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कोरबा

SECL कुसमुंडा प्रबंधन की वादाखिलाफी पर गेवरा ग्रामीणों का बड़ा आक्रोश, 11 साल बाद भी न विस्थापन न मुआवज़ा

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कोरबा/कुसमुंडा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) कुसमुंडा प्रबंधन की उदासीनता और कथित वादाखिलाफी के ख़िलाफ़ कोरबा जिले के गेवरा ग्राम के ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है ग्रामीणों ने SECL कुसमुंडा प्रबंधन को एक सख्त ज्ञापन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है ।

​ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2015 में इंदिरा स्टेडियम कुसमुंडा में आयोजित जनसुनवाई में प्रबंधन ने स्पष्ट रूप से घोषणा की थी कि गेवरा ग्राम का विस्थापन वैशालीनगर – खमरिया ग्राम में किया जाएगा इस सार्वजनिक घोषणा को 11 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन दुर्भाग्यवश आज तक न तो विस्थापन की प्रक्रिया शुरू की गई है न ही महत्वपूर्ण DRCC बैठक बुलाई गई है और न ही ग्रामीणों को उनका वैध मुआवज़ा प्रदान किया गया है ।

​जनता के साथ सरासर धोखा

​ग्रामीणों ने SECL प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि गेवरा ग्राम को जानबूझकर पीछे धकेलते हुए जरहाजेल डंपिंग और बरमपुर डंपिंग जैसी अन्य परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है, ग्रामीणों ने इसे जनसुनवाई में किए गए वादों का खुला उल्लंघन और ग्रामवासियों के साथ घोर अन्याय बताया है।
​ग्रामीणों के अनुसार यह अनदेखी दर्शाती है कि उन्हें जानबूझकर परियोजना से बाहर करने की कोशिश की जा रही है जो कि सरासर धोखा है ।

​ग्रामीणों की तीन सूत्रीय तत्काल मांगें

​ग्रामीणों ने SECL प्रबंधन को स्पष्ट करते हुए निम्नलिखित तीन सूत्रीय मांगों को तुरंत पूरा करने की मांग की है:-

  1. ​तत्काल DRCC बैठक:- गेवरा ग्राम के विस्थापन और मुआवज़े पर अंतिम निर्णय लेने हेतु DRCC Meeting अविलंब आयोजित की जाए ।
  2. ​समान प्राथमिकता:- गेवरा ग्राम को जरहाजेल डंपिंग और बरमपुर डंपिंग के समान स्तर पर विस्थापन प्रक्रिया में तुरंत शामिल किया जाए ।
  3. ​11 साल का मुआवज़ा:- 11 वर्षों से लंबित उनके वैध मुआवज़े का तत्काल और पूर्ण भुगतान सुनिश्चित किया जाए ।

​आंदोलन की चेतावनी

​ज्ञापन के अंत में ग्रामीणों ने SECL कुसमुंडा प्रबंधन को कड़ी चेतावनी दी है उनका कहना है कि यदि प्रबंधन ने इन महत्वपूर्ण मांगों पर जल्द से जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं की तो गेवरा के ग्रामीण एक होकर बड़े स्तर पर और निर्णायक आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे ।

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कोरबा

बच्चों की सुरक्षा, उज्जवल भविष्य और जागरूकता का संदेश-कोरबा में सुरक्षित बचपन की पहल

