सौर ऊर्जा से शून्य हुआ बिजली बिल, बढ़ी बचत और जुड़ा पर्यावरण संरक्षण कोरबा। हर घर रोशन हो, हर परिवार आत्मनिर्भर बने इसी सपने को साकार कर रही है भारत सरकार की प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना। इस योजना ने आज देश के करोड़ों परिवारों के जीवन में बदलाव ला रही है। यह केवल बिजली उपलब्ध कराने का माध्यम नहीं है, बल्कि नागरिकों को स्वच्छ ऊर्जा से जोड़ते हुए पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। छत्तीसगढ़ का कोरबा जिला, जो ऊर्जा नगरी के रूप में पूरे देश में अपनी अलग पहचान रखता है, अब पारंपरिक ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम बढ़ा रहा है। यहाँ के ग्रामीण और शहरी परिवार इस योजना से लाभान्वित होकर आत्मनिर्भरता और बचत की नई मिसालें गढ़ रहे हैं। इन्हीं लाभार्थियों में दादरखुर्द निवासी अजय राज बेन भी शामिल हैं, जिन्होंने इस योजना का लाभ उठाकर अपने परिवार के जीवन में नया उजाला लाया। भारतीय वायुसेना में सेवाएँ देने के बाद अब वह समाज में ऊर्जा सशक्तिकरण के प्रतीक बन चुके हैं। वर्ष 2024 में उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत अपने घर की छत पर 3 किलोवाट क्षमता का सोलर पैनल स्थापित कराया। इस योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार से उन्हें 78,000 की सब्सिडी प्राप्त हुई, जिसने इस स्थापना को सहज और किफायती बना दिया। सौर ऊर्जा से अब उनके घर की हर ज़रूरत पूरी होती है। पंखे, रेफ्रिजरेटर, वॉशिंग मशीन, टेलीविजन और अन्य सभी घरेलू उपकरण अब बिना किसी रुकावट के चलते हैं। पहले जहाँ हर माह बिजली बिल की चिंता होती थी, वहीं अब उनके घर का बिल शून्य हो गया है। इतना ही नहीं, अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भी भेजी जाती है, जिससे न केवल राज्य के ऊर्जा संतुलन में उनका योगदान है, बल्कि यह ऊर्जा अन्य जरूरतमंद परिवारों तक भी पहुँच रही है।
उन्हें इस योजना की जानकारी अखबार में प्रकाशित एक विज्ञापन से मिली। इसके बाद उन्होंने अपने पड़ोसी की मदद से आधिकारिक वेबसाइ पर आवेदन किया। आवेदन प्रक्रिया सरल और पूरी तरह पारदर्शी रही। आवेदन के बाद विशेषज्ञ टीम ने उनके घर का सर्वेक्षण किया और निर्धारित समय-सीमा में सोलर पैनल की स्थापना कर दी। पूरी प्रक्रिया में न तो किसी प्रकार की जटिलता रही और न ही किसी तरह की बाधा। उन्होंने बताया कि सरकार ने जिस पारदर्शी व्यवस्था और समयबद्धता के साथ इस योजना को लागू किया है, वह सचमुच सराहनीय है। श्री बेन का कहना है कि इस योजना ने उन्हें दोहरा लाभ मिला है। एक ओर उनके परिवार को मुफ्त और अबाधित बिजली मिल रही है, वहीं दूसरी ओर वे पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे रहे हैं। कोयला और डीजल जैसे पारंपरिक स्रोतों पर निर्भर रहने की बजाय वे अब सूर्य की असीम ऊर्जा का उपयोग कर रहे हैं। आज दादरखुर्द ही नहीं, बल्कि आसपास के गाँवों और इलाकों में भी कई लोग उनकी सफलता से प्रेरित होकर इस योजना से जुड़ रहे हैं। उनके पड़ोसी, रिश्तेदार और मित्र इस पहल को देखकर उत्साहित हैं और सौर ऊर्जा अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं।
प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना केवल आज की ऊर्जा आवश्यकताओं का समाधान नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक सुरक्षित और स्वच्छ भविष्य का आधार है। इस योजना से हर घर की छत पर सोलर पैनल लगाकर भारत तेजी से आत्मनिर्भर ऊर्जा राष्ट्र बनने की ओर अग्रसर है। कोरबा जैसे औद्योगिक जिले में जहाँ कोयला उत्पादन की पहचान रही है, वहां यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि सरकार की योजनाएँ न केवल लोगों के जीवन को आसान बना रही हैं, बल्कि हरित विकास और सतत भविष्य की नींव भी रख रही हैं। अपने अनुभव साझा करते हुए अजय राज बेन कहते हैं “अब मुझे यह चिंता नहीं रहती कि बिजली का बिल कितना आएगा। सूर्यघर योजना ने सचमुच घर-घर में रोशनी और उम्मीद जगाई है। मैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ, जिन्होंने हम जैसे आम नागरिकों के जीवन में इतनी बड़ी सुविधा और आत्मनिर्भरता का मार्ग खोला। प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना वास्तव में एक ऐतिहासिक कदम है।” यह योजना वास्तव में भारत सरकार की उस दूरदृष्टि को दर्शाती है, जिसमें हर घर तक स्वच्छ ऊर्जा पहुँचाकर देश को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने का सपना साकार हो रहा है।
