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छत्तीसगढ़

प्रेमी की मौत की खबर मिलते प्रेमिका ने लगाई फांसी:जिस पेड़ पर लटका था प्रेमी, 2 दिन बाद उसी पर फंदे से झूली प्रेमिका

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जांजगीर-चांपा। जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम धाराशिव में प्रेमी-प्रेमिका ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। विष्णुकांत पुरी (40) शादीशुदा था। उसका लीलाबाई सूर्यवंशी (27) से प्रेम संबंध था। साथ रहने को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ, जिसके बाद युवती ने उसके खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।

इस घटना के बाद प्रेमी ने पेड़ से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। दो दिन बाद लीलाबाई को इसकी जानकारी मिली तो उसने भी उसी जगह फंदा लगाकर जान दे दी। मामला पामगढ़ थाना क्षेत्र का है। पुलिस ने दोनों के शव बरामद कर लिए हैं। दोनों के बीच 1 साल से अफेयर था। विष्णुकांत चार बच्चों का पिता था।

एक साल से अधिक समय से था प्रेम संबंध

विष्णुकांत पुरी (40) और लीलाबाई सूर्यवंशी (27) धाराशिव गांव में रहते थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दोनों के बीच पिछले एक वर्ष से अधिक समय से प्रेम संबंध था। पुलिस के मुताबिक, विष्णुकांत पहले से शादीशुदा था और उसके चार बच्चे हैं।

जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों के संबंधों को लेकर अक्सर विवाद होता था। जानकारी के अनुसार, लीलाबाई कई बार विष्णुकांत के घर गई थी, जहां उसकी पत्नी के साथ विवाद और मारपीट की घटनाएं भी हुई थीं।

20 जुलाई को दर्ज कराई थी शिकायत

पुलिस के अनुसार, 20 जुलाई को लीलाबाई ने विष्णुकांत के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के बाद जब पुलिस युवक के घर पहुंची तो वह वहां से फरार मिला। इसके बाद से वह लापता था। उसके बाद विष्णुकांत ने लगभग 20 जुलाई को ही खेत में पेड़ से फंदा लगाकर जान दे दी थी। जब उसका शव मिला, तब तक वह काफी हद तक सड़-गल चुका था।

प्रेमी की मौत की जानकारी मिलने के बाद पहुंची युवती

23 जुलाई को जब लीलाबाई को विष्णुकांत की मौत की जानकारी मिली तो वह उसी खेत में पहुंची। इसके बाद उसने भी कथित तौर पर उसी पेड़ की डाल पर फंदा लगाकर अपनी जान दे दी।

सूचना पर पामगढ़ थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पुलिस ने दोनों मामलों में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।

मामला पामगढ़ थाना क्षेत्र का है।

मामला पामगढ़ थाना क्षेत्र का है।

दोनों मामलों की जांच जारी

पामगढ़ थाना पुलिस ने दोनों मामलों में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। शुक्रवार को दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराने के बाद परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

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कोरबा

ग्राम बतरा में अवैध शराब बिक्री की शिकायत पर पुलिस की त्वरित कार्यवाही, जांच में नही पाई गई मद्यपान अथवा अवैध बिक्री की पुष्टि

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कोरबा। ग्राम बतरा महिला समूह द्वारा पुलिस अधीक्षक कोरबा के समक्ष गांव में अवैध शराब बिक्री एवं उसे बंद कराने के संबंध में एक शिकायत पत्र प्रस्तुत किया गया था।
उक्त शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक कोरबा के निर्देशन एवं अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) कटघोरा के मार्गदर्शन में थाना पाली पुलिस टीम द्वारा तत्काल ग्राम बतरा पहुंचकर शिकायत स्थल एवं संदिग्ध ठिकानों पर सघन जांच व रेड की कार्रवाई की गई।

पुलिस टीम द्वारा ग्राम बतरा में मौके पर जाकर की गई जांच एवं मद्यपान (अवैध शराब बिक्री/सेवन) विरोधी कार्यवाही के दौरान स्थल पर कोई भी व्यक्ति शराब पीते या अवैध रूप से शराब बेचते हुए नहीं पाया गया। साथ ही मौके से किसी प्रकार की अवैध शराब या संदिग्ध सामग्री बरामद नहीं हुई।
थाना पाली पुलिस द्वारा गांव के गणमान्य नागरिकों एवं महिला समूह के सदस्यों को आश्वस्त किया गया है कि क्षेत्र में अवैध शराब तथा अन्य असामाजिक गतिविधियों पर पुलिस की कड़ी नजर है। यदि भविष्य में किसी भी प्रकार की अवैध शराब बिक्री या सेवन की सूचना मिलती है, तो संबंधितों के विरुद्ध सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

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कोरबा

एमबीबीएस बैच 2026 के विद्यार्थियों ने ली कैडेवरिक शपथ

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व्हाइट कोट समारोह में चिकित्सा सेवा, नैतिकता और मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पण का संदेश

