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छत्तीसगढ़

यूथ कांग्रेस नेता ने कहा-छूट नहीं मिली तो तोड़फोड़ करेंगे:बालोद के टोल-प्लाजा में हंगामा, मैनेजर से कहा- कलेक्टर नहीं हो, खड़े होकर बात करो

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बालोद, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बालोद-दल्लीराजहरा मार्ग पर जमही टोल प्लाजा में शुल्क वसूली शुरू होते ही विवाद बढ़ गया है। टोल प्लाजा से युवा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रत्याशी प्रशांत बोकड़े का एक वीडियो सामने आया है। वीडियो में प्रशांत बोकड़े और टोल प्लाजा मैनेजर के बीच बहस होती नजर आ रही है। इस दौरान प्रशांत बोकड़े मैनेजर से कहते हैं कि तुम कलेक्टर नहीं हो, खड़े हो कर बात करो।

प्रशांत आगे कहते हैं कि 72 घंटे के भीतर स्थानीय लोगों को टोल में छूट नहीं दी गई तो टोल प्लाजा पर तोड़फोड़ की जाएगी। इसके लिए भले ही उन्हें दिवाली जेल में मनानी पड़े।

जमही टोल प्लाजा पर रविवार, 25 अक्टूबर से शुल्क वसूली शुरू की गई है। बोकड़े का कहना है कि टोल के आसपास बसे गांवों के लोगों और बालोद-दल्लीराजहरा के बीच रोजाना आने-जाने वालों को भी छूट नहीं मिल रही है। 500 मीटर जाने के लिए भी टोल देना पड़ रहा है। नियमों के अनुसार 20 किमी के दायरे में रहने वाले लोगों को छूट दी जाती है।

बोकड़े ने कहा कि इससे स्थानीय लोगों पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि झलमला से महाराष्ट्र बॉर्डर तक राष्ट्रीय राजमार्ग-930 का काम पूरा नहीं हुआ है। जब सड़क का काम ही पूरा नहीं हुआ तो टोल वसूली कैसे शुरू कर दी गई।

टोल प्लाजा पर शुल्क वसूली शुरू होने के बाद स्थानीय लोगों को राहत देने की मांग।

टोल प्लाजा पर शुल्क वसूली शुरू होने के बाद स्थानीय लोगों को राहत देने की मांग।

टोल प्लाजा पर युवा कांग्रेस नेता प्रशांत बोकड़े और मैनेजर के बीच बहस।

टोल प्लाजा पर युवा कांग्रेस नेता प्रशांत बोकड़े और मैनेजर के बीच बहस।

मैनेजर से बोले- आप IAS-IPS नहीं, खड़े होकर बात कीजिए

टोल प्लाजा पर मैनेजर के साथ बातचीत के दौरान प्रशांत बोकड़े नाराज हो गए। मैनेजर के कुर्सी पर बैठकर बात करने पर उन्होंने आपत्ति जताई। बोकड़े ने कहा, ‘तुम IAS-IPS नहीं हो, जो जनप्रतिनिधियों के सामने कुर्सी पर बैठकर बात कर रहे हो। खड़े होकर बात कीजिए। आप अधिकारी हैं, हम जनप्रतिनिधि हैं। क्या आपके पास इतनी तवज्जो नहीं है? यहां के कलेक्टर हो क्या?’

उन्होंने कहा कि पहले सड़क निर्माण का काम पूरा किया जाना चाहिए, उसके बाद शुल्क वसूली की जानी चाहिए।

मैनेजर से कहा- IAS- IPS नहीं हो खड़े हो कर बात करो।

मैनेजर से कहा- IAS- IPS नहीं हो खड़े हो कर बात करो।

हाईवे इंजीनियर को बुलाने की मांग, अधिकारियों पर लगाए आरोप

टोल मैनेजर से बातचीत के दौरान बोकड़े ने नेशनल हाईवे के इंजीनियर वसीम शेख को मौके पर बुलाने की मांग की। इस दौरान उन्होंने अधिकारी पर भ्रष्टाचार और कमीशन लेने के आरोप लगाए। बोकड़े ने कहा कि कहां है आपका नेशनल हाईवे का इंजीनियर वसीम? आपके वसीम साहब कहां हैं? भ्रष्ट अधिकारी कहां है, बुलाओ।

नेशनल हाईवे के इंजीनियर वसीम शेख को मौके पर बुलाने की मांग की गई।

नेशनल हाईवे के इंजीनियर वसीम शेख को मौके पर बुलाने की मांग की गई।

500 मीटर जाने के लिए भी टोल देना पड़ रहा- बोकड़े

बोकड़े ने कहा कि टोल प्लाजा के दोनों ओर गांव बसे हुए हैं। ऐसे में एक गांव के व्यक्ति को दूसरे गांव में सामान खरीदने जाने के लिए भी टोल देना पड़ रहा है। उन्होंने सवाल किया कि क्या स्थानीय लोगों को एक किलोमीटर या 5-10 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए भी शुल्क देना होगा?