कोरबा, 01 अक्टूबर 2026। राज्य शासन के निर्देशानुसार कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन में जिले में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक संचालित “सेवा संकल्प अभियान” के अंतर्गत आम नागरिकों तक विभिन्न शासकीय सेवाओं एवं योजनाओं का लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से नगरीय निकाय एवं जनपद पंचायत क्षेत्रों में 01 अक्टूबर से विशेष शिविर आयोजित किए जा रहें। इसी क्रम में 02 अक्टूबर को नगर पालिका परिषद दीपका कार्यालय एवं नगर पंचायत छुरीकला अंतर्गत बस स्टैंड छुरी के समीप शिविर आयोजित किए जाएंगे। आम नागरिकों से अपील की गई है कि अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर शिविर का लाभ उठायें।
पीएम जनमन के अंतर्गत लगभग 167.20 लाख रुपये की लागत से अटल चौक से जंगल पारा तक बना 2.38 किलोमीटर मार्ग कोरबा, 01 अक्टूबर 2026। विकासखंड पाली के दूरस्थ ग्राम डोंगानाला के जंगल पारा में रहने वाले बिरहोर परिवारों के लिए बारिश का मौसम बड़ी परेशानी लेकर आता था। अटल चौक से बस्ती तक जाने वाला कच्चा रास्ता कीचड़ से भर जाता था। पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता था और बच्चे स्कूल जाने से कतराते थे। अब प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) के अंतर्गत बनी पक्की सड़क ने उनकी रोजमर्रा की यात्रा आसान कर दी है।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत अटल चौक से जंगल पारा तक लगभग 2.38 किलोमीटर सड़क का निर्माण लगभग 167.20 लाख रुपये की लागत से किया गया है। मार्ग में सीसी सड़क के साथ डामर सड़क भी बनाई गई है। इससे बस्ती में रहने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति बिरहोर समुदाय के लगभग 40 परिवारों को आवागमन में सुविधा मिल रही है। बस्ती के सुनहर सिंह बिरहोर बताते हैं कि पक्की सड़क बनने से अब आने-जाने में आसानी होती है। गीता बाई के अनुसार उन्हें रास्ते में पहले जैसी परेशानी नहीं होती और बच्चे भी आसानी से स्कूल आ-जा सकते हैं। गाँव के किसान पुनो राम पटेल पुराने दिनों को याद करते हुए बताते हैं कि बारिश में रास्ते पर घुटनों तक कीचड़ हो जाता था। अब पक्की सड़क बनने से उस परेशानी से राहत मिली है। जंगल पारा के परिवारों के लिए यह सड़क स्कूल और आवश्यक सेवाओं तक पहुँचने का सुगम रास्ता बन गई है। बारिश के दिनों में जिस मार्ग से गुजरना कठिन था, उसी पर अब ग्रामीण अधिक आसानी से आ-जा रहे हैं।
उद्यानिकी विभाग की सहायता से अपनाई ड्रिप सिंचाई, प्लास्टिक मल्चिंग और उन्नत खेती कोरबा, 01 अक्टूबर 2026। पोड़ी-उपरोड़ा विकासखंड के ग्राम नगौई बछेरा निवासी किसान गुरुचरण मरार पहले परंपरागत तरीके से धान की खेती करते थे। वर्ष में एक ही फसल लेने के कारण खेती से होने वाली आय सीमित थी। सिंचाई का साधन नहीं था और कृषि कार्य के लिए ट्रैक्टर व अन्य मशीनें किराये पर लानी पड़ती थीं। ऐसे में छह सदस्यीय परिवार की जरूरतें पूरी करना कठिन होता था। गांव के भ्रमण के दौरान उद्यानिकी विभाग के कर्मचारियों ने श्री मरार को विभागीय योजनाओं और आधुनिक खेती की जानकारी दी। इसके बाद उन्होंने शासकीय उद्यान रोपणी, नगौई में आवेदन किया। राष्ट्रीय बागवानी मिशन और राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत उन्हें ड्रिप सिंचाई प्रणाली, प्लास्टिक मल्चिंग तथा ग्राफ्टेड बैंगन रोपण के लिए कुल 46 हजार रुपये का विभागीय अनुदान मिला। इन संसाधनों और विभागीय मार्गदर्शन की मदद से श्री मरार ने खेती के तरीके में बदलाव किया। अब वे वर्ष में दो से तीन फसलें लेते हैं और वर्तमान में भिंडी की खेती से भी आय अर्जित कर रहे हैं। विभाग को दी गई जानकारी के अनुसार, उनकी अनुमानित वार्षिक आय पहले लगभग 45 हजार रुपये थी, जो अब लगभग ढाई से तीन लाख रुपये तक पहुंच गई है। बढ़ी हुई आय से परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरी है। वे गांव के अन्य किसानों को भी खेती से जुड़ी जानकारी देते हैं। श्री मरार कहते हैं कि उद्यानिकी विभाग से योजनाओं की जानकारी मिलने पर उनका आधुनिक खेती के प्रति उत्साह बढ़ा। वे आगे भी विभागीय मार्गदर्शन लेकर खेती करना चाहते हैं और मिली सहायता के लिए आभार व्यक्त करते हैं।