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कोरबा

कस्तूरबा छात्रावास में घुसा 5 फीट का नाग, जितेंद्र सारथी ने किया सुरक्षित रेस्क्यू, बच्चों और कर्मचारियों ने ली राहत की सांस

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कोरबा। कस्तूरबा छात्रावास में उस समय हड़कंप मच गया, जब परिसर में लगभग 5 फीट लंबा कोबरा सांप दिखाई दिया,छात्रावास में रिकंस्ट्रक्शन (पुनर्निर्माण) का कार्य चल रहा था,इसी दौरान काम कर रहे मजदूरों की नजर अचानक सांप पर पड़ी, सांप को देखते ही वहां मौजूद लोगों में भय का माहौल बन गया, इसके बाद तत्काल उमेश राठौर ने वन विभाग एवं नोवा नेचर के सदस्य जितेंद्र सारथी को इसकी सूचना दी गई।

सूचना मिलते ही जितेंद्र सारथी बिना देर किए मौके पर पहुंचे और बेहद फुर्तीले एवं आक्रामक स्वभाव के कोबरा का सावधानीपूर्वक सुरक्षित रेस्क्यू किया,सांप को सुरक्षित रेस्क्यू बैग में रखने के बाद वहां मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली फिर उसे प्राकृतिक रहवास जंगल में छोड़ दिया गया।

बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर हैं जितेंद्र सारथी और छात्रावास अधीक्षिका

छात्रावास में बच्चों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है, जितेंद्र सारथी और छात्रावास की अधीक्षिका इस तरह की घटनाओं को लेकर गंभीर रहते हैं,परिसर में सांप या किसी अन्य वन्यजीव के दिखाई देने पर तत्काल सूचना देकर उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है, ताकि बच्चों, कर्मचारियों और अन्य लोगों की सुरक्षा बनी रहे।

वन्यजीवों को नुकसान न पहुंचाएं, विशेषज्ञों को दें सूचना

जितेंद्र सारथी ने लोगों से अपील की कि सांप दिखाई देने पर घबराएं नहीं और न ही उसे मारने का प्रयास करें, सांप से सुरक्षित दूरी बनाए रखें तथा प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम या संबंधित वन विभाग को सूचना दें, समय पर सूचना और सुरक्षित रेस्क्यू से मानव जीवन के साथ-साथ वन्यजीवों की भी रक्षा की जा सकती है।

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कोरबा

6 किलोमीटर के लिए 13 टुकड़ों में 5.6 करोड़ मंजूर:मुरुम-मिट़्टी के बेस वाली पुलिया बही, सड़क अधूरी

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कोरबा। कोरबा जिला मुख्यालय से करीब 96 किमी दूर स्थित अमलडीहा पंचायत के वनांचल गांव बलसेंधा और मालीकछार आज भी पक्की सड़क की बाट जोह रहे हैं।

वर्ष 2024-25 में जिला खनिज न्यास संस्थान (डीएमएफ) मद से 8.6 किमी सड़क निर्माण के लिए 9 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था। चूंकि मार्ग वन क्षेत्र से होकर गुजरता है, इसलिए निर्माण का जिम्मा कोरबा वन मंडल को सौंपा गया।

विभाग ने पूरी परियोजना को 13 अलग-अलग कार्यों में बांटकर 5 करोड़ 60 लाख 23 हजार रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति ली। पहली किस्त के रूप में 2.24 करोड़ रुपए जारी भी हो गए, लेकिन दो साल बाद भी जमीनी हकीकत जस की तस है।

सड़क के नाम पर जंगल की मिट्टी और मुरुम बिछा दी गई, जो पहली ही बारिश में बह गई। नाले पर बनी पाइप-पुलिया भी पानी में समा गई और काटनखर्रा नाले पर प्रस्तावित आरसीसी पुलिया का काम शुरू तक नहीं हो सका। अब ग्रामीण श्रमदान कर मिट्टी डालकर रास्ता बनाने को मजबूर हैं।

615 की आबादी, बारिश में बाइक निकालना भी दूभर; एम्बुलेंस भी नहीं पहुंचती

रायगढ़ और सरगुजा जिले की सीमा से लगे बलसेंधा (आबादी 305) और मालीकछार (आबादी 310) के ग्रामीण सुविधाओं के अभाव में जी रहे हैं। दोनों में केवल प्राथमिक शालाएं हैं; आगे की पढ़ाई के लिए बच्चों को अमलडीहा जाना पड़ता है।

अमलडीहा के उपसरपंच ननकी राम राठिया और स्थानीय निवासी संजय राठिया व भारत सिंह ने बताया कि सड़क के नाम पर गिट्टी और मुरुम बिछाकर छोड़ दिया गया था, जो बारिश में बह गई।

मालीकछार में सीसी रोड का काम भी अधूरा रह गया। आलम यह है कि बारिश में दोपहिया वाहन चलाना भी जोखिम भरा हो जाता है। गांव में किसी के बीमार पड़ने पर एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती और मरीजों को खाट पर लादकर श्यांग प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाना पड़ता है।

कार्यक्षेत्र कुदमुरा का, बजट का हिसाब नहीं

परियोजना में प्रशासनिक विसंगति भी सामने आई है। अमलडीहा पंचायत कुदमुरा वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आती है, पर निर्माण की जिम्मेदारी पसरखेत के रेंजर देवदत्त खांडे को सौंपी गई। जब उनसे अब तक खर्च हुई राशि और खरीदे गए सीमेंट-गिट्टी का ब्यौरा मांगा गया, तो वे कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे सके।

वन विभाग को यह काम लेना ही नहीं चाहिए था। किसी तकनीकी निर्माण एजेंसी को जिम्मेदारी मिलती तो बेहतर होता। अब तक करीब 700 मीटर सड़क बनी है, शेष कार्य भी पूरा कराया जाएगा।