उन्होंने कहा कि आसपास के गांवों और जिले के लोगों को टोल से राहत मिलनी चाहिए। स्थानीय जरूरतों के लिए बार-बार इस मार्ग से गुजरने वालों पर शुल्क का बोझ डालना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने व्यवस्था में तत्काल सुधार करने की मांग की।

बालोद-दल्लीराजहरा मार्ग पर जमही टोल प्लाजा में शुल्क वसूली शुरू हो गई है।

बालोद-दल्लीराजहरा मार्ग पर जमही टोल प्लाजा में शुल्क वसूली शुरू हो गई है।

कांग्रेस नेता बोले- स्थानीय लोगों पर आर्थिक बोझ डालना गलत

दल्लीराजहरा ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष रतिराम कोसमा ने कहा कि बालोद और दल्लीराजहरा के बीच रोजाना सैकड़ों लोग बीएसपी माइंस में काम करने के लिए आते-जाते हैं। आसपास के गांवों के ग्रामीणों को भी दिन में कई बार इस मार्ग से गुजरना पड़ता है। ऐसे में हर बार टोल शुल्क देना उनके लिए आर्थिक नुकसान है।

कोसमा ने कहा कि यह आदिवासी क्षेत्र है। महंगाई के दौर में आर्थिक रूप से कमजोर किसानों और ग्रामीणों पर अतिरिक्त बोझ डालना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, टोल शुरू करने से पहले एनएचएआई और स्थानीय प्रशासन को आसपास के लोगों के लिए छूट की व्यवस्था करनी चाहिए थी।

NHAI अधिकारी बोले- नियमानुसार होगी कार्रवाई

नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के छत्तीसगढ़ प्रोजेक्ट ऑफिसर दिग्विजय सिंह ने कहा कि वे अभी नए आए हैं और मामले की पूरी जानकारी लेने के बाद ही कुछ कह सकेंगे। उन्होंने बताया कि नियमानुसार टोल प्लाजा के 18 से 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले स्थानीय लोगों को छूट मिलती है। इस मामले में सभी तथ्यों की जानकारी लेने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

360 रुपए में मासिक पास बनवा सकेंगे स्थानीय लोग

जिला मुख्यालय से करीब 16 किमी दूर ग्राम जमही के पास बने टोल प्लाजा पर 25 अक्टूबर से शुल्क वसूली शुरू हो चुकी है। इसके तहत कार, जीप और वैन से एक तरफ गुजरने पर 35 रुपए और 24 घंटे के भीतर आने-जाने पर कुल 55 रुपए देने होंगे।

वहीं, टोल प्लाजा से 20 किमी के दायरे में रहने वाले स्थानीय गैर-व्यावसायिक वाहन मालिक 360 रुपए में मासिक पास बनवा सकेंगे।

युवा कांग्रेस नेता प्रशांत बोकड़े के बारे में जानिए

प्रशांत बोकड़े बालोद जिले के दल्लीराजहरा के रहने वाले है। युवा कांग्रेस के प्रमुख नेता हैं। वे बालोद जिले के युवा कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वर्तमान में छत्तीसगढ़ प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष पद के दावेदारों में से एक हैं।

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छत्तीसगढ़

फिल्म-सिटी के लिए पेड़ों की कटाई फिर शुरू:रायपुर में पेड़ से लिपटे ग्रामीणों को पुलिस थाने ले गई, कांग्रेस ने घेराव किया

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रायपुर, एजेंसी। नवा रायपुर के माना-तूता में बन रही चित्रोत्पला फिल्म सिटी के लिए जंगल में पेड़ों की कटाई फिर शुरू हो गई है। कटाई के दौरान ग्रामीण पेड़ों से लिपटकर रोकने की कोशिश करने लगे। इस दौरान ग्रामीणों को रोकने पहुंची पुलिस के साथ झूमाझटकी हुई। इसका वीडियो भी सामने आया है।

