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नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा

गजरा नदी में रेत का खेल! नदी किनारे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का जमावड़ा, मौके पर लोडिंग की तस्वीरें आईं सामने

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बांकीमोंगरा में कथित रेत उत्खनन को लेकर फिर गरमाया मामला, नदी से बस्ती तक ट्रैक्टरों की आवाजाही पर सवाल; खनिज विभाग की निगरानी आखिर कहां?

बांकीमोंगरा। गजरा नदी में रेत उत्खनन और परिवहन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े होने लगे हैं। नदी किनारे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की मौजूदगी और उनमें रेत भरने की गतिविधियों की तस्वीरें सामने आने के बाद क्षेत्र में कथित रेत कारोबार को लेकर चर्चा तेज हो गई है। तस्वीरों में ट्रैक्टर-ट्रॉली के पास रेत की लोडिंग करते लोग दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि नदी क्षेत्र में चल रही इन गतिविधियों की निगरानी आखिर कौन कर रहा है?

स्थानीय स्तर पर लगातार यह शिकायतें सामने आ रही हैं कि गजरा नदी से रेत निकालकर ट्रैक्टरों के माध्यम से आसपास की बस्तियों और अन्य स्थानों तक पहुंचाई जा रही है। यदि यह उत्खनन और परिवहन नियमानुसार हो रहा है, तो संबंधित विभाग को इसकी अनुमति, निर्धारित मात्रा और परिवहन व्यवस्था स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं यदि नियमों का उल्लंघन हो रहा है, तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?

नदी किनारे ट्रैक्टर, मौके पर लोडिंग; क्या विभाग को जानकारी नहीं?

सामने आई तस्वीरों में नदी किनारे ट्रैक्टर और ट्रॉली के साथ रेत भरने की गतिविधियां दिखाई दे रही हैं। इन तस्वीरों के आधार पर उत्खनन की वैधता या अवैधता का निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है, लेकिन ये तस्वीरें खनिज विभाग के लिए जांच का आधार जरूर बन सकती हैं।

आखिर नदी क्षेत्र में किसकी अनुमति से रेत निकाली जा रही है? क्या संबंधित वाहनों के पास वैध परिवहन दस्तावेज हैं? क्या उत्खनन निर्धारित स्थान और निर्धारित मात्रा के अनुसार हो रहा है? इन सवालों का जवाब अब संबंधित विभाग को देना चाहिए।

नदी से बस्ती तक ट्रैक्टरों की आवाजाही, रहवासियों की बढ़ी परेशानी

गजरा बस्ती के रहवासियों की परेशानी भी कम नहीं है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रेत से भरे ट्रैक्टर दिनभर बस्ती की संकरी गलियों और चौक-चौराहों से गुजरते हैं। भारी वाहनों की आवाजाही के कारण बच्चों, बुजुर्गों और दोपहिया वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

लोगों का कहना है कि कई बार वाहन चालकों को समझाइश देने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ। यदि संकरी गलियों में भारी ट्रैक्टरों की आवाजाही इसी तरह जारी रही, तो किसी भी समय गंभीर दुर्घटना की आशंका बनी रह सकती है।

खनिज विभाग के साथ एसडीएम और तहसीलदार भी लें संज्ञान

मामला अब केवल खनिज नियमों तक सीमित नहीं रह गया है। इसमें आम नागरिकों की सुरक्षा और स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही भी जुड़ गई है। ऐसे में खनिज विभाग के अधिकारियों के साथ एसडीएम और तहसीलदार को भी मौके की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करना चाहिए।

सिर्फ कागजी जांच से काम नहीं चलेगा। नदी क्षेत्र में औचक निरीक्षण कर उत्खनन की अनुमति, ट्रैक्टरों के दस्तावेज, ई-ट्रांजिट पास और परिवहन की वास्तविक स्थिति की जांच जरूरी है। साथ ही बस्ती के भीतर भारी वाहनों की आवाजाही पर भी उचित नियंत्रण होना चाहिए।

सात ट्रैक्टरों की चर्चा, कारोबार के पीछे कौन?