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कोरबा 31 अक्टूबर 2026। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के निर्देशन में लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (पॉक्सो अधिनियम) के संबंध में अखिल भारतीय विद्यालय जागरूकता अभियान “सुरक्षित बचपन अभियान” के प्रथम चरण का आयोजन दिनांक 26 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक किया जा रहा है। उक्त के परिपालन में आयोजित शिविर में सुश्री सीमा प्रताप चन्द्रा, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश (एफ.टी.सी.) कोरबा के द्वारा सरस्वती शिशु मंदिर, हायर सेकेण्डरी स्कूल(सी.एस.ई.बी.) कोरबा में सम्मिलित होकर उनके द्वारा बच्चों को जागरूक करते हुए कहा गया कि बच्चों को न केवल अनजान व्यक्तियों से सतर्क रहना चाहिए, बल्कि किसी परिचित व्यक्ति, पड़ोसी अथवा रिश्तेदार पर भी आँख बंद करके विश्वास नहीं करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति उन्हें किसी प्रकार का लालच देकर, बहला-फुसलाकर अथवा किसी अन्य प्रलोभन के माध्यम से अपने साथ चलने के लिए कहता है, तो वे उसके साथ न जाएँ। बच्चों को अपनी सुरक्षा के प्रति सदैव सजग रहना चाहिए तथा किसी भी असहज या संदिग्ध परिस्थिति में तत्काल अपने माता-पिता, शिक्षक अथवा किसी विश्वसनीय व्यक्ति को इसकी जानकारी देनी चाहिए, बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है तथा उनकी सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए जागरूकता और सतर्कता अत्यंत आवश्यक है। इसी कड़ी में उन्होंने यह भी कहा कि माता-पिता द्वारा बच्चों को डाँटना उनके प्रति चिंता, स्नेह एवं उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए आर्शिवाद स्वरूप है। बच्चों को माता-पिता की बातों को सकारात्मक रूप से समझना चाहिए तथा किसी भी परिस्थिति में निराश होकर गलत कदम के बारे में नहीं सोचना चाहिए। जीवन अनमोल है और जीवन में आने वाली कठिनाइयों का सामना धैर्य एवं साहस के साथ करना चाहिए। उन्होने बताया कि 16-17 वर्ष की आयु जीवन का अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ाव होता है। इस उम्र में प्रेम-प्रसंग जैसे रिश्तों के चलते घर से अन्यत्र किसी के साथ चले जाना कई बार अनजाने में कानूनी समस्याओं एवं आपराधिक प्रकरणों का कारण बन सकता है। उन्होंने कहा कि यह उम्र प्रेम-प्रसंग में पड़कर अपने भविष्य को प्रभावित करने की नहीं, बल्कि शिक्षा प्राप्त करने, अपने लक्ष्य निर्धारित करने एवं अपने सुनहरे भविष्य के निर्माण की है। बच्चों को भावनाओं में बहकर कोई भी ऐसा कदम नहीं उठाना चाहिए, जिससे उनका भविष्य प्रभावित हो।
जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश ने बच्चों को शुभकामनाएँ व्यक्त करते हुए कहा कि कोरबा जिले में बच्चों से संबंधित या पॉक्सो अधिनियम संबंधित एक भी मामला सामने न आए तथा किसी भी परिवार को किसी प्रकार के हृदय विदारक घटना का सामना न करना पड़े।

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कोरबा

एन.के.एम. लायंस पब्लिक स्कूल, मडवारानी में 13 – बटालियन कोरबा की शस्त्र प्रदर्शनी ने विद्यार्थियों में जगाई देशभक्ति की भावना

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कोरबा/मडवारानी, 30 अक्टूबर 2026। एन.के.एम. लायंस पब्लिक स्कूल, मडवारानी में आज 13 – बटालियन, कोरबा के सौजन्य से शस्त्र प्रदर्शनी एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को सुरक्षा बलों की भूमिका, अनुशासन, राष्ट्रसेवा और देशभक्ति के महत्व से परिचित कराना था।

इस अवसर पर राकेश शर्मा (कमांडेंट), ओम चंदेल एवं मयंक तिवारी (उप कमांडेंट), विकास कुजूर एवं राम बहादुर शर्मा (सहायक कमांडेंट), शिव कुमार पांडे (कंपनी कमांडर), मदन मोहन ओझा (सूबेदार मेजर) तथा आर. एस. पटेल (प्रभारी स्टेनो) प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में शस्त्र प्रदर्शनी लगाई गई, जिसमें अधिकारियों ने विद्यार्थियों को विभिन्न प्रकार के शस्त्रों, उनके उपयोग एवं सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्रदान कीं।

इस अवसर पर कक्षा पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों के लिए चित्रकला प्रतियोगिता तथा कक्षा नौवीं से बारहवीं तक के विद्यार्थियों के लिए निबंध लेखन प्रतियोगिता आयोजित की गई। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को अधिकारियों द्वारा पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया।
विद्यालय के अध्यक्ष पी.एम.जे.एफ. लायन डॉ. राजकुमार अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में अनुशासन, साहस, देशभक्ति और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करते हैं। उन्होंने सुरक्षा बलों के त्याग एवं समर्पण को विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य सुभाष चंद्र आनंद ने भी अपने उद्बोधन में सभी अधिकारियों का स्वागत एवं आभार व्यक्त किया। उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ अनुशासन, नैतिक मूल्यों और राष्ट्रप्रेम को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी।
अंत में विद्यालय परिवार की ओर से 13 – बटालियन, कोरबा के सभी अधिकारियों के प्रति उनके बहुमूल्य समय, मार्गदर्शन एवं सहयोग के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम उत्साहपूर्ण एवं प्रेरणादायक वातावरण में संपन्न हुआ।

