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गोवा- मोदी ने 77 फीट की श्रीराम-प्रतिमा का अनावरण किया:कर्नाटक में एक लाख लोगों के साथ गीता पढ़ी, श्रीकृष्ण मठ में सोने का कलश चढ़ाया

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बेंगलुरु/पणजी,एजेंसी। पीएम नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को गोवा के कैनाकोना में श्री संस्थान गोकर्ण जीवोत्तम मठ में पूजा की। यहां भगवान राम की 77 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा का अनावरण किया। दावा किया जा रहा है कि यह दुनिया की सबसे ऊंची श्रीराम प्रतिमा है।

इससे पहले दिन में पीएम कर्नाटक पहुंचे थे। उडुपी में उन्होंने श्री कृष्ण मठ में पूजा-अर्चना की थी। यहां सुवर्ण तीर्थ मंडप का उद्घाटन किया और सोने का कलश चढ़ाया। इसके बाद पीएम ने 1 लाख लोगों के साथ श्रीमद्भगवद गीता का पाठ किया।

पीएम ने उडुपी में 25 मिनट की स्पीच दी। यहां उन्होंने श्रीकृष्ण के गीता के उपदेशों की बात की। पीएम ने कहा- भगवत गीता हमें सिखाती है कि शांति और सच्चाई को वापस लाने के लिए अत्याचारी का अंत करना जरूरी है। यही नेशनल सिक्योरिटी पॉलिसी का सार है। पहले की सरकारें आतंकी हमलों के बाद जवाबी कार्रवाई नहीं करती थीं, पर यह नया भारत है।

कर्नाटक में पीएम का कार्यक्रम, 4 तस्वीरें…

पीएम ने उडुपी में श्रीकृष्ण मठ में पूजा की, मंदिर की परिक्रमा लगाई।

पीएम ने उडुपी में श्रीकृष्ण मठ में पूजा की, मंदिर की परिक्रमा लगाई।

पीएम ने पवित्र कनकना किंडी के लिए तैयार स्वर्ण कवच मंदिर में चढ़ाया।

पीएम ने पवित्र कनकना किंडी के लिए तैयार स्वर्ण कवच मंदिर में चढ़ाया।

श्री कृष्ण मठ के पुजारी ने पीएम मोदी का माला पहनाकर स्वागत किया।

श्री कृष्ण मठ के पुजारी ने पीएम मोदी का माला पहनाकर स्वागत किया।

उडुपी पहुंचने पर पीएम ने एयरपोर्ट से करीब 3 किमी लंबा रोड शो किया।

उडुपी पहुंचने पर पीएम ने एयरपोर्ट से करीब 3 किमी लंबा रोड शो किया।

कर्नाटक में पीएम का संबोधन, 4 बड़ी बातें…

  • उडुपी आना मेरे लिए बहुत खास है। उडुपी जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी के अच्छे शासन के मॉडल की कर्मभूमि रही है। 1968 में उडुपी के लोगों ने जनसंघ के वीएस आचार्य को उडुपी म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के लिए चुना था। इसके साथ ही, उडुपी ने एक नए शासन मॉडल की नींव रखी।
  • मेरा जन्म गुजरात में हुआ, गुजरात और उडुपी के बीच गहरा संबंध रहा है। यहां स्थापित विग्रह की पूजा द्वारका में माता रुक्मणि करती थी। बाद में ये प्रतिमा यहां स्थापित हुआ। पिछले साल मैं समुद्र के भीतर द्वाराका जी के दर्शन करके आया था।
  • हमारे समाज में मंत्रों का और गीता के श्लोकों का पाठ तो शताब्दियों से हो रहा है, पर जब 1 लाख कंठ, एक स्वर में इन श्लोकों का ऐसा उच्चारण करते हैं, जब इतने सारे लोग गीता जैसे पुण्य ग्रन्थ का पाठ करते हैं, जब ऐसे दैवीय शब्द एक स्थान पर एक साथ गूंजते हैं, तो एक ऐसी ऊर्जा निकलती है, जो हमारे मन को, हमारे मस्तिष्क को एक नया स्पंदन और नई शक्ति देती है।
  • श्री कृष्ण ने युद्ध के मैदान में गीता का उपदेश दिया था। भगवत गीता हमें सिखाती है कि शांति और सच्चाई को वापस लाने के लिए अत्याचारी का अंत करना जरूरी है। यही नेशनल सिक्योरिटी पॉलिसी का सार है। पहले की सरकारें आतंकी हमलों के बाद जवाबी कार्रवाई नहीं करती थीं, पर यह नया भारत है। हम शांति स्थापित करना जानते हैं, और उसकी रक्षा भी करते हैं।