क्षेत्र में सात ट्रैक्टरों के जरिए रेत परिवहन किए जाने की चर्चा भी स्थानीय स्तर पर है। हालांकि इन वाहनों की संख्या, मालिकों और उनकी गतिविधियों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। प्रशासन यदि निष्पक्ष जांच करता है तो यह स्पष्ट हो सकता है कि कितने वाहन इस गतिविधि में शामिल हैं और उनके पास वैध अनुमति एवं परिवहन दस्तावेज हैं या नहीं।

सबसे अहम बात यह है कि जांच केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यदि किसी प्रकार का अवैध उत्खनन प्रमाणित होता है, तो इसके पीछे शामिल वाहन मालिकों और कारोबार से जुड़े अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए।

अब कार्रवाई का इंतजार, आश्वासन से नहीं रुकेगा मामला

गजरा नदी और गजरा बस्ती का मामला अब प्रशासन के लिए गंभीरता से लेने का विषय बन चुका है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का जायजा लेंगे और आवश्यक कार्रवाई करेंगे।

सवाल साफ है—क्या खनिज विभाग नदी में चल रही गतिविधियों की नियमित निगरानी कर रहा है? क्या एसडीएम और तहसीलदार बस्तीवासियों की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कदम उठाएंगे? या फिर प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही सक्रिय होगा?

गजरा नदी के प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और बस्ती के नागरिकों की जान-माल की रक्षा प्रशासन की जिम्मेदारी है। अब देखना होगा कि तस्वीरों और शिकायतों के सामने आने के बाद जिम्मेदार विभाग कितनी जल्दी जांच और कार्रवाई शुरू करते हैं।

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पटाखा बाजार में सुरक्षा व्यवस्था की खुली पोल! 17 दुकानों के बीच खतरे का कारोबार, नियमों की अनदेखी पर प्रशासन मौन?

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कपड़ों के पर्दों से घिरी दुकानें, अग्निशमन उपकरणों की कमी और आपातकालीन इंतजाम नदारद होने के आरोप; खुशियों के त्योहार में कहीं लापरवाही भारी न पड़ जाए!

बांकीमोंगरा/कोरबा। दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही पटाखों की खरीदारी के लिए बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। लेकिन इस रौनक के बीच पटाखा बाजार की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिस स्थान पर बारूद और ज्वलनशील सामग्री का कारोबार हो रहा है, वहां सुरक्षा के बुनियादी इंतजामों में कथित लापरवाही सामने आ रही है।

मौके की तस्वीरें कुछ ऐसी व्यवस्था की ओर इशारा कर रही हैं, जहां सुरक्षा मानकों के पालन से ज्यादा दुकानें सजाने और कारोबार चलाने पर जोर दिखाई देता है। बाजार में करीब 17 दुकानें संचालित होने की जानकारी है, लेकिन अग्नि सुरक्षा के इंतजामों को लेकर स्थिति संतोषजनक नजर नहीं आ रही।

दुकानों के बीच दूरी का सवाल, एक चिंगारी बन सकती है बड़ी मुसीबत

पटाखों की दुकानों के संचालन के लिए विस्फोटक अधिनियम और विस्फोटक नियमों के तहत निर्धारित शर्तों का पालन जरूरी है। दुकानें सुरक्षित दूरी पर हों और आग लगने की स्थिति में दूसरी दुकानों तक आग फैलने की आशंका कम रहे, इसके लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।

लेकिन यहां दुकानों को कतारबद्ध तरीके से पास-पास बनाए जाने की शिकायत है। यदि निर्धारित दूरी का पालन नहीं हुआ है तो यह स्थिति किसी अप्रिय घटना के दौरान बड़ा खतरा बन सकती है।

टिन शेड की जगह कपड़ों के पर्दे, सुरक्षा मानकों पर सवाल

पटाखा बाजार में दुकानों के चारों ओर कपड़े के पर्दों का इस्तेमाल भी सवालों के घेरे में है। ज्वलनशील सामग्री से घिरे ऐसे स्थान पर आग लगने की स्थिति में खतरा तेजी से बढ़ सकता है।

दुकानों के प्रवेश द्वार आमने-सामने होने और पर्याप्त खुली जगह नहीं होने को लेकर भी जांच की आवश्यकता है। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रत्येक दुकान निर्धारित लाइसेंस और स्वीकृत नक्शे के अनुरूप ही संचालित हो रही है या नहीं।

17 दुकानों में महज 6 के सामने अग्निशामक यंत्र!