विरोध कर रहे 10 ग्रामीणों को पुलिस माना थाने ले गई। इसकी जानकारी मिलने पर शहर जिला कांग्रेस और ग्रामीण कांग्रेस के अध्यक्ष समेत बड़ी संख्या में कांग्रेसी थाने पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों को थाने ले जाने के विरोध में घेराव किया। घेराव के करीब 1 घंटे बाद पुलिस ने ग्रामीणों को छोड़ दिया।

दरअसल, मंगलवार को पेड़ काटे जाने की जानकारी मिलने पर ग्रामीण मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने कटाई रोकने की मांग की थी। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी इसका विरोध किया था। विरोध के बाद पेड़ों की कटाई रोक दी गई थी, लेकिन अब दोबारा कटाई तेज कर दी गई है।

इधर, स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर पेड़ों की कटाई जारी रही, तो वे फिर से इसका विरोध करेंगे।

चित्रोत्पला फिल्म सिटी के लिए पेड़ों की कटाई की जा रही थी।

चित्रोत्पला फिल्म सिटी के लिए पेड़ों की कटाई की जा रही थी।

मौके पर पहुंचे ग्रामीणों पेड़ कटाई का विरोध किया था। इसके बाद कटाई पर रोक लगा दी गई थी।

मौके पर पहुंचे ग्रामीणों पेड़ कटाई का विरोध किया था। इसके बाद कटाई पर रोक लगा दी गई थी।

दोबारा पेड़ कटाई शुरू होने पर ग्रामीण पेड़ों से लिपट गए।

दोबारा पेड़ कटाई शुरू होने पर ग्रामीण पेड़ों से लिपट गए।

विरोध कर रहे ग्रामीणों का पुलिस थाने ले गई।

विरोध कर रहे ग्रामीणों का पुलिस थाने ले गई।

कांग्रेसियों ने माना थाने का घेराव किया। इस दौरान वे धरने पर बैठ गए।

कांग्रेसियों ने माना थाने का घेराव किया। इस दौरान वे धरने पर बैठ गए।

ग्रामीण बोले- 30 से 40 साल पुराने हैं पेड़

ग्रामीणों का कहना है कि फिल्म सिटी का निर्माण करीब 100 एकड़ क्षेत्र में किया जा रहा है। इसके लिए बड़ी संख्या में पेड़ काटे जाने की आशंका है। जंगल में काटे जा रहे पेड़ करीब 30 से 40 साल पुराने हैं। एक पेड़ को बड़ा होने में कई साल लग जाते हैं। ऐसे में पुराने पेड़ों को काटना पर्यावरण के लिहाज से सही नहीं है।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें विकास कार्यों से परेशानी नहीं है, लेकिन इसके लिए जंगल के पुराने पेड़ों को नहीं काटना चाहिए। उनकी मांग है कि फिल्म सिटी के लिए नवा रायपुर में किसी दूसरे स्थान का चयन किया जाए

मौके पर पुलिस की टीम भी मौजूद रही।

मौके पर पुलिस की टीम भी मौजूद रही।

क्या है चित्रोत्पला फिल्म सिटी परियोजना?

नवा रायपुर के माना-तूता क्षेत्र में चित्रोत्पला फिल्म सिटी और ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 24 जनवरी 2026 को इस परियोजना का भूमिपूजन किया था। इसका उद्देश्य छत्तीसगढ़ में फिल्म निर्माण को बढ़ावा देना और राज्य को फिल्मों की शूटिंग के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है।

परियोजना के तहत फिल्म सिटी के लिए 95.79 करोड़ रुपए और ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के लिए 52.03 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। दोनों परियोजनाओं को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर विकसित करने की योजना है। इसमें निजी क्षेत्र से करीब 300 करोड़ रुपए के निवेश की संभावना भी जताई गई है।

फिल्म सिटी में फिल्मों और वेब सीरीज की शूटिंग के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। यहां सड़क, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट जैसे स्थायी सेट तैयार करने की योजना है।

फिल्म सिटी के लिए जंगल में पेड़ों की कटाई फिर शुरू हो गई है।

फिल्म सिटी के लिए जंगल में पेड़ों की कटाई फिर शुरू हो गई है।

फिल्म इंडस्ट्री और पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना

चित्रोत्पला फिल्म सिटी से छत्तीसगढ़ में फिल्म निर्माण, पर्यटन और रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। वहीं, ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर में सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शनियां और अन्य आयोजन किए जाने हैं।