पीएम ने गोवा में श्रीराम की 77 फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया

प्रधानमंत्री शाम 4 बजे दक्षिण गोवा के कैनाकोना स्थित श्री संस्थान गोकर्ण परतगली जीवोत्तम मठ पहुंचे। यह मठ गौड़ सारस्वत ब्राह्मण वैष्णव परंपरा का पहला प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां पीएम ने श्रीराम की प्रतिमा के साथ

मठ में बने ‘रामायण थीम पार्क गार्डन’ का भी उद्घाटन किया।

पीएम मोदी शुक्रवार शाम को गोवा पहुंचे। यहां उन्होंने 77 फीट ऊंची श्रीराम की मूर्ति का अनावरण किया।

पीएम मोदी शुक्रवार शाम को गोवा पहुंचे। यहां उन्होंने 77 फीट ऊंची श्रीराम की मूर्ति का अनावरण किया।

कांस्य से बनी 77 फीट ऊंची श्रीराम की मूर्ति राम सुतार ने बनाई है। इन्होंने ही गुजरात में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी बनाई थी।

कांस्य से बनी 77 फीट ऊंची श्रीराम की मूर्ति राम सुतार ने बनाई है। इन्होंने ही गुजरात में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी बनाई थी।

पीएम ने गोवा में श्री संस्थान गोकर्ण परतगली जीवोत्तम मठ में पूजा-अर्चना की।

पीएम ने गोवा में श्री संस्थान गोकर्ण परतगली जीवोत्तम मठ में पूजा-अर्चना की।

गोवा में पीएम की स्पीच, 5 बड़ी बातें…

आज भारत एक अद्भुत सांस्कृतिक पुनर्जागरण का साक्षी बन रहा है। अयोध्या में राम मंदिर का पुनर्स्थापन, काशी विश्वनाथ धाम का भव्य पुनरुद्धार और उज्जैन में महाकाल महालोक का विस्तार। ये सब हमारे राष्ट्र की उस जागरूकता को प्रकट करते हैं, जो अपनी आध्यात्मिक धरोहर को नई शक्ति के साथ उभार रही है।

श्री संस्थान गोकर्ण पर्तगली जीवोत्तम मठ अपनी स्थापना की 550वीं वर्षगांठ मना रहा है। बीते 550 सालों में इस संस्था ने समय के कितने ही चक्रवात झेले हैं। युग बदला, दौर बदला, देश और समाज में कई परिवर्तन हुए लेकिन बदलते युगों और चुनौतियों के बीच इस मठ ने अपनी दिशा नहीं खोई

आज रामायण पर आधारित एक थीम पार्क का उद्घाटन भी हुआ है। आज इस मठ के साथ जो नए आयाम जुड़े हैं, वो आने वाली पीढ़ियों के लिए ध्यान, प्रेरणा और साधना के स्थायी केंद्र बनने जा रहे हैं।

ऐसे समय भी आए जब गोवा के मंदिरों और स्थानीय परंपराओं को संकट का सामना करना पड़ा। जब भाषा और सांस्कृतिक पहचान पर दबाव बना। लेकिन ये परिस्थितियां समाज की आत्मा को कमजोर नहीं कर पाईं, बल्कि उसे और दृढ़ बनाया।

