाला,68 लोगों का रेस्क्यू, 9 जिलों में अलर्ट
रायपुर,एजेंसी। बंगाल की खाड़ी में बने लो प्रेशर एरिया के कारण बस्तर संभाग में भारी बारिश के बाद आई बाढ़ में फंसे 6 लोगों को हेलीकॉप्टर से निकाला गया है। इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण मांदर गांव के ये लोग घर की छत पर फंसे हुए थे।
वायुसेना के हेलीकॉप्टर से अब तक 68 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाया गया। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने वायुसेना से मदद मांगी थी।
वहीं NH-30 जगदलपुर-सुकमा मार्ग पर दरभा घाटी के पास उफनते नाले को पार करने के दौरान एक कार बह गई। हादसे में कार सवार पति-पत्नी और दो बच्चों की मौत हो गई। ड्राइवर ने तैरकर जान बचाई। सभी तमिलनाडु के रहने वाले थे।
SDRF की टीम ने देर रात कार में फंसे शवों को बाहर निकाला। सभी शवों को जगदलपुर मेडिकल कॉलेज भेजकर पोस्टमॉर्टम किया गया।

लोहंडीगुड़ा ब्लॉक के मांदर गांव में घर की छत पर फंसे लोगों को वायुसेना के हेलीकॉप्टर से निकाला गया।

दंतेवाड़ा के बारसूर-गीदम रोड के बीच बहने वाले गणेश नाला में एक ग्रामीण फंस गया, जिसे लोगों ने सुरक्षित बाहर निकाला।

बस्तर के मांदर गांव में घर की छत में फंसे लोगों को सेना के जवानों ने निकाला।

वायुसेना के हेलीकॉप्टर के जरिए लोगों को रेस्क्यू किया गया।

हेलीकॉप्टर से लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया।

छिंदगढ़ के कोकराल नदी में पुल के ऊपर पानी बह रहा है।

दंतेवाड़ा जगदलपुर रोड स्थित बंजारीनघाट सड़क पर पानी भर गया है।

बस्तर में भारी बारिश के बाद नदी-नाले उफान पर हैं। तस्वीर परियागुड़ा गांव की है जहां नाले का पानी सड़क पर आ गया।

बीजापुर के भैरमगढ़ स्थित सीआपीएफ के 165वीं बटालियन में पानी घुस गया।

कुन्ना और मिचवार के बीच नदी पर बना पुल टूट गया है।

दोरनापाल सुकमा के बीच दुब्बाटोटा नाले पर तीन से चार फीट ऊपर पानी भर गया है।

झीरम में जगदलपुर-सुकमा मार्ग पर सड़क के ऊपर से नाले का पानी बह रहा है।
सीआरपीएफ कैंप में घुसा पानी, 3 दिन अलर्ट
इससे पहले बीजापुर के भैरमगढ़ स्थित CRPF 165वीं बटालियन के मुख्यालय में इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़ने से पानी घुस गया। दंतेवाड़ा-जगदलपुर रोड पर बंजारीनघाट पर सड़क में पानी भर गया। छिंदगढ़ के कोकराल नदी में पुल के ऊपर से पानी बह रहा है। सुकमा में लगातार बारिश से शबरी नदी उफान पर है।
मौसम विभाग की माने तो अगले 3 दिन कई जगहों पर भारी बारिश हो सकती है। आज बीजापुर, दंतेवाड़ा, बस्तर और कोंडागांव इन चार जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। इसके अलावा सुकमा, नारायणपुर, कांकेर, धमतरी, गरियाबंद इन 5 जिलों में भारी बारिश का यलो अलर्ट है।
कबीरधाम, बलौदाबाजार, रायपुर सहित सेंट्रल पार्ट के 9 जिलों में बिजली गिरने, बादल गरजने और आंधी चलने का अलर्ट है। उत्तरी हिस्से में मौसम सामान्य रहने की उम्मीद है।
बिलासपुर में बाढ़ में बहने से एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत
रायपुर में मंगलवार शाम तेज बारिश हुई। बिलासपुर जिले में बाढ़ में बहने से एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत हो गई। वहीं पचपेड़ी थाना क्षेत्र के टांगर गांव में एक 12 साल का बच्चा एनीकट पार करते समय नदी में बह गया। इसके अलावा बीजापुर जिले में नाव पलटने से 2 बच्चियां लापता हैं।

बिलासपुर में मरही माता मंदिर के दर्शन के दौरान बाढ़ में बहने से 3 बच्चों की मौत हो गई। बीजापुर में भी 2 बच्चियां बह गईं।

कोरबा
कोरबा में पेड़ पर लटका मिला पति का शव:पत्नी से विवाद के बाद किराए के घर से निकला था, जांच में जुटी पुलिस
कोरबा/कुसमुंडा। कोरबा में सोमवार सुबह एक व्यक्ति का शव पेड़ से लटका मिला। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। मामला कुसमुंडा थाना क्षेत्र के गेवरा बस्ती, बरपाली गांव का है।
मृतक की पहचान रामपुर, करतला थाना क्षेत्र निवासी नरेश चौहान (30) के रूप में हुई। नरेश बरपाली में मनीराम खरे के मकान में किराए पर रहता था और मजदूरी करता था।