-प्रेमलता यादव, डीएफओ, कोरबा वन मंडल

सड़क निर्माण की स्वीकृति काफी पहले दी गई थी। यदि राशि जारी होने के बाद भी सड़क नहीं बनी है, तो मैं स्वयं मौके पर जाकर वस्तुस्थिति देखूंगा। संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

-कुणाल दुदावत, कलेक्टर, कोरबा

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कोरबा में मिशन वरुण के तहत 6 टुल्लू पंप जब्त:पंप से पानी का दबाव कम होने की शिकायत पर निगम की कार्रवाई

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कोरबा। कोरबा में गर्मी शुरू होने से पहले जल संरक्षण और सुचारु जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम ने मिशन वरुण के तहत जांच अभियान तेज कर दिया है। इसी कड़ी में निगम की टीम ने तुलसीनगर में कार्रवाई करते हुए 6 टुल्लू पंप जब्त किए हैं। निगम का कहना है कि अवैध रूप से मोटर पंप लगाकर पानी खींचने से पाइपलाइन में जल आपूर्ति का दबाव कम हो जाता है। इससे कई घरों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाता।

नगर निगम आयुक्त आशुतोष पांडे ने बताया कि नोडल जल प्रभारी राकेश मौर्य के नेतृत्व में शहर में अवैध जल कनेक्शन और टुल्लू पंप के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। अलग-अलग वार्डों में जांच कर अवैध रूप से लगाए गए मोटर पंप हटाए जा रहे हैं।

अवैध पंप मिलने पर जब्ती की कार्रवाई

आयुक्त के मुताबिक, टुल्लू पंप से पानी खींचने के कारण जल आपूर्ति का दबाव प्रभावित होता है। इसका असर दूसरे घरों और वार्डों तक होने वाली आपूर्ति पर भी पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अवैध रूप से टुल्लू पंप लगाकर पानी खींचते पाए जाने पर पंप जब्त किए जाएंगे। यह कार्रवाई नियमित रूप से जारी रहेगी।

पानी की समस्या होने पर निगम से करें संपर्क

आयुक्त ने नागरिकों से अपील की है कि निगम के जल कनेक्शन में अवैध रूप से टुल्लू पंप न लगाएं। यदि किसी घर में पानी का दबाव कम है या जल आपूर्ति से जुड़ी समस्या हो रही है, तो जल प्रबंधन टीम या निगम की हेल्पलाइन से संपर्क करें।

एसईसीएल की एसबीएस कॉलोनी में भी शिकायतें

इनपुट के मुताबिक, एसईसीएल की एसबीएस कॉलोनी में भी कुछ लोगों ने घरों में मोटर पंप लगा रखे हैं। इससे आसपास के कई घरों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंचने की शिकायत है। बताया गया है कि शिकायतों के बावजूद वहां स्थिति में बदलाव नहीं आया है। ऐसे में निगम के अभियान के तहत इस क्षेत्र में भी जांच और कार्रवाई की जरूरत सामने आ रही है।

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नहर में कूदे युवक का तीसरे दिन भी पता नहीं:कोरबा में तलाश जारी,परिजनों ने पानी कम करने और गांवों में मुनादी की मांग की

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कोरबा। कोरबा के सीतामढ़ी में नहर में कूदे सतीश रजक का तीन दिन बाद भी पता नहीं चल सका है। गोताखोरों की टीम लगातार उसकी तलाश कर रही है, लेकिन नहर में पानी का बहाव तेज होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में परेशानी आ रही है। युवक के नहीं मिलने से परेशान परिजन और बस्ती के लोग गुरुवार सुबह कोतवाली थाना पहुंचे और युवक की तलाश तेज करने की मांग की।

सतीश रजक हमाली का काम करता है। उसके परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैं, जिनकी उम्र 11 साल और 3 साल है। परिजनों के मुताबिक, तीन दिन पहले दोपहर करीब 3 बजे सतीश ने बच्चों को खाना खिलाया और खुद भी खाना खाया। इसके बाद वह घर के पास स्थित नहर की तरफ एक व्यक्ति के साथ गया था। इसी दौरान वह सीतामणी बसोड़ मोहल्ले के सामने से गुजर रही नहर में कूद गया।

साथ गए व्यक्ति ने इसकी जानकारी परिजनों को दी। इसके बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। सूचना मिलने पर डायल 112 और कोतवाली थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने जिला नगर सेना की गोताखोर टीम को बुलाकर तलाश शुरू कराई।

तीन दिन से तलाश, अब तक नहीं मिला सुराग

नहर में पानी का बहाव तेज होने के कारण गोताखोरों को युवक की तलाश करने में काफी दिक्कत हो रही है। तीन दिनों से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है, लेकिन अब तक सतीश का कोई सुराग नहीं मिला है। इससे परिवार के लोग परेशान हैं।

परिजनों और बस्ती के लोगों ने मांग की है कि नहर में पानी का स्तर कम कराया जाए। साथ ही नहर किनारे बसे गांवों में मुनादी कराई जाए, ताकि लोगों को युवक के बारे में जानकारी मिल सके और उसकी तलाश में मदद मिल सके।

पुलिस ने दर्ज किया मामला

इस मामले में सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी ने बताया कि सतीश रजक के नहर में कूदने की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। मामले में गुम इंसान की रिपोर्ट दर्ज की गई है। साथ ही भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 143 के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। गोताखोरों और अन्य माध्यमों से युवक की तलाश लगातार जारी है।

सीएसपी ने लोगों से अपील की है कि वे नहर के पास नहाने न जाएं। फिलहाल नहर में पानी का बहाव तेज है, ऐसे में हादसा होने का खतरा बना हुआ है।

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