गोवा की यही विशेषता है कि यहां की संस्कृति ने हर बदलाव में अपने मूल स्वरूप को बनाए रखा और समय के साथ पुनर्जीवित भी किया। इसमें पर्तगाली मठ जैसे संस्थानों का बहुत बड़ा योगदान रहा है।

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एमपी-राजस्थान में 3 दिनों से बारिश,कई जगह बाढ़ जैसे हालात:नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट में पानी भरा, काशी में 100 मंदिर डूबे

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नई दिल्ली, एजेंसी। देश के मध्य और पूर्वी हिस्से में मानसून एक्टिव है। मध्यप्रदेश, राजस्थान के कई इलाकों में लगातार तीसरे दिन भारी बारिश से हालात खराब हैं। इसकी वजह तीन मानसूनी सिस्टम हैं। इनके कारण अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से बड़ी मात्रा में नमी आ रही है।

भोपाल में बुधवार को लगातार तीसरे दिन स्कूलों में छुट्टी है। यहां दो दिनों में 8.57 इंच बारिश हुई। करीब 200 मकानों में ढाई फीट तक पानी भर गया। रतलाम, झाबुआ, धार, बड़वानी और इंदौर में अगले 24 घंटे में यहां 4 इंच से ज्यादा बारिश का अनुमान है।

उधर, राजस्थान में खोखी बांध की दीवार टूटने से 300 बीघा फसल खराब हो गई है। कोटा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे की टनल के एक हिस्से में दो-तीन फीट तक पानी भरा हुआ है।

वहीं, उत्तर प्रदेश में पिछले 2 दिनों से भारी बारिश हो रही है। इसके चलते जेवर में बने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मंगलवार को पानी भर गया था। इसका वीडियो आज सामने आया है। वाराणसी में घाटों की सीढ़ियों तक पानी पहुंच गया है। 100 से ज्यादा छोटे मंदिर डूब गए हैं।

सैटेलाइट मैप में देखें मानसूनी बादलों की स्थिति

देशभर से मौसम की तस्वीरें

मध्य प्रदेश में पिछले तीन दिनों से बारिश हो रही है। वहीं, शिवपुरी में NH-46 पर करीब एक फीट तक पानी भर गया। इससे काफी देर तक जाम लगा रहा। प्रदेश में अब तक 19.6 इंच बारिश हो चुकी है।

मध्य प्रदेश में पिछले तीन दिनों से बारिश हो रही है। वहीं, शिवपुरी में NH-46 पर करीब एक फीट तक पानी भर गया। इससे काफी देर तक जाम लगा रहा। प्रदेश में अब तक 19.6 इंच बारिश हो चुकी है।

राजस्थान में पिछले 3 दिनों से भारी बारिश हो रही है। इसके चलते कोटा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की टनल में पानी भर गया है। इस वजह से बुधवार सुबह से यहां लंबा जाम लगा हुआ है। पिछले दो दिनों से ट्रैफिक रेंग-रेंगकर चल रहा है।

राजस्थान में पिछले 3 दिनों से भारी बारिश हो रही है। इसके चलते कोटा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की टनल में पानी भर गया है। इस वजह से बुधवार सुबह से यहां लंबा जाम लगा हुआ है। पिछले दो दिनों से ट्रैफिक रेंग-रेंगकर चल रहा है।

उत्तर प्रदेश के नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बारिश के बाद पानी भर गया था। एयरपोर्ट अथॉरिटी के मुताबिक, इससे फ्लाइट ऑपरेशन और यात्रियों की आवाजाही पर कोई असर नहीं पड़ा। घटना मंगलवार की है, जिसका वीडियो अब वायरल हो रहा है।

उत्तर प्रदेश के नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बारिश के बाद पानी भर गया था। एयरपोर्ट अथॉरिटी के मुताबिक, इससे फ्लाइट ऑपरेशन और यात्रियों की आवाजाही पर कोई असर नहीं पड़ा। घटना मंगलवार की है, जिसका वीडियो अब वायरल हो रहा है।