बाजार की अग्निशमन व्यवस्था पर नजर डालें तो स्थिति और चिंताजनक दिखाई देती है। मौके पर कुल 17 दुकानों में से केवल 6 दुकानों के सामने CO2 अग्निशामक यंत्र दिखाई देने की जानकारी मिली है।

वहीं पानी और सूखी रेत से भरी बाल्टियों की पर्याप्त व्यवस्था भी नजर नहीं आई। सवाल यह है कि बाकी दुकानों में आग बुझाने के लिए क्या इंतजाम किए गए हैं? क्या संबंधित विभाग ने इन व्यवस्थाओं का भौतिक सत्यापन किया है?

आपातकालीन स्थिति में राहत कैसे मिलेगी?

पटाखा बाजार में किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए दमकल वाहन, प्राथमिक उपचार और एंबुलेंस की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। लेकिन मौके पर निरीक्षण के दौरान एंबुलेंस और दमकल वाहनों की मौजूदगी नजर नहीं आने की बात सामने आई है।

यदि आग या विस्फोट जैसी घटना होती है तो शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होंगे। ऐसे में प्रशासन को तत्काल आपातकालीन व्यवस्था सुनिश्चित करने की जरूरत है।

दुकान के सामने ही पटाखों का प्रदर्शन!

नाबालिगों से दुकान संचालन कराने का आरोप

नियमों के तहत पटाखा बिक्री स्थल के आसपास धूम्रपान और खुली आग पर प्रतिबंध रहता है। इसके लिए चेतावनी बोर्ड लगाना भी जरूरी है।

इसके बावजूद दुकानों के सामने पटाखे फोड़कर ग्राहकों को नमूना दिखाने की शिकायत सामने आई है। यदि यह गतिविधि वास्तव में बिक्री परिसर में हो रही है तो यह गंभीर सुरक्षा उल्लंघन का विषय है। इसकी तत्काल जांच होनी चाहिए।

अब प्रशासन की जिम्मेदारी तय करने का समय

पटाखा बाजार में सामने आ रही इन परिस्थितियों ने संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर दुकानें संचालित होने से पहले सुरक्षा मानकों का निरीक्षण किसने किया? क्या सभी दुकानों के लाइसेंस और अनुमतियों की जांच की गई? क्या अग्निशमन विभाग ने सुरक्षा इंतजामों को हरी झंडी दी है?

स्थानीय प्रशासन, पुलिस, नगर निकाय और अग्निशमन विभाग को संयुक्त रूप से बाजार का निरीक्षण कर कमियों को तत्काल दूर कराना चाहिए। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित संचालकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई भी होनी चाहिए।

त्योहार खुशियों का प्रतीक है, जोखिम का नहीं। प्रशासन की एक छोटी सी लापरवाही कई परिवारों की खुशियां छीन सकती है। इसलिए जरूरी है कि किसी हादसे के बाद जांच बैठाने के बजाय उससे पहले सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त की जाए।

अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में कब संज्ञान लेते हैं और पटाखा बाजार को सुरक्षित बनाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

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10 दिन से घरों का कचरा नहीं उठा, मधुसूदन दास ने पालिका प्रशासन को दिया 5 दिन का अल्टीमेटम

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5 दिनों में समस्या का समाधान नहीं हुआ तो नगर पालिका कार्यालय में कचरा सौंपने की चेतावनी

बांकी मोंगरा। नगर पालिका परिषद बांकी मोंगरा में सफाई व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। नेता प्रतिपक्ष मधुसूदन दास ने क्षेत्र में पिछले 7 से 10 दिनों से डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण ठप होने और सफाई कार्य में उपयोग किए जा रहे रिक्शों की गुणवत्ता पर गंभीर आपत्ति जताई है। इस संबंध में उन्होंने मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) को पत्र लिखकर तत्काल व्यवस्था सुधारने और घटिया गुणवत्ता के रिक्शों की जांच कर संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।

मधुसूदन दास ने पत्र के माध्यम से बताया कि उनके वार्ड सहित आसपास के 5-6 वार्डों के नागरिक लगातार कचरा उठाव नहीं होने की शिकायत कर रहे हैं। कई दिनों से घरों से कचरा संग्रहण नहीं होने के कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि सफाई कार्य में लगे पुराने रिक्शों की स्थिति खराब हो चुकी है, जबकि नए रिक्शों की आपूर्ति में भी लापरवाही बरती गई है। उनके अनुसार, कुछ नए रिक्शे उपलब्ध कराए गए हैं, लेकिन उनकी गुणवत्ता बेहद खराब है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सफाई कार्य में इस्तेमाल होने वाला छोटा हाथी वाहन पिछले करीब 10 दिनों से खराब पड़ा है और अब तक उसकी मरम्मत नहीं कराई गई है। वाहनों की अनुपलब्धता और खराब स्थिति के चलते डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण प्रभावित हो रहा है।