हालांकि, निर्माण के लिए पेड़ों की कटाई को लेकर ग्रामीण विरोध कर रहे हैं। उनकी मांग है कि विकास कार्यों के साथ जंगल और पुराने पेड़ों को भी सुरक्षित रखा जाए।

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छत्तीसगढ़

तूफान अर्नब का असर, 4 जिलों में रेड अलर्ट:90 किमी की रफ्तार से हवाएं चलेंगी, बस्तर के स्कूलों में छुट्टी, 779 राहत शिविर तैयार

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रायपुर, एजेंसी। बंगाल की खाड़ी में एक्टिव चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ का असर मंगलवार यानी आज से छत्तीसगढ़ में दिखने लगेगा। मौसम विभाग ने 28 और 29 अक्टूबर को प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी दी है। चक्रवाती तूफान अर्नब के बुधवार को ओडिशा-आंध्र प्रदेश तट से टकराने की आशंका है।

दक्षिण छत्तीसगढ़ में 60 से 90 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और कुछ जगहों पर 200 मिमी तक बारिश होने की संभावना है। 28 अक्टूबर के लिए चार जिलों में रेड अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, रायपुर समेत कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

चक्रवात ‘अर्नब’ के असर को देखते हुए बस्तर के स्कूलों में कल छुट्टी घोषित कर दी गई है। वहीं इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने किसानों के लिए मौसम आधारित सलाह जारी की है। किसानों को अगले 2 से 4 दिन धान और अन्य फसलों की कटाई रोकने, कटी फसल को सुरक्षित रखने और खेतों में पानी निकासी की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है।

कुछ जगहों पर बारिश, तेज हवा और बिजली गिरने की चेतावनी

मौसम विभाग ने मंगलवार को प्रदेश में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान जताया है। वहीं, एक-दो स्थानों पर भारी बारिश के साथ गरज-चमक, बिजली गिरने और 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है।

अगले दो दिनों में प्रदेश के अधिकांश स्थानों पर मध्यम बारिश हो सकती है। दक्षिण छत्तीसगढ़ में भारी बारिश की आशंका जताई गई है। मध्य छत्तीसगढ़ में भी भारी बारिश हो सकती है।

रायपुर में भी बदलेगा मौसम, दिन में 31 डिग्री तक रहेगा तापमान

रायपुर में बादलों छाए रह सकते हैं। बारिश, गरज-चमक और तेज हवा चलने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, शहर का अधिकतम तापमान करीब 31 डिग्री और न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस रह सकता है।

सोमवार को रायपुर में अधिकतम तापमान 32.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 1.2 डिग्री अधिक था। वहीं, न्यूनतम तापमान 20.1 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 0.3 डिग्री कम था।

अंबिकापुर में सबसे कम 12.9 डिग्री तापमान

प्रदेश में सोमवार को मौसम ड्राई रहा और कहीं भी बारिश दर्ज नहीं की गई। रायपुर में सबसे अधिक 32.4 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ, जबकि अंबिकापुर में न्यूनतम तापमान 12.9 डिग्री सेल्सियस रहा। बिलासपुर में अधिकतम तापमान 32.2 डिग्री, माना एयरपोर्ट में 31.2 डिग्री और जगदलपुर में 31.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

बस्तर संभाग के 4 जिलों में भारी बारिश

मौसम विज्ञानी गायत्री वाणी के मुताबिक, चक्रवात का असर 28 अक्टूबर को दक्षिण और मध्य छत्तीसगढ़ में ज्यादा रहेगा। इसके बाद 29 अक्टूबर को उत्तर-पश्चिम और उत्तर छत्तीसगढ़ के जिलों में बारिश का प्रभाव बढ़ सकता है। आज (मंगलवार) बस्तर संभाग के सुकमा, बस्तर और आसपास के जिलों में भारी बारिश की संभावना है।

दंतेवाड़ा-सुकमा में स्कूलों की छुट्टी, किसानों को भी सलाह

चक्रवात के संभावित असर को देखते हुए दक्षिण बस्तर के दंतेवाड़ा और सुकमा जिले में 28 अक्टूबर को स्कूलों में छुट्टी घोषित की गई है। वहीं, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने किसानों को अगले 2 से 4 दिनों तक धान और दूसरी फसलों की कटाई रोकने की सलाह दी गई है।