मुंबई में कुर्ला के अशोक नगर इलाके में बुधवार सुबह 3 बजे गौसिया चॉल के पास बारिश की वजह से मिट्टी का बड़ा हिस्सा गिर गया। इसकी चपेट में दो-तीन घर आ गए। महाराष्ट्र के कई इलाकों में 24 घंटे से बारिश हो रही है।

मुंबई में कुर्ला के अशोक नगर इलाके में बुधवार सुबह 3 बजे गौसिया चॉल के पास बारिश की वजह से मिट्टी का बड़ा हिस्सा गिर गया। इसकी चपेट में दो-तीन घर आ गए। महाराष्ट्र के कई इलाकों में 24 घंटे से बारिश हो रही है।

उत्तराखंड के चमोली की नीति घाटी में दो दिन पहले बादल फटने से तमक नाला उफान पर आ गया था। तेज बहाव में 17 टन स्टील से बना वैली ब्रिज बह गया। अब नाले पर अस्थायी ब्रिज बनाने का काम किया जा रहा है।

उत्तराखंड के चमोली की नीति घाटी में दो दिन पहले बादल फटने से तमक नाला उफान पर आ गया था। तेज बहाव में 17 टन स्टील से बना वैली ब्रिज बह गया। अब नाले पर अस्थायी ब्रिज बनाने का काम किया जा रहा है।

हिमाचल के शिमला-धर्मशाला NH-205 पर भराड़ीघाट के पास मंगलवार को चलती कार पर बड़ी चट्टान गिर गई। हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि 2 लोग घायल हो गए। राज्य में लैंडस्लाइड से अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है।

हिमाचल के शिमला-धर्मशाला NH-205 पर भराड़ीघाट के पास मंगलवार को चलती कार पर बड़ी चट्टान गिर गई। हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि 2 लोग घायल हो गए। राज्य में लैंडस्लाइड से अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है।

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टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का इस्तीफा:फरवरी 2027 तक जिम्मेदारी संभालते रहेंगे, नोएल टाटा से मतभेद, ट्रस्ट में खींचतान बनी वजह

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मुंबई, एजेंसी। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने आज 12 अगस्त को इस्तीफा दे दिया है। उनका इस्तीफा 18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की एजीएम से ठीक पहले आया है। हालांकि, वे फरवरी 2027 तक पद पर बने रहेंगे।

चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल को लेकर टाटा ट्रस्ट्स के साथ सहमति नहीं बन पाई थी। नए कारोबारों में भारी निवेश, उनके प्रदर्शन और टाटा संस के भविष्य को लेकर मतभेद इस फैसले की बड़ी वजह बने।

एन चंद्रशेखरन के इस्तीफे की खबर के बाद टाटा ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में गिरावट है। टीसीएस, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील और टाटा कंज्यूमर के शेयर 3% तक नीचे हैं।

चंद्रशेखरन ने इस्तीफा देते हुए क्या कहा

चंद्रशेखरन ने कहा कि, “टाटा संस के चेयरमैन के रूप में मेरा मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को खत्म हो रहा है। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास करके मेरे अगले 5 साल के कार्यकाल के विस्तार की सिफारिश की थी।

इसे टाटा संस की नॉमिनेशन एंड रेमुनरेशन कमेटी और बोर्ड ने दर्ज किया था और आगे बढ़ाने की सिफारिश की थी। इसके बाद, यह प्रस्ताव 24 फरवरी 2026 को टाटा संस बोर्ड के सामने रखा गया था।

हालांकि, यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका क्योंकि बोर्ड के एक सदस्य ने इसका समर्थन नहीं किया। सर्वसम्मत समर्थन न मिलने की वजह से मैंने इस फैसले को टालने का विकल्प चुना। उस बोर्ड मीटिंग को हुए 6 महीने बीत चुके हैं और आज तक कोई फैसला नहीं हो पाया है।