पांच दिन का अल्टीमेटम, आंदोलन की चेतावनी

नेता प्रतिपक्ष मधुसूदन दास ने नगर पालिका प्रशासन से पांच दिनों के भीतर समस्या का निराकरण करने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि निर्धारित समय में सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई तो क्षेत्र में जमा कचरे को एकत्रित कर नगर पालिका कार्यालय पहुंचाया जाएगा और अधिकारियों को सौंपा जाएगा।

उन्होंने कहा कि स्वच्छता जैसी बुनियादी नागरिक सुविधा में इस तरह की लापरवाही दुर्भाग्यजनक है। नगर पालिका प्रशासन को मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कचरा उठाव शुरू कराना चाहिए, खराब वाहनों की मरम्मत करानी चाहिए तथा घटिया गुणवत्ता के रिक्शों की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करनी चाहिए।

अब देखना होगा कि नेता प्रतिपक्ष की शिकायत और पांच दिनों की चेतावनी के बाद नगर पालिका प्रशासन सफाई व्यवस्था को लेकर क्या कदम उठाता है।

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दीपावली और छठ महापर्व पर सोनी विकास झा एवं विकास झा ने दी शुभकामनाएं, सुख-समृद्धि और सामाजिक सद्भाव का दिया संदेश

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बांकीमोंगरा। दीपों के महापर्व दीपावली और लोकआस्था के महापर्व छठ पूजा के पावन अवसर पर नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा की अध्यक्ष श्रीमती सोनी विकास झा एवं भारतीय जनता युवा मोर्चा छत्तीसगढ़ के प्रदेश कोषाध्यक्ष विकास झा ने क्षेत्रवासियों सहित समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

इस अवसर पर पालिका अध्यक्ष श्रीमती सोनी विकास झा ने अपने शुभकामना संदेश में कहा कि दीपावली खुशियों, नई उम्मीदों और सकारात्मक ऊर्जा का पर्व है। यह त्योहार हमें अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने तथा आपसी प्रेम, भाईचारे और सौहार्द के साथ समाज को मजबूत बनाने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कामना की कि मां लक्ष्मी की कृपा से प्रत्येक घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास हो तथा हर परिवार के जीवन में खुशियों का उजाला बना रहे।

वहीं विकास झा ने कहा कि छठ महापर्व छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश की सांस्कृतिक एकता और लोकआस्था का प्रतीक है। सूर्यदेव एवं छठी मैया की आराधना से जुड़ा यह पर्व हमें प्रकृति के प्रति सम्मान, अनुशासन, त्याग, समर्पण और स्वच्छता का संदेश देता है। उन्होंने छठ व्रतियों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए सभी के सुखद, मंगलमय एवं सफल जीवन की कामना की।

दोनों जनप्रतिनिधियों ने अपने संदेश में कहा कि त्योहारों की वास्तविक खुशी तभी सार्थक होती है, जब हम समाज के प्रत्येक वर्ग के साथ खुशियां साझा करें। जरूरतमंदों की सहायता करें और आपसी मतभेद भुलाकर प्रेम एवं सद्भाव के साथ पर्व मनाएं।

उन्होंने नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण का ध्यान रखते हुए सुरक्षित एवं स्वच्छ दीपावली मनाने तथा छठ महापर्व के दौरान स्वच्छता और सामाजिक जिम्मेदारी का विशेष ध्यान रखने की अपील की।

अंत में श्रीमती सोनी विकास झा एवं विकास झा ने कहा कि दीपों की रोशनी हर जीवन से निराशा का अंधकार मिटाए और छठी मैया के आशीर्वाद से हर परिवार में आरोग्य, सुख-समृद्धि एवं खुशहाली आए।

दोनों ने पुनः समस्त बांकीमोंगरा नगरवासियों, क्षेत्रवासियों एवं प्रदेशवासियों को दीपावली और छठ महापर्व की हार्दिक बधाई एवं मंगलमय शुभकामनाएं दीं।

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