जिन किसानों ने फसल काट ली है, उन्हें उपज सुरक्षित रखने और खेतों में पानी निकासी की व्यवस्था करने को कहा गया है, ताकि बारिश से फसलों को नुकसान कम हो।

चक्रवात ‘अर्नब’ से निपटने की तैयारी आज 27 अक्टूबर और कल 28 अक्टूबर को प्रदेश के 12 जिलों में भारी बारिश और तेज हवाएं चलने की आशंका है। इसे देखते हुए सरकार ने राहत और बचाव की तैयारी तेज कर दी है। संवेदनशील गांवों में राहत शिविर, मेडिकल टीम, बचाव दल और कंट्रोल रूम तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।

सोमवार को हुई बैठक के बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने 26 अक्टूबर को चक्रवात से निपटने की कार्ययोजना जारी की। इसके तहत 12 अति संवेदनशील जिलों के 763 बाढ़ प्रभावित गांवों की पहचान की गई है। बाकी 21 जिलों में भी 1,006 संवेदनशील गांवों की पहचान की गई है।

लोगों को सुरक्षित रखने के लिए 779 राहत शिविर तैयार रखे गए हैं। इनमें करीब एक लाख लोगों के ठहरने की व्यवस्था है। जरूरत पड़ने पर लोगों को यहां पहुंचाया जाएगा। गर्भवती महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगों को सुरक्षित निकालने में प्राथमिकता दी जाएगी।

12 जिलों में ज्यादा खतरा, आज से दिखेगा असर

विभाग की कार्ययोजना के अनुसार, सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, कोंडागांव, बस्तर, कांकेर, धमतरी, महासमुंद, गरियाबंद, बालोद और रायपुर को अति संवेदनशील जिलों में शामिल किया गया है। इन जिलों में 27 और 28 अक्टूबर को भारी बारिश और तेज हवाओं का असर पड़ने की आशंका है।

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, आज (मंगलवार) से बस्तर संभाग के जिलों में बारिश का असर दिख सकता है। 28 अक्टूबर को दक्षिण और मध्य छत्तीसगढ़ में भारी बारिश की संभावना है। इसके बाद 29 अक्टूबर को उत्तर-पश्चिम और उत्तर छत्तीसगढ़ के जिलों में भी बारिश का प्रभाव बढ़ सकता है।

779 राहत शिविर तैयार, एक लाख लोगों को ठहराने की क्षमता

सरकार ने 12 संवेदनशील जिलों में 341 और बाकी जिलों में 438 राहत शिविर तैयार रखने के निर्देश दिए हैं। इनमें पीने का पानी, भोजन, दवाइयां और बिजली की व्यवस्था की जाएगी।

तेज हवाओं से गिरने की आशंका वाले मकानों की पहचान कर जरूरी कदम उठाने को कहा गया है। प्रशासन मुनादी कर लोगों से अपील कर रहा है कि खराब मौसम में बिना जरूरत घर से बाहर न निकलें।

7 SDRF टीमों के साथ NDRF भी संभालेगी मोर्चा

आपदा से निपटने के लिए राज्य में SDRF की 7 टीमें तैयार की गई हैं। हर टीम में 36 जवान हैं। इनकी तैनाती रायपुर, बिलासपुर, जगदलपुर, दुर्ग और अंबिकापुर में की जा रही है।

दुर्ग में NDRF की एक टीम पहले से मौजूद है। सुकमा, बस्तर और बीजापुर में भी एक-एक NDRF टीम तैनात करने की तैयारी है।

इसके अलावा सभी जिलों में नगर सेना के 828 प्रशिक्षित जवान और 3,895 आपदा मित्र तैनात किए जा रहे हैं। बचाव कार्यों के लिए SDRF के पास 1,450 उपकरण हैं। इनमें पानी के अंदर देखने वाले कैमरे, हाइड्रोलिक कटर और रबर बोट शामिल हैं।

अस्पतालों में दवाइयां और डॉक्टर तैयार रखने के निर्देश

सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी तैयारी की है। 12 संवेदनशील जिलों में 12 जिला अस्पतालों, 65 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और 215 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त दवाइयां और डॉक्टर उपलब्ध रखने की व्यवस्था की गई है।

अन्य 21 जिलों में 21 जिला अस्पतालों, 153 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और 609 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।

