कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और एकला चलो की राजनीति विधायक केरकेट्टा को महंगा पड़ा, कटी टिकिट कोरबा। पाली तानाखार विधायक मोहितराम केरकेट्टा को कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और एकला चलो की राजनीति महंगी पड़ गई। पांच साल तक लोगों से जनसंपर्क नहीं रखा और निष्क्रियता के कारण प्रदेश कांग्रेस ने केरकेट्टा की टिकिट काटकर जनपद पंचायत पाली की जनपद अध्यक्ष श्रीमती दुलेश्वरी सिदार को अपना प्रत्याशी बनाया है। यहां यह बताना लाजिमी होगा कि केन्द्र सरकार ने राजनीति में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का कानून बनाया है, लेकिन प्रदेश कांग्रेस ने इसे इसी विधानसभा में फालो किया है। हर लोकसभा क्षेत्र से दो महिलाओं को टिकिट देने का फैसला किया है।
कोरबा लोकसभा क्षेत्र में आठ विधानसभा क्षेत्र आते हैं, जिसमें कोरबा जिले में चार विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं और इन चार विधानसभा क्षेत्र में पाली-तानाखार से महिला प्रत्याशी के रूप में श्रीमती सिदार को उतारा गया है। पाली तानाखार विधानसभा क्षेत्र में इस बार महिला मतदाताओं की संख्या पुरूषों से अधिक है, महिला प्रत्याशी होने के कारण इस बार दुलेश्वरी सिदार को इसका लाभ मिल सकता है। उधर केरकेट्टा की टिकि ट कटने से सभी ब्लाक अध्यक्ष सहित कांग्रेसजन काफी खुश हैं और ऐतिहासिक जिताऊ प्रत्याशी श्रीमती दुलेश्वरी सिदार को टिकिट मिलने से सभी एकजुट हो गए हैं और ऐतिहासिक जीत के लिए सभी ने संकल्प लिया है।
40 हजार की लीड से जीत का लक्ष्य कांग्रेसजनों ने रखा है। प्रदेश महासचिव प्रशांत मिश्रा ने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सभी कांग्रेसियों को एकजुट होकर काम करने की अपील की है और कहा है कि हमारा विधायक होने के साथ-साथ इस बार फिर छत्तीसगढ़ के विकास को ऊंचाई तक पहुंचाने और विकसित छत्तीसगढ़ की संकल्पना को आगे ले जाने के लिए कांग्रेस सरकार की वापसी जरूरी है। हम मिलजुलकर सत्ता वापसी के लिए काम करें। उन्होंने आम जनता से भी अपील की है कि श्रीमती दुलेश्वरी सिदार घर की ही बेटी-बहू है और इस पर अपना आशीर्वाद दें, ताकि क्षेत्र का विकास आगे बढ़ सके। मोहित केरकेट्टा की टिकिट कटने का यह रहा प्रमुख कारण पाली-तानाखार विधानसभा क्षेत्र के लोगों ने मोहित केरकेट्टा को इसलिए जिताया था कि वे कार्यकर्ताओं को साथ लेकर क्षेत्र का विकास करें, लेकिन बीत पांच साल में केरकेट्टा ने जिताने वाले कार्यकर्ताओं की ही उपेक्षा कर दी। वरिष्ठ पदाधिकारियों को किसी काम के लिए पूछते तक नहीं, जिसके कारण कई ब्लाक अध्यक्षों ने मोर्चा खोल दिया और केरकेट्टा को इस बार टिकिट न देने की मांग कोरबा प्रवास पर आयीं प्रदेश संगठन प्रभारी कुमारी शैलजा सहित प्रदेश अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री से की थी।
प्रदेश संगठन ने कार्यकर्ताओं का मान रखा और केरकेट्टा के स्थान पर श्रीमती दुलेश्वरी सिदार को मैदान में उतारा। इसके अलावा विधायक बनने का दम्भ केरकेट्टा में दिखा और जनता के सुख-दुख में शामिल होने के बजाय पांच साल एशो-आराम में बिता दिया और क्षेत्र के विकास में भी पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। स्वेच्छानुदान की राशि का बंदरबाट कर दिया। मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान की राशि सैकड़ों लोगों को 15-15 हजार देकर उनसे अवैध वसूली की शिकायत भी थी।
अपने कार्यकर्ताओं को काम देने के एवज में उनसे अवैध वसूली करते रहे, इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ और दिव्य आकाश सहित कई राष्ट्रीय चैनलों एवं अखबारों में सुर्खियां बनी रही। इसके अलावा विधायक मद की राशि को उन्हीं लोगों को विकास के लिए दिया जो बड़ी रकम कमीशन के तौर पर दिया, इसकी भी शिकायत ऊपर संगठन तक पहुंची। इसके अलावा कई अन्य कारण भी हैं जिसके कारण केरकेट्टा की टिकिट कटी।