टाटा संस एक बहुत बड़ा संस्थान है और कई बड़े रणनीतिक प्रोजेक्ट्स अभी अहम मोड़ पर हैं। फरवरी 2027 के बाद ग्रुप की अगुआई करने के लिए न सिर्फ एक लीडर का होना जरूरी है, बल्कि कर्मचारियों, निवेशकों, पार्टनर्स और बाकी स्टेकहोल्डर्स के लिए लीडरशिप को लेकर स्पष्टता होना भी बहुत जरूरी है।”

इस्तीफे की 4 बड़ी वजह

चंद्रशेखरन का कार्यकाल बढ़ाने पर मतभेद

फरवरी 2026 में टाटा संस बोर्ड ने चंद्रशेखरन के अगले 5 साल के कार्यकाल की सिफारिश की थी। बाद में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने इसका विरोध किया और सिर्फ 2 साल का कार्यकाल देने की वकालत की।

24 फरवरी 2026 को 5 साल के विस्तार का प्रस्ताव बोर्ड के सामने रखा गया। एक सदस्य के समर्थन न देने से इस पर सहमति नहीं बन सकी है।

नए कारोबारों के प्रदर्शन पर सवाल

चंद्रशेखरन के कार्यकाल में टाटा ग्रुप ने एविएशन, डिजिटल कारोबार, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और बैटरी जैसे नए क्षेत्रों में बड़े निवेश किए। इनमें से कुछ कारोबार अभी घाटे में हैं।

एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस को FY26 में कुल रू.22,238 करोड़ का घाटा हुआ, जबकि टाटा डिजिटल का घाटा रू.4,974 करोड़ रहा। इन्हीं मुद्दों पर नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन के प्रदर्शन को लेकर आपत्ति जताई थी।

टाटा संस की लिस्टिंग हो या नहीं

टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट किया जाए या निजी कंपनी ही रखा जाए, इस पर टाटा ट्रस्ट्स के अंदर अलग-अलग राय सामने आई। नोएल टाटा लिस्टिंग के पक्ष में नहीं बताए जाते हैं, जबकि कुछ ट्रस्टी लिस्टिंग की वकालत कर चुके हैं।

टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच तालमेल

टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66% हिस्सेदारी है, इसलिए दोनों के बीच बड़े फैसलों पर सहमति बेहद अहम है। नए कारोबारों की रणनीति, निवेश और चंद्रशेखरन के कार्यकाल को लेकर मतभेदों से दोनों के बीच तालमेल का सवाल भी सामने आया।

चंद्रशेखरन का 9 साल का सफर: रेवेन्यू रू.16.24 लाख करोड़ पहुंचा

चंद्रशेखरन के 2017 में कमान संभालने के बाद टाटा ग्रुप का दायरा काफी बढ़ा है। चंद्रशेखरन ने ग्रुप को एविएशन, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, बैटरी और डिजिटल बिजनेस जैसे नए क्षेत्रों में उतारा।

  • रेवेन्यू: वित्त वर्ष 2020 में ग्रुप का रेवेन्यू रू.7.89 लाख करोड़ था, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर रू.16.24 लाख करोड़ हो गया।
  • मुनाफा: ग्रुप का मुनाफा रू.32,000 करोड़ से बढ़कर रू.1.71 लाख करोड़ हो गया।
  • मार्केट कैप: लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 2020 के रू.9.31 लाख करोड़ से बढ़कर 2026 में रू.24.39 लाख करोड़ पहुंच गया।

टाटा ग्रुप, टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स में फर्क

  • टाटा ग्रुपः टाटा नाम से चलने वाली अलग-अलग कंपनियों और कारोबारों को मिलाकर टाटा ग्रुप बनता है। जैसे- टीसीएस, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा पावर और एअर इंडिया।
  • टाटा संसः टाटा संस, टाटा ग्रुप की मुख्य कंपनी है। यह ग्रुप की बड़ी कंपनियों में हिस्सेदारी रखती है और बड़े फैसलों में अहम भूमिका निभाती है।
  • टाटा ट्रस्ट्सः टाटा ट्रस्ट्स सामाजिक और परोपकारी काम करने वाले ट्रस्टों का समूह है। इसके पास टाटा संस की करीब 66% हिस्सेदारी है।