पशुओं की देखभाल और टीकाकरण के लिए भी पशु चिकित्सकों के माध्यम से व्यवस्था करने को कहा गया है। आपदा के दौरान घायल लोगों को प्राथमिकता से इलाज उपलब्ध कराया जाएगा।

24 घंटे कंट्रोल रूम चालू रहेंगे, हेल्पलाइन नंबर 1070 जारी

राज्य स्तर पर बाढ़ नियंत्रण कक्ष 24 घंटे चालू है। आपदा के समय लोग टोल फ्री नंबर 1070 पर संपर्क कर सकते हैं। राज्य नियंत्रण कक्ष सभी जिलों के कंट्रोल रूम से संपर्क में रहेगा।

सभी जिलों में कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने और उनके फोन नंबरों का प्रचार करने के निर्देश दिए गए हैं।

इंद्रावती, शबरी और गोदावरी नदियों के जलस्तर पर नजर रखने के लिए केंद्रीय जल आयोग से संपर्क किया जा रहा है। गंगरेल डैम, ओडिशा के खातीगुड़ा डैम और मुरान बांध से भी समन्वय किया गया है।

बांधों से पानी छोड़ने की स्थिति बनने पर प्रशासन को 48 घंटे पहले सूचना देने की व्यवस्था करने को कहा गया है।

बाढ़ में फंसे लोगों को हेलीकॉप्टर से निकालने की तैयारी

बारिश से गांवों में पानी भरने या लोगों के चारों तरफ पानी घिरने पर जरूरत के मुताबिक हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू किया जाएगा। इसके लिए रायपुर और बस्तर में मौजूद हेलीकॉप्टर बेस से संपर्क किया गया है।

नदी, नाले, पुल-पुलिया और पानी में डूबी सड़कों पर खतरा होने पर लोगों की आवाजाही रोक दी जाएगी। प्रभावित परिवारों को सुरक्षित जगहों और राहत शिविरों तक पहुंचाया जाएगा। शिविरों में भोजन, पीने के पानी और इलाज की व्यवस्था रखने के निर्देश दिए गए हैं।

तूफान के बाद नुकसान का सर्वे, सड़क-बिजली बहाली पर फोकस

सरकार ने चक्रवात का असर खत्म होने के बाद नुकसान का आकलन करने की तैयारी भी की है। राजस्व, कृषि, पंचायत, पशुपालन, नगरीय प्रशासन, लोक निर्माण, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और दूरसंचार विभाग को मकानों, फसलों, पशुओं और संचार व्यवस्था को हुए नुकसान का सर्वे करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रभावित इलाकों में पीने के पानी की जांच और सफाई की जाएगी। पानी को साफ करने, कीटों पर नियंत्रण रखने और बीमारियों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। मृत पशुओं को सुरक्षित तरीके से हटाया जाएगा। क्षतिग्रस्त सड़कों, पुल-पुलियों, तटबंधों और नालियों की मरम्मत के साथ बिजली और दूरसंचार सेवाएं भी बहाल की जाएंगी।

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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़-बिजली बिल में 200 यूनिट तक राहत मार्च 2027 तक:धान खरीदी के लिए 360 नए केंद्र खुलेंगे, 8,000 करोड़ की रेल परियोजना मंजूर

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रायपुर, एजेंसी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में किसानों, सरकारी कर्मचारियों और आम लोगों से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए। बिजली बिल में 400 यूनिट तक मिल रही राहत 31 मार्च 2027 तक जारी रहेगी।

खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू होगी। किसानों से 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदा जाएगा और 360 नए केंद्र खोले जाएंगे। सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। इसके अलावा कुल 19 फैसलों पर मुहर लगी है।

11 अक्टूबर की कैबिनेट में हुए कई फैसले

इससे पहले 11 अक्टूबर को हुई कैबिनेट बैठक में पूर्व अग्निवीरों के लिए गृह विभाग में आरक्षक के 36 पदों पर भर्ती को मंजूरी दी गई थी। इन पदों पर रिक्तियों के अनुसार भर्ती की जाएगी। राज्य सरकार पहले ही पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षक भर्ती में 10 प्रतिशत श्रेणीवार आरक्षण का प्रावधान कर चुकी है।

इसके अलावा, ‘आदिम जाति विकास विभाग’ का नाम बदलकर ‘जनजातीय कार्य विभाग’ करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली थी। इसके लिए छत्तीसगढ़ शासन के कार्य आवंटन नियम में बदलाव किया जाएगा।

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