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कोरबा

आदिवासी किसान के खाते से 2.35 लाख रुपये गायब होने का आरोप, भाजपा नेता राजेश यादव ने खोला मोर्चा

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मुख्यमंत्री से उच्चस्तरीय जांच की मांग, बोले– किसान को न्याय नहीं मिला तो करेंगे आंदोलन

बिलासपुर/कोटा/कोरबा। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित, शाखा कोटा में एक आदिवासी किसान के बैंक खाते से कथित तौर पर बिना जानकारी और सहमति के रू.2,35,500 की राशि निकाले जाने का गंभीर मामला सामने आया है। मामले को लेकर भाजपा झुग्गी-झोपड़ी प्रकोष्ठ के प्रदेश सह-संयोजक एवं बिलासपुर संभाग प्रभारी राजेश यादव ने कड़ी नाराजगी जताते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है।

प्राप्त शिकायत के अनुसार, पीड़ित किसान न्याय मूर्ति सिंह पिता गजेन्द्र पाल सिंह, निवासी ग्राम मानिकपुर, पोस्ट केन्दा, तहसील कोटा का जिला सहकारी बैंक कोटा में बचत खाता है। किसान ने केन्दा धान खरीदी केंद्र में धान बेचा था, जिसकी राशि उसके बैंक खाते में जमा हुई थी।

दो अलग-अलग तारीखों में राशि निकाले जाने का आरोप

किसान का आरोप है कि 5 मार्च 2026 को उसके खाते से रू.55,500 की राशि निकाल ली गई। इसकी जानकारी मिलने पर जब उसने संबंधित लोगों से पूछताछ की तो राशि गलती से निकल जाने और वापस करने की बात कही गई, लेकिन अब तक रकम वापस नहीं मिली।

इसी तरह 6 मई 2026 को किसान द्वारा किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के तहत लिए गए ₹2 लाख के ऋण में से ₹1,80,000 की राशि भी कथित तौर पर उसकी जानकारी और सहमति के बिना निकाल ली गई। किसान ने संबंधित कर्मचारियों से जवाब मांगा, लेकिन उसे संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

राजेश यादव ने मुख्यमंत्री से की शिकायत

काफी समय से न्याय के लिए भटक रहे आदिवासी किसान ने भाजपा नेता राजेश यादव से मुलाकात कर अपनी समस्या बताई। राजेश यादव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री से शिकायत कर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

उन्होंने मांग की है कि बैंक के भुगतान वाउचर, निकासी रजिस्टर, चेक, हस्ताक्षर एवं अन्य वित्तीय अभिलेखों की जांच कराई जाए। संबंधित अवधि के CCTV फुटेज सुरक्षित कर उनकी जांच हो तथा आवश्यकता पड़ने पर हस्ताक्षरों की फोरेंसिक जांच कराई जाए। यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके विरुद्ध FIR सहित कठोर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही किसान की पूरी ₹2,35,500 की राशि ब्याज सहित वापस दिलाई जाए।

किसान को न्याय नहीं मिला तो करेंगे आंदोलन – राजेश यादव

भाजपा नेता राजेश यादव ने कहा कि एक आदिवासी किसान की मेहनत की कमाई और खेती के लिए लिए गए ऋण की राशि इस तरह कथित रूप से निकाल लिया जाना अत्यंत गंभीर विषय है। किसानों और आदिवासी समाज के लोगों के हितों की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है। किसान अपनी मेहनत से देश का पेट भरता है, उसके साथ किसी भी प्रकार का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “पीड़ित किसान को हर हाल में न्याय मिलना चाहिए। उसकी पूरी राशि वापस दिलाई जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो। यदि जांच में देरी की गई या किसान को न्याय नहीं मिला तो किसानों के हित में हम आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।”

इस मामले की प्रतिलिपि उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री, सहकारिता मंत्री, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष, पुलिस अधीक्षक बिलासपुर तथा जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को भी भेजी गई है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस गंभीर शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है।

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