कैसे चुना जाएगा नया चैयरमैन

टाटा संस के चेयरमैन को चुनने की प्रक्रिया में पहले चयनसमिति उम्मीदवारों पर विचार करती है। इस समिति में टाटा ट्रस्ट्स की ओर से नामित सदस्य, टाटा संस बोर्ड का एक सदस्य और एक स्वतंत्र बाहरी सदस्य शामिल होते हैं।

समिति उम्मीदवार के नाम की सिफारिश टाटा संस के बोर्ड से करती है। बोर्ड उम्मीदवार की योग्यता और ग्रुप की जरूरतों को देखते हुए अंतिम नियुक्ति का फैसला करता है। अगर मौजूदा चेयरमैन को ही जारी रखना हो, तो उनके कार्यकाल के विस्तार पर भी इसी प्रक्रिया के तहत फैसला होता है।

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खुदरा महंगाई लगातार सातवें महीने बढ़ी, खाने-पीने की चीजें महंगी:जुलाई में 4.45% रही, दूसरे महीने RBI के 4% के अनुमान से ज्यादा

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मुंबई, एजेंसी। आलू-प्याज जैसे खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने से रिटेल महंगाई लगातार सातवें महीने बढ़ी है। जुलाई में यह 4.45% रही। एक महीने पहले जून में यह 4.38% पर थी। आज 12 अगस्त को रिटेल महंगाई के आंकड़े जारी किए गए हैं।

खाने-पीने के सामानों की महंगाई यानी फूड इंफ्लेशन जुलाई में बढ़कर 5.52% पर पहुंच गई है। जून में यह आंकड़ा 5.32% पर था।

RBI के 4% टारगेट से लगातार दूसरे महीने ऊपर

रिजर्व बैंक ने रिटेल महंगाई दर का लक्ष्य 4% तय किया है। यह लगातार दूसरा महीना होगा जब रिटेल महंगाई आरबीआई के तय कम्फर्ट जोन 4% से ऊपर दर्ज की गई है।

महंगाई कैसे बढ़ती-घटती है?

महंगाई का बढ़ना-घटना प्रोडक्ट की डिमांड-सप्लाई पर निर्भर करता है। अगर लोगों के पास पैसे ज्यादा होंगे तो वे ज्यादा चीजें खरीदेंगे। इससे चीजों की डिमांड बढ़ेगी और सप्लाई नहीं होने पर इनकी कीमत बढ़ेगी। वहीं अगर डिमांड कम होगी और सप्लाई ज्यादा तो महंगाई कम होगी।

4.45% महंगाई दर का क्या मतलब है?

1. तुलना पिछले साल से होती है (साल-दर-साल)

जब हम कहते हैं कि जूलाई 2026 में महंगाई 4.45% है, तो इसका मतलब है कि हम इसकी तुलना जुलाई 2025 से कर रहे हैं। यह पूरे एक साल का बदलाव है। 4.45% एक औसत नंबर है जिसे ‘कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स’ कहते हैं। इसमें आपके जीवन की सैकड़ों चीजें शामिल हैं:

  • किसी चीज के दाम बहुत ज्यादा बढ़े होंगे।
  • किसी चीज के दाम घटे भी होंगे।
  • जब इन सबको एक साथ मिलाया गया, तो औसतन खर्च 4.45% बढ़ गया।

2. रू.100 की चीज अब रू.104.45 की हो गई

इसका गणित बहुत सीधा है। अगर जुलाई 2025 में आपने कोई सामान जैसे राशन रू.100 में खरीदा था, तो वही सामान जुलाई 2026 में रू.104.45 का हो गया है।

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