बताया गया कि नरेश अपनी पत्नी और बच्चों के साथ किराए के मकान में रहता था। रविवार को वह काम पर जाने की बात कहकर घर से निकला, लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटा। उसकी पत्नी लगातार उसकी तलाश करती रही।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पति-पत्नी के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। विवाद के बाद नरेश घर से निकला और फिर नहीं लौटा। कुसमुंडा थाना पुलिस ने नरेश की पत्नी का बयान दर्ज किया है। बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया।

छत्तीसगढ़
सुकमा : मरीज को मिला समय पर उपचार, सुकमा के चिकित्सकों की टीम ने दिखाई तत्परता
जिला अस्पताल में मौत के मुंह से लौटाई महिला की सांसें
सुकमा। सुकमा जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवा की तत्परता और आधुनिक संसाधनों की उपलब्धता का एक सराहनीय उदाहरण सामने आया है। सिविल सर्जन डॉ. एमआर कश्यप से प्राप्त जानकारी के अनुसार छिंदगढ़ विकासखंड के कुन्ना निवासी 38 वर्षीय श्रीमती पाली कवासी को गंभीर अवस्था में जिला अस्पताल सुकमा में भर्ती कराया गया।

देरी से अस्पताल पहुंचने के कारण स्थिति अत्यंत जोखिमपूर्ण थी और तत्काल सर्जरी आवश्यक हो गई। अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुजा ने बिना समय गंवाए तुरंत एलएससीएस (सीजर) ऑपरेशन कर मरीज का उपचार प्रारंभ किया। हालांकि ऑपरेशन के दौरान मृत बच्चा पैदा होने से महिला की स्थिति और अधिक जटिल हो गई।
महिला की हालत लगातार बिगड़ती चली गई और रेफर करने की तैयारी की जा रही थी। इसी दौरान महिला का श्वास बंद सा हो गया, साथ ही नाड़ी और हृदय की धड़कन भी थम सी गई। ऐसे संकट की घड़ी में जिला अस्पताल की मेडिकल टीम ने त्वरित निर्णय लेते हुए महिला को दो बार सीपीआर दिया और तत्काल वार्ड में शिफ्ट कर आधुनिक वेंटीलेटर की सहायता से उपचार शुरू किया गया। इसके बाद महिला को दो यूनिट रक्त चढ़ाया गया।
डॉक्टरों की सतर्कता और उपलब्ध संसाधनों के कारण महिला की जान बचा ली गई। आज श्रीमती पाली कवासी पूरी तरह स्वस्थ हैं और जिला अस्पताल के डॉक्टरों व स्टाफ के प्रयासों की सराहना कर रही हैं।

छत्तीसगढ़
जशपुर : राज्यपाल रमेन डेका ने जशपुर के मातृत्व वन में किया सीता अशोक के पौधे का रोपण
जशपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने सर्किट हाउस जशपुर के मातृत्व वन में एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत सीता अशोक के पौधे का रोपण कर पर्यावरण के संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया।
इस अवसर पर कलेक्टर रोहित व्यास वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार और वनमंडला अधिकारी शशि कुमार और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

लगभग 2 एकड़ क्षेत्र में विकसित इस मातृत्व वन में 400 से अधिक विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया है, जो पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संवेदनाओं के अद्वितीय समन्वय का उदाहरण प्रस्तुत करता है। मातृत्व वन में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत जिले के जनप्रतिनिधियों द्वारा अपनी माताओं के नाम पर पौधरोपण किया गया है। इस पहल ने अभियान को भावनात्मक और सामाजिक रूप से विशेष महत्व प्रदान किया है।
राज्यपाल रमेन डेका ने इस अवसर पर कहा कि माँ हमारे जीवन की प्रथम गुरु होती हैं और उनका स्थान सर्वोच्च होता है। ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के माध्यम से हम माँ के प्रति सम्मान को प्रकृति से जोड़ रहे हैं। यह पहल आने वाली पीढ़ियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ सामाजिक मूल्यों को भी सुदृढ़ करेगी। उन्होंने कहा कि मातृत्व वन जैसी पहल न केवल हरित क्षेत्र बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि समाज में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का भाव भी विकसित करेंगी।
मातृत्व वन के अंतर्गत पर्यावरणीय एवं औषधीय दृष्टि से महत्वपूर्ण पौधों का चयन कर उनका रोपण किया गया है। इनमें टिकोमा, झारुल, सीता अशोक, गुलमोहर, लक्ष्मीतरु, आंवला, बीजा, सिन्दूर, नागकेसरी, अर्जुन एवं जामुन जैसी प्रजातियाँ प्रमुख हैं। ये पौधे न केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में सहायक होंगे, बल्कि आने वाले समय में औषधीय एवं जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मातृत्व वन की स्थापना का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, माताओं के प्रति सम्मान को प्रकृति के माध्यम से अभिव्यक्त करना तथा नई पीढ़ी में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। यह पहल ‘हर घर एक पेड़, हर पेड़ में माँ की ममता’ के संदेश को साकार करने की दिशा में एक सार्थक कदम है।

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