कोरबा 04 नवम्बर 2026। शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, कोरबा में एमबीबीएस बैच 2026 के नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए व्हाइट कोट एवं कैडेवरिक शपथ समारोह का आयोजन गरिमामय वातावरण में किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. के.के. सहारे, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आनंद मसीह लकड़ा, प्राध्यापकगण एवं विद्यार्थियों के अभिभावक उपस्थित रहे।

व्हाइट कोट समारोह चिकित्सा सेवा के प्रति समर्पण, करुणा और नैतिकता का प्रतीक है। कैडेवरिक शपथ के माध्यम से विद्यार्थियों ने चिकित्सा शिक्षा के प्रथम गुरु देहदाताओं के प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता व्यक्त की।

इस अवसर पर अतिथियों ने विद्यार्थियों को चिकित्सा नैतिकता और मानवीय मूल्यों का पालन करते हुए समर्पण भाव से समाज की सेवा करने के लिए प्रेरित किया। समारोह ने भावी चिकित्सकों की जीवन यात्रा को प्रेरणादायक और यादगार शुरुआत प्रदान की।

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कोरबा

प्रारूप मतदाता सूची में नाम न होने पर पूर्व मतदाता भी भर सकते हैं फॉर्म-6, भारत निर्वाचन आयोग ने जारी किया स्पष्टीकरण

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पूर्व में पंजीकृत मतदाता द्वारा फॉर्म-6 भरने पर नहीं होगी कोई दंडात्मक कार्रवाई

आयोग ने दूर किया संशय – लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत अभियोजन का भय निराधार

कोरबा 04 नवंबर 2026। विशेष गहन पुनरीक्षण  (SIR)  कार्यक्रम के दौरान प्रारूप मतदाता सूची में नाम शामिल न होने की स्थिति में पूर्व मतदाता भी पुनः नाम जुड़वाने के लिए बिना किसी संकोच के फॉर्म-6 भर सकते हैं। भारत निर्वाचन आयोग ने इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए मतदाताओं के असमंजस व संशय को दूर किया है।

संशय और आयोग का स्पष्टीकरण

आयोग के संज्ञान में यह बात आई थी कि कई ऐसे मतदाता, जो पूर्व में पंजीकृत थे लेकिन वर्तमान में प्रकाशित प्रारूप मतदाता सूची में उनका नाम छूट गया है, फॉर्म-6 भरने में झिझक रहे थे। फॉर्म-6 में यह घोषणा (डिक्लेरेशन) देनी होती है कि उनका नाम पहली बार मतदाता सूची में शामिल किया जा रहा है। मतदाताओं को आशंका थी कि पूर्व में पंजीकृत होने के कारण यह घोषणा ‘‘गलत घोषणा ( False Declaration) मानी जाएगी और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत उन पर दंडात्मक या कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
 इस पर स्पष्ट करते हुए आयोग ने कहा है कि- यदि किसी नागरिक का नाम वर्तमान प्रारूप मतदाता सूची में दर्ज नहीं है, तो अंतिम सूची में नाम दर्ज कराने के लिए उसे नए सिरे से फॉर्म-6 प्रस्तुत करना आवश्यक है, भले ही वह पूर्व में मतदाता रहा हो। ऐसी परिस्थिति में केवल इस आधार पर फॉर्म-6 भरना गलत या झूठी घोषणा नहीं माना जाएगा कि आवेदक पहले से पंजीकृत था।

 उच्च न्यायालय के निर्णय का संदर्भ

आयोग का यह रुख दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा याचिका संख्या W.P.¼C½ No.14955/2026 (निलोत्पल दत्ता व अन्य बनाम भारत निर्वाचन आयोग व अन्य, निर्णय दिनांक 14.10.2026) में दिए गए आदेश के अनुरूप है।
अदालत ने स्पष्ट किया था कि इस संदर्भ में गलत घोषणा संबंधी आशंका पूरी तरह निराधार है और ऐसे आवेदक नियमानुसार फॉर्म-6 जमा कर सकते हैं।

 कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी

भारत निर्वाचन आयोग ने सभी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO) को निर्देशित किया है कि केवल इस आधार पर किसी भी आवेदक के विरुद्ध लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत कोई कार्रवाई न की जाए कि उसका नाम पहले की किसी मतदाता सूची में था। आवेदक को केवल यह सुनिश्चित करना होगा कि उसका नाम किसी अन्य संसदीय या विधानसभा क्षेत्र की वर्तमान सूची में पहले से पंजीकृत न हो और आवेदन विधिक नियमों के अनुरूप हो।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी छत्तीसगढ़ ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे वर्तमान प्रारूप मतदाता सूची में अपने नाम की जांच अवश्य करें और नाम न होने पर समय रहते फॉर्म-6 भरकर निर्वाचक नामावली में अपना पंजीकरण सुनिश्चित